अगला शुक्रवार6 दिन बाद
शुक्रवार व्रत
माता लक्ष्मी; संतोषी माता
- उस दिन की तिथि
- शुक्ल षष्ठी, 5:54 AM (अगले दिन) तक
- ग्रह
- शुक्र
- उसी दिन
- स्कंद षष्ठी
शुक्रवार माता लक्ष्मी; संतोषी माता का दिन है, और शुक्रवार व्रत उन्हीं के लिए रखा जाता है। अगला शुक्रवार 16 अक्टूबर 2026 को है; उस दिन सूर्योदय पर शुक्ल षष्ठी तिथि है।
अगला शुक्रवार6 दिन बाद
माता लक्ष्मी; संतोषी माता
| तारीख़ | व्रत | सूर्योदय की तिथि | उसी दिन और व्रत |
|---|---|---|---|
| 16अक्टूबरशुक्रवार | शुक्रवार व्रत | शुक्ल षष्ठी | स्कंद षष्ठी |
| 23अक्टूबरशुक्रवार | शुक्रवार व्रत | शुक्ल द्वादशी | शुक्र प्रदोष व्रत |
| 30अक्टूबरशुक्रवार | शुक्रवार व्रत | कृष्ण पंचमी | – |
| 6नवंबरशुक्रवार | शुक्रवार व्रत | कृष्ण द्वादशी | शुक्र प्रदोष व्रत |
| 13नवंबरशुक्रवार | शुक्रवार व्रत | शुक्ल चतुर्थी | विनायक चतुर्थी |
| 20नवंबरशुक्रवार | शुक्रवार व्रत | शुक्ल दशमी | देवउठनी एकादशी |
| 27नवंबरशुक्रवार | शुक्रवार व्रत | कृष्ण तृतीया | गणाधिप संकष्टी चतुर्थी |
| 4दिसंबरशुक्रवार | शुक्रवार व्रत | कृष्ण एकादशी | उत्पन्ना एकादशी |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
इस दिन इनमें से किसी मंत्र का जाप यहीं, गिनती के साथ कर सकते हैं: 21, 51, 108 या 1008 बार, स्वयं गिनकर या ऑडियो के साथ।
शुक्रवार देवी का दिन है: माता लक्ष्मी, संतोषी माता और दुर्गा। शुक्रवार का व्रत ज़्यादातर माता लक्ष्मी या संतोषी माता के लिए रखा जाता है।
संतोषी माता का व्रत लगातार सोलह शुक्रवार तक रखा जाता है और इसमें खट्टी चीज़ें नहीं खाई जातीं। दक्षिण भारत में श्रावण पूर्णिमा से पहले के शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत रखा जाता है।
व्रत की विधि, भोजन के नियम और कथा परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होती है; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
शुक्रवार व्रत माता लक्ष्मी; संतोषी माता के लिए रखा जाता है। शुक्रवार का ग्रह शुक्र है।
अगला शुक्रवार 16 अक्टूबर 2026 को है। उस दिन सूर्योदय पर शुक्ल षष्ठी तिथि है।
शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत शुक्र प्रदोष कहलाता है। अगला शुक्र प्रदोष 23 अक्टूबर 2026 को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।