जन्माष्टमी पूजा विधि
कृष्ण · पूजा विधि · त्योहार की पूजा
घर में जन्माष्टमी की पूजा: दिन का व्रत, आधी रात को श्री कृष्ण के जन्म पर पंचामृत अभिषेक, पालना, भोग, आरती और पारण, हर सामग्री के विकल्प के साथ।

आरती · खाटू श्याम
खाटू श्याम जी की आरती 'ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे': पूरा पाठ, हर अंतरे का सरल अर्थ, कठिन शब्द और पाठांतर।
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥
अर्थ: हे श्री श्याम, हे हरि, आपकी जय हो; हे बाबा, आपकी जय हो। आप खाटू धाम में विराजमान हैं और अनुपम रूप धारण किए हुए हैं।
रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥
॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥
अर्थ: आप रत्नों से जड़े सिंहासन पर बैठे हैं और सिर के ऊपर चँवर डुलाया जा रहा है। शरीर पर केसरिया बागा (लंबा अंगरखा) है और कानों में कुण्डल हैं।
गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे।खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले॥
॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥
अर्थ: गले में फूलों की माला है और सिर पर मुकुट है। आग पर धूप जलाई जा रही है और दीपक की ज्योति जल रही है।
मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे।सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे॥
॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥
अर्थ: सोने के थाल में लड्डू, खीर और चूरमा भरे हैं। सेवक भोग लगाते हैं और रोज़ आपकी सेवा करते हैं।
झांझ कटोरा और घड़ियावल, शंख मृदंग घुरे।भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे॥
॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥
अर्थ: झाँझ, कटोरा और घड़ियाल बज रहे हैं, शंख और मृदंग गूँज रहे हैं। भक्त आरती गाते हैं और जय-जयकार करते हैं।
जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे॥
॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥
अर्थ: आरती कहती है कि जो आपका ध्यान करता है, वह फल पाता है और सब दुःखों से उबर जाता है। सेवक अपने मुख से 'श्री श्याम, श्याम' का उच्चारण करते रहते हैं।
श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।कहत भक्त-जन, मनवांछित फल पावे॥
॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥
अर्थ: आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि जो कोई श्री श्याम बिहारी जी की यह आरती गाता है, भक्तजनों के अनुसार वह मनचाहा फल पाता है।
जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे।निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे॥
॥ ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ॥
अर्थ: हे श्री श्याम, हे बाबा, आपकी जय हो। आपने अपने भक्तों के सब काम पूरे किए हैं।
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'ॐ जय श्री श्याम हरे' राजस्थान के सीकर ज़िले में खाटू धाम में विराजमान श्री श्याम बाबा की आरती है। भक्त खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' कहकर पुकारते हैं; परंपरा उन्हें महाभारत के वीर बर्बरीक से जोड़ती है, जिन्हें श्रीकृष्ण ने अपना 'श्याम' नाम दिया था।
आरती में बाबा के शृंगार का वर्णन है: रत्नों से जड़ा सिंहासन, केसरिया बागा, कानों में कुण्डल, गले में फूलों की माला। फिर मोदक, खीर और चूरमा के भोग और झाँझ, शंख और मृदंग के साथ गाई जाती आरती का चित्र है।
हे श्री श्याम, हे हरि, आपकी जय हो; हे बाबा, आपकी जय हो। आप खाटू धाम में विराजमान हैं और अनुपम रूप धारण किए हुए हैं।
आप रत्नों से जड़े सिंहासन पर बैठे हैं और सिर के ऊपर चँवर डुलाया जा रहा है। शरीर पर केसरिया बागा (लंबा अंगरखा) है और कानों में कुण्डल हैं।
गले में फूलों की माला है और सिर पर मुकुट है। आग पर धूप जलाई जा रही है और दीपक की ज्योति जल रही है।
सोने के थाल में लड्डू, खीर और चूरमा भरे हैं। सेवक भोग लगाते हैं और रोज़ आपकी सेवा करते हैं।
झाँझ, कटोरा और घड़ियाल बज रहे हैं, शंख और मृदंग गूँज रहे हैं। भक्त आरती गाते हैं और जय-जयकार करते हैं।
आरती कहती है कि जो आपका ध्यान करता है, वह फल पाता है और सब दुःखों से उबर जाता है। सेवक अपने मुख से 'श्री श्याम, श्याम' का उच्चारण करते रहते हैं।
आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि जो कोई श्री श्याम बिहारी जी की यह आरती गाता है, भक्तजनों के अनुसार वह मनचाहा फल पाता है।
