लक्ष्मी

पूजा विधि · लक्ष्मी · त्योहार की पूजा

दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि

दीपावली की शाम घर में लक्ष्मी-गणेश पूजा: सफ़ाई, प्रदोष काल का समय, चौकी सजाना, गणेश पूजन, लक्ष्मी पूजन, दीपमालिका, बही-खाता, तिजोरी और आरती।

इस पेज पर
  1. परिचय
  2. एक नज़र में
  3. कब करें
  4. सामग्री
  5. तैयारी
  6. चित्र या मूर्ति
  7. संकल्प
  8. चरण-दर-चरण विधि
  9. पाठ
  10. भोग
  11. समापन
  12. छोटी विधि
  13. परंपराओं में अंतर
  14. ये भी पढ़ें
  15. स्रोत
  16. सवाल-जवाब
  17. सुधार सुझाएँ
त्योहार की पूजा

यह पन्ना दीपावली (कार्तिक अमावस्या) की शाम घर में होने वाली लक्ष्मी-गणेश पूजा बताता है: प्रदोष काल में गणेश पूजन, लक्ष्मी पूजन, सिक्कों की पूजा, दीपमालिका पूजन, बही-खाते और तिजोरी की पूजा, और परिवार के साथ आरती। नई मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा, कलश-स्थापना के साथ नवग्रह और षोडश मातृका पूजन वाला पूरा विधान, श्री सूक्त से हवन, और आधी रात के महानिशीथ काल की तांत्रिक साधनाएँ पुरोहित या जानकार आचार्य के साथ की जाने वाली अलग विधियाँ हैं। धनतेरस, नरक चतुर्दशी, गोवर्धन पूजा और भाई दूज इस पन्ने में नहीं हैं।

परिचय

दीपावली कार्तिक अमावस्या की वह रात है जब साल की सबसे अँधेरी रात दीयों से जगमगा उठती है। इस शाम घर-घर में माँ लक्ष्मी और गणेश जी की एक साथ पूजा होती है: लक्ष्मी जी सुख-समृद्धि की देवी हैं, और गणेश जी शुभ-लाभ और सद्बुद्धि के देवता। परंपरा दोनों की साथ पूजा को इसलिए महत्व देती है कि समृद्धि के साथ उसे सही ढंग से बरतने की समझ भी चाहिए।

पूजा का समय सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल है। उससे पहले घर की सफ़ाई, द्वार पर रंगोली और तोरण, और पूजा की चौकी तैयार कर ली जाती है। यहाँ गीता प्रेस की नित्यकर्म-पूजाप्रकाश की "श्रीमहालक्ष्मी-पूजन" विधि का घर के लिए सरल रूप है; जितना हो सके उतना करें। एक दीपक, लक्ष्मी-गणेश का नाम और परिवार के साथ गाई आरती भी पूरी दीपावली पूजा है।

एक नज़र में

समय
कार्तिक अमावस्या की शाम, प्रदोष काल में (सूर्यास्त से लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक)
अवधि
लगभग 45 मिनट से एक घंटा; छोटी पूजा 15 मिनट में
कौन कर सकता है
पूरा परिवार साथ; पूजा घर का कोई भी सदस्य करा सकता है
मुख्य सामग्री
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या तस्वीर, मिट्टी के दीये, खील-बताशे, कमल या लाल फूल, कुमकुम, सिक्के, मिठाई
आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता; उससे पहले जय गणेश देवा

पूजा कब करें

  • दीपावली कार्तिक कृष्ण अमावस्या को मनाई जाती है; अमांत पंचांग में यही आश्विन अमावस्या कहलाती है, पर दिन एक ही है। यहीं के हिंदू कैलेंडर में हर साल की तारीख़ दी गई है।
  • लक्ष्मी पूजा का सबसे प्रचलित समय प्रदोष काल है, जो सूर्यास्त से शुरू होकर लगभग 2 घंटे 24 मिनट रहता है। परंपरा इसमें भी उस समय को सबसे उपयुक्त मानती है जब स्थिर लग्न, अक्सर वृषभ लग्न, हो। यह समय हर शहर में अलग होता है; अपने शहर का सूर्यास्त यहीं के सूर्योदय-सूर्यास्त वाले पन्ने पर देखें, और सटीक मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग।
  • पूरी विधि लंबी हो तो पूजा मुहूर्त से कुछ पहले शुरू की जा सकती है, ताकि लक्ष्मी पूजन का मुख्य हिस्सा मुहूर्त में पड़े; बाकी पूजा मुहूर्त के बाद भी चल सकती है।
  • कुछ स्रोत आधी रात के महानिशीथ काल में भी लक्ष्मी पूजा बताते हैं; वह ज़्यादातर तांत्रिक परंपराओं और विशेष साधकों के लिए है। घर की पूजा के लिए प्रदोष काल ही प्रचलित है।

