वरुथिनी एकादशी204 दिन बाद
वरुथिनी एकादशी 2027
वैशाख कृष्ण एकादशी
- तिथि शुरू
- 1 मई, 6:54 PM
- तिथि समाप्त
- 2 मई, 7:52 PM
- पारण
- 3 मई, 5:39 AM – 8:19 AM
- द्वादशी समाप्त
- 3 मई, 8:04 PM
वरुथिनी एकादशी 2 मई 2027, रविवार को है। यह वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। एकादशी तिथि 1 मई, 6:54 PM से 2 मई, 7:52 PM तक रहेगी, और व्रत का पारण 3 मई को 5:39 AM – 8:19 AM के बीच है।
वरुथिनी एकादशी204 दिन बाद
वैशाख कृष्ण एकादशी
वरुथिनी का अर्थ है रक्षा करने वाली। यह वैशाख के कृष्ण पक्ष में आती है।
एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय पर एकादशी तिथि हो, और अगले दिन द्वादशी में खोला जाता है। नियम का पूरा ब्योरा एकादशी के पन्ने पर है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त | पारण |
|---|---|---|---|---|
| 24अप्रैलगुरुवार | वरुथिनी एकादशी 2025 | 23 अप्रैल, 4:45 PM | 24 अप्रैल, 2:34 PM | 25 अप्रैल, 5:46 AM – 8:23 AM |
| 13अप्रैलसोमवार | वरुथिनी एकादशी 2026 | 13 अप्रैल, 1:17 AM | 14 अप्रैल, 1:09 AM | 14 अप्रैल, 6:55 AM – 8:31 AM |
| 2मईरविवार | वरुथिनी एकादशी 2027 | 1 मई, 6:54 PM | 2 मई, 7:52 PM | 3 मई, 5:39 AM – 8:19 AM |
| 20अप्रैलगुरुवार | वरुथिनी एकादशी 2028 | 19 अप्रैल, 4:14 PM | 20 अप्रैल, 6:47 PM | 21 अप्रैल, 5:49 AM – 8:26 AM |
| 9मईबुधवार | वरुथिनी एकादशी 2029 | 8 मई, 7:40 AM | 9 मई, 10:02 AM | 10 मई, 5:34 AM – 8:15 AM |
| 28अप्रैलरविवार | वरुथिनी एकादशी 2030 | 27 अप्रैल, 11:40 AM | 28 अप्रैल, 12:26 PM | 29 अप्रैल, 5:42 AM – 8:21 AM |
| 17अप्रैलगुरुवार | वरुथिनी एकादशी 2031 | 17 अप्रैल, 1:48 AM | 18 अप्रैल, 12:23 AM | 18 अप्रैल, 6:06 AM – 8:28 AM |
| 5मईबुधवार | वरुथिनी एकादशी 2032 | 5 मई, 3:46 AM | 6 मई, 1:34 AM | 6 मई, 7:03 AM – 8:17 AM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
वरुथिनी एकादशी 2 मई 2027, रविवार को है। एकादशी तिथि 1 मई, 6:54 PM से 2 मई, 7:52 PM तक रहेगी।
वरुथिनी एकादशी का पारण 3 मई 2027 को 5:39 AM – 8:19 AM के बीच है। द्वादशी तिथि 3 मई, 8:04 PM तक रहेगी।
वरुथिनी एकादशी वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। जहाँ महीना अमावस्या पर पूरा होता है (अमांत गणना), वहाँ यही एकादशी चैत्र कृष्ण पक्ष की कहलाती है।
वरुथिनी एकादशी को बरुथनी एकादशी भी कहते हैं।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।