लक्ष्मी

पूजा विधि · लक्ष्मी · रोज़ की पूजा

लक्ष्मी पूजा विधि

शुक्रवार को घर में माँ लक्ष्मी की सरल पूजा: सफ़ाई, घी का दीपक, कमल या लाल फूल, कुमकुम, खीर या मिश्री का भोग, लक्ष्मी मंत्र, आरती और प्रार्थना।

इस पेज पर
  1. परिचय
  2. एक नज़र में
  3. कब करें
  4. सामग्री
  5. तैयारी
  6. चित्र या मूर्ति
  7. संकल्प
  8. चरण-दर-चरण विधि
  9. पाठ
  10. भोग
  11. समापन
  12. छोटी विधि
  13. परंपराओं में अंतर
  14. ये भी पढ़ें
  15. स्रोत
  16. सवाल-जवाब
  17. सुधार सुझाएँ
रोज़ की पूजा

यह पन्ना घर में शुक्रवार या रोज़ शाम की माँ लक्ष्मी की सरल पूजा बताता है। दीपावली की लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए अलग पन्ना है। श्री सूक्त के वैदिक मंत्रों से हवन या अभिषेक, श्री यंत्र की प्रतिष्ठा, तांत्रिक या दीक्षा से जुड़ी लक्ष्मी साधनाएँ, और वरलक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी या संतोषी माता जैसे व्रतों की अपनी कथा और विधि है; ये इस पन्ने में नहीं हैं, और विस्तृत अनुष्ठान किसी जानकार आचार्य के साथ करना ठीक है।

परिचय

माँ लक्ष्मी की पूजा का पहला अंग पूजा से पहले ही शुरू हो जाता है: घर की सफ़ाई। परंपरा में लक्ष्मी जी को स्वच्छता, प्रकाश और शांत, प्रेम भरे घर से जोड़ा जाता है, इसलिए साफ़ घर में शाम को जलाया गया दीपक ही उनकी सबसे सरल पूजा मानी जाती है।

शुक्रवार देवी का दिन है, और बहुत-से घर इस दिन लक्ष्मी जी की थोड़ी विस्तृत पूजा करते हैं। यहाँ दिया क्रम गीता प्रेस की नित्यकर्म-पूजाप्रकाश की "श्रीमहालक्ष्मी-पूजन" विधि पर आधारित है, घर के हिसाब से छोटा किया हुआ। इस पूजा का भाव समृद्धि की प्रार्थना के साथ-साथ जो पहले से मिला है, उसके लिए आभार है।

एक नज़र में

समय
शुक्रवार; सुबह स्नान के बाद, या शाम को दीपक जलाने के समय
अवधि
लगभग 20 मिनट; रोज़ शाम का दीपक और प्रणाम दो मिनट में
कौन कर सकता है
घर का कोई भी सदस्य; कई घरों में पूरा परिवार साथ बैठता है
मुख्य सामग्री
घी का दीपक, कमल या लाल-गुलाबी फूल, कुमकुम, अक्षत, सिक्का, खीर या मिश्री
आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता

पूजा कब करें

  • शुक्रवार माँ लक्ष्मी की पूजा और व्रत का दिन माना जाता है। यहीं के शुक्रवार व्रत वाले पन्ने पर इस दिन के अलग-अलग व्रतों की जानकारी है।
  • बहुत-से घरों में रोज़ शाम सूर्यास्त के समय पूजा-स्थान और मुख्य द्वार पर दीपक जलाया जाता है; इसे लक्ष्मी जी का स्मरण माना जाता है। जिस दिन विस्तृत पूजा न हो सके, उस दिन यही काफ़ी है।
  • दीपावली, धनतेरस, शरद पूर्णिमा (कोजागर पूजा) और वरलक्ष्मी व्रत लक्ष्मी पूजा के बड़े दिन हैं; इनकी तारीख़ें यहीं के व्रत पन्नों और कैलेंडर में हैं। दीपावली की पूजा के लिए अलग पन्ना है।

