खाटू श्याम

आरती · खाटू श्याम

ॐ जय श्री श्याम हरे

खाटू श्याम जी की आरती 'ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे': पूरा पाठ, हर अंतरे का सरल अर्थ, कठिन शब्द और पाठांतर।

इस पेज पर
  1. पूरा पाठ
  2. परिचय
  3. अंतरा-वार अर्थ
  4. भावार्थ
  5. कठिन शब्द
  6. फलश्रुति
  7. कब पढ़ें
  8. विधि
  9. पाठ-भेद
  10. रचयिता और स्रोत
  11. ये भी पढ़ें
  12. सवाल-जवाब
  13. सुधार सुझाएँ

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥

अर्थ: हे श्री श्याम, हे हरि, आपकी जय हो; हे बाबा, आपकी जय हो। आप खाटू धाम में विराजमान हैं और अनुपम रूप धारण किए हुए हैं।

रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥

॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥

अर्थ: आप रत्नों से जड़े सिंहासन पर बैठे हैं और सिर के ऊपर चँवर डुलाया जा रहा है। शरीर पर केसरिया बागा (लंबा अंगरखा) है और कानों में कुण्डल हैं।

गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे।खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले॥

॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥

अर्थ: गले में फूलों की माला है और सिर पर मुकुट है। आग पर धूप जलाई जा रही है और दीपक की ज्योति जल रही है।

मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे।सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे॥

॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥

अर्थ: सोने के थाल में लड्डू, खीर और चूरमा भरे हैं। सेवक भोग लगाते हैं और रोज़ आपकी सेवा करते हैं।

झांझ कटोरा और घड़ियावल, शंख मृदंग घुरे।भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे॥

॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥

अर्थ: झाँझ, कटोरा और घड़ियाल बज रहे हैं, शंख और मृदंग गूँज रहे हैं। भक्त आरती गाते हैं और जय-जयकार करते हैं।

जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे॥

॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥

अर्थ: आरती कहती है कि जो आपका ध्यान करता है, वह फल पाता है और सब दुःखों से उबर जाता है। सेवक अपने मुख से 'श्री श्याम, श्याम' का उच्चारण करते रहते हैं।

श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।कहत भक्त-जन, मनवांछित फल पावे॥

॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥

अर्थ: आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि जो कोई श्री श्याम बिहारी जी की यह आरती गाता है, भक्तजनों के अनुसार वह मनचाहा फल पाता है।

जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे।निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे॥

॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥

अर्थ: हे श्री श्याम, हे बाबा, आपकी जय हो। आपने अपने भक्तों के सब काम पूरे किए हैं।

हर अंतरे का अर्थ पाठ के बीच में पढ़ने के लिए ऊपर पाठ और अर्थ चुनें, या नीचे पढ़ें।

परिचय

'ॐ जय श्री श्याम हरे' राजस्थान के सीकर ज़िले में खाटू धाम में विराजमान श्री श्याम बाबा की आरती है। भक्त खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' कहकर पुकारते हैं; परंपरा उन्हें महाभारत के वीर बर्बरीक से जोड़ती है, जिन्हें श्रीकृष्ण ने अपना 'श्याम' नाम दिया था।

आरती में बाबा के शृंगार का वर्णन है: रत्नों से जड़ा सिंहासन, केसरिया बागा, कानों में कुण्डल, गले में फूलों की माला। फिर मोदक, खीर और चूरमा के भोग और झाँझ, शंख और मृदंग के साथ गाई जाती आरती का चित्र है।

अंतरा-वार अर्थ

  1. मुखड़ा ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे…

    हे श्री श्याम, हे हरि, आपकी जय हो; हे बाबा, आपकी जय हो। आप खाटू धाम में विराजमान हैं और अनुपम रूप धारण किए हुए हैं।

  2. अंतरा १ रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे…

    आप रत्नों से जड़े सिंहासन पर बैठे हैं और सिर के ऊपर चँवर डुलाया जा रहा है। शरीर पर केसरिया बागा (लंबा अंगरखा) है और कानों में कुण्डल हैं।

  3. अंतरा २ गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे…

    गले में फूलों की माला है और सिर पर मुकुट है। आग पर धूप जलाई जा रही है और दीपक की ज्योति जल रही है।

