शिव

पूजा विधि · शिव · रोज़ की पूजा

शिव पूजा विधि

घर में रोज़ और सोमवार को शिव जी की सरल पूजा: जल अर्पण, बेलपत्र, दीपक, "ॐ नमः शिवाय", आरती और आधी परिक्रमा, हर सामग्री के विकल्प के साथ।

इस पेज पर
  1. परिचय
  2. एक नज़र में
  3. कब करें
  4. सामग्री
  5. तैयारी
  6. चित्र या मूर्ति
  7. संकल्प
  8. चरण-दर-चरण विधि
  9. पाठ
  10. भोग
  11. समापन
  12. छोटी विधि
  13. परंपराओं में अंतर
  14. ये भी पढ़ें
  15. स्रोत
  16. सवाल-जवाब
  17. सुधार सुझाएँ
रोज़ की पूजा

यह पन्ना घर में रोज़ या सोमवार को की जाने वाली शिव जी की सरल पूजा बताता है: शिवलिंग या तस्वीर के सामने जल, बेलपत्र, दीपक और "ॐ नमः शिवाय" के साथ। रुद्राष्टाध्यायी के वैदिक मंत्रों से होने वाला रुद्राभिषेक, पार्थिव शिवलिंग का विधिवत पूजन, मंदिर की प्रतिष्ठित मूर्ति की सेवा और दीक्षा से जुड़ी शैव साधनाएँ अलग विधियाँ हैं; इन्हें किसी जानकार आचार्य से सीखकर या उनके साथ करें। महाशिवरात्रि की रात की पूजा के लिए अलग पन्ना है।

परिचय

शिव जी की पूजा सबसे सरल पूजाओं में गिनी जाती है। उन्हें भोलेनाथ इसीलिए कहा जाता है कि वे थोड़े में प्रसन्न माने जाते हैं: एक लोटा जल, एक बेलपत्र और सच्चे मन से लिया गया नाम। शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल चढ़ाना, यानी अभिषेक, इस पूजा का केंद्र है।

यहाँ घर की रोज़ की पूजा का क्रम है, जिसे सोमवार, प्रदोष या सावन में थोड़ा विस्तार से किया जा सकता है। हर सामग्री के साथ उसका विकल्प भी लिखा है। जो चीज़ न हो, उसे मन से अर्पित करना भी पूजा का ही अंग माना गया है; जल, दीपक और नाम के साथ की गई छोटी-सी पूजा भी पूरी पूजा है।

एक नज़र में

समय
सुबह स्नान के बाद; सोमवार और प्रदोष को शाम को भी
अवधि
लगभग 15 से 20 मिनट; छोटी पूजा 5 मिनट में
कौन कर सकता है
घर का कोई भी सदस्य: स्त्री, पुरुष, बच्चे और बुज़ुर्ग
मुख्य सामग्री
जल, बेलपत्र, सफ़ेद फूल, चंदन, दीपक, धूप और थोड़ा भोग
आरती
ॐ जय शिव ओंकारा

पूजा कब करें

  • रोज़ सुबह स्नान के बाद, घर की बाकी पूजा के साथ। जो रोज़ न कर पाएँ, वे सप्ताह में सोमवार को कर सकते हैं।
  • सोमवार शिव जी का दिन माना जाता है। सावन के सोमवार, सोलह सोमवार का संकल्प, हर महीने का प्रदोष (त्रयोदशी की शाम) और मासिक शिवरात्रि पर यही पूजा थोड़े विस्तार से की जाती है।
  • प्रदोष की पूजा सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में होती है। यहीं के सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि वाले पन्नों पर हर साल की तारीख़ें, प्रदोष काल और निशीथ काल का समय दिया गया है।
  • महाशिवरात्रि की रात की चार पहर की पूजा के लिए अलग पन्ना "महाशिवरात्रि पूजा विधि" देखें।

