सूर्य देव

सूर्य देव · गायत्री मंत्र

गायत्री मंत्र

सावित्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

Om Bhur Bhuvah Svah, Tat Savitur Varenyam, Bhargo Devasya Dhimahi, Dhiyo Yo Nah Prachodayat

इस मंत्र का जाप करें

अर्थ

हम सविता देव के उस श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सही राह पर प्रेरित करे।

गायत्री मंत्र: शब्दार्थ
शब्दअर्थ
ॐ भूर्भुवः स्वःतीन व्याहृतियाँ: पृथ्वी, अंतरिक्ष और स्वर्ग
तत्उस
सवितुःसविता (प्रेरक सूर्य-देव) के
वरेण्यम्वरण करने योग्य, श्रेष्ठ
भर्गःतेज
देवस्यदेव के
धीमहिहम ध्यान करते हैं
धियःबुद्धियों को
यःजो
नःहमारी
प्रचोदयात्प्रेरित करे
विद्महेहम जानते हैं, मानते हैं
धीमहिहम ध्यान करते हैं
तन्नो ... प्रचोदयात्वे हमें प्रेरित करें, सही राह दिखाएँ

उच्चारण

Om Bhur Bhuvah Svah, Tat Savitur Varenyam, Bhargo Devasya Dhimahi, Dhiyo Yo Nah Prachodayat

  • चार ठहराव रखें: ॐ भूर्भुवः स्वः । तत्सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ।
  • "वरेण्यं" को व-रे-ण्यम् बोलें; कई परंपराएँ इसे "वरेणियं" की तरह भी बोलती हैं।
  • "प्रचोदयात्" के अंत का "त्" आधा है।

भाव और महत्त्व

सविता, यानी प्रेरक सूर्य-देव, के तेज का ध्यान और सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना।

स्रोत
ऋग्वेद (मंडल 3, सूक्त 62, मंत्र 10), ऋषि विश्वामित्र। जप के समय आरंभ में "ॐ भूर्भुवः स्वः" जोड़ा जाता है।
कब जपा जाता है
परंपरा में इसका जाप सुबह, दोपहर और शाम की संध्या में, ख़ासकर सूर्योदय के समय किया जाता है।
देवता
सूर्य देव
प्रकार
गायत्री मंत्र: गायत्री छंद में ध्यान और प्रेरणा की प्रार्थना: "... विद्महे, ... धीमहि, तन्नो ... प्रचोदयात्"।

जाप कैसे करें

एक जगह सीधे बैठें, मंत्र का अर्थ मन में रखें और उसे साफ़, एक-सी गति से दोहराएँ। एक बार पूरा मंत्र बोलने में लगभग 25 सेकंड लगते हैं, इसलिए 108 बार लगभग 45 मिनट का अभ्यास है।

पूरी विधि मंत्र जाप कैसे करें में है।

गायत्री मंत्र का जाप करें

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है?

हम सविता देव के उस श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सही राह पर प्रेरित करे।

गायत्री मंत्र किसका मंत्र है?

गायत्री मंत्र सूर्य देव का गायत्री मंत्र है। सविता, यानी प्रेरक सूर्य-देव, के तेज का ध्यान और सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना।

गायत्री मंत्र कहाँ से लिया गया है?

ऋग्वेद (मंडल 3, सूक्त 62, मंत्र 10), ऋषि विश्वामित्र। जप के समय आरंभ में "ॐ भूर्भुवः स्वः" जोड़ा जाता है।

गायत्री मंत्र का जाप कब करें?

परंपरा में इसका जाप सुबह, दोपहर और शाम की संध्या में, ख़ासकर सूर्योदय के समय किया जाता है।

गायत्री मंत्र का जाप कितनी बार करें?

एक माला यानी 108 बार सबसे प्रचलित है, जिसमें लगभग 45 मिनट लगते हैं। शुरुआत 21 या 51 बार से कर सकते हैं (लगभग 9 मिनट या लगभग 21 मिनट), और विशेष दिन पर 1008 बार।

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