शिव चालीसा
शिव · चालीसा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान
देवी-देवताओं की चालीसा: शुरुआत के दोहे, चालीस चौपाइयाँ और अंत का दोहा, पूरे पाठ के साथ। हर चौपाई का सरल अर्थ, कठिन शब्द, कब और कैसे पढ़ें।
मूल पाठ, हमारा लिखा अर्थ और पढ़ने की सलाह अलग-अलग रखे गए हैं; मूल पाठ में अपनी ओर से कोई पंक्ति नहीं जोड़ी गई।
शिव · चालीसा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान
भैरव · चालीसा
श्री गणपति गुरु गौरि पद प्रेम सहित धरि माथ
दुर्गा · चालीसा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी
लक्ष्मी · चालीसा
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास
गायत्री · चालीसा
ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड
संतोषी माता · चालीसा
बन्दौं सन्तोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार
हनुमान · चालीसा · अवधी
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि
राम · चालीसा
श्री रघुबीर भक्त हितकारी
कृष्ण · चालीसा
बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम
गणेश · चालीसा
जय गणपति सद्गुणसदन, कविवर बदन कृपाल
शनि · चालीसा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल
चालीसा चालीस चौपाइयों की भक्ति-रचना है, जिसके आरंभ और अंत में दोहे होते हैं। सबसे प्रसिद्ध हनुमान चालीसा है, जो गोस्वामी तुलसीदास की रचना मानी जाती है।
चालीसा सुबह या शाम की पूजा में, या जब मन हो तब पढ़ी जाती है। हर चालीसा के पेज पर उस देवता से जुड़े दिन और अवसर दिए गए हैं।
ज़रूरी नहीं, पर अर्थ जानकर पढ़ने से पाठ में मन लगता है। हर चौपाई का सरल अर्थ पेज पर दिया है; ऊपर "पाठ और अर्थ" चुनकर उसे पाठ के साथ भी पढ़ सकते हैं।
हर चालीसा का पाठ प्रकाशित स्रोत से मिलाकर लिखा गया है; हर पेज के नीचे स्रोत और पाठ-भेद दिए हैं।