पूजा सामग्री

  • आवश्यक इसके बिना यह विधि नहीं होती
  • वैकल्पिक हो तो अच्छा; न हो तो विकल्प दिया है
  • परंपरा-विशेष कुछ परंपराओं में ही
सामग्रीउपयोगस्थितिविकल्प / टिप्पणी
जलशिवलिंग पर अभिषेक के लिए; यही इस पूजा का केंद्र हैआवश्यकसाफ़ पानी का एक लोटा काफ़ी है; गंगाजल हो तो कुछ बूँदें मिला लें। शिवलिंग न हो तो तस्वीर के सामने एक कटोरी में जल अर्पित करें।
बेलपत्र (बिल्वपत्र)शिव जी को सबसे प्रिय पत्ता; तीन पत्तियों वाला, बिना कटा-फटावैकल्पिकरोज़ न मिले तो पहले चढ़ाया हुआ बेलपत्र धोकर फिर से चढ़ाया जा सकता है; गीता प्रेस यह बात स्कंद पुराण के हवाले से लिखती है। वह भी न हो तो मन से अर्पित करें।
दूधजल के साथ अभिषेकवैकल्पिकथोड़ा-सा दूध जल में मिलाकर चढ़ाना काफ़ी है; न हो तो केवल जल। बहुत-से परिवार दूध की बर्बादी से बचने के लिए थोड़ी मात्रा ही लेते हैं।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)सोमवार या विशेष दिन का स्नानवैकल्पिकरोज़ की पूजा में ज़रूरी नहीं। चढ़ाने के बाद शुद्ध जल से शिवलिंग धो दें; अलग पात्र में बचा पंचामृत प्रसाद है।
चंदन या भस्मशिवलिंग पर तिलक या त्रिपुंडवैकल्पिकसफ़ेद चंदन घिसकर; न हो तो यह उपचार छोड़ दें।
अक्षतबिना टूटे चावल, अर्पण के लिएवैकल्पिकथोड़े-से साबुत चावल; न हों तो छोड़ दें।
फूलसफ़ेद और सुगंधित फूल, कनेर या आकवैकल्पिकजो भी ताज़ा फूल मिले। केतकी (केवड़ा) शिव पूजा में नहीं चढ़ाई जाती।
धतूरा और आक के फूलशिव जी को प्रिय माने जाते हैंपरंपरा-विशेषज़रूरी नहीं। धतूरा ज़हरीला होता है: बच्चों की पहुँच से दूर रखें और छूने के बाद हाथ धो लें।
दीपकघी या तेल का दीपकवैकल्पिकघी का दीपक दाईं ओर और तेल का बाईं ओर रखने की परंपरा है (गीता प्रेस)। दीपक न हो तो एक अगरबत्ती से भी पूजा हो जाती है।
धूप या अगरबत्तीसुगंध अर्पणवैकल्पिकन हो तो छोड़ दें।
नैवेद्यभोग: मिश्री, फल, मेवा या घर की बनी शुद्ध मिठाईवैकल्पिकथोड़ी मिश्री या एक फल भी काफ़ी है।
कपूरआरती के लिएवैकल्पिकन हो तो घी के दीपक से आरती करें।
रुद्राक्ष की मालामंत्र जाप की गिनतीवैकल्पिकउंगलियों पर गिनकर या बिना गिने भी जाप हो सकता है।

स्थान और अपनी तैयारी

  • पूजा के लिए घर का कोई शांत, साफ़ कोना चुनें। जहाँ रोज़ पूजा होती है, वहीं शिवलिंग या शिव परिवार की तस्वीर रखें।
  • स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। हाथ-पैर धोकर, थोड़ा जल पीकर (आचमन) आसन पर बैठें। आसन ऊन, कुश या किसी साफ़ कपड़े का हो सकता है।
  • जल, फूल और बेलपत्र पूजा से पहले जुटा लें। गीता प्रेस लिंग पुराण के हवाले से लिखती है कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति और सोमवार को बेलपत्र नहीं तोड़े जाते; ऐसे दिनों के लिए एक दिन पहले तोड़कर रख लें।
  • बैठकर दो-तीन लंबी साँसें लें और मन को शांत करें। पूजा की सबसे बड़ी तैयारी यही भाव है।

