गायत्री मंत्र
गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
हम सविता देव के उस श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सही राह पर प्रेरित करे।

सूर्य को अर्घ्य देते हुए उनके मंत्र जपे जाते हैं; गायत्री मंत्र सविता यानी प्रेरक सूर्य-देव का ध्यान है। इनका जाप रविवार, सूर्योदय का समय, रथ सप्तमी और छठ को विशेष रूप से किया जाता है।
गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
हम सविता देव के उस श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सही राह पर प्रेरित करे।
मंत्र
ॐ सूर्याय नमः
सूर्य देव को नमस्कार।
सूर्य देव के मंत्र रविवार, सूर्योदय का समय, रथ सप्तमी और छठ को विशेष रूप से जपे जाते हैं।
गायत्री मंत्र सूर्य देव के सबसे ज़्यादा जपे जाने वाले मंत्रों में है। यहाँ सूर्य देव के 2 मंत्र दिए गए हैं: गायत्री मंत्र, ॐ सूर्याय नमः।
सूर्य देव के मंत्र रविवार, सूर्योदय का समय, रथ सप्तमी और छठ को विशेष रूप से जपे जाते हैं, पर नाम-जाप और नमन के मंत्र रोज़ किसी भी समय जपे जा सकते हैं।
एक माला यानी 108 बार सबसे प्रचलित है। शुरुआत 21 या 51 बार से की जा सकती है, और विशेष दिन पर 1008 बार। नियमितता गिनती से ज़्यादा मायने रखती है।
टैप से या वॉल्यूम बटन से गिनती, 108 मनकों की माला, रोज़ का लक्ष्य और आपकी साधना की प्रगति।