आरती संग्रह

देवी-देवताओं की प्रचलित आरतियाँ, पूरे पाठ के साथ: मुखड़ा, हर अंतरा और दोहराव। हर आरती के नीचे अंतरा-वार सरल अर्थ, कठिन शब्द और यह कब गाई जाती है।

हर आरती का पाठ दो प्रकाशित स्रोतों से मिलाकर जाँचा गया है, और जहाँ शब्द अलग मिलते हैं वहाँ पाठ-भेद लिखा है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आरती कब की जाती है?

आरती आम तौर पर पूजा के अंत में की जाती है: सुबह की पूजा के बाद और शाम को दीपक जलाने के समय। त्योहारों और व्रतों में पूजा के अंत में आरती गाने की परंपरा है।

आरती के समय दीपक कैसे घुमाते हैं?

प्रचलित तरीका है कि दीपक को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में गोल घुमाया जाए; कई परंपराओं में चरणों के सामने चार बार, नाभि के सामने दो बार, मुख के सामने एक बार और फिर पूरे विग्रह के सामने सात बार। परंपराओं में इसमें अंतर है।

क्या बिना दीपक के आरती गा सकते हैं?

हाँ, आरती का पाठ या गायन भाव से कभी भी किया जा सकता है। दीपक, कपूर और घंटी आरती के साथ की जाने वाली विधि का हिस्सा हैं।

इन आरतियों का पाठ कहाँ से लिया गया है?

हर आरती का पाठ दो प्रकाशित स्रोतों से मिलाकर लिखा गया है; हर पेज के नीचे स्रोत और पाठ-भेद दिए हैं।