चित्र या मूर्ति कैसे रखें

  • शिवलिंग को जलाधारी (अरघे) के साथ एक छोटी चौकी या थाली में रखें, ताकि चढ़ाया हुआ जल एक ओर से बहकर निकल सके। जलाधारी की नली के नीचे एक पात्र रख दें।
  • घरों में आम तौर पर छोटा शिवलिंग रखा जाता है। शिवलिंग न हो तो शिव जी या शिव परिवार की तस्वीर के सामने पूजा करें और जल एक पात्र में अर्पित करें।
  • गीता प्रेस की नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के अनुसार जल का कलश, घंटी, धूप और तेल का दीपक बाईं ओर; घी का दीपक दाईं ओर; चंदन और फूल सामने रखे जाते हैं, और भोग भगवान के ठीक सामने।
  • दिशा: बहुत-सी विधियों में पूजा करने वाला पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठता है, और कई परंपराओं में जलाधारी की नली उत्तर की ओर रखी जाती है। घर की बनावट के अनुसार रीतियाँ अलग हैं; जहाँ साफ़ जगह पर आराम से बैठ सकें, वही ठीक है।

संकल्प

संकल्प का अर्थ है पूजा शुरू करने से पहले मन में साफ़ निश्चय करना: मैं कौन हूँ, किसकी पूजा कर रहा हूँ और किस भाव से। दाहिने हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लेकर संकल्प बोला जाता है, फिर जल नीचे छोड़ दिया जाता है।

हे महादेव, आज [दिन] को मैं [अपना नाम] अपने परिवार के साथ आपकी पूजा अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार कर रहा/रही हूँ। जो सामग्री है उसे स्वीकार करें, और जो नहीं है उसे मेरे भाव से पूरा मानें।

विस्तृत पूजा में पुरोहित संस्कृत संकल्प में संवत, महीना, तिथि, स्थान और गोत्र भी बोलते हैं। घर की रोज़ की पूजा में अपनी भाषा में किया गया यह सरल संकल्प काफ़ी है।

पूजा की विधि, चरण-दर-चरण

  1. १आचमन और संकल्प

    क्या करें
    आसन पर बैठकर आचमन करें और ऊपर दिया संकल्प बोलें।
    कैसे करें
    दाहिनी हथेली में थोड़ा-थोड़ा जल लेकर तीन बार पिएँ और हाथ धो लें। फिर हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प बोलें और जल ज़मीन या किसी पात्र में छोड़ दें।
    भाव
    अब कुछ देर के लिए मेरा मन केवल शिव जी के पास है।
    विकल्प
    जल्दी हो तो हाथ जोड़कर मन में ही संकल्प कर लें।
  2. २गणेश जी और नंदी को प्रणाम

    क्या करें
    शिव पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण करें, और शिव जी के द्वार पर बैठे नंदी को प्रणाम करें।
    कैसे करें
    हाथ जोड़कर "श्री गणेशाय नमः" कहें। शिवलिंग के सामने नंदी की छोटी मूर्ति हो तो उन्हें भी एक फूल चढ़ाएँ; न हो तो मन से प्रणाम कर लें।
    भाव
    हर काम की शुरुआत विघ्नहर्ता से, और शिव तक पहुँचने से पहले उनके सबसे प्रिय भक्त का आदर।
    विकल्प
    बच्चे साथ हों तो नंदी को फूल चढ़ाने का काम उन्हें दें।
  3. ३शिव जी का ध्यान

    क्या करें
    आँखें बंद करके शिव जी के शांत रूप का ध्यान करें।
    कैसे करें
    हाथ में एक फूल लेकर मन में शिव जी का रूप देखें: कपूर जैसे उजले, मस्तक पर चंद्रमा, जटाओं में गंगा, गले में सर्प, पास में माँ पार्वती। ध्यान का श्लोक पढ़ें या केवल रूप का स्मरण करें, फिर फूल शिवलिंग पर चढ़ा दें।
    भाव
    जिनकी पूजा कर रहा हूँ, वे मेरे सामने उपस्थित हैं।
    पाठ

    ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं
    रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
    पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं
    विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥

    अर्थ: मैं महेश्वर का नित्य ध्यान करूँ: जो चाँदी के पर्वत जैसे उजले हैं, सुंदर चंद्रमा जिनका आभूषण है, रत्नों के आभूषणों से जिनका शरीर दमकता है, जिनके हाथों में परशु, मृग, वर और अभय की मुद्रा है, जो प्रसन्न हैं, कमल पर बैठे हैं, देवगण चारों ओर से जिनकी स्तुति करते हैं, जो बाघ की खाल पहने हैं, जो विश्व के आदि और विश्व के बीज हैं, सब भय हरने वाले हैं, और जिनके पाँच मुख और तीन नेत्र हैं।

