मंत्र जाप कैसे करें

जाप का अर्थ है किसी मंत्र या भगवान के नाम को मन लगाकर बार-बार दोहराना। इसकी कोई कठिन विधि नहीं है; यहाँ परंपरा में प्रचलित सरल तरीका दिया गया है।

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1. तैयारी

  • एक शांत जगह चुनें और हो सके तो रोज़ उसी जगह और उसी समय जाप करें।
  • परंपरा में सुबह (ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय) और शाम की संध्या का समय अच्छा माना जाता है, पर नाम-जाप कभी भी किया जा सकता है।
  • आसन या चटाई पर सीधी पीठ के साथ बैठें। ज़मीन पर न बैठ पाएँ तो कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं।
  • जिस मंत्र का जाप करना है, उसका अर्थ एक बार पढ़ लें; और चाहें तो मन में संकल्प लें कि कितनी बार जाप करेंगे।

2. जाप के तीन प्रकार

परंपरा में जाप तीन तरह से बताया गया है। तीनों में मंत्र और उसका अर्थ मन में रहे, यही मुख्य बात है।

वाचिक
बोलकर, ऐसे स्वर में कि दूसरे भी सुन सकें।
उपांशु
होंठ हिलें पर स्वर इतना धीमा हो कि पास बैठा व्यक्ति भी मुश्किल से सुने।
मानसिक
बिना बोले, केवल मन में दोहराना।

शुरुआत में वाचिक या उपांशु जाप से मन टिकाना आसान होता है।

3. माला से गिनती

  • जप-माला में 108 मनके और एक बड़ा मनका (सुमेरु) होता है। एक माला पूरी होने पर 108 जाप होते हैं।
  • कई परंपराओं में माला दाएँ हाथ में ली जाती है और मनके अंगूठे से आगे बढ़ाए जाते हैं; तर्जनी (पहली उँगली) से माला नहीं छुई जाती।
  • सुमेरु पर पहुँचकर उसे लाँघते नहीं, माला पलटकर वापस दूसरी दिशा में जाप शुरू करते हैं।
  • माला न हो तो यहाँ का जाप काउंटर गिनती रखता है।

4. उच्चारण और गति

  • मंत्र का हर अक्षर साफ़ बोलें; जल्दी में शब्द न खाएँ।
  • गति एक-सी रखें। धीमी गति से जपने पर ध्यान बेहतर टिकता है।
  • उच्चारण के लिए ऑडियो सुनें; हर मंत्र के पेज पर उसका उच्चारण और शब्दार्थ दिया गया है, जैसे ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र।

5. कितनी बार जाप करें

संख्या अभ्यास का एक तरीका है। ज़्यादा गिनती से निश्चित रूप से ज़्यादा फल मिलने का कोई दावा यहाँ नहीं किया गया; नियमितता और मन लगाकर जपना ज़्यादा मायने रखता है।

21 बार शुरुआत या छोटे अभ्यास के लिए

किस अभ्यास के लिए
शुरुआत करने वालों के लिए, या जिस दिन समय कम हो। रोज़ थोड़ा जाप करने की आदत डालने के लिए यह अच्छा विकल्प है।
लगभग कितना समय
मंत्र की लंबाई पर: लगभग 85 सेकंड (छोटा मंत्र) से लगभग 8 मिनट (महामृत्युंजय जैसा लंबा मंत्र) तक
परंपरा में
सामान्य मंत्र-जाप के लिए 21 बार का कोई अलग शास्त्रीय विधान नहीं मिलता। इसे अभ्यास का एक सुविधाजनक विकल्प मानें।
सहज कैसे पूरा करें
गिनती की चिंता छोड़ दें; काउंटर गिन रहा है। हर बार पूरा मंत्र साफ़ और एक ही गति से बोलें।

51 बार कुछ अधिक समय देकर अभ्यास

किस अभ्यास के लिए
जब कुछ अधिक समय देकर, एक ही बैठक में अभ्यास करना हो।
लगभग कितना समय
मंत्र की लंबाई पर: लगभग 3 मिनट (छोटा मंत्र) से लगभग 19 मिनट (महामृत्युंजय जैसा लंबा मंत्र) तक
परंपरा में
51 बार का भी कोई अलग शास्त्रीय विधान नहीं मिलता; यह 21 और 108 के बीच का अभ्यास-विकल्प है।
सहज कैसे पूरा करें
शुरू से अंत तक एक ही गति रखें। मन भटक जाए तो चिंता न करें; अगली बार से फिर मंत्र और उसके अर्थ पर लौट आएँ।