पूजा सामग्री

  • आवश्यक इसके बिना यह विधि नहीं होती
  • वैकल्पिक हो तो अच्छा; न हो तो विकल्प दिया है
  • परंपरा-विशेष कुछ परंपराओं में ही
सामग्रीउपयोगस्थितिविकल्प / टिप्पणी
मिट्टी के दीये, घी या तेल और बत्तियाँदीपमालिका पूजन और पूरे घर में दीये; दीपावली दीपों का ही पर्व हैआवश्यकगीता प्रेस ग्यारह, इक्कीस या उससे अधिक दीये बताती है; जितने हों उतने। मिट्टी के दीये न हों तो धातु के दीपक।
लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्तियाँ या तस्वीरपूजा का केंद्रवैकल्पिकनई मूर्ति लाना ज़रूरी नहीं; पुरानी मूर्ति या तस्वीर भी ठीक है। कुछ न हो तो गणेश जी के लिए मौली लपेटी सुपारी और लक्ष्मी जी के लिए सिक्के।
चौकी और लाल कपड़ामूर्तियाँ रखने के लिएवैकल्पिककोई साफ़ ऊँचा स्थान और साफ़ कपड़ा।
सिक्के या रुपये (द्रव्य-लक्ष्मी)गीता प्रेस इन्हें आठ पंखुड़ियों के कमल पर रखकर मूर्ति के साथ पूजने को कहती हैपरंपरा-विशेषएक सिक्का भी काफ़ी है।
खील (धान का लावा) और बताशेदीपमालिका पूजन के बाद गणेश जी, लक्ष्मी जी और सभी देवताओं कोपरंपरा-विशेषन हों तो कोई भी मिठाई।
कमल या लाल-गुलाबी फूल, गेंदे की मालापूजा और सजावटवैकल्पिकजो ताज़े फूल मिलें।
कुमकुम, हल्दी, केसर या चंदन, अक्षततिलक, अष्टदल कमल और अर्पणवैकल्पिकरोली से भी कमल और स्वस्तिक बनता है।
दूर्वागणेश पूजन मेंवैकल्पिकन हो तो लाल फूल।
बही-खाता, कलम, तिजोरी या गल्लाव्यापारी परिवारों में सरस्वती, लेखनी और कुबेर की पूजापरंपरा-विशेषजो व्यापार नहीं करते, वे पढ़ाई की किताबें, कलम या घर के हिसाब की बही रख सकते हैं, या यह हिस्सा छोड़ दें।
हल्दी की पाँच गाँठें, साबुत धनिया, कमलगट्टेबही-खाते की थैली में रखने के लिए, जो बाद में तिजोरी में रखी जाती हैपरंपरा-विशेषन हों तो केवल सिक्का और अक्षत।
नैवेद्यमिठाई, मौसमी फल, ईख (गन्ना), सिंघाड़ा, संतरावैकल्पिकगीता प्रेस लिखती है कि ये चीज़ें अपने घर के आचार के अनुसार चढ़ाई जाती हैं; जो हो वही।
कपूर, घंटी और शंखप्रधान आरतीवैकल्पिकघी के दीपक से आरती और ताली भी काफ़ी है।
कलश, आम के पत्ते और नारियलकई घरों में मुख्य द्वार या पूजा-स्थान पर मंगल-कलशपरंपरा-विशेषज़रूरी नहीं।

स्थान और अपनी तैयारी

  • दिन में पूरे घर की सफ़ाई करें; गीता प्रेस भी पूजन के दिन घर को स्वच्छ कर पूजा-स्थान को पवित्र करने को कहती है। यह दीपावली की पूजा का पहला हिस्सा माना जाता है।
  • मुख्य द्वार पर रंगोली, आम या अशोक के पत्तों का तोरण और गेंदे की माला लगाने का चलन है।
  • शाम को स्नान करके नए या साफ़ कपड़े पहनें। पूजा के समय परिवार के सब लोग साथ बैठें।
  • पूजा से पहले सारी सामग्री थाली में और सब दीयों में बत्ती-तेल डालकर तैयार रखें; मुहूर्त छोटा हो तो समय बचेगा।
  • दीयों की जगह पहले तय कर लें: परदों, कपड़ों, काग़ज़ की सजावट और पटाखों से दूर, और छोटे बच्चों की पहुँच से थोड़ा ऊपर।