पूजा सामग्री

  • आवश्यक इसके बिना यह विधि नहीं होती
  • वैकल्पिक हो तो अच्छा; न हो तो विकल्प दिया है
  • परंपरा-विशेष कुछ परंपराओं में ही
सामग्रीउपयोगस्थितिविकल्प / टिप्पणी
घी का दीपकपूजा का प्रकाश; लक्ष्मी पूजा में दीपक का विशेष स्थान हैवैकल्पिकतिल या किसी भी तेल का दीपक उतना ही मान्य है। गीता प्रेस के अनुसार घी का दीपक दाईं ओर और तेल का बाईं ओर रखा जाता है।
माँ लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्तिपूजा का केंद्र; कमल पर बैठी लक्ष्मी जी की छवि सबसे प्रचलित हैवैकल्पिकन हो तो एक साफ़ थाली में चाँदी या कोई भी सिक्का रखकर उसकी पूजा करें; गीता प्रेस इसे "द्रव्य-लक्ष्मी" कहती है।
कमल का फूललक्ष्मी जी कमलासना हैं; गीता प्रेस यथासंभव लाल कमल से पूजा करने को कहती हैवैकल्पिकगुलाब, गुड़हल या कोई भी लाल-गुलाबी ताज़ा फूल।
कुमकुम या रोलीतिलक और अर्पणवैकल्पिकन हो तो हल्दी।
अक्षतकुमकुम में रँगे साबुत चावलवैकल्पिकगीता प्रेस लिखती है कि कुछ जगह अक्षत की जगह हल्दी या धनिया चढ़ाया जाता है।
केसर या चंदनगंध; विस्तृत पूजा में केसर मिले चंदन से आठ पंखुड़ियों का कमल बनाया जाता हैपरंपरा-विशेषरोली से कमल या स्वस्तिक भी बना सकते हैं; न हो तो छोड़ दें।
इत्रसुगंधवैकल्पिकधूप या अगरबत्ती से भी सुगंध अर्पित होती है।
लाल या गुलाबी चुनरीवस्त्र के रूप मेंवैकल्पिकमौली का एक धागा वस्त्र की जगह।
नैवेद्यखीर, मिश्री, मखाने, सफ़ेद मिठाई या गुड़वैकल्पिकगीता प्रेस लिखती है कि कई जगह भोग में गुड़ का प्रसाद दिया जाता है। थोड़ी मिश्री भी काफ़ी है।
कमलगट्टे की मालालक्ष्मी मंत्र के जाप के लिएपरंपरा-विशेषकिसी भी माला से या उंगलियों पर जाप करें।
शंखआरती के समय शंख-ध्वनिपरंपरा-विशेषघंटी या केवल ताली।

स्थान और अपनी तैयारी

  • पूजा से पहले घर, ख़ासकर रसोई, मुख्य द्वार और पूजा-स्थान की सफ़ाई कर लें, और द्वार के पास से जूते-चप्पल हटा दें।
  • स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। कई महिलाएँ इस दिन लाल, गुलाबी या सफ़ेद वस्त्र पहनना पसंद करती हैं; यह रीति है, नियम नहीं।
  • कई घरों में शुक्रवार को मुख्य द्वार पर रोली या रंगोली से स्वस्तिक या छोटे पद-चिह्न बनाए जाते हैं; यह स्वागत का भाव है।
  • गीता प्रेस की महालक्ष्मी पूजा पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठने को कहती है; घर की जगह के अनुसार बदलाव ठीक है।

चित्र या मूर्ति कैसे रखें

  • चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति रखें। कई घरों में साथ में गणेश जी या भगवान विष्णु (लक्ष्मी-नारायण) की तस्वीर भी रहती है।
  • गीता प्रेस की विधि में लक्ष्मी जी के पास एक पवित्र पात्र में केसर मिले चंदन से आठ पंखुड़ियों वाला कमल बनाकर उस पर सिक्के (द्रव्य-लक्ष्मी) रखे जाते हैं और दोनों की एक साथ पूजा होती है। शुक्रवार की पूजा में एक सिक्का भी काफ़ी है।
  • घी का दीपक दाईं ओर, धूप बाईं ओर, फूल और कुमकुम सामने, और भोग तस्वीर के ठीक सामने रखें।
  • दीपक सीधे ज़मीन पर न रखकर थोड़े अक्षत या एक छोटी थाली पर रखने का चलन है; इससे सफ़ाई भी बनी रहती है।

संकल्प

संकल्प का अर्थ है पूजा से पहले मन में साफ़ निश्चय करना। लक्ष्मी पूजा में संकल्प के साथ यह भी याद रखा जाता है कि समृद्धि की प्रार्थना ईमानदार कमाई और घर के सुख के लिए है।

हे माँ लक्ष्मी, आज शुक्रवार को मैं [अपना नाम] अपने परिवार के साथ श्रद्धा से आपकी पूजा कर रहा/रही हूँ। हमारे घर में मेहनत की कमाई, आपसी प्रेम और संतोष बना रहे, और जो मिला है उसका सही उपयोग करने की बुद्धि मिले।

