शिव ताण्डव स्तोत्रम्
शिव · स्तोत्र · संस्कृत
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
संस्कृत और हिन्दी के स्तोत्र, स्तुतियाँ, अष्टक और श्लोक, श्लोक-संख्या के साथ पूरा पाठ, हर श्लोक का अर्थ, शब्दार्थ, भावार्थ और रोमन लिपि।
हर पाठ प्रामाणिक स्रोत से मिलाकर जाँचा गया है; ग्रंथ और रचयिता उतने ही विश्वास से लिखे हैं जितना वे ज्ञात हैं।
शिव · स्तोत्र · संस्कृत
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
शिव · अष्टकम् · संस्कृत
नमामीशमीशाननिर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्
शिव · अष्टकम् · संस्कृत
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं
शिव · स्तोत्र · संस्कृत
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय
शिव · श्लोक · संस्कृत
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्
शिव · स्तोत्र · संस्कृत
रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं
शिव · स्तोत्र · संस्कृत
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्
शिव · अष्टकम् · संस्कृत
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्
अर्धनारीश्वर, शिव, पार्वती · स्तोत्र · संस्कृत
चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय
भैरव, शिव · अष्टकम् · संस्कृत
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं
दक्षिणामूर्ति, शिव · स्तोत्र · संस्कृत
मौनव्याख्याप्रकटितपरब्रह्मतत्त्वं युवानं
नटराज, शिव · स्तोत्र · संस्कृत
सदञ्चित मुदञ्चित निकुञ्चित पदं झलझलञ्चलित मञ्जु कटकम्
दुर्गा · स्तोत्र · संस्कृत
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
दुर्गा · स्तोत्र · संस्कृत
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्
दुर्गा · स्तुति · संस्कृत
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः
दुर्गा · स्तोत्र · संस्कृत
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा · स्तोत्र · संस्कृत
ॐ विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे
दुर्गा · स्तोत्र · संस्कृत
न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो
नवदुर्गा, दुर्गा · श्लोक · संस्कृत
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी
लक्ष्मी · स्तोत्र · संस्कृत
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती
लक्ष्मी · सूक्त · संस्कृत
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्
लक्ष्मी · अष्टकम् · संस्कृत
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते
अन्नपूर्णा, पार्वती · स्तोत्र · संस्कृत
नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी
काली · अष्टकम् · संस्कृत
गलद्रक्तमुण्डावलीकण्ठमाला
सरस्वती · श्लोक · संस्कृत
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
शीतला माता · अष्टकम् · संस्कृत
वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्
विष्णु · श्लोक · संस्कृत
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विष्णु, कृष्ण · अष्टकम् · संस्कृत
अच्युतं केशवं रामनारायणं
नरसिंह · स्तोत्र · संस्कृत
श्रीमत्पयोनिधिनिकेतनचक्रपाणे
वेंकटेश्वर · स्तोत्र · संस्कृत
कौसल्या सुप्रजा राम पूर्वा सन्ध्या प्रवर्तते
राम · स्तोत्र · संस्कृत
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं
राम · स्तुति · ब्रज
श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं
हनुमान · अष्टकम् · ब्रज
बाल समय रबि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो
हनुमान · स्तुति · अवधी
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान
हनुमान · श्लोक · संस्कृत
मनोजवं मारुततुल्यवेगं
सीता · श्लोक · संस्कृत
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्
कृष्ण, बाल गोपाल · अष्टकम् · संस्कृत
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्
कृष्ण · अष्टकम् · संस्कृत
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्
कृष्ण, बाल गोपाल · अष्टकम् · संस्कृत
नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपं
जगन्नाथ · अष्टकम् · संस्कृत
कदाचित्कालिन्दीतटविपिनसङ्गीतकरवो
राधा, राधा-कृष्ण · स्तोत्र · संस्कृत
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि
गणेश · स्तोत्र · संस्कृत
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्
गणेश · श्लोक · संस्कृत
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ
गणेश · स्तोत्र · संस्कृत
मुदाकरात्तमोदकं सदाविमुक्तिसाधकं
कार्तिकेय · स्तोत्र · संस्कृत
हे स्वामिनाथ करुणाकर दीनबन्धो
अय्यप्पा · स्तुति · संस्कृत
हरिवरासनं विश्वमोहनं
सूर्य · स्तोत्र · संस्कृत
ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्
शनि · स्तोत्र · संस्कृत
नमः कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च
नवग्रह, सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु · स्तोत्र · संस्कृत
जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्
मंगल · स्तोत्र · संस्कृत
मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः
गंगा · स्तोत्र · संस्कृत
देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे
तुलसी · श्लोक · संस्कृत
वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी
यमुना, कृष्ण · अष्टकम् · संस्कृत
नमामि यमुनामहं सकलसिद्धिहेतुं मुदा
स्तोत्र किसी देवता की प्रशंसा में कई श्लोकों की रचना है। स्तुति भी प्रशंसा और प्रार्थना है, अक्सर किसी कथा के बीच कही गई। अष्टक आठ श्लोकों का स्तोत्र होता है। श्लोक एक अकेला पद्य है, जैसे पूजा के आरंभ में पढ़ा जाने वाला ध्यान-श्लोक।
हर पेज पर हर श्लोक का हिन्दी अर्थ, कठिन शब्दों के अर्थ और रोमन लिपि दी गई है। पहले अर्थ पढ़कर फिर धीरे-धीरे पाठ करने से उच्चारण और भाव दोनों सहज होते हैं।
कई स्तोत्रों के अंत में कुछ श्लोक बताते हैं कि उस स्तोत्र के पाठ का क्या फल परंपरा में माना गया है। इन्हें फलश्रुति कहते हैं। हमने इन्हें स्तोत्र के अपने शब्दों के रूप में दिया है।
संस्कृत पाठ sanskritdocuments.org जैसे संशोधित संग्रहों और दूसरे प्रकाशित स्रोत से मिलाकर लिखा गया है; हर पेज के नीचे स्रोत दिया है।