चित्र या मूर्ति कैसे रखें

  • चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्तियाँ रखें। गीता प्रेस की विधि में माँ लक्ष्मी को गणेश जी के दाहिने भाग में स्थापित करने को कहा गया है। कई परिवारों की अपनी रीति अलग होती है; उसे मानना भी ठीक है।
  • कई घरों में साथ में माँ सरस्वती और कुबेर जी की तस्वीर भी रखी जाती है।
  • लक्ष्मी जी के पास एक थाली में केसर मिले चंदन या रोली से आठ पंखुड़ियों का कमल बनाकर उस पर सिक्के रखें; गीता प्रेस इन्हें "द्रव्य-लक्ष्मी" कहकर मूर्ति के साथ ही पूजने को कहती है।
  • पूजा करने वाला पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठे (गीता प्रेस)। घी का मुख्य दीपक दाईं ओर; ग्यारह या इक्कीस दीयों की थाली लक्ष्मी जी के पास।
  • बही-खाता, कलम, और तिजोरी या गल्ले की चाबी पूजा-स्थान के पास रखें, ताकि बाद में उनकी पूजा हो सके।
  • द्रिक पंचांग में बड़ी पूजा का एक रूप दिया गया है जिसमें चौकी के एक ओर लाल कपड़े पर लक्ष्मी-गणेश और दूसरी ओर सफ़ेद कपड़े पर नवग्रह स्थापित होते हैं; यह पुरोहित के साथ होने वाली विस्तृत विधि का हिस्सा है, घर की सरल पूजा में ज़रूरी नहीं।

संकल्प

दीपावली की पूजा का संकल्प हाथ में जल, अक्षत, फूल और एक सिक्का लेकर किया जाता है। गीता प्रेस के संकल्प में महालक्ष्मी-पूजन, कुबेर आदि के पूजन, और उसके अंग के रूप में गणेश-पूजन का निश्चय किया जाता है; संकल्प के बाद जल-अक्षत गणेश जी के पास छोड़ दिए जाते हैं।

हे माँ लक्ष्मी, हे गणेश जी, आज दीपावली की शुभ संध्या पर मैं [अपना नाम] अपने पूरे परिवार की ओर से आपकी पूजा कर रहा/रही हूँ। हमारे घर में सुख, शांति, ईमानदार कमाई और सद्बुद्धि बनी रहे, और जो कुछ है उसमें से ज़रूरतमंदों के साथ बाँटने का मन रहे।

पुरोहित संस्कृत संकल्प में संवत, मास, तिथि, गोत्र और नाम बोलते हैं; घर की पूजा में अपनी भाषा का यह संकल्प काफ़ी है।

पूजा की विधि, चरण-दर-चरण

  1. १पवित्रीकरण

    क्या करें
    अपने ऊपर और पूजा की सामग्री पर जल छिड़ककर पूजा शुरू करें।
    कैसे करें
    बाएँ हाथ में थोड़ा जल लें और दाहिने हाथ की उंगलियों से अपने ऊपर, परिवार पर और सामग्री पर छिड़कें। गीता प्रेस की महालक्ष्मी पूजा इसी श्लोक से शुरू होती है।
    भाव
    अब घर ही नहीं, मन भी साफ़ है।
    पाठ

    ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
    यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

    अर्थ: कोई अपवित्र हो या पवित्र, किसी भी अवस्था में हो, जो कमल-नयन भगवान का स्मरण करता है, वह भीतर और बाहर से शुद्ध हो जाता है।

    स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन का आरंभ (प्रोक्षण का श्लोक)।

    विकल्प
    श्लोक न पढ़ सकें तो "हे भगवान, हमें भीतर-बाहर से शुद्ध करें" कहकर जल छिड़कें।
  2. २संकल्प

    क्या करें
    हाथ में जल, अक्षत, फूल और सिक्का लेकर पूजा का संकल्प लें।
    कैसे करें
    ऊपर दिया संकल्प बोलें और जल-अक्षत गणेश जी के पास छोड़ दें; सिक्का द्रव्य-लक्ष्मी वाली थाली में रख दें।
    भाव
    यह पूजा पूरे परिवार की ओर से है।
    विकल्प
    बच्चे साथ हों तो उन्हें भी हाथ में थोड़े अक्षत दें।
  3. ३गणेश पूजन

    क्या करें
    पहले गणेश जी की छोटी पूजा करें: जल, रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल, धूप-दीप और लड्डू।
    कैसे करें
    गणेश जी पर जल के छींटे दें, रोली का तिलक लगाएँ, अक्षत, दूर्वा और लाल फूल चढ़ाएँ, धूप-दीप दिखाएँ और लड्डू या मोदक का भोग लगाएँ। हर उपचार के साथ "ॐ श्रीगणेशाय नमः" बोलें।
    भाव
    हर शुभ काम की तरह आज की पूजा भी विघ्नहर्ता से।
    पाठ

    वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
    निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

    अर्थ: हे टेढ़ी सूँड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों जैसी आभा वाले देव, मेरे सब कामों को सदा बिना विघ्न पूरा करें।

    वक्रतुण्ड महाकाय: पूरा पाठ और अर्थ

    विकल्प
    समय कम हो तो केवल यह श्लोक पढ़कर फूल चढ़ाएँ और आगे बढ़ें।
  4. ४लक्ष्मी जी का ध्यान और आवाहन

    क्या करें
    हाथ में फूल लेकर माँ लक्ष्मी का ध्यान करें और उन्हें पूजा में आने की प्रार्थना करें।
    कैसे करें
    आँखें बंद करके कमल पर बैठी, स्वर्ण जैसी आभा वाली माँ लक्ष्मी का रूप मन में लाएँ। गीता प्रेस की महालक्ष्मी पूजा ध्यान में श्री सूक्त का पहला मंत्र पढ़ती है। फिर फूल माँ के चरणों में चढ़ा दें।
    भाव
    माँ, आज हमारे घर पधारिए।
    पाठ

    ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
    चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

    अर्थ: हे अग्निदेव (जातवेद), सोने जैसी आभा वाली, सोने और चाँदी की मालाएँ पहने, चंद्रमा जैसी उजली, स्वर्णमयी लक्ष्मी को मेरे पास ले आइए।

    श्री सूक्त: पूरा पाठ और अर्थ

    विकल्प
    वैदिक मंत्र का उच्चारण कठिन लगे तो "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" बोलकर ध्यान करें।
  5. ५लक्ष्मी पूजन: स्नान, वस्त्र, गंध और फूल

    क्या करें
    माँ को जल अर्पित करें, चुनरी ओढ़ाएँ, चंदन और कुमकुम लगाएँ, अक्षत और कमल या लाल फूल चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    धातु की मूर्ति हो तो पंचामृत और फिर शुद्ध जल से स्नान कराकर पोंछें; मिट्टी की मूर्ति या तस्वीर हो तो केवल जल के छींटे। फिर लाल चुनरी, अनामिका से केसर-चंदन और कुमकुम, कुमकुम वाले अक्षत, और फूल-माला। गीता प्रेस यथासंभव लाल कमल से पूजा करने को कहती है।
    भाव
    माँ की सेवा, घर आई प्रिय अतिथि की तरह।
    पाठ

    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। गन्धं समर्पयामि॥
    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। कुङ्कुमं समर्पयामि॥
    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। पुष्पं पुष्पमालां च समर्पयामि॥

    अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं चंदन (गंध) अर्पित करता/करती हूँ। माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं कुमकुम अर्पित करता/करती हूँ। माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं फूल और फूलों की माला अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: हर उपचार को देवता के नाम-मंत्र के साथ "समर्पयामि" कहकर अर्पित करने का प्रचलित ढंग; ये वाक्य गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के श्रीमहालक्ष्मी-पूजन में इसी रूप में हैं।

    विकल्प
    सामग्री कम हो तो जो है उसी से; जो न हो, उसे मन से अर्पित करें।
  6. ६द्रव्य-लक्ष्मी की पूजा

    क्या करें
    अष्टदल कमल पर रखे सिक्कों की भी लक्ष्मी जी के साथ पूजा करें।
    कैसे करें
    सिक्कों पर कुमकुम, अक्षत और एक फूल चढ़ाएँ। गीता प्रेस मूर्तिमयी लक्ष्मी जी और द्रव्य-लक्ष्मी, दोनों की एक साथ पूजा करने को कहती है।
    भाव
    जो धन घर में आता है, वह भी माँ का प्रसाद है; उसका आदर से उपयोग हो।
    विकल्प
    एक सिक्का भी काफ़ी है।
  7. ७धूप, दीप और नैवेद्य

    क्या करें
    धूप दिखाएँ, मुख्य दीपक की ज्योति अर्पित करें और भोग लगाएँ।
    कैसे करें
    धूप घुमाकर रख दें, फिर घी का मुख्य दीपक दिखाएँ और हाथ धो लें। मिठाई, फल और खील-बताशे सामने रखकर उनके चारों ओर जल घुमाएँ और निवेदन करें, फिर आचमन के लिए जल चढ़ाएँ।
    भाव
    जो कुछ हमारे घर में है, पहले माँ को।
    पाठ

