चातुर्मास पूरा होगा41 दिन बाद
चातुर्मास 2026
25 जुलाई से 20 नवंबर तक
- शुरू
- देवशयनी एकादशी, 25 जुलाई 2026
- समाप्त
- देवउठनी एकादशी, 20 नवंबर 2026
- कुल
- 118 दिन
चातुर्मास 2026 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी से शुरू हुआ और 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी पर पूरा होगा; अभी चातुर्मास चल रहा है और इसके 41 दिन बाक़ी हैं। इस पन्ने पर वे व्रत हैं जो एक दिन के नहीं, हफ़्तों या महीनों के होते हैं।
चातुर्मास पूरा होगा41 दिन बाद
25 जुलाई से 20 नवंबर तक
चातुर्मास का अर्थ है चार महीने। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी) तक चलता है। मान्यता है कि इन चार महीनों में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक काम नहीं किए जाते।
यह समय बारिश का है, और परंपरा में इसे व्रत, पूजा, कथा और संयम का समय माना गया है। कई लोग चार महीनों के लिए कोई एक नियम लेते हैं, जैसे किसी एक चीज़ का त्याग या रोज़ का पाठ। साधु-संत इन महीनों में यात्रा नहीं करते और एक ही जगह रहते हैं। सावन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, पितृ पक्ष, नवरात्रि और दीपावली, सब चातुर्मास में ही आते हैं।
| साल | शुरू (देवशयनी एकादशी) | समाप्त (देवउठनी एकादशी) | कुल दिन |
|---|---|---|---|
| चातुर्मास 2026 | 25 जुलाई 2026 शनिवार | 20 नवंबर 2026 शुक्रवार | 118 |
| चातुर्मास 2027 | 14 जुलाई 2027 बुधवार | 10 नवंबर 2027 बुधवार | 119 |
जिस साल चातुर्मास के बीच अधिक मास आता है, उस साल यह पाँच महीने का हो जाता है।
कार्तिक को साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। पूरे महीने सूर्योदय से पहले स्नान, तुलसी की पूजा, शाम को दीपदान और सात्विक भोजन का नियम लिया जाता है। इसी महीने में करवा चौथ, दीपावली, छठ, देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा आते हैं।
कार्तिक की तारीख़ें दो हैं। उत्तर भारत में महीना शरद पूर्णिमा के अगले दिन शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा को पूरा होता है; कार्तिक स्नान इसी हिसाब से किया जाता है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में महीना पंद्रह दिन बाद, दीपावली की अमावस्या के अगले दिन शुरू होता है।
| साल | उत्तर भारत (पूर्णिमांत) | पश्चिम और दक्षिण भारत (अमांत) |
|---|---|---|
| कार्तिक 2026 | 27 अक्टूबर 2026 से 24 नवंबर 2026 | 10 नवंबर 2026 से 8 दिसंबर 2026 |
| कार्तिक 2027 | 16 अक्टूबर 2027 से 14 नवंबर 2027 | 30 अक्टूबर 2027 से 28 नवंबर 2027 |
भीष्म पंचक कार्तिक के आख़िरी पाँच दिन का व्रत है: देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक। कथा के अनुसार बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म पितामह ने इन्हीं पाँच दिनों में पांडवों को राजधर्म का उपदेश दिया था। जो लोग पूरे कार्तिक का व्रत नहीं रख पाते, वे इन पाँच दिनों का व्रत रखते हैं। इसे विष्णु पंचक भी कहते हैं।
| साल | शुरू (देवउठनी एकादशी) | समाप्त (कार्तिक पूर्णिमा) |
|---|---|---|
| भीष्म पंचक 2026 | 20 नवंबर 2026 शुक्रवार | 24 नवंबर 2026 मंगलवार |
| भीष्म पंचक 2027 | 10 नवंबर 2027 बुधवार | 14 नवंबर 2027 रविवार |
चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग 11 दिन छोटा होता है। इस अंतर को पूरा करने के लिए लगभग हर 32-33 महीने में एक महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहते हैं। यह वह चंद्र मास है जिसमें कोई संक्रांति नहीं पड़ती। इसे भगवान विष्णु के नाम पर पुरुषोत्तम मास कहा जाता है; मल मास भी इसी का नाम है।
अधिक मास में विवाह जैसे मांगलिक काम नहीं किए जाते, पर व्रत, दान, जप और भागवत कथा के लिए इसे बहुत अच्छा माना जाता है। इसकी दो एकादशी, पद्मिनी और परमा, सिर्फ़ इसी महीने में आती हैं। अगला अधिक मास चैत्र का है, 16 मार्च 2029 से 13 अप्रैल 2029 तक।
| अधिक मास | कब से कब तक | दिन |
|---|---|---|
| अधिक ज्येष्ठ 2026 | 17 मई 2026 से 15 जून 2026 | 30 |
| अधिक चैत्र 2029 | 16 मार्च 2029 से 13 अप्रैल 2029 | 29 |
| अधिक भाद्रपद 2031 | 19 अगस्त 2031 से 16 सितंबर 2031 | 29 |
कौन सा महीना अधिक होगा और कब, इसका ब्योरा कैलेंडर के पन्ने पर है।
द्वात्रिंशी का अर्थ है बत्तीस। यह लगातार 32 पूर्णिमाओं तक रखा जाने वाला व्रत है, यानी लगभग ढाई साल का संकल्प। इसे मार्गशीर्ष, माघ या वैशाख की पूर्णिमा से शुरू किया जाता है और 32वीं पूर्णिमा पर उद्यापन किया जाता है।
हर पूर्णिमा के व्रत की तारीख़ पूर्णिमा के पन्ने पर दी गई है।
चातुर्मास 2026 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी से शुरू होकर 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी पर पूरा होता है; कुल 118 दिन।
चातुर्मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए काम की शुरुआत जैसे मांगलिक काम नहीं किए जाते। ये काम देवउठनी एकादशी के बाद फिर शुरू होते हैं।
अगला अधिक मास चैत्र का है, जो 16 मार्च 2029 से 13 अप्रैल 2029 तक रहेगा।
भीष्म पंचक 2026 20 नवंबर 2026 (देवउठनी एकादशी) से 24 नवंबर 2026 (कार्तिक पूर्णिमा) तक है।
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में कार्तिक मास 27 अक्टूबर 2026 से 24 नवंबर 2026 तक है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत (अमांत) में यह 10 नवंबर 2026 से 8 दिसंबर 2026 तक है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।