    स्रोत: शिव जी का प्रचलित ध्यान-श्लोक; द्रिक पंचांग की शिव पूजा विधि (ध्यानम्) के पाठ से मिलाया गया। गीता प्रेस की पञ्चदेव-पूजा में भी शिव जी का यही ध्यान है।

    विकल्प
    श्लोक कठिन लगे तो केवल "ॐ नमः शिवाय" कहकर रूप का स्मरण करें।
  4. ४जल से अभिषेक

    क्या करें
    शिवलिंग पर धीरे-धीरे, पतली धार में जल चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    लोटा दोनों हाथों से पकड़ें और जल ऊपर से गिराने के बजाय पास से पतली धार में चढ़ाएँ। जल चढ़ाते हुए "ॐ नमः शिवाय" बोलते रहें। जल जलाधारी से बहकर नीचे रखे पात्र में जाए।
    भाव
    जैसे जल शिवलिंग को शीतल करता है, वैसे ही मेरे मन की तपन भी शांत हो।
    पाठ

    ॐ नमः शिवाय

    अर्थ: मैं मंगलमय शिव को नमन करता/करती हूँ और स्वयं को उन्हें समर्पित करता/करती हूँ।

    मंत्र का अर्थ और उच्चारण

    विकल्प
    शिवलिंग न हो तो तस्वीर के सामने एक कटोरी में जल अर्पित करें, या आँखें बंद करके मन में अभिषेक की कल्पना करें।
  5. ५दूध या पंचामृत से स्नान

    क्या करें
    सोमवार या किसी विशेष दिन थोड़ा दूध या पंचामृत चढ़ाएँ, फिर शुद्ध जल से स्नान कराएँ।
    कैसे करें
    पंचामृत अलग पात्र में बनाएँ: दूध, दही, थोड़ा घी, शहद और शक्कर। थोड़ा-सा चढ़ाएँ, फिर साफ़ जल से शिवलिंग अच्छी तरह धो दें, ताकि चिकनाई या मिठास न रहे।
    भाव
    जो अच्छा और शुद्ध है, वह पहले भगवान को।
    पाठ

    ॐ नमः शिवाय। पञ्चामृतस्नानं समर्पयामि॥
    ॐ नमः शिवाय। शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि॥

    अर्थ: हे शिव, आपको नमन; मैं पंचामृत से स्नान अर्पित करता/करती हूँ। हे शिव, आपको नमन; मैं शुद्ध जल से स्नान अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: हर उपचार को देवता के नाम-मंत्र के साथ "समर्पयामि" कहकर अर्पित करने का प्रचलित ढंग। गीता प्रेस की नित्यकर्म-पूजाप्रकाश कहती है कि जो श्लोक न पढ़ सकें वे नाम-मंत्र से पूजा करें, और उसके पार्थिव-पूजन में हर उपचार "ॐ नमः शिवाय" के साथ इन्हीं शब्दों से अर्पित होता है।

    विकल्प
    रोज़ की पूजा में केवल जल काफ़ी है।
  6. ६चंदन और अक्षत

    क्या करें
    शिवलिंग पर चंदन लगाएँ और कुछ अक्षत चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से चंदन लगाएँ; कई घरों में चंदन या भस्म से तीन आड़ी रेखाओं का त्रिपुंड बनाया जाता है। फिर कुछ साबुत चावल चढ़ाएँ।
    भाव
    शीतल चंदन की तरह मेरा स्वभाव भी शांत रहे।
    पाठ

    ॐ नमः शिवाय। गन्धं समर्पयामि॥
    ॐ नमः शिवाय। अक्षतान् समर्पयामि॥

    अर्थ: हे शिव, आपको नमन; मैं चंदन (गंध) अर्पित करता/करती हूँ। हे शिव, आपको नमन; मैं अक्षत अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश (शिव-पूजा और पार्थिव-पूजन) के उपचार-वाक्यों के अनुसार।

    विकल्प
    चंदन न हो तो यह चरण छोड़ दें; केवल अक्षत भी चढ़ा सकते हैं।
  7. ७बेलपत्र और फूल