    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। धूपमाघ्रापयामि॥
    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। दीपं दर्शयामि॥
    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। नैवेद्यं निवेदयामि॥

    अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं धूप की सुगंध अर्पित करता/करती हूँ, दीपक की ज्योति दिखाता/दिखाती हूँ, और यह भोग निवेदन करता/करती हूँ।

    स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन के उपचार-वाक्य।

    विकल्प
    भोग में कुछ भी न बना हो तो खील-बताशे या मिश्री।
  8. ८दीपमालिका पूजन

    क्या करें
    ग्यारह, इक्कीस या उससे अधिक दीये एक थाली में जलाकर लक्ष्मी जी के पास रखें और उनकी पूजा करें।
    कैसे करें
    गीता प्रेस के अनुसार दीपों की ज्योति का "ॐ दीपावल्यै नमः" नाम-मंत्र से रोली, अक्षत और फूल से पूजन करें और नीचे की प्रार्थना पढ़ें। फिर अपने घर के आचार के अनुसार संतरा, ईख, सिंघाड़ा और खील चढ़ाएँ; खील गणेश जी, लक्ष्मी जी और सभी देवताओं को अर्पित की जाती है।
    भाव
    हर दीया अँधेरे पर उजाले की छोटी-सी जीत।
    पाठ

    त्वं ज्योतिस्त्वं रविश्चन्द्रो विद्युदग्निश्च तारकाः।
    सर्वेषां ज्योतिषां ज्योतिर्दीपावल्यै नमो नमः॥

    अर्थ: तुम ही ज्योति हो; तुम ही सूर्य, चंद्रमा, बिजली, अग्नि और तारे हो। सब ज्योतियों की ज्योति, दीपों की इस पंक्ति को बार-बार नमस्कार।

    स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन के अंतर्गत दीपमालिका-पूजन।

    विकल्प
    दीये कम हों तो पाँच या सात भी; भाव संख्या से बड़ा है।
  9. ९बही-खाता, कलम और तिजोरी

    क्या करें
    व्यापारी परिवारों में इस समय बही-खाते पर सरस्वती जी, कलम की, और तिजोरी पर कुबेर जी की पूजा होती है।
    कैसे करें
    गीता प्रेस के अनुसार बही और थैली पर रोली या केसर-चंदन से स्वस्तिक बनाएँ, थैली में हल्दी की पाँच गाँठें, धनिया, कमलगट्टा, अक्षत, दूर्वा और सिक्का रखें, और उस पर सरस्वती जी की पूजा करें। कलम पर मौली बाँधकर पूजें। तिजोरी या गल्ले पर स्वस्तिक बनाकर कुबेर जी का नाम-मंत्र से पूजन करें, और फिर वह थैली तिजोरी में रख दें।
    भाव
    मेहनत का हिसाब साफ़ रहे और कलम सच लिखे।
    पाठ

    ॐ वीणापुस्तकधारिण्यै श्रीसरस्वत्यै नमः।
    ॐ कुबेराय नमः।

    अर्थ: वीणा और पुस्तक धारण करने वाली श्री सरस्वती जी को नमस्कार। धन के रक्षक कुबेर जी को नमस्कार।

    स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन के अंग के रूप में दिए सरस्वती (बही-खाता) और कुबेर पूजन के नाम-मंत्र।

    विकल्प
    जो व्यापार नहीं करते, वे बच्चों की किताबें और कलम, या घर के हिसाब की बही रखकर पूजा कर सकते हैं, या यह चरण छोड़ दें।
  10. १०पूरे घर में दीये

    क्या करें
    पूजा के दीपों से बाकी दीये जलाकर पूरे घर को सजाएँ।
    कैसे करें
    गीता प्रेस के अनुसार अंत में सब दीपक जलाकर पूरा घर अलंकृत करें: मुख्य द्वार, आँगन, छत, रसोई, पानी रखने की जगह और तुलसी के पास। दीये परदों और पटाखों से दूर रखें, और बच्चों के साथ एक बड़ा व्यक्ति रहे।
    भाव
    घर का कोई कोना अँधेरा न रहे।
    विकल्प
    छोटे घर में द्वार, खिड़की और पूजा-स्थान पर कुछ दीये भी काफ़ी हैं।
  11. ११प्रधान आरती

