योगिनी एकादशी263 दिन बाद
योगिनी एकादशी 2027
आषाढ़ कृष्ण एकादशी
- तिथि शुरू
- 29 जून, 10:04 PM
- तिथि समाप्त
- 30 जून, 8:31 PM
- पारण
- 1 जुलाई, 5:27 AM – 8:14 AM
- द्वादशी समाप्त
- 1 जुलाई, 6:14 PM
योगिनी एकादशी 30 जून 2027, बुधवार को है। यह आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। एकादशी तिथि 29 जून, 10:04 PM से 30 जून, 8:31 PM तक रहेगी, और व्रत का पारण 1 जुलाई को 5:27 AM – 8:14 AM के बीच है।
योगिनी एकादशी263 दिन बाद
आषाढ़ कृष्ण एकादशी
योगिनी एकादशी आषाढ़ के कृष्ण पक्ष में, निर्जला और देवशयनी एकादशी के बीच आती है।
एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय पर एकादशी तिथि हो, और अगले दिन द्वादशी में खोला जाता है। नियम का पूरा ब्योरा एकादशी के पन्ने पर है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त | पारण |
|---|---|---|---|---|
| 21जूनशनिवार | योगिनी एकादशी 2025 | 21 जून, 7:19 AM | 22 जून, 4:28 AM | 22 जून, 1:47 PM – 4:35 PM |
| 10जुलाईशुक्रवार | योगिनी एकादशी 2026 | 10 जुलाई, 8:16 AM | 11 जुलाई, 5:22 AM | 11 जुलाई, 1:50 PM – 4:36 PM |
| 30जूनबुधवार | योगिनी एकादशी 2027 | 29 जून, 10:04 PM | 30 जून, 8:31 PM | 1 जुलाई, 5:27 AM – 8:14 AM |
| 18जूनरविवार | योगिनी एकादशी 2028 | 18 जून, 2:28 AM | 19 जून, 3:16 AM | 19 जून, 1:46 PM – 4:34 PM |
| 7जुलाईशनिवार | योगिनी एकादशी 2029 | 6 जुलाई, 5:12 PM | 7 जुलाई, 7:06 PM | 8 जुलाई, 5:30 AM – 8:16 AM |
| 26जूनबुधवार | योगिनी एकादशी 2030 | 25 जून, 3:01 PM | 26 जून, 5:27 PM | 27 जून, 5:26 AM – 8:13 AM |
| 15जूनरविवार | योगिनी एकादशी 2031 | 14 जून, 7:18 PM | 15 जून, 8:11 PM | 16 जून, 5:23 AM – 8:11 AM |
| 3जुलाईशनिवार | योगिनी एकादशी 2032 | 2 जुलाई, 5:05 PM | 3 जुलाई, 4:53 PM | 4 जुलाई, 5:28 AM – 8:15 AM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
योगिनी एकादशी 30 जून 2027, बुधवार को है। एकादशी तिथि 29 जून, 10:04 PM से 30 जून, 8:31 PM तक रहेगी।
योगिनी एकादशी का पारण 1 जुलाई 2027 को 5:27 AM – 8:14 AM के बीच है। द्वादशी तिथि 1 जुलाई, 6:14 PM तक रहेगी।
योगिनी एकादशी आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। जहाँ महीना अमावस्या पर पूरा होता है (अमांत गणना), वहाँ यही एकादशी ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की कहलाती है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।