    क्या करें
    तीन पत्तियों वाला बेलपत्र और फूल अर्पित करें।
    कैसे करें
    बेलपत्र धोकर, उसका चिकना हिस्सा शिवलिंग की ओर करके, यानी उलटा करके चढ़ाएँ; गीता प्रेस के अनुसार बेलपत्र नीचे मुख करके चढ़ाया जाता है। फूल ऊपर मुख करके, जैसे पौधे पर खिलते हैं, वैसे चढ़ाएँ।
    भाव
    बेलपत्र की तीन पत्तियों के साथ मन, वाणी और कर्म, तीनों शिव को अर्पित।
    पाठ

    ॐ नमः शिवाय। बिल्वपत्रं समर्पयामि॥
    ॐ नमः शिवाय। पुष्पाणि समर्पयामि॥

    अर्थ: हे शिव, आपको नमन; मैं बेलपत्र अर्पित करता/करती हूँ। हे शिव, आपको नमन; मैं फूल अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के अनुसार।

    विकल्प
    बेलपत्र न मिले तो पहले चढ़ाया बेलपत्र धोकर फिर चढ़ाएँ, या केवल फूल। केतकी (केवड़ा) न चढ़ाएँ, और बहुत-से घरों में शिव जी पर तुलसी भी नहीं चढ़ाई जाती।
  8. ८धूप और दीप

    क्या करें
    धूप दिखाएँ और दीपक जलाकर उसकी ज्योति अर्पित करें।
    कैसे करें
    अगरबत्ती या धूप को शिवलिंग के सामने धीरे-धीरे घुमाएँ और धूपदान में रख दें। फिर दीपक जलाकर दिखाएँ और यथास्थान रख दें। दीपक दिखाने के बाद हाथ धो लें।
    भाव
    मेरे भीतर का अँधेरा भी इस ज्योति से दूर हो।
    पाठ

    ॐ नमः शिवाय। धूपमाघ्रापयामि॥
    ॐ नमः शिवाय। दीपं दर्शयामि॥

    अर्थ: हे शिव, आपको नमन; मैं धूप की सुगंध अर्पित करता/करती हूँ। हे शिव, आपको नमन; मैं दीपक की ज्योति दिखाता/दिखाती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के उपचार-वाक्य "धूपमाघ्रापयामि" और "दीपं दर्शयामि"।

    विकल्प
    दीपक न हो तो केवल धूप, और धूप भी न हो तो मन से दीपक अर्पित करें।
  9. ९नैवेद्य

    क्या करें
    भोग अर्पित करें।
    कैसे करें
    भोग शिवलिंग के ऊपर नहीं, सामने एक छोटी थाली या कटोरी में रखें। उसके चारों ओर थोड़ा जल घुमाकर अर्पित करें, कुछ क्षण रुकें, फिर एक बार जल चढ़ाकर आचमन अर्पित करें। शिव पुराण बताता है कि जो चीज़ शिवलिंग के ऊपर रख दी जाए वह ग्रहण नहीं की जाती, और जो लिंग को छुए बिना अर्पित हो वह पवित्र प्रसाद है।
    भाव
    जो मुझे मिला है, वह आपकी ही देन है; पहले आप स्वीकार करें।
    पाठ

    ॐ नमः शिवाय। नैवेद्यं निवेदयामि॥

    अर्थ: हे शिव, आपको नमन; मैं यह भोग निवेदन करता/करती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के अनुसार।

    विकल्प
    भोग में कुछ न हो तो थोड़ी मिश्री या एक फल; वह भी न हो तो मन से भोग लगाएँ।
  10. १०मंत्र जाप

    क्या करें
    कुछ देर "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें; चाहें तो महामृत्युंजय मंत्र भी।
    कैसे करें
    11, 21 या 108 बार, रुद्राक्ष की माला से या बिना माला के। गिनती से ज़्यादा ध्यान उच्चारण और भाव पर रखें। किसी बीमार या संकट में पड़े व्यक्ति के लिए प्रार्थना करनी हो तो महामृत्युंजय मंत्र जपा जाता है।
    भाव
    बार-बार नाम लेने से मन धीरे-धीरे शिव में टिकता है।
    पाठ

    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

    अर्थ: हम तीन नेत्रों वाले शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सबका पोषण बढ़ाते हैं। जैसे पका हुआ फल अपने डंठल से सहज ही छूट जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमृत से नहीं।