    क्या करें
    पूरे परिवार के साथ पहले गणेश जी की और फिर "ॐ जय लक्ष्मी माता" से माँ लक्ष्मी की आरती करें।
    कैसे करें
    गीता प्रेस के अनुसार आरती की थाली में स्वस्तिक बनाकर, अक्षत-फूल के आसन पर घी की बत्ती और अलग पात्र में कपूर जलाएँ, थाली पर जल छिड़कें, और खड़े होकर परिवार के साथ घंटी बजाते हुए आरती गाएँ। आरती के बाद सबको आरती दें।
    भाव
    साल भर की कृपा के लिए पूरे घर का एक स्वर में धन्यवाद।
    विकल्प
    आरती न आती हो तो दीपक घुमाते हुए "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" बोलें।
    आरतीॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी मातापूरी माँ लक्ष्मी की आरती पढ़ें
  12. १२पुष्पांजलि, परिक्रमा और प्रार्थना

    क्या करें
    हाथों में फूल लेकर पुष्पांजलि दें, परिक्रमा करें और साष्टांग या हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
    कैसे करें
    गीता प्रेस की मंत्र-पुष्पांजलि में लक्ष्मी गायत्री भी पढ़ी जाती है। फूल माँ के चरणों में चढ़ाकर परिक्रमा करें; जगह न हो तो अपने स्थान पर घूमकर प्रणाम करें। फिर नीचे दी क्षमा-प्रार्थना पढ़ें।
    भाव
    जो बन पड़ा, सब माँ के चरणों में।
    पाठ

    ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

    अर्थ: हम महालक्ष्मी को जानते हैं, विष्णु-पत्नी का ध्यान करते हैं; वे लक्ष्मी हमें प्रेरणा दें।

    मंत्र का अर्थ और उच्चारण

    विकल्प
    अपने शब्दों में की गई प्रार्थना भी पूरी प्रार्थना है।

पूजा में पढ़े जाने वाले पाठ

लक्ष्मी

श्री सूक्त

लक्ष्मी · सूक्त · संस्कृत

लक्ष्मी जी का ध्यान; पूजा के बाद पूरा पाठ

भोग

  • खील (धान का लावा) और बताशे
  • लड्डू, बर्फ़ी या घर की बनी मिठाई
  • ईख (गन्ना), सिंघाड़ा, संतरा और मौसमी फल
  • गणेश जी के लिए लड्डू या मोदक
  • कई घरों में खीर या गुड़

गीता प्रेस के अनुसार दीपमालिका पूजन के बाद अपने घर के आचार के अनुसार संतरा, ईख, पानीफल (सिंघाड़ा) और धान का लावा (खील) चढ़ाया जाता है, और खील गणेश जी, महालक्ष्मी और सभी देवी-देवताओं को अर्पित की जाती है। पूजा के बाद यही प्रसाद परिवार, पड़ोसियों और घर में काम करने वालों में बाँटा जाता है।

प्रार्थना और समापन

हे माँ लक्ष्मी, हे गणेश जी, इस साल जो कुछ मिला, उसके लिए आभार। आने वाले साल में हमारे घर में ईमानदार कमाई, अच्छा स्वास्थ्य, आपसी प्रेम और सही निर्णय लेने की बुद्धि रहे। जिनके घर में आज दीया नहीं जला, उनके जीवन में भी उजाला हो। पूजा में जो कमी रही, उसे क्षमा करें।

क्षमा प्रार्थना

नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये।
या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्त्वदर्चनात्॥
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥

अर्थ: हे हरिप्रिया, आपको नमस्कार; आप सब देवताओं को वर देने वाली हैं। आपकी शरण में आए लोगों को जो गति मिलती है, आपकी इस पूजा से वही मुझे मिले। हे परमेश्वरी, मुझसे दिन-रात हज़ारों भूलें होती हैं; मुझे अपना सेवक मानकर क्षमा करें।

स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन (दीपावली) की क्षमा-प्रार्थना के दो श्लोक।

पूजा के बाद

  • आरती के बाद प्रसाद और खील-बताशे बाँटें; बड़ों को प्रणाम करें।
  • पूजा का मुख्य दीपक रात भर जलता रहे, ऐसी परंपरा है; उसे सुरक्षित जगह पर, परदों से दूर, पर्याप्त घी या तेल के साथ रखें। सुरक्षित न लगे तो सोने से पहले दीपक को अपने-आप शांत होने दें, या आदर से बुझा दें; इसमें डरने की कोई बात नहीं।
  • हल्दी, धनिया, कमलगट्टे और सिक्के वाली थैली तिजोरी में रख दें, जैसा गीता प्रेस बताती है।
  • गीता प्रेस के अनुसार नई गणेश-लक्ष्मी प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं होता; वे पूजा-स्थान में रहती हैं। पुरानी मिट्टी की मूर्तियाँ हों तो उन्हें आदर से घर में ही पानी की बाल्टी में घोलकर वह मिट्टी गमलों में डाल दें; धातु की मूर्तियाँ पूजा में रहती हैं।
  • अगले दिन फूल और पत्ते मिट्टी में डाल दें, और बचे हुए दीये धोकर अगले साल के लिए रख लें।