  4. अंतरा ३ मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे…

    सोने के थाल में लड्डू, खीर और चूरमा भरे हैं। सेवक भोग लगाते हैं और रोज़ आपकी सेवा करते हैं।

  5. अंतरा ४ झांझ कटोरा और घड़ियावल, शंख मृदंग घुरे…

    झाँझ, कटोरा और घड़ियाल बज रहे हैं, शंख और मृदंग गूँज रहे हैं। भक्त आरती गाते हैं और जय-जयकार करते हैं।

  6. अंतरा ५ जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे…

    आरती कहती है कि जो आपका ध्यान करता है, वह फल पाता है और सब दुःखों से उबर जाता है। सेवक अपने मुख से 'श्री श्याम, श्याम' का उच्चारण करते रहते हैं।

  7. अंतरा ६ श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे…

    आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि जो कोई श्री श्याम बिहारी जी की यह आरती गाता है, भक्तजनों के अनुसार वह मनचाहा फल पाता है।

  8. अंतरा ७ जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे…

    हे श्री श्याम, हे बाबा, आपकी जय हो। आपने अपने भक्तों के सब काम पूरे किए हैं।

भावार्थ

यह आरती खाटू में विराजे श्याम बाबा की झाँकी जैसी है। पहले उनका शृंगार दिखता है: सिंहासन, चँवर, केसरिया बागा, कुण्डल, फूलों की माला और मुकुट। फिर पूजा का दृश्य आता है: धूप-दीप, सोने के थाल में मोदक, खीर और चूरमा का भोग, और झाँझ, शंख और मृदंग के साथ गाते हुए भक्त।

अंत में आरती श्याम बाबा के नाम-स्मरण की महिमा कहती है: सेवक 'श्याम-श्याम' उचारते हैं, और आरती का विश्वास है कि बाबा अपने भक्तों के काम पूरे करते हैं। यही भरोसा खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' कहने वाली भक्ति के केंद्र में है।

कठिन शब्दों के अर्थ

विराजत
विराजमान हैं
अनुपम
जिसकी कोई उपमा न हो
रतन जड़ित
रत्नों से जड़ा
चंवर
पूजा में डुलाया जाने वाला पंखा (चामर)
ढुरे
डुल रहा है
बागो
बागा, लंबा अंगरखा
श्रवण
कान
खेवत
(धूप) जलाते हैं
मोदक
लड्डू
चूरमा
गेहूँ, घी और गुड़ या शक्कर से बना राजस्थानी भोग
सुवरण
सोने का
झांझ
मंजीरे जैसा बाजा
घड़ियावल
घड़ियाल, बड़ा घंटा
मृदंग
ढोल जैसा बाजा
घुरे
गूँजते हैं
उबरे
उबर जाता है, छूट जाता है
उचरे
उच्चारण करते हैं
मनवांछित
मन में चाहा हुआ
पूरण काज
पूरे किए हुए काम

फलश्रुति

छठा अंतरा कहता है कि जो कोई श्री श्याम बिहारी जी की आरती गाता है, वह मनचाहा फल पाता है। ये आरती के अपने शब्द हैं, जिनमें भक्त का भरोसा बोलता है; इन्हें किसी निश्चित फल के वादे की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।

श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत भक्त-जन, मनवांछित फल पावे॥

आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि जो कोई श्री श्याम बिहारी जी की यह आरती गाता है, भक्तजनों के अनुसार वह मनचाहा फल पाता है।

यह आरती कब गाई जाती है

  • रोज़ सुबह-शाम श्याम बाबा की पूजा में
  • एकादशी के दिन, जिसे श्याम भक्त विशेष मानते हैं
  • फाल्गुन में खाटू के मेले के दिनों में
  • श्याम जागरण और कीर्तन के अंत में

आरती कैसे करें

  • श्याम बाबा के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएँ; घर में जो भोग बना हो, जैसे खीर या चूरमा, वह पहले अर्पित करें।
  • टेक 'ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे' से शुरू करें और हर अंतरे के बाद इसे दोहराएँ।
  • मंदिरों में आरती के साथ झाँझ, शंख और घंटा बजता है; घर में ताली बजाकर भी गा सकते हैं।