    मंत्र का अर्थ और उच्चारण

    विकल्प
    मंत्र कठिन लगे तो केवल "ॐ नमः शिवाय" या "शिव शिव" का नाम-जाप करें। समय हो तो शिव चालीसा भी पढ़ सकते हैं।
  11. ११आरती

    क्या करें
    कपूर या घी के दीपक से "ॐ जय शिव ओंकारा" गाकर आरती करें और अंत में कर्पूरगौरं श्लोक पढ़ें।
    कैसे करें
    आरती की थाली को शिवलिंग के सामने घड़ी की सुई की दिशा में घुमाएँ। परिवार के लोग साथ में गाएँ और घंटी बजाएँ। आरती के बाद थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाकर रख दें।
    भाव
    पूरे परिवार का मन एक साथ शिव की ओर।
    पाठ

    कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
    सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

    अर्थ: जो कपूर जैसे उजले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं, सर्पराज को हार की तरह पहनते हैं और सदा भक्तों के हृदय-कमल में बसते हैं, उन भव (शिव) को माँ भवानी के साथ मैं नमन करता/करती हूँ।

    कर्पूरगौरं करुणावतारं: पूरा पाठ और अर्थ

    विकल्प
    आरती न आती हो तो दीपक घुमाते हुए "ॐ नमः शिवाय" बोलें।
    आरतीॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारापूरी शिव जी की आरती पढ़ें
  12. १२आधी परिक्रमा और प्रणाम

    क्या करें
    शिवलिंग की आधी परिक्रमा करें और प्रणाम करें।
    कैसे करें
    शिव जी की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। शिवलिंग को अपनी दाईं ओर रखते हुए चलें, जलाधारी की नली (सोमसूत्र) तक जाएँ, उसे लाँघे बिना वहीं से लौटकर दूसरी ओर से उसी जगह तक आएँ। गीता प्रेस के अनुसार परिक्रमा की जगह न हो तो अपने आसन पर ही घूम जाएँ। फिर हाथ जोड़कर प्रणाम करें और नीचे दी क्षमा-प्रार्थना पढ़ें।
    भाव
    जितना बन पड़ा, सब आपके चरणों में।
    विकल्प
    बैठे-बैठे सिर झुकाकर प्रणाम करना भी पूरा प्रणाम है।

पूजा में पढ़े जाने वाले पाठ

शिव

शिव चालीसा

शिव · चालीसा

मंत्र जाप के बाद, ख़ासकर सोमवार को

शिव

रुद्राष्टकम्

शिव · अष्टकम् · संस्कृत

सोमवार और प्रदोष की शाम की पूजा में

शिव

शिव मानस पूजा

शिव · स्तोत्र · संस्कृत

जिस दिन सामग्री न हो: इसमें पूरी पूजा मन से अर्पित की जाती है

भोग

  • मिश्री या बताशे
  • मौसमी फल, जैसे केला या बेल
  • दूध की खीर या मखाने
  • सूखे मेवे
  • घर की बनी शुद्ध मिठाई

भोग शिवलिंग के ऊपर न रखकर सामने थाली में रखें; वही प्रसाद के रूप में बाँटें। शिवलिंग पर चढ़ा जल, दूध और फूल प्रसाद में नहीं लिए जाते; उन्हें पौधों और मिट्टी में दे दें।

प्रार्थना और समापन

हे भोलेनाथ, आज आपने अपनी पूजा का अवसर दिया, इसके लिए आभार। मेरे घर में शांति रहे, मन में धैर्य रहे, और मैं किसी का बुरा न सोचूँ। पूजा में जो कमी रह गई हो, उसे क्षमा करें।

क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व मां महेश्वर॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥

अर्थ: हे महेश्वर, न मैं आपको बुलाना जानता हूँ, न आपकी अर्चना करना, न पूजा की विधि जानता हूँ; मुझे क्षमा करें। हे देवों के ईश्वर, मेरी पूजा मंत्र, विधि और भक्ति, तीनों में अधूरी है; फिर भी मैंने जो पूजा की है, वह आपकी कृपा से पूरी हो।

स्रोत: पूजा के अंत की प्रचलित शिव क्षमा-प्रार्थना के दो श्लोक, द्रिक पंचांग की शिव पूजा विधि (क्षमा-प्रार्थना) के पाठ के अनुसार। "मन्त्रहीनं क्रियाहीनं" वाला श्लोक गीता प्रेस की शिव-पूजा की क्षमा-याचना में भी है।