समय कम हो तो: छोटी विधि

  1. दिन में घर साफ़ करें, द्वार सजाएँ, शाम को स्नान करें।
  2. प्रदोष काल में चौकी पर लक्ष्मी-गणेश, सिक्के और दीयों की थाली सजाएँ।
  3. जल छिड़ककर पवित्रीकरण करें और परिवार की ओर से संकल्प लें।
  4. पहले गणेश जी, फिर लक्ष्मी जी और सिक्कों की पूजा करें।
  5. दीपमालिका पूजकर खील-बताशे चढ़ाएँ; व्यापारी बही-खाता और तिजोरी पूजें।
  6. पूरे घर में दीये जलाएँ।
  7. परिवार के साथ आरती, पुष्पांजलि और क्षमा-प्रार्थना करके प्रसाद बाँटें।

परंपराओं में अंतर

  • बंगाल, असम और ओडिशा के कई घरों में दीपावली की अमावस्या को काली पूजा होती है, और लक्ष्मी पूजा शरद पूर्णिमा (कोजागरी) को।
  • गुजरात और मारवाड़ी व्यापारी परिवारों में दीपावली पर नए बही-खातों की पूजा (चोपड़ा पूजन) होती है, और कई जगह नया साल अगले दिन से शुरू होता है।
  • दक्षिण भारत के कई हिस्सों में दीपावली का मुख्य दिन नरक चतुर्दशी की भोर है, जब तेल-स्नान होता है; वहाँ अमावस्या की लक्ष्मी पूजा उतनी केंद्रीय नहीं।
  • मूर्तियों का स्थान: गीता प्रेस लक्ष्मी जी को गणेश जी के दाहिने भाग में रखने को कहती है; कई घरों में बीच में लक्ष्मी जी, एक ओर गणेश जी और दूसरी ओर सरस्वती जी रखी जाती हैं।
  • कुछ परिवार हर साल नई मिट्टी की मूर्तियाँ लाते हैं, कुछ चाँदी या धातु की वही मूर्तियाँ हर साल पूजते हैं।
  • उपवास: कई घरों में दिन भर व्रत रखकर पूजा के बाद भोजन किया जाता है; द्रिक पंचांग भी इसे अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, फलाहार या दूध से रखने की बात कहता है। यह अपनी इच्छा और सेहत पर है।

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लक्ष्मी

लक्ष्मी पूजा विधि

लक्ष्मी · पूजा विधि · रोज़ की पूजा

शुक्रवार को घर में माँ लक्ष्मी की सरल पूजा: सफ़ाई, घी का दीपक, कमल या लाल फूल, कुमकुम, खीर या मिश्री का भोग, लक्ष्मी मंत्र, आरती और प्रार्थना।

माँ लक्ष्मी के लिए और

स्रोत और समीक्षा

  • गीता प्रेस, गोरखपुर: नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन: कार्तिक अमावस्या की पूजा; गणेश जी के दाहिने भाग में लक्ष्मी जी; घर की सफ़ाई और सायंकाल पूजा; द्रव्य-लक्ष्मी; पूर्व या उत्तर मुख; प्रोक्षण-श्लोक; उपचार-वाक्य; श्री सूक्त से ध्यान; सरस्वती (बही), लेखनी, कुबेर (तिजोरी) और दीपमालिका पूजन; खील और ऋतुफल; प्रधान आरती; मंत्र-पुष्पांजलि में लक्ष्मी गायत्री; क्षमा-प्रार्थना; नई प्रतिमाओं का विसर्जन न करना।
  • गीता प्रेस: नित्यकर्म-पूजाप्रकाश (दूसरी प्रति): दीपमालिका और कुबेर-सरस्वती पूजन के श्लोक और नाम-मंत्र इस साफ़ प्रति से मिलाए गए।
  • द्रिक पंचांग: दीवाली पूजा विधि: पूरी दीपावली पूजा के अंग; मुहूर्त से पहले पूजा शुरू करना; रात भर दीपक; क्षमता के अनुसार उपवास।
  • द्रिक पंचांग: लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल (सूर्यास्त से लगभग 2 घंटे 24 मिनट), स्थिर लग्न और वृषभ लग्न; महानिशीथ काल का मत; नवग्रह के साथ चौकी सजाने का विस्तृत रूप।
  • दैनिक भक्ति: लक्ष्मी गायत्री मंत्र और हिंदू कैलेंडर: मंत्र का पाठ और अर्थ यहीं के मंत्र पन्ने से; दीपावली की तारीख़ यहीं के कैलेंडर में।

