शिव

शिव · मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र

त्र्यम्बक मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam, Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat

इस मंत्र का जाप करें

अर्थ

हम तीन नेत्रों वाले शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सबका पोषण बढ़ाते हैं। जैसे पका हुआ फल अपने डंठल से सहज ही छूट जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमृत से नहीं।

महामृत्युंजय मंत्र: शब्दार्थ
शब्दअर्थ
त्र्यम्बकम्तीन नेत्रों वाले (शिव) को
यजामहेहम पूजते हैं
सुगन्धिम्सुगंधित, पवित्र
पुष्टिवर्धनम्पोषण और समृद्धि बढ़ाने वाले
उर्वारुकम् इवककड़ी (खरबूजे) की तरह
बन्धनात्डंठल के बंधन से
मृत्योःमृत्यु से
मुक्षीयमुक्त करें
मा अमृतात्अमृत से नहीं

उच्चारण

Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam, Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat

  • "त्र्यम्बकं" को त्र्य-म्ब-कम् बोलें।
  • "उर्वारुकमिव" एक साथ: उर्-वा-रु-क-मि-व।
  • "माऽमृतात्" का अर्थ "मा अमृतात्" है; बोलते समय यह "माम्रितात्" जैसा एक साथ सुनाई देता है।
  • दो ठहराव रखें: "पुष्टिवर्धनम्" के बाद और मंत्र के अंत में।

भाव और महत्त्व

भगवान शिव से भय, रोग और मृत्यु के बंधन से मुक्ति की प्रार्थना। मुक्ति इस तरह माँगी गई है जैसे पका फल बिना चोट के डंठल से छूटता है।

स्रोत
ऋग्वेद (मंडल 7, सूक्त 59, मंत्र 12), ऋषि वसिष्ठ। यही मंत्र यजुर्वेद में भी आता है।
कब जपा जाता है
सोमवार, सावन और महाशिवरात्रि पर, और किसी रोगी या संकट में पड़े व्यक्ति के लिए प्रार्थना के रूप में इसका जाप किया जाता है। अनुष्ठान के रूप में सवा लाख जाप का संकल्प भी प्रचलित है।
देवता
शिव
प्रकार
मंत्र: किसी देवता को नमन का छोटा मंत्र, ज़्यादातर "ॐ ... नमः" के रूप में।

जाप कैसे करें

एक जगह सीधे बैठें, मंत्र का अर्थ मन में रखें और उसे साफ़, एक-सी गति से दोहराएँ। एक बार पूरा मंत्र बोलने में लगभग 22 सेकंड लगते हैं, इसलिए 108 बार लगभग 40 मिनट का अभ्यास है।

पूरी विधि मंत्र जाप कैसे करें में है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ क्या है?

हम तीन नेत्रों वाले शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सबका पोषण बढ़ाते हैं। जैसे पका हुआ फल अपने डंठल से सहज ही छूट जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमृत से नहीं।

महामृत्युंजय मंत्र किसका मंत्र है?

महामृत्युंजय मंत्र शिव का मंत्र है। भगवान शिव से भय, रोग और मृत्यु के बंधन से मुक्ति की प्रार्थना। मुक्ति इस तरह माँगी गई है जैसे पका फल बिना चोट के डंठल से छूटता है।

महामृत्युंजय मंत्र कहाँ से लिया गया है?

ऋग्वेद (मंडल 7, सूक्त 59, मंत्र 12), ऋषि वसिष्ठ। यही मंत्र यजुर्वेद में भी आता है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप कब करें?

सोमवार, सावन और महाशिवरात्रि पर, और किसी रोगी या संकट में पड़े व्यक्ति के लिए प्रार्थना के रूप में इसका जाप किया जाता है। अनुष्ठान के रूप में सवा लाख जाप का संकल्प भी प्रचलित है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप कितनी बार करें?

एक माला यानी 108 बार सबसे प्रचलित है, जिसमें लगभग 40 मिनट लगते हैं। शुरुआत 21 या 51 बार से कर सकते हैं (लगभग 8 मिनट या लगभग 19 मिनट), और विशेष दिन पर 1008 बार।

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