पूजा के बाद

  • आरती के बाद दोनों हथेलियों से आरती लें, फिर परिवार में प्रसाद बाँटें।
  • जलाधारी से निकला जल और दूध किसी गमले या पेड़ की जड़ में डाल दें; नाली में न बहाएँ।
  • मुरझाए फूल और बेलपत्र अगली पूजा से पहले उतार लें। बेलपत्र धोकर फिर चढ़ाया जा सकता है; बाकी फूल गमले या बगीचे की मिट्टी में दबा दें या खाद में डाल दें। नदी-तालाब में डालने की पुरानी रीति है, पर पानी को गंदा होने से बचाने के लिए मिट्टी बेहतर है।
  • दूध, शहद या पंचामृत चढ़ाया हो तो शिवलिंग को साफ़ जल से धोकर कपड़े से पोंछ दें, ताकि चींटियाँ न लगें।

समय कम हो तो: छोटी विधि

  1. स्नान करके आसन पर बैठें, गणेश जी को प्रणाम करें और मन में संकल्प लें।
  2. "ॐ नमः शिवाय" बोलते हुए शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल चढ़ाएँ।
  3. चंदन, अक्षत, बेलपत्र और फूल अर्पित करें।
  4. धूप-दीप दिखाएँ और सामने थाली में भोग रखें।
  5. कुछ देर "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें।
  6. "ॐ जय शिव ओंकारा" से आरती करें।
  7. आधी परिक्रमा करके प्रणाम करें और प्रसाद बाँटें।

परंपराओं में अंतर

  • केतकी (केवड़ा) शिव पूजा में नहीं चढ़ाई जाती; इसकी कथा शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता में है, और गीता प्रेस भी इसे शिवार्चन में निषिद्ध फूलों में गिनती है। तुलसी भी बहुत-से घरों में शिव जी पर नहीं चढ़ाई जाती; उसकी जगह बेलपत्र का महत्व है।
  • शिवलिंग पर हल्दी और कुमकुम न चढ़ाने की मान्यता कई जगह है, जबकि गीता प्रेस की शिव-पूजा में कुमकुम लगे अक्षत चढ़ाए जाते हैं। अपने परिवार की रीति मानें; जो न चढ़ाएँ, वे चंदन या भस्म का उपयोग करें।
  • परिक्रमा: गीता प्रेस के अनुसार शिव जी की केवल आधी परिक्रमा की जाती है, सोमसूत्र (जलाधारी की नली) तक; और ढकी हुई नली को लाँघा जा सकता है।
  • शिव-नैवेद्य को लेकर शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता, अध्याय 22) में विस्तार से विचार है: वहाँ शिवलिंग के ऊपर रखी चीज़ को ग्रहण न करने और लिंग को छुए बिना अर्पित भोग को पवित्र प्रसाद मानने की बात है; बाणलिंग, स्वयंभू लिंग, धातु और स्फटिक के लिंग और ज्योतिर्लिंगों के लिए नियम अलग बताए गए हैं।
  • दक्षिण भारत के शैव घरों में भस्म (विभूति) और रुद्राक्ष का विशेष स्थान है और पूजा में तमिल या संस्कृत स्तोत्र पढ़े जाते हैं; उत्तर भारत में सावन में काँवड़ से लाया गंगाजल चढ़ाने की परंपरा है।

ये भी पढ़ें

शिव

महाशिवरात्रि पूजा विधि

शिव · पूजा विधि · त्योहार की पूजा

महाशिवरात्रि पर घर में शिव पूजा: सुबह संकल्प, सेहत के अनुसार व्रत, रात में एक बार या चारों पहर की पूजा, जागरण, निशीथ काल और अगली सुबह पारण।

शिव जी के लिए और

स्रोत और समीक्षा

समीक्षा (10 अक्टूबर 2026): Order of worship follows the panchopachara/shodashopachara of Gita Press Nityakarma-Pujaprakash (upachara list p.122-123, name-mantra rule, arrangement, Shiva-puja and Parthiv-pujan upachara sentences with "ॐ नमः शिवाय"), checked against two archive.org OCR copies. Bilva rules (plucking days, re-offering washed leaves, face-down), half pradakshina to the somasutra and Shiva's prohibited flowers (ketaki) from the same book. Dhyana shloka and kshama-prarthana text from Drik Panchang's Shiva puja vidhi. Ketaki story and naivedya rule checked in Shiva Purana Vidyeshvara Samhita ch. 8 and 22; women/children line in Koti Rudra Samhita 38.22 (sanskritdocuments.org). Mantra lines copied from the site's own mantra pages. Karpur Gauram from shlokam.org. Tulsi not offered to Shiva is given only as a widespread custom, without a scriptural claim.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या घर में शिवलिंग रख सकते हैं?