समीक्षा (10 अक्टूबर 2026): Sequence and all quoted Sanskrit come from the Gita Press Nityakarma-Pujaprakash Shri Mahalakshmi-pujan (checked in two archive.org OCR copies): placement (Lakshmi to Ganesha's right), evening worship in a cleaned house, dravya-lakshmi on an ashtadal lotus, east/north facing, the apavitrah prokshan verse, Shri Sukta verse 1 at dhyana, upachara sentences with "ॐ महालक्ष्म्यै नमः", the Saraswati (bahi) and Kuber name-mantras, the dipmalika prayer "त्वं ज्योतिस्त्वं...", kheel and seasonal fruit, the family pradhan aarti, Lakshmi Gayatri in mantra-pushpanjali, the kshama verses (first and an inner pair of its list), and no visarjan for the new images. Pradosh kaal length, sthir/vrishabha lagna, the mahanishita view and the navagraha chauki from Drik Panchang's Lakshmi Puja muhurat page; starting before the muhurat, all-night lamp and fasting by capacity from Drik's Diwali puja vidhi. Lamps are the only item marked essential, since dipmalika is the festival itself. Safety notes added for lamps and fireworks.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दीपावली पूजा का सही समय क्या है?

सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल, जो लगभग 2 घंटे 24 मिनट रहता है; उसमें भी स्थिर लग्न (अक्सर वृषभ लग्न) का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह हर शहर में अलग होता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखें। पूरी विधि लंबी हो तो कुछ पहले शुरू कर दें, ताकि लक्ष्मी पूजन मुहूर्त में पड़े।

क्या हर साल नई मूर्ति लानी ज़रूरी है?

नहीं। बहुत-से घरों में नई मूर्ति लाने का चलन है, पर पुरानी धातु की मूर्ति, तस्वीर, या सुपारी (गणेश) और सिक्के (लक्ष्मी) से भी पूजा पूरी है। नई मूर्ति की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा कराना चाहें तो पुरोहित से कराएँ; घर की सरल पूजा में श्रद्धा से आवाहन काफ़ी है।

लक्ष्मी जी और गणेश जी को किस तरफ़ रखें?

गीता प्रेस की विधि में माँ लक्ष्मी को गणेश जी के दाहिने भाग में स्थापित करने को कहा गया है। कई परिवारों की अपनी पुरानी रीति अलग है, और वह भी ठीक है। सबसे ज़रूरी है कि दोनों की पूजा आदर और साफ़-सफ़ाई से हो।

क्या रात भर दीया जलाना ज़रूरी है?

पूजा का दीपक रात भर जलता रहे, यह परंपरा है। पर सुरक्षा पहले है: दीपक परदों और कपड़ों से दूर, हवा से बचा, पर्याप्त घी या तेल के साथ हो। सुरक्षित न लगे तो उसे अपने-आप शांत होने दें; इससे पूजा अधूरी नहीं होती और डरने की कोई बात नहीं।

पूजा कौन करे: घर का मुखिया ही?

घर का कोई भी सदस्य पूजा करा सकता है: पति, पत्नी, बेटा, बेटी या बुज़ुर्ग। सबसे अच्छा यह है कि पूरा परिवार साथ बैठे; एक व्यक्ति विधि करे और बाकी सब फूल, अक्षत और आरती में साथ दें।

पूजा करने वाली स्त्री को मासिक धर्म हो तो?

परिवारों की रीतियाँ अलग हैं। कई घरों में ऐसे में विधि कोई और सदस्य करता है और वे पास बैठकर प्रार्थना, आरती और दीये जलाने में साथ देती हैं; कई घर ऐसा भेद नहीं मानते। अपने घर की रीति और अपनी सुविधा के अनुसार चलें; इसमें अपराध-बोध की कोई बात नहीं।

पुरानी मूर्तियों का क्या करें?

गीता प्रेस के अनुसार दीपावली पर पूजी गई नई प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं होता; वे पूजा-स्थान में रहती हैं। पुरानी मिट्टी की मूर्तियाँ आदर से घर में पानी में घोलकर वह मिट्टी गमलों में डाली जा सकती है। नदी-तालाब में डालने से पानी गंदा होता है, इसलिए यह तरीका बेहतर है।

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इस विधि में कोई बात आपकी परंपरा से अलग हो, या कहीं गलती दिखे, तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को स्रोत से मिलाकर देखते हैं।

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