अगला रविवारकल
रविवार व्रत
सूर्य देव
- उस दिन की तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा, 9:30 PM तक
- ग्रह
- सूर्य
- उसी दिन
- शारदीय नवरात्रि
रविवार सूर्य देव का दिन है, और रविवार व्रत उन्हीं के लिए रखा जाता है। अगला रविवार कल, 11 अक्टूबर 2026 को है; उस दिन सूर्योदय पर शुक्ल प्रतिपदा तिथि है।
अगला रविवारकल
सूर्य देव
| तारीख़ | व्रत | सूर्योदय की तिथि | उसी दिन और व्रत |
|---|---|---|---|
| 11अक्टूबररविवार | रविवार व्रत | शुक्ल प्रतिपदा | शारदीय नवरात्रि |
| 18अक्टूबररविवार | रविवार व्रत | शुक्ल सप्तमी | – |
| 25अक्टूबररविवार | रविवार व्रत | शुक्ल चतुर्दशी | कोजागर पूजा, शरद पूर्णिमा, आश्विन पूर्णिमा व्रत · सत्यनारायण व्रत |
| 1नवंबररविवार | रविवार व्रत | कृष्ण सप्तमी | अहोई अष्टमी, कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी |
| 8नवंबररविवार | रविवार व्रत | कृष्ण चतुर्दशी | दर्श अमावस्या |
| 15नवंबररविवार | रविवार व्रत | शुक्ल षष्ठी | छठ पूजा, स्कंद षष्ठी · सूरसम्हारम (कंद षष्ठी) |
| 22नवंबररविवार | रविवार व्रत | शुक्ल त्रयोदशी | रवि प्रदोष व्रत |
| 29नवंबररविवार | रविवार व्रत | कृष्ण षष्ठी | – |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
इस दिन इनमें से किसी मंत्र का जाप यहीं, गिनती के साथ कर सकते हैं: 21, 51, 108 या 1008 बार, स्वयं गिनकर या ऑडियो के साथ।
रविवार सूर्य देव का दिन है। इस दिन का व्रत सूर्य देव को समर्पित है; परंपरा में सुबह सूर्य को जल (अर्घ्य) दिया जाता है और दिन में एक बार, सूर्यास्त से पहले, बिना नमक का भोजन किया जाता है।
माघ शुक्ल सप्तमी की रथ सप्तमी और कार्तिक व चैत्र का छठ पर्व सूर्य आराधना के सबसे बड़े अवसर हैं।
व्रत की विधि, भोजन के नियम और कथा परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होती है; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
रविवार व्रत सूर्य देव के लिए रखा जाता है। रविवार का ग्रह सूर्य है।
अगला रविवार 11 अक्टूबर 2026 को है। उस दिन सूर्योदय पर शुक्ल प्रतिपदा तिथि है।
रविवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत रवि प्रदोष कहलाता है। अगला रवि प्रदोष 22 नवंबर 2026 को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।