विस्तृत पूजा में पुरोहित संस्कृत संकल्प बोलते हैं; घर की पूजा में अपनी भाषा का यह संकल्प काफ़ी है।

पूजा की विधि, चरण-दर-चरण

  1. १दीपक जलाकर आरंभ

    क्या करें
    पूजा की शुरुआत घी का दीपक जलाकर करें।
    कैसे करें
    दीपक लक्ष्मी जी की तस्वीर के दाईं ओर रखें और बाती ठीक कर लें, ताकि पूजा भर जलता रहे। शाम की पूजा हो तो इसी समय मुख्य द्वार पर भी एक दीपक रख दें।
    भाव
    जहाँ प्रकाश है, वहाँ लक्ष्मी हैं।
    विकल्प
    घी न हो तो तेल का दीपक।
  2. २आचमन, संकल्प और गणेश स्मरण

    क्या करें
    आचमन करें, संकल्प लें और गणेश जी को प्रणाम करें।
    कैसे करें
    दाहिनी हथेली में थोड़ा जल लेकर तीन बार पिएँ और हाथ धो लें। हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प बोलें। फिर हाथ जोड़कर "श्री गणेशाय नमः" कहें।
    भाव
    हर पूजा की शुरुआत विघ्नहर्ता से।
    विकल्प
    जल्दी हो तो मन में संकल्प करके सीधे ध्यान से शुरू करें।
  3. ३ध्यान

    क्या करें
    हाथ में फूल लेकर माँ लक्ष्मी के रूप का ध्यान करें।
    कैसे करें
    आँखें बंद करके कमल पर बैठी, लाल वस्त्र पहने, हाथों में कमल लिए माँ लक्ष्मी का रूप मन में लाएँ। नीचे का श्लोक पढ़कर फूल तस्वीर के सामने चढ़ा दें।
    भाव
    माँ मेरे घर में, मेरे सामने उपस्थित हैं।
    पाठ

    नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
    शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

    अर्थ: हे महामाया, श्रीपीठ पर विराजमान, देवताओं से पूजित, हाथों में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी, आपको नमस्कार।

    महालक्ष्म्यष्टकम्: पूरा पाठ और अर्थ

    विकल्प
    श्लोक कठिन लगे तो "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" कहकर रूप का स्मरण करें।
  4. ४स्नान और वस्त्र

    क्या करें
    जल अर्पित करें और चुनरी या मौली चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    धातु की मूर्ति हो तो एक कटोरी में रखकर जल से स्नान कराएँ और पोंछ दें; तस्वीर हो तो जल के कुछ छींटे दें। फिर लाल चुनरी ओढ़ाएँ या मौली का धागा चढ़ाएँ।
    भाव
    माँ की सेवा, घर की बेटी की तरह आदर से।
    पाठ

    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि॥
    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। वस्त्रं समर्पयामि॥

    अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं शुद्ध जल से स्नान अर्पित करता/करती हूँ। माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं वस्त्र अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: हर उपचार को देवता के नाम-मंत्र के साथ "समर्पयामि" कहकर अर्पित करने का प्रचलित ढंग। गीता प्रेस की नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के श्रीमहालक्ष्मी-पूजन में हर उपचार "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" के साथ इन्हीं शब्दों से अर्पित होता है।

    विकल्प
    चुनरी न हो तो यह उपचार मन से करें।
  5. ५कुमकुम, हल्दी और अक्षत

    क्या करें
    माँ को कुमकुम का तिलक लगाएँ और कुमकुम में रँगे अक्षत चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    अनामिका उंगली से कुमकुम लगाएँ, फिर थोड़े अक्षत। कई जगह अक्षत की जगह हल्दी या साबुत धनिया चढ़ाया जाता है। सिक्का रखा हो तो उस पर भी कुमकुम और अक्षत चढ़ाएँ।
    भाव
    सौभाग्य का रंग, सौभाग्य की देवी को।
    पाठ

    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। कुङ्कुमं समर्पयामि॥
    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। अक्षतान् समर्पयामि॥

    अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं कुमकुम अर्पित करता/करती हूँ। माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं अक्षत अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन के उपचार-वाक्य।

    विकल्प
    कुमकुम न हो तो हल्दी।
  6. ६कमल और फूल

    क्या करें
    कमल या लाल-गुलाबी फूल और माला चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    फूल ऊपर मुख करके चढ़ाएँ। कमल हो तो उसकी कली भी चढ़ाई जा सकती है; गीता प्रेस के अनुसार कलियाँ चढ़ाने का निषेध कमल पर लागू नहीं होता।
    भाव
    कीचड़ में खिलकर भी निर्मल रहने वाले कमल जैसा मन।
    पाठ

