चालीसा संग्रह

देवी-देवताओं की चालीसा: शुरुआत के दोहे, चालीस चौपाइयाँ और अंत का दोहा, पूरे पाठ के साथ। हर चौपाई का सरल अर्थ, कठिन शब्द, कब और कैसे पढ़ें।

मूल पाठ, हमारा लिखा अर्थ और पढ़ने की सलाह अलग-अलग रखे गए हैं; मूल पाठ में अपनी ओर से कोई पंक्ति नहीं जोड़ी गई।

भगवान के अनुसार

सभी चालीसा (११)

शिव और उनके रूप

शिव

शिव चालीसा

शिव · चालीसा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान

भैरव

भैरव चालीसा

भैरव · चालीसा

श्री गणपति गुरु गौरि पद प्रेम सहित धरि माथ

देवी

गायत्री

गायत्री चालीसा

गायत्री · चालीसा

ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड

राम परिवार

हनुमान

हनुमान चालीसा

हनुमान · चालीसा · अवधी

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि

कृष्ण परंपरा

अन्य देवता

गणेश

गणेश चालीसा

गणेश · चालीसा

जय गणपति सद्गुणसदन, कविवर बदन कृपाल

नवग्रह

शनि

शनि चालीसा

शनि · चालीसा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल

वेबसाइट पर और

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चालीसा क्या होती है?

चालीसा चालीस चौपाइयों की भक्ति-रचना है, जिसके आरंभ और अंत में दोहे होते हैं। सबसे प्रसिद्ध हनुमान चालीसा है, जो गोस्वामी तुलसीदास की रचना मानी जाती है।

चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

चालीसा सुबह या शाम की पूजा में, या जब मन हो तब पढ़ी जाती है। हर चालीसा के पेज पर उस देवता से जुड़े दिन और अवसर दिए गए हैं।

क्या चालीसा का अर्थ जानना ज़रूरी है?

ज़रूरी नहीं, पर अर्थ जानकर पढ़ने से पाठ में मन लगता है। हर चौपाई का सरल अर्थ पेज पर दिया है; ऊपर "पाठ और अर्थ" चुनकर उसे पाठ के साथ भी पढ़ सकते हैं।

इन चालीसाओं का पाठ कहाँ से लिया गया है?

हर चालीसा का पाठ प्रकाशित स्रोत से मिलाकर लिखा गया है; हर पेज के नीचे स्रोत और पाठ-भेद दिए हैं।