स्तोत्र, स्तुति और श्लोक

संस्कृत और हिन्दी के स्तोत्र, स्तुतियाँ, अष्टक और श्लोक, श्लोक-संख्या के साथ पूरा पाठ, हर श्लोक का अर्थ, शब्दार्थ, भावार्थ और रोमन लिपि।

हर पाठ प्रामाणिक स्रोत से मिलाकर जाँचा गया है; ग्रंथ और रचयिता उतने ही विश्वास से लिखे हैं जितना वे ज्ञात हैं।

भगवान के अनुसार

शिवशिव१२ स्तोत्रभैरवभैरवकालभैरवाष्टकम्नटराजनटराजनटराज स्तोत्रम्अर्धनारीश्वरअर्धनारीश्वरअर्धनारीश्वर स्तोत्रम्दक्षिणामूर्तिदक्षिणामूर्तिदक्षिणामूर्ति स्तोत्रम्दुर्गादुर्गा७ स्तोत्रनवदुर्गानवदुर्गाप्रथमं शैलपुत्री च (नवदुर्गा के नौ नाम)पार्वतीपार्वती२ स्तोत्रकालीकालीकालिकाष्टकम्लक्ष्मीलक्ष्मी३ स्तोत्रसरस्वतीसरस्वतीया कुन्देन्दुतुषारहारधवला (सरस्वती वन्दना)अन्नपूर्णाअन्नपूर्णाअन्नपूर्णा स्तोत्रम्शीतला माताशीतला माताशीतलाष्टकम्विष्णुविष्णु२ स्तोत्रनरसिंहनरसिंहलक्ष्मीनृसिंह करावलम्ब स्तोत्रम्वेंकटेश्वरवेंकटेश्वरश्री वेंकटेश सुप्रभातम्रामराम२ स्तोत्रसीतासीताउद्भवस्थितिसंहारकारिणीं (सीता वन्दना)हनुमानहनुमान३ स्तोत्रकृष्णकृष्ण५ स्तोत्रराधाराधाराधा कृपाकटाक्ष स्तोत्रम्राधा-कृष्णराधा-कृष्णराधा कृपाकटाक्ष स्तोत्रम्बाल गोपालबाल गोपाल२ स्तोत्रजगन्नाथजगन्नाथजगन्नाथाष्टकम्गणेशगणेश३ स्तोत्रकार्तिकेयकार्तिकेयसुब्रह्मण्य करावलम्ब स्तोत्रम्अय्यप्पाअय्यप्पाहरिवरासनम्नवग्रहनवग्रहनवग्रह स्तोत्रम्सूर्यसूर्य२ स्तोत्रचंद्रचंद्रनवग्रह स्तोत्रम्मंगलमंगल२ स्तोत्रबुधबुधनवग्रह स्तोत्रम्बृहस्पतिबृहस्पतिनवग्रह स्तोत्रम्शुक्रशुक्रनवग्रह स्तोत्रम्शनिशनि२ स्तोत्रराहुराहुनवग्रह स्तोत्रम्केतुकेतुनवग्रह स्तोत्रम्गंगागंगागङ्गा स्तोत्रम्यमुनायमुनायमुनाष्टकम्तुलसीतुलसीतुलसी नामाष्टक

सभी स्तोत्र (५३)

शिव और उनके रूप

शिव

रुद्राष्टकम्

शिव · अष्टकम् · संस्कृत

नमामीशमीशाननिर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्

शिव

शिव मानस पूजा

शिव · स्तोत्र · संस्कृत

रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं

शिव

बिल्वाष्टकम्

शिव · अष्टकम् · संस्कृत

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्

नटराज

नटराज स्तोत्रम्

नटराज, शिव · स्तोत्र · संस्कृत

सदञ्चित मुदञ्चित निकुञ्चित पदं झलझलञ्चलित मञ्जु कटकम्

देवी

दुर्गा

कीलक स्तोत्रम्

दुर्गा · स्तोत्र · संस्कृत

ॐ विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे

लक्ष्मी

श्री सूक्त

लक्ष्मी · सूक्त · संस्कृत

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्

शीतला माता

शीतलाष्टकम्

शीतला माता · अष्टकम् · संस्कृत

वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्

विष्णु और उनके रूप

राम परिवार

हनुमान

बजरंग बाण

हनुमान · स्तुति · अवधी

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान

कृष्ण परंपरा

कृष्ण

मधुराष्टकम्

कृष्ण, बाल गोपाल · अष्टकम् · संस्कृत

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्

कृष्ण

दामोदराष्टकम्

कृष्ण, बाल गोपाल · अष्टकम् · संस्कृत

नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपं

अन्य देवता

अय्यप्पा

हरिवरासनम्

अय्यप्पा · स्तुति · संस्कृत

हरिवरासनं विश्वमोहनं

नवग्रह

सूर्य

आदित्य हृदयम्

सूर्य · स्तोत्र · संस्कृत

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्

नवग्रह

नवग्रह स्तोत्रम्

नवग्रह, सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु · स्तोत्र · संस्कृत

जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्

पवित्र नदियाँ और तुलसी

गंगा

गङ्गा स्तोत्रम्

गंगा · स्तोत्र · संस्कृत

देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे

तुलसी

तुलसी नामाष्टक

तुलसी · श्लोक · संस्कृत

वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी

यमुना

यमुनाष्टकम्

यमुना, कृष्ण · अष्टकम् · संस्कृत

नमामि यमुनामहं सकलसिद्धिहेतुं मुदा

वेबसाइट पर और

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

स्तोत्र, स्तुति, अष्टक और श्लोक में क्या अंतर है?

स्तोत्र किसी देवता की प्रशंसा में कई श्लोकों की रचना है। स्तुति भी प्रशंसा और प्रार्थना है, अक्सर किसी कथा के बीच कही गई। अष्टक आठ श्लोकों का स्तोत्र होता है। श्लोक एक अकेला पद्य है, जैसे पूजा के आरंभ में पढ़ा जाने वाला ध्यान-श्लोक।

संस्कृत न आती हो तो स्तोत्र कैसे पढ़ें?

हर पेज पर हर श्लोक का हिन्दी अर्थ, कठिन शब्दों के अर्थ और रोमन लिपि दी गई है। पहले अर्थ पढ़कर फिर धीरे-धीरे पाठ करने से उच्चारण और भाव दोनों सहज होते हैं।

फलश्रुति का क्या अर्थ है?

कई स्तोत्रों के अंत में कुछ श्लोक बताते हैं कि उस स्तोत्र के पाठ का क्या फल परंपरा में माना गया है। इन्हें फलश्रुति कहते हैं। हमने इन्हें स्तोत्र के अपने शब्दों के रूप में दिया है।

इन स्तोत्रों का पाठ कहाँ से लिया गया है?

संस्कृत पाठ sanskritdocuments.org जैसे संशोधित संग्रहों और दूसरे प्रकाशित स्रोत से मिलाकर लिखा गया है; हर पेज के नीचे स्रोत दिया है।