भारत के कैलेंडर और पंचांग

भारत में तारीख़ कई तरह से गिनी जाती है: चंद्रमा से चलने वाले महीने, सूर्य से चलने वाले महीने, और दोनों को साथ रखने वाले संवत। यहाँ हर कैलेंडर में आज की तारीख़ देखें और जानें कि वह कैसे चलता है।

तिथि वाला कैलेंडर

हिन्दू कैलेंडर वही कैलेंडर है जो घरों की दीवार पर टँगा मिलता है: अंग्रेज़ी तारीख़ों के साथ हर दिन की तिथि, व्रत और त्योहार। किसी भी दिन को चुनकर उसका नक्षत्र, सूर्योदय, राहु काल और चौघड़िया देखें।

माँ दुर्गाहिन्दू कैलेंडर10आश्विन अमावस्याअक्टूबर 2026हर दिन की तिथि, व्रत और त्योहार, महीने के कैलेंडर में।इस महीने का कैलेंडर देखें

हिन्दू कैलेंडर, महीने के अनुसार

संवत: साल गिनने के दो तरीके

संवत साल गिनने की गिनती है। विक्रम संवत ईस्वी सन् से 57 साल आगे चलता है और शक संवत 78 साल पीछे, इसलिए दोनों में 135 साल का अंतर है। 10 अक्टूबर 2026 को विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 चल रहा है।

महीना कब बदलता है: पूर्णिमांत और अमांत

चंद्र मास दो तरह से गिना जाता है। उत्तर और मध्य भारत में महीना पूर्णिमा पर पूरा होता है (पूर्णिमांत), और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमावस्या पर (अमांत)। तिथि और त्योहार वही रहते हैं; सिर्फ़ कृष्ण पक्ष में महीने का नाम अलग हो जाता है।

सूर्य से चलने वाले क्षेत्रीय कैलेंडर

तमिलनाडु, केरल और बंगाल में महीने चंद्रमा से नहीं, सूर्य से चलते हैं। सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में जाता है (संक्रांति), तब नया महीना शुरू होता है, इसलिए तमिल कैलेंडर, मलयालम कैलेंडर और बंगाली कैलेंडर की तारीख़ें अंग्रेज़ी कैलेंडर के साथ लगभग बँधी रहती हैं।

पंचांग के पाँच अंग

पंचांग का मतलब है पाँच अंग। हर दिन इन पाँच चीज़ों से पहचाना जाता है, और तीनों तरह के कैलेंडर इन्हीं पर टिके हैं।

तिथि
चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12 अंश की दूरी एक तिथि है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं: 15 शुक्ल पक्ष की और 15 कृष्ण पक्ष की।
वार
सप्ताह का दिन। पंचांग में दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक गिना जाता है।
नक्षत्र
आकाश के 27 बराबर हिस्सों में से वह हिस्सा जिसमें चंद्रमा उस समय होता है।
योग
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर निकाले जाने वाले 27 योग।
करण
तिथि का आधा भाग। एक तिथि में दो करण होते हैं और कुल 11 करण हैं।

आज के पाँचों अंग, राहु काल और चौघड़िया आज का पंचांग में देखें; किसी और तारीख़ के लिए हिन्दू कैलेंडर में वह दिन चुनें।

अधिक मास

12 चंद्र मास का साल लगभग 354 दिन का होता है, जबकि सूर्य का साल लगभग 365 दिन का। हर साल के इस करीब 11 दिन के अंतर को पूरा करने के लिए लगभग हर ढाई-तीन साल में एक पूरा महीना जोड़ा जाता है। इसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं।

जिस चंद्र मास में सूर्य किसी नई राशि में नहीं जाता, यानी जिसमें कोई संक्रांति नहीं पड़ती, वही अधिक मास होता है और उसे अगले महीने का नाम मिलता है।

अधिक मास कब-कब
सालअधिक मासकब से कब तक
2023अधिक श्रावण18 जुलाई – 16 अगस्त 2023
2026अधिक ज्येष्ठ17 मई – 15 जून 2026
2029अधिक चैत्र16 मार्च – 13 अप्रैल 2029
2031अधिक भाद्रपद19 अगस्त – 16 सितंबर 2031
2034अधिक आषाढ़17 जून – 15 जुलाई 2034
2037अधिक ज्येष्ठ16 मई – 13 जून 2037

तारीख़ें दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार हैं। जिस साल अधिक मास पड़ता है उसके सारे महीने विक्रम संवत, पूर्णिमांत और अमांत पन्नों पर देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भारत में कौन-कौन से कैलेंडर चलते हैं?

सरकारी कामकाज में ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ शक संवत वाला राष्ट्रीय कैलेंडर चलता है। धार्मिक कामों के लिए विक्रम संवत और शक संवत के पंचांग चलते हैं, जिनके महीने उत्तर में पूर्णिमांत और दक्षिण-पश्चिम में अमांत गिने जाते हैं। तमिलनाडु, केरल और बंगाल में सूर्य से चलने वाले अपने कैलेंडर हैं।

विक्रम संवत और शक संवत में कितना अंतर है?

135 साल का। विक्रम संवत 57 ईसा पूर्व से और शक संवत 78 ईस्वी से गिना जाता है। 10 अक्टूबर 2026 को विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 है।

पूर्णिमांत और अमांत में क्या फ़र्क है?

पूर्णिमांत में महीना पूर्णिमा पर पूरा होता है और अमांत में अमावस्या पर। शुक्ल पक्ष में दोनों में महीने का नाम एक ही रहता है; कृष्ण पक्ष में पूर्णिमांत का महीना एक आगे होता है। 10 अक्टूबर 2026 को पूर्णिमांत में आश्विन और अमांत में भाद्रपद मास है।

अगला अधिक मास कब है?

अगला अधिक मास अधिक चैत्र है, जो 16 मार्च 2029 से 13 अप्रैल 2029 तक रहेगा। पिछला अधिक ज्येष्ठ 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक था।

भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर कौन सा है?

शक संवत पर बना राष्ट्रीय कैलेंडर, जो 22 मार्च 1957 से लागू है। इसका साल चैत्र से, 22 मार्च को (लीप वर्ष में 21 मार्च को) शुरू होता है। 10 अक्टूबर 2026 को इसमें तारीख़ 18 आश्विन 1948 शक है।

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तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।