कालाष्टमी 2026 की तारीख़ें

अगली कालाष्टमी कालाष्टमी है, जो 1 नवंबर 2026, रविवार को है। अष्टमी तिथि 1 नवंबर, 2:51 PM से 2 नवंबर, 1:10 PM तक रहेगी। नीचे 2026 और 2027 की सभी तारीख़ें दी गई हैं।

रविवार1नवंबर 2026

अगली कालाष्टमी22 दिन बाद

कालाष्टमी

कार्तिक कृष्ण अष्टमी

तिथि शुरू
1 नवंबर, 2:51 PM
तिथि समाप्त
2 नवंबर, 1:10 PM

कालाष्टमी 2026 की सूची

कालाष्टमी 2026 की तारीख़ें
तारीख़व्रतमास और पक्षतिथि
10जनवरीशनिवार
कालाष्टमी
माघ कृष्ण अमांत: पौष10 जनवरी, 8:25 AM से
11 जनवरी, 10:21 AM तक
9फ़रवरीसोमवार
कालाष्टमी
फाल्गुन कृष्ण अमांत: माघ9 फ़रवरी, 5:01 AM से
10 फ़रवरी, 7:27 AM तक
11मार्चबुधवार
कालाष्टमी
चैत्र कृष्ण अमांत: फाल्गुन11 मार्च, 1:54 AM से
12 मार्च, 4:19 AM तक
10अप्रैलशुक्रवार
कालाष्टमी
वैशाख कृष्ण अमांत: चैत्र9 अप्रैल, 9:20 PM से
10 अप्रैल, 11:15 PM तक
9मईशनिवार
कालाष्टमी
ज्येष्ठ कृष्ण अमांत: वैशाख9 मई, 2:03 PM से
10 मई, 3:07 PM तक
8जूनसोमवार
अधिक मास की कालाष्टमी
अधिक ज्येष्ठ कृष्ण8 जून, 3:25 AM से
9 जून, 3:24 AM तक
7जुलाईमंगलवार
कालाष्टमी
आषाढ़ कृष्ण अमांत: ज्येष्ठ7 जुलाई, 1:25 PM से
8 जुलाई, 12:21 PM तक
5अगस्तबुधवार
कालाष्टमी
श्रावण कृष्ण अमांत: आषाढ़5 अगस्त, 8:42 PM से
6 अगस्त, 6:52 PM तक
4सितंबरशुक्रवार
कालाष्टमी
भाद्रपद कृष्ण अमांत: श्रावण4 सितंबर, 2:26 AM से
5 सितंबर, 12:14 AM तक
3अक्टूबरशनिवार
कालाष्टमी
आश्विन कृष्ण अमांत: भाद्रपद3 अक्टूबर, 8:00 AM से
4 अक्टूबर, 5:52 AM तक
1नवंबररविवार
कालाष्टमी
कार्तिक कृष्ण अमांत: आश्विन1 नवंबर, 2:51 PM से
2 नवंबर, 1:10 PM तक
1दिसंबरमंगलवार
कालाष्टमीकालभैरव जयंती
मार्गशीर्ष कृष्ण अमांत: कार्तिक1 दिसंबर, 12:11 AM से
1 दिसंबर, 11:14 PM तक
30दिसंबरबुधवार
कालाष्टमी
पौष कृष्ण अमांत: मार्गशीर्ष30 दिसंबर, 12:37 PM से
31 दिसंबर, 12:33 PM तक

सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।

कालाष्टमी 2027 की सूची

कालाष्टमी 2027 की तारीख़ें
तारीख़व्रतमास और पक्षतिथि
29जनवरीशुक्रवार
कालाष्टमी
माघ कृष्ण अमांत: पौष29 जनवरी, 4:03 AM से
30 जनवरी, 4:58 AM तक
28फ़रवरीरविवार
कालाष्टमी
फाल्गुन कृष्ण अमांत: माघ27 फ़रवरी, 9:54 PM से
28 फ़रवरी, 11:45 PM तक
29मार्चसोमवार
कालाष्टमी
चैत्र कृष्ण अमांत: फाल्गुन29 मार्च, 5:10 PM से
30 मार्च, 7:39 PM तक
28अप्रैलबुधवार
कालाष्टमी
वैशाख कृष्ण अमांत: चैत्र28 अप्रैल, 12:31 PM से
29 अप्रैल, 3:02 PM तक
28मईशुक्रवार
कालाष्टमी
ज्येष्ठ कृष्ण अमांत: वैशाख28 मई, 6:27 AM से
29 मई, 8:21 AM तक
27जूनरविवार
कालाष्टमी
आषाढ़ कृष्ण अमांत: ज्येष्ठ26 जून, 9:52 PM से
27 जून, 10:45 PM तक
26जुलाईसोमवार
कालाष्टमी
श्रावण कृष्ण अमांत: आषाढ़26 जुलाई, 10:24 AM से
27 जुलाई, 10:12 AM तक
24अगस्तमंगलवार
कालाष्टमी
भाद्रपद कृष्ण अमांत: श्रावण24 अगस्त, 8:24 PM से
25 अगस्त, 7:19 PM तक
23सितंबरगुरुवार
कालाष्टमी
आश्विन कृष्ण अमांत: भाद्रपद23 सितंबर, 4:37 AM से
24 सितंबर, 2:57 AM तक
22अक्टूबरशुक्रवार
कालाष्टमी
कार्तिक कृष्ण अमांत: आश्विन22 अक्टूबर, 11:56 AM से
23 अक्टूबर, 9:59 AM तक
20नवंबरशनिवार
कालाष्टमीकालभैरव जयंती
मार्गशीर्ष कृष्ण अमांत: कार्तिक20 नवंबर, 7:17 PM से
21 नवंबर, 5:20 PM तक
20दिसंबरसोमवार
कालाष्टमी
पौष कृष्ण अमांत: मार्गशीर्ष20 दिसंबर, 3:34 AM से
21 दिसंबर, 1:53 AM तक

तारीख़ कैसे तय होती है

कालाष्टमी उस दिन मानी जाती है जिस दिन अष्टमी तिथि शाम के प्रदोष काल में सबसे ज़्यादा समय तक रहे, क्योंकि भैरव पूजा रात में होती है। इसलिए यह कई बार उस दिन पड़ती है जिस दिन सूर्योदय पर सप्तमी होती है।

कालाष्टमी के बारे में

कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है और भगवान शिव के रूप काल भैरव को समर्पित है। इसे भैरव अष्टमी भी कहते हैं।

मार्गशीर्ष महीने (अमांत गणना में कार्तिक) की कालाष्टमी कालभैरव जयंती है, जो साल की सबसे प्रमुख कालाष्टमी है।

आराध्य
भगवान काल भैरव
कब
कृष्ण पक्ष की अष्टमी
कितनी बार
महीने में एक बार; साल में 12 या 13
व्रत का समय
दिन भर; पूजा शाम और रात में

और व्रत

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगली कालाष्टमी कब है?

अगली कालाष्टमी 1 नवंबर 2026, रविवार को है: कालाष्टमी। अष्टमी तिथि 1 नवंबर, 2:51 PM से 2 नवंबर, 1:10 PM तक रहेगी।

कालभैरव जयंती कब है?

मार्गशीर्ष महीने की कालाष्टमी कालभैरव जयंती है। अगली कालभैरव जयंती 1 दिसंबर 2026 को है।

2026 में कालाष्टमी कितनी बार है?

2026 में कालाष्टमी 13 बार है; इनमें अधिक मास का एक दिन भी है। आम तौर पर: महीने में एक बार; साल में 12 या 13।

कालाष्टमी की तारीख़ कैसे तय होती है?

कालाष्टमी उस दिन मानी जाती है जिस दिन अष्टमी तिथि शाम के प्रदोष काल में सबसे ज़्यादा समय तक रहे, क्योंकि भैरव पूजा रात में होती है। इसलिए यह कई बार उस दिन पड़ती है जिस दिन सूर्योदय पर सप्तमी होती है।

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तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।