हाँ, बहुत-से घरों में छोटा शिवलिंग रखकर रोज़ पूजा होती है। गीता प्रेस बताती है कि शिवलिंग में सभी देवताओं की पूजा आवाहन-विसर्जन के बिना भी की जा सकती है। ध्यान इतना रखें कि जलाधारी से जल निकलने की जगह हो और शिवलिंग साफ़ रहे। कुछ दिन पूजा न हो पाए तो डरने की बात नहीं; लौटकर फिर से शुरू करें।

शिवलिंग न हो तो पूजा कैसे करें?

शिव जी या शिव परिवार की तस्वीर के सामने यही क्रम रखें। जल एक कटोरी में अर्पित करें, बेलपत्र और फूल तस्वीर के सामने रखें। शिव मानस पूजा का पाठ भी कर सकते हैं, जिसमें पूरी पूजा मन से की जाती है। मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाना भी इसी पूजा का रूप है।

क्या स्त्रियाँ शिवलिंग पर जल चढ़ा सकती हैं?

हाँ। घरों और मंदिरों में स्त्रियाँ सदा से शिव जी को जल चढ़ाती आई हैं, और शिव पुराण शिवरात्रि व्रत को स्त्रियों और बच्चों समेत सबके लिए हितकारी बताता है। कुछ परिवारों में अविवाहित लड़कियों के शिवलिंग छूने को लेकर अलग मान्यताएँ हैं; ये परिवार की अपनी रीतियाँ हैं, इन्हें अपनी श्रद्धा और घर की परंपरा के अनुसार मानें।

मासिक धर्म के दिनों में शिव पूजा करें या नहीं?

इस पर परिवारों की रीतियाँ अलग हैं। कई घरों में इन दिनों मूर्ति या शिवलिंग छूने और विधिवत पूजा से विराम लिया जाता है और पूजा कोई और सदस्य कर लेता है; कई घर ऐसा नहीं मानते। मन में "ॐ नमः शिवाय" का स्मरण और प्रार्थना आम तौर पर हर स्थिति में की जाती है। अपने घर की रीति और अपनी सुविधा के अनुसार चलें; इसमें अपराध-बोध की कोई बात नहीं।

बेलपत्र रोज़ नहीं मिलता, क्या करें?

गीता प्रेस स्कंद पुराण के हवाले से लिखती है कि नया बेलपत्र न मिले तो चढ़ाया हुआ बेलपत्र धोकर बार-बार चढ़ाया जा सकता है। कुछ बेलपत्र साफ़ कपड़े में लपेटकर रख लें। वह भी न हो तो फूल चढ़ाएँ, या मन से बेलपत्र अर्पित करें।

शिव जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते?

तुलसी को परंपरा में भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है, और शिव पूजा में वही स्थान बेलपत्र का है; इसलिए बहुत-से घरों में शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ाई जाती। केतकी के निषेध की कथा शिव पुराण में है। अनजाने में कुछ चढ़ गया हो तो चिंता न करें; पूजा में भाव सबसे बड़ा है।

क्या सोमवार का व्रत भी रखना होता है?

नहीं, पूजा व्रत के बिना भी पूरी है। व्रत रखना चाहें तो अपनी सेहत के अनुसार रखें: फलाहार, एक समय भोजन, या पूजा होने तक कुछ न खाना। गर्भावस्था, बीमारी, नियमित दवा या बुढ़ापे में कठोर व्रत न रखें; पूजा और नाम-जाप काफ़ी है। यहीं के सोमवार व्रत वाले पन्ने पर इसकी परंपराएँ दी गई हैं।

सुधार सुझाएँ

इस विधि में कोई बात आपकी परंपरा से अलग हो, या कहीं गलती दिखे, तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को स्रोत से मिलाकर देखते हैं।

सुधार भेजें