पाठ-भेद

अलग-अलग पुस्तकों में कुछ जगह शब्द अलग मिलते हैं। ऊपर का पाठ नीचे दिए स्रोत के अनुसार है; दूसरे पाठ ये हैं:

कहाँदूसरा पाठटिप्पणी
अंतरा 6कहत मनोहर स्वामी मनवांछित फल पावेंभारतकोश (bharatdiscovery.org) के पाठ में; यहाँ अंतिम पंक्ति में किसी 'मनोहर स्वामी' की छाप है, जबकि द्रिक पंचांग, भक्ति भारत और आज तक में 'कहत भक्त-जन'
अंतरा 6 के बादतन मन धन सब कुछ है तेरा, हो बाबा सब कुछ है तेरा। तेरा तुझको अर्पण, क्या लोग मेरा॥केवल द्रिक पंचांग में एक अतिरिक्त अंतरा ('लोग' संभवतः 'लागे' की छपाई की भूल है); यह 'ॐ जय जगदीश हरे' के अंतिम अंतरे जैसा है और भक्ति भारत, भारतकोश व आज तक में नहीं है
अंतरा 4शंख मृदंग धुरेद्रिक पंचांग में; भक्ति भारत और आज तक में 'घुरे'
अंतरा 7ॐ जय श्री श्याम हरे बाबा जय श्री श्याम हरे। निज भक्तों के तुम ने पूर्ण काज करें॥भारतकोश में

रचयिता और स्रोत

रचयिता
ज्ञात नहीं
भाषा
हिन्दी

पाठ की जाँच (10 अक्टूबर 2026): हर पंक्ति द्रिक पंचांग, भक्ति भारत और भारतकोश (bharatdiscovery.org) के पाठ से मिलाई गई; आज तक का पाठ भी देखा गया (भक्ति भारत जैसा)। टेक और सातों अंतरे और उनका क्रम चारों में एक है। 'घुरे' भक्ति भारत और आज तक से, 'सिर पर मुकुट' द्रिक पंचांग से (भक्ति भारत में 'पार' छपाई की भूल है)। अंतिम पंक्ति में 'कहत भक्त-जन' द्रिक पंचांग, भक्ति भारत और आज तक का पाठ है। द्रिक पंचांग के अतिरिक्त अंतरे 'तन मन धन सब कुछ है तेरा' को मूल पाठ में नहीं लिया गया, क्योंकि बाकी स्रोतों में वह नहीं है; वह पाठांतर में है। रचयिता अज्ञात।

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खाटू श्याम जी के लिए और

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

खाटू श्याम जी कौन हैं?

राजस्थान के सीकर ज़िले के खाटू गाँव में विराजमान श्याम बाबा। परंपरा उन्हें महाभारत के वीर बर्बरीक (घटोत्कच के पुत्र) से जोड़ती है, जिन्होंने श्रीकृष्ण को अपना शीश दान किया था और श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना नाम 'श्याम' दिया।

श्याम बाबा की आरती कब गाई जाती है?

मंदिरों में दिन में कई बार आरती होती है; घर में सुबह-शाम की पूजा के अंत में इसे गा सकते हैं। एकादशी, श्याम जागरण और फाल्गुन मेले के दिनों में यह आरती विशेष रूप से गाई जाती है।

आरती में 'श्याम बिहारी' किसे कहा गया है?

श्याम बाबा को ही। 'बिहारी' श्रीकृष्ण का भी नाम है, और खाटू श्याम जी की भक्ति में उन्हें श्रीकृष्ण के रूप में पूजा जाता है।

आरती में चूरमा का भोग क्यों आता है?

चूरमा राजस्थान का पारंपरिक भोग है और खाटू श्याम जी को विशेष रूप से चढ़ाया जाता है। आरती में मोदक और खीर के साथ इसका नाम आता है।

इस आरती के रचयिता कौन हैं?

द्रिक पंचांग और भक्ति भारत के पाठ में किसी कवि का नाम नहीं है। भारतकोश के पाठ की अंतिम पंक्ति 'कहत मनोहर स्वामी' है, पर इस नाम के बारे में और कोई जानकारी नहीं मिली, इसलिए रचयिता अज्ञात माना गया है।

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