हे श्री श्याम, हे बाबा, आपकी जय हो। आपने अपने भक्तों के सब काम पूरे किए हैं।
यह आरती खाटू में विराजे श्याम बाबा की झाँकी जैसी है। पहले उनका शृंगार दिखता है: सिंहासन, चँवर, केसरिया बागा, कुण्डल, फूलों की माला और मुकुट। फिर पूजा का दृश्य आता है: धूप-दीप, सोने के थाल में मोदक, खीर और चूरमा का भोग, और झाँझ, शंख और मृदंग के साथ गाते हुए भक्त।
अंत में आरती श्याम बाबा के नाम-स्मरण की महिमा कहती है: सेवक 'श्याम-श्याम' उचारते हैं, और आरती का विश्वास है कि बाबा अपने भक्तों के काम पूरे करते हैं। यही भरोसा खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' कहने वाली भक्ति के केंद्र में है।
छठा अंतरा कहता है कि जो कोई श्री श्याम बिहारी जी की आरती गाता है, वह मनचाहा फल पाता है। ये आरती के अपने शब्द हैं, जिनमें भक्त का भरोसा बोलता है; इन्हें किसी निश्चित फल के वादे की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।
श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत भक्त-जन, मनवांछित फल पावे॥आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि जो कोई श्री श्याम बिहारी जी की यह आरती गाता है, भक्तजनों के अनुसार वह मनचाहा फल पाता है।
अलग-अलग पुस्तकों में कुछ जगह शब्द अलग मिलते हैं। ऊपर का पाठ नीचे दिए स्रोत के अनुसार है; दूसरे पाठ ये हैं:
| कहाँ | दूसरा पाठ | टिप्पणी |
|---|---|---|
| अंतरा 6 | कहत मनोहर स्वामी मनवांछित फल पावें | भारतकोश (bharatdiscovery.org) के पाठ में; यहाँ अंतिम पंक्ति में किसी 'मनोहर स्वामी' की छाप है, जबकि द्रिक पंचांग, भक्ति भारत और आज तक में 'कहत भक्त-जन' |
| अंतरा 6 के बाद | तन मन धन सब कुछ है तेरा, हो बाबा सब कुछ है तेरा। तेरा तुझको अर्पण, क्या लोग मेरा॥ | केवल द्रिक पंचांग में एक अतिरिक्त अंतरा ('लोग' संभवतः 'लागे' की छपाई की भूल है); यह 'ॐ जय जगदीश हरे' के अंतिम अंतरे जैसा है और भक्ति भारत, भारतकोश व आज तक में नहीं है |
| अंतरा 4 | शंख मृदंग धुरे | द्रिक पंचांग में; भक्ति भारत और आज तक में 'घुरे' |
| अंतरा 7 | ॐ जय श्री श्याम हरे बाबा जय श्री श्याम हरे। निज भक्तों के तुम ने पूर्ण काज करें॥ | भारतकोश में |
पाठ की जाँच (10 अक्टूबर 2026): हर पंक्ति द्रिक पंचांग, भक्ति भारत और भारतकोश (bharatdiscovery.org) के पाठ से मिलाई गई; आज तक का पाठ भी देखा गया (भक्ति भारत जैसा)। टेक और सातों अंतरे और उनका क्रम चारों में एक है। 'घुरे' भक्ति भारत और आज तक से, 'सिर पर मुकुट' द्रिक पंचांग से (भक्ति भारत में 'पार' छपाई की भूल है)। अंतिम पंक्ति में 'कहत भक्त-जन' द्रिक पंचांग, भक्ति भारत और आज तक का पाठ है। द्रिक पंचांग के अतिरिक्त अंतरे 'तन मन धन सब कुछ है तेरा' को मूल पाठ में नहीं लिया गया, क्योंकि बाकी स्रोतों में वह नहीं है; वह पाठांतर में है। रचयिता अज्ञात।
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अच्युतं केशवं रामनारायणं
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अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्
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वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्
राजस्थान के सीकर ज़िले के खाटू गाँव में विराजमान श्याम बाबा। परंपरा उन्हें महाभारत के वीर बर्बरीक (घटोत्कच के पुत्र) से जोड़ती है, जिन्होंने श्रीकृष्ण को अपना शीश दान किया था और श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना नाम 'श्याम' दिया।
मंदिरों में दिन में कई बार आरती होती है; घर में सुबह-शाम की पूजा के अंत में इसे गा सकते हैं। एकादशी, श्याम जागरण और फाल्गुन मेले के दिनों में यह आरती विशेष रूप से गाई जाती है।
श्याम बाबा को ही। 'बिहारी' श्रीकृष्ण का भी नाम है, और खाटू श्याम जी की भक्ति में उन्हें श्रीकृष्ण के रूप में पूजा जाता है।
चूरमा राजस्थान का पारंपरिक भोग है और खाटू श्याम जी को विशेष रूप से चढ़ाया जाता है। आरती में मोदक और खीर के साथ इसका नाम आता है।
द्रिक पंचांग और भक्ति भारत के पाठ में किसी कवि का नाम नहीं है। भारतकोश के पाठ की अंतिम पंक्ति 'कहत मनोहर स्वामी' है, पर इस नाम के बारे में और कोई जानकारी नहीं मिली, इसलिए रचयिता अज्ञात माना गया है।
पाठ की किसी पंक्ति, शब्द या अर्थ में गलती दिखे तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को प्रामाणिक स्रोत से मिलाकर ही बदलते हैं, और मूल पाठ में अपनी ओर से कुछ नहीं जोड़ते।