सफला एकादशी85 दिन बाद
सफला एकादशी 2027
पौष कृष्ण एकादशी
- तिथि शुरू
- 2 जनवरी, 2:24 PM
- तिथि समाप्त
- 3 जनवरी, 4:08 PM
- पारण
- 4 जनवरी, 7:14 AM – 9:19 AM
- द्वादशी समाप्त
- 4 जनवरी, 6:16 PM
सफला एकादशी 3 जनवरी 2027, रविवार को है। यह पौष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। एकादशी तिथि 2 जनवरी, 2:24 PM से 3 जनवरी, 4:08 PM तक रहेगी, और व्रत का पारण 4 जनवरी को 7:14 AM – 9:19 AM के बीच है।
सफला एकादशी85 दिन बाद
पौष कृष्ण एकादशी
सफला का अर्थ है सफल करने वाली। यह पौष के कृष्ण पक्ष में आती है।
एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय पर एकादशी तिथि हो, और अगले दिन द्वादशी में खोला जाता है। नियम का पूरा ब्योरा एकादशी के पन्ने पर है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त | पारण |
|---|---|---|---|---|
| 15दिसंबरसोमवार | सफला एकादशी 2025 | 14 दिसंबर, 6:51 PM | 15 दिसंबर, 9:20 PM | 16 दिसंबर, 7:07 AM – 9:11 AM |
| 3जनवरीरविवार | सफला एकादशी 2027 | 2 जनवरी, 2:24 PM | 3 जनवरी, 4:08 PM | 4 जनवरी, 7:14 AM – 9:19 AM |
| 23दिसंबरगुरुवार | सफला एकादशी 2027 | 22 दिसंबर, 11:41 PM | 23 दिसंबर, 11:11 PM | 24 दिसंबर, 7:11 AM – 9:15 AM |
| 12दिसंबरमंगलवार | सफला एकादशी 2028 | 11 दिसंबर, 5:33 PM | 12 दिसंबर, 3:13 PM | 13 दिसंबर, 7:05 AM – 9:09 AM |
| 31दिसंबरसोमवार | सफला एकादशी 2029 | 30 दिसंबर, 9:51 PM | 31 दिसंबर, 7:12 PM | 1 जनवरी, 7:14 AM – 9:18 AM |
| 21दिसंबरशनिवार | सफला एकादशी 2030 | 20 दिसंबर, 2:50 PM | 21 दिसंबर, 12:33 PM | 22 दिसंबर, 7:10 AM – 9:14 AM |
| 9जनवरीशुक्रवार | सफला एकादशी 2032 | 8 जनवरी, 3:28 PM | 9 जनवरी, 1:58 PM | 10 जनवरी, 7:15 AM – 9:20 AM |
| 28दिसंबरमंगलवार | सफला एकादशी 2032 | 27 दिसंबर, 7:11 PM | 28 दिसंबर, 8:01 PM | 29 दिसंबर, 7:13 AM – 9:17 AM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
सफला एकादशी 3 जनवरी 2027, रविवार को है। एकादशी तिथि 2 जनवरी, 2:24 PM से 3 जनवरी, 4:08 PM तक रहेगी।
सफला एकादशी का पारण 4 जनवरी 2027 को 7:14 AM – 9:19 AM के बीच है। द्वादशी तिथि 4 जनवरी, 6:16 PM तक रहेगी।
सफला एकादशी पौष महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। जहाँ महीना अमावस्या पर पूरा होता है (अमांत गणना), वहाँ यही एकादशी मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की कहलाती है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।