    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। पुष्पं पुष्पमालां च समर्पयामि॥

    अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं फूल और फूलों की माला अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन के उपचार-वाक्य।

    विकल्प
    फूल न हों तो अक्षत, या मन से फूल अर्पित करें।
  7. ७धूप और दीप

    क्या करें
    धूप दिखाएँ और दीपक की ज्योति अर्पित करें।
    कैसे करें
    धूप को माँ के सामने धीरे-धीरे घुमाकर रख दें, फिर जलता दीपक उठाकर दिखाएँ और यथास्थान रख दें। हाथ धो लें।
    भाव
    घर का हर कोना उजला रहे।
    पाठ

    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। धूपमाघ्रापयामि॥
    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। दीपं दर्शयामि॥

    अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं धूप की सुगंध अर्पित करता/करती हूँ। माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं दीपक की ज्योति दिखाता/दिखाती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के अनुसार।

    विकल्प
    धूप न हो तो केवल दीपक।
  8. ८खीर या मिश्री का भोग

    क्या करें
    माँ के सामने भोग रखें।
    कैसे करें
    भोग एक छोटी थाली में रखें, उसके चारों ओर थोड़ा जल घुमाएँ और कुछ क्षण आँखें बंद करके निवेदन करें। फिर एक बार जल चढ़ाकर आचमन अर्पित करें।
    भाव
    जो रसोई में बना, पहले माँ को।
    पाठ

    ॐ महालक्ष्म्यै नमः। नैवेद्यं निवेदयामि॥

    अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं यह भोग निवेदन करता/करती हूँ।

    स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन के उपचार-वाक्य।

    विकल्प
    थोड़ी मिश्री, गुड़ या एक फल भी भोग है।
  9. ९मंत्र जाप

    क्या करें
    कुछ देर लक्ष्मी गायत्री मंत्र या "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" का जाप करें।
    कैसे करें
    11, 21 या 108 बार, कमलगट्टे या किसी भी माला से या बिना माला के। उच्चारण धीमा और साफ़ रखें।
    भाव
    माँ के रूप का ध्यान, और साथ में कृतज्ञता।
    पाठ

    ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

    अर्थ: हम महालक्ष्मी को जानते हैं, विष्णु-पत्नी का ध्यान करते हैं; वे लक्ष्मी हमें प्रेरणा दें।

    मंत्र का अर्थ और उच्चारण

    विकल्प
    "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" भी प्रचलित है; कई परंपराओं में बीज मंत्र गुरु से लेकर जपे जाते हैं।
  10. १०स्तोत्र पाठ

    क्या करें
    समय हो तो लक्ष्मी जी का कोई स्तोत्र या चालीसा पढ़ें।
    कैसे करें
    शुक्रवार को महालक्ष्म्यष्टकम्, कनकधारा स्तोत्र, श्री सूक्त या लक्ष्मी चालीसा में से कोई एक, जो सहज लगे। एक पाठ ध्यान से करना कई पाठ जल्दी-जल्दी करने से अच्छा है।
    भाव
    माँ की स्तुति में मन लगाना।
    विकल्प
    पाठ का समय न हो तो यह चरण छोड़कर सीधे आरती करें।
  11. ११आरती

    क्या करें
    कपूर या घी के दीपक से "ॐ जय लक्ष्मी माता" गाकर आरती करें।
    कैसे करें
    आरती की थाली माँ के सामने घड़ी की सुई की दिशा में घुमाएँ। परिवार साथ गाए, घंटी या शंख बजे। आरती के बाद थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमा दें और सबको आरती दें।
    भाव
    पूरा घर एक स्वर में माँ के साथ।
    विकल्प
    आरती न आती हो तो दीपक घुमाते हुए "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" बोलें।
    आरतीॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी मातापूरी माँ लक्ष्मी की आरती पढ़ें
  12. १२प्रार्थना और प्रणाम

    क्या करें
    हाथ जोड़कर माँ से प्रार्थना करें, एक परिक्रमा करें और प्रणाम करें।
    कैसे करें
    नीचे का श्लोक पढ़ें या अपने शब्दों में प्रार्थना करें। परिक्रमा की जगह न हो तो अपने आसन पर ही घूमकर प्रणाम करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना पढ़ें।
    भाव
    माँ, प्रसन्न रहिए; आपकी कृपा से