अगली स्कंद षष्ठी6 दिन बाद
स्कंद षष्ठी
आश्विन शुक्ल षष्ठी
- तिथि शुरू
- 16 अक्टूबर, 3:25 AM
- तिथि समाप्त
- 17 अक्टूबर, 5:54 AM
अगली स्कंद षष्ठी स्कंद षष्ठी है, जो 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को है। षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर, 3:25 AM से 17 अक्टूबर, 5:54 AM तक रहेगी। नीचे 2026 और 2027 की सभी तारीख़ें दी गई हैं।
अगली स्कंद षष्ठी6 दिन बाद
आश्विन शुक्ल षष्ठी
| तारीख़ | व्रत | मास और पक्ष | तिथि |
|---|---|---|---|
| 24जनवरीशनिवार | स्कंद षष्ठी | माघ शुक्ल | 24 जनवरी, 1:46 AM से 25 जनवरी, 12:40 AM तक |
| 22फ़रवरीरविवार | स्कंद षष्ठी | फाल्गुन शुक्ल | 22 फ़रवरी, 11:10 AM से 23 फ़रवरी, 9:09 AM तक |
| 24मार्चमंगलवार | स्कंद षष्ठी | चैत्र शुक्ल | 23 मार्च, 6:38 PM से 24 मार्च, 4:08 PM तक |
| 22अप्रैलबुधवार | स्कंद षष्ठी | वैशाख शुक्ल | 22 अप्रैल, 1:20 AM से 22 अप्रैल, 10:50 PM तक |
| 21मईगुरुवार | अधिक मास की स्कंद षष्ठी | अधिक ज्येष्ठ शुक्ल | 21 मई, 8:28 AM से 22 मई, 6:25 AM तक |
| 19जूनशुक्रवार | स्कंद षष्ठी | ज्येष्ठ शुक्ल | 19 जून, 5:00 PM से 20 जून, 3:47 PM तक |
| 19जुलाईरविवार | स्कंद षष्ठी | आषाढ़ शुक्ल | 19 जुलाई, 3:42 AM से 20 जुलाई, 3:30 AM तक |
| 17अगस्तसोमवार | स्कंद षष्ठी | श्रावण शुक्ल | 17 अगस्त, 4:59 PM से 18 अगस्त, 5:50 PM तक |
| 16सितंबरबुधवार | स्कंद षष्ठी | भाद्रपद शुक्ल | 16 सितंबर, 8:59 AM से 17 सितंबर, 10:47 AM तक |
| 16अक्टूबरशुक्रवार | स्कंद षष्ठी | आश्विन शुक्ल | 16 अक्टूबर, 3:25 AM से 17 अक्टूबर, 5:54 AM तक |
| 15नवंबररविवार | स्कंद षष्ठीसूरसम्हारम (कंद षष्ठी) | कार्तिक शुक्ल | 14 नवंबर, 11:24 PM से 16 नवंबर, 2:01 AM तक |
| 15दिसंबरमंगलवार | स्कंद षष्ठीसुब्रह्मण्य षष्ठी | मार्गशीर्ष शुक्ल | 14 दिसंबर, 7:15 PM से 15 दिसंबर, 9:19 PM तक |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
| तारीख़ | व्रत | मास और पक्ष | तिथि |
|---|---|---|---|
| 13जनवरीबुधवार | स्कंद षष्ठी | पौष शुक्ल | 13 जनवरी, 1:02 PM से 14 जनवरी, 1:59 PM तक |
| 12फ़रवरीशुक्रवार | स्कंद षष्ठी | माघ शुक्ल | 12 फ़रवरी, 3:19 AM से 13 फ़रवरी, 2:59 AM तक |
| 13मार्चशनिवार | स्कंद षष्ठी | फाल्गुन शुक्ल | 13 मार्च, 1:54 PM से 14 मार्च, 12:32 PM तक |
| 12अप्रैलसोमवार | स्कंद षष्ठी | चैत्र शुक्ल | 11 अप्रैल, 9:39 PM से 12 अप्रैल, 7:34 PM तक |
| 11मईमंगलवार | स्कंद षष्ठी | वैशाख शुक्ल | 11 मई, 3:48 AM से 12 मई, 1:23 AM तक |
| 9जूनबुधवार | स्कंद षष्ठी | ज्येष्ठ शुक्ल | 9 जून, 9:35 AM से 10 जून, 7:12 AM तक |
| 8जुलाईगुरुवार | स्कंद षष्ठी | आषाढ़ शुक्ल | 8 जुलाई, 4:07 PM से 9 जुलाई, 2:04 PM तक |
| 7अगस्तशनिवार | स्कंद षष्ठी | श्रावण शुक्ल | 7 अगस्त, 12:22 AM से 7 अगस्त, 11:00 PM तक |
| 5सितंबररविवार | स्कंद षष्ठी | भाद्रपद शुक्ल | 5 सितंबर, 11:17 AM से 6 सितंबर, 10:57 AM तक |
| 5अक्टूबरमंगलवार | स्कंद षष्ठी | आश्विन शुक्ल | 5 अक्टूबर, 1:36 AM से 6 अक्टूबर, 2:32 AM तक |
| 4नवंबरगुरुवार | स्कंद षष्ठीसूरसम्हारम (कंद षष्ठी) | कार्तिक शुक्ल | 3 नवंबर, 7:32 PM से 4 नवंबर, 9:38 PM तक |
| 3दिसंबरशुक्रवार | स्कंद षष्ठीसुब्रह्मण्य षष्ठी | मार्गशीर्ष शुक्ल | 3 दिसंबर, 4:14 PM से 4 दिसंबर, 6:57 PM तक |
स्कंद षष्ठी उस दिन मानी जाती है जिस दिन सूर्यास्त के समय षष्ठी तिथि हो। इसलिए यह कई बार उस दिन पड़ती है जिस दिन सूर्योदय पर पंचमी होती है और षष्ठी दिन में लगती है।
इस दिन इनमें से किसी मंत्र का जाप यहीं, गिनती के साथ कर सकते हैं: 21, 51, 108 या 1008 बार, स्वयं गिनकर या ऑडियो के साथ।
स्कंद षष्ठी हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी को आती है और शिव-पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित है, जिन्हें दक्षिण भारत में मुरुगन और सुब्रह्मण्य कहा जाता है। यह व्रत तमिल परंपरा में सबसे ज़्यादा प्रचलित है और इसे कंद षष्ठी भी कहते हैं।
कार्तिक महीने (तमिल ऐप्पसी) की स्कंद षष्ठी सबसे बड़ी है। उससे पहले छह दिन का व्रत रखा जाता है, जो षष्ठी के दिन सूरसम्हारम पर पूरा होता है।
अगली स्कंद षष्ठी 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को है: स्कंद षष्ठी। षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर, 3:25 AM से 17 अक्टूबर, 5:54 AM तक रहेगी।
कार्तिक महीने की स्कंद षष्ठी पर सूरसम्हारम होता है। अगला सूरसम्हारम 15 नवंबर 2026 को है।
2026 में स्कंद षष्ठी 12 बार है; इनमें अधिक मास का एक दिन भी है। आम तौर पर: महीने में एक बार; साल में 12 या 13।
स्कंद षष्ठी उस दिन मानी जाती है जिस दिन सूर्यास्त के समय षष्ठी तिथि हो। इसलिए यह कई बार उस दिन पड़ती है जिस दिन सूर्योदय पर पंचमी होती है और षष्ठी दिन में लगती है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।