108 बार लंबा अभ्यास: एक पूरी माला

किस अभ्यास के लिए
एक पूरी माला का लंबा अभ्यास; रोज़ के नियमित जाप के लिए सबसे प्रचलित गिनती।
लगभग कितना समय
मंत्र की लंबाई पर: लगभग 7 मिनट (छोटा मंत्र) से लगभग 40 मिनट (महामृत्युंजय जैसा लंबा मंत्र) तक
परंपरा में
जप-माला में 108 मनके और एक सुमेरु होता है, इसलिए एक माला यानी 108 जाप की परंपरा बहुत पुरानी और व्यापक है। 108 के महत्त्व की कई व्याख्याएँ प्रचलित हैं, जैसे 27 नक्षत्र × 4 चरण = 108, या 12 राशियाँ × 9 ग्रह = 108; ये परंपरा की व्याख्याएँ हैं।
सहज कैसे पूरा करें
माला से गिनें तो सुमेरु पर रुककर माला पलट लें, उसे लाँघें नहीं; यहाँ काउंटर भी गिनती रखता है। बीच में रुकना पड़े तो रोकें और बाद में वहीं से जारी रखें।

1008 बार विस्तृत जाप-सत्र

किस अभ्यास के लिए
किसी विशेष दिन, व्रत या संकल्प के लिए लंबा जाप-सत्र।
लगभग कितना समय
मंत्र की लंबाई पर: लगभग 1 घंटे 5 मिनट (छोटा मंत्र) से लगभग 6 घंटे 10 मिनट (महामृत्युंजय जैसा लंबा मंत्र) तक
परंपरा में
1008 को अष्टोत्तर सहस्र (हज़ार और आठ) कहते हैं; सहस्रनाम जैसे पाठों और कई अनुष्ठानों में यह गिनती चलती है। यह लंबे अभ्यास का विकल्प है, इसका फल 108 से अधिक होने का कोई दावा नहीं है।
सहज कैसे पूरा करें
इसे एक बैठक में पूरा करना ज़रूरी नहीं। हर 108 के बाद छोटा विराम लें; रुककर बाद में जारी रख सकते हैं, आपकी गिनती इसी ब्राउज़र में सहेजी रहती है।

6. नियमितता

रोज़ थोड़ा जाप करना कभी-कभार बहुत अधिक करने से ज़्यादा अच्छा माना जाता है। 21 बार से शुरू करें, फिर धीरे-धीरे 108 तक जाएँ। गिनती पूरी न हो पाए तो भी कोई बात नहीं; अगले दिन फिर से जारी रखें।

जाप शुरू करें

सूर्य देव

गायत्री मंत्र

सूर्य देव · गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या जाप बीच में रोक सकते हैं?

हाँ। "रोकें" दबाकर जाप रोक दें और "जारी रखें" से वहीं से आगे बढ़ें। पेज बंद हो जाए तब भी अधूरी गिनती इसी ब्राउज़र में सहेजी रहती है, और अगली बार पेज खोलने पर वहीं से जारी रख सकते हैं।

गिनती भूल जाएँ तो क्या करें?

यहाँ गिनती काउंटर रखता है, इसलिए गिनती याद रखने की ज़रूरत नहीं। माला से जाप कर रहे हों और गिनती छूट जाए, तो परंपरा में कम मानकर फिर से गिनने का चलन है; मन को शांत रखकर आगे बढ़ें।

ऑडियो के साथ जाप कैसे करें?

"ऑडियो के साथ" चुनकर जाप शुरू करें। हर बार पूरा मंत्र बजने पर गिनती एक बढ़ती है। साथ-साथ धीमे स्वर में या मन में मंत्र दोहराते रहें। यह गिनती ऑडियो के दोहराव की है; आपने स्वयं कितनी बार बोला, यह गिनती उसका प्रमाण नहीं है।

स्वयं जाप करते समय गिनती कैसे बढ़ाएँ?

"स्वयं जाप करें" चुनें और हर बार मंत्र पूरा करने पर "एक जाप पूरा" बटन दबाएँ। कंप्यूटर पर स्पेस बार से भी गिनती बढ़ती है।

क्या जाप के लिए माला ज़रूरी है?

नहीं। माला गिनती रखने का एक पारंपरिक साधन है। बिना माला के उँगलियों पर, या यहाँ के जाप काउंटर से भी गिनती रख सकते हैं।

क्या बिना दीक्षा के जाप कर सकते हैं?

भक्ति परंपरा में भगवान का नाम-जाप और नमन के मंत्र सबके लिए खुले माने जाते हैं। कुछ परंपराओं में बीज मंत्र गुरु से दीक्षा लेकर जपे जाते हैं; उसके लिए अपनी परंपरा या गुरु की सलाह मानें।

जाप करते समय मन भटके तो क्या करें?

मन का भटकना स्वाभाविक है। जैसे ही ध्यान आए, बिना खुद को दोष दिए फिर से मंत्र और उसके अर्थ पर लौट आएँ। धीमी गति और मंत्र का अर्थ याद रखना इसमें मदद करता है।

जाप माला, साधक ऐप में

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