नवंबर 2026 का हिन्दू कैलेंडर

नवंबर 2026 के इस हिन्दू कैलेंडर में हर दिन की तिथि, व्रत और त्योहार दिए गए हैं। इस महीने कार्तिक और मार्गशीर्ष मास हैं और विक्रम संवत 2083 चल रहा है। मुख्य पर्व: धनतेरस (6 नवंबर), दीपावली (8 नवंबर), छठ पूजा (13 नवंबर से) और देवउठनी एकादशी (20 नवंबर)। एकादशी 5 और 20 नवंबर को, पूर्णिमा 24 नवंबर को और अमावस्या 9 नवंबर को है। किसी भी तारीख़ को चुनकर उस दिन का नक्षत्र, सूर्योदय, राहु काल और चौघड़िया देखें।

माँ लक्ष्मी
माँ लक्ष्मी

नवंबर 2026

November 2026

कार्तिक – मार्गशीर्ष · विक्रम संवत 2083

  • त्योहार
  • व्रत
  • पूर्णिमा
  • अमावस्या

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इस महीने के व्रत और त्योहार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नवंबर 2026 में एकादशी कब है?

नवंबर 2026 में दो एकादशी हैं। 5 नवंबर (गुरुवार) को रमा एकादशी है। तिथि 10:35 AM तक रहती है। 20 नवंबर (शुक्रवार) को देवउठनी एकादशी है। तिथि 7:15 AM से शुरू होती है।

नवंबर 2026 में पूर्णिमा कब है?

नवंबर 2026 की पूर्णिमा 24 नवंबर (मंगलवार) को है। तिथि 8:24 PM तक रहती है।

नवंबर 2026 में अमावस्या कब है?

नवंबर 2026 की अमावस्या 9 नवंबर (सोमवार) को है। तिथि 12:31 PM तक रहती है।

नवंबर 2026 में कौन-कौन से व्रत और त्योहार हैं?

नवंबर 2026 के व्रत और त्योहार: रमा एकादशी (5 नवंबर), धनतेरस (6 नवंबर), दीपावली (8 नवंबर), गोवर्धन पूजा (10 नवंबर), भाई दूज (11 नवंबर), छठ पूजा (13 नवंबर से 4 दिन) और देवउठनी एकादशी (20 नवंबर)।

नवंबर 2026 में कौन सा हिन्दू महीना चल रहा है?

25 नवंबर से मार्गशीर्ष मास शुरू होता है; उससे पहले कार्तिक मास है। यह उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार है, जिसमें महीना पूर्णिमा के अगले दिन बदलता है। विक्रम संवत 2083 है।

इस कैलेंडर में हर तारीख़ पर कौन सी तिथि लिखी है?

हर तारीख़ पर वह तिथि लिखी है जो उस दिन सूर्योदय के समय चल रही होती है, यानी उदया तिथि। सभी समय दिल्ली के लिए भारतीय समय में हैं; दूसरा शहर चुनने पर सूर्योदय, राहु काल और कभी-कभी तिथि का दिन भी बदल सकता है।

महीने के अनुसार हिन्दू कैलेंडर

और कैलेंडर

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आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।

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हर दिन की तिथि सूर्योदय के समय की है। सभी समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। तिथियाँ और समय खगोलीय गणना से निकाले गए हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।