सूर्य, हनुमान और भैरव52 दिन बाद
कालभैरव जयंती 2026
मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी
- तिथि शुरू
- 1 दिसंबर, 12:11 AM
- तिथि समाप्त
- 1 दिसंबर, 11:14 PM
- आराध्य
- भगवान काल भैरव
कालभैरव जयंती 1 दिसंबर 2026, मंगलवार को है। यह मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी को आता है (अमांत गणना में कार्तिक कृष्ण अष्टमी)। तिथि 1 दिसंबर, 12:11 AM से 1 दिसंबर, 11:14 PM तक रहेगी।
सूर्य, हनुमान और भैरव52 दिन बाद
मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी
कालभैरव जयंती मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है; अमांत गणना में यही तिथि कार्तिक कृष्ण अष्टमी कहलाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव काल भैरव के रूप में प्रकट हुए थे।
यह साल की सबसे प्रमुख कालाष्टमी है। काशी में काल भैरव को नगर का कोतवाल माना जाता है।
व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|
| 12नवंबरबुधवार | कालभैरव जयंती 2025 | 11 नवंबर, 11:08 PM | 12 नवंबर, 10:58 PM |
| 1दिसंबरमंगलवार | कालभैरव जयंती 2026 | 1 दिसंबर, 12:11 AM | 1 दिसंबर, 11:14 PM |
| 20नवंबरशनिवार | कालभैरव जयंती 2027 | 20 नवंबर, 7:17 PM | 21 नवंबर, 5:20 PM |
| 9नवंबरगुरुवार | कालभैरव जयंती 2028 | 9 नवंबर, 3:40 PM | 10 नवंबर, 2:04 PM |
| 28नवंबरबुधवार | कालभैरव जयंती 2029 | 28 नवंबर, 5:45 PM | 29 नवंबर, 4:40 PM |
| 18नवंबरसोमवार | कालभैरव जयंती 2030 | 18 नवंबर, 1:30 AM | 19 नवंबर, 2:23 AM |
| 7दिसंबररविवार | कालभैरव जयंती 2031 | 6 दिसंबर, 7:50 PM | 7 दिसंबर, 9:40 PM |
| 24नवंबरबुधवार | कालभैरव जयंती 2032 | 24 नवंबर, 3:03 PM | 25 नवंबर, 5:36 PM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
कालभैरव जयंती 1 दिसंबर 2026, मंगलवार को है। मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी तिथि 1 दिसंबर, 12:11 AM से 1 दिसंबर, 11:14 PM तक रहेगी।
कालभैरव जयंती मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी को आता है। जहाँ महीना अमावस्या पर पूरा होता है (अमांत गणना), वहाँ यही तिथि कार्तिक कृष्ण अष्टमी कहलाती है।
कालभैरव जयंती भगवान काल भैरव से जुड़ा है।
कालभैरव जयंती 2027 में 20 नवंबर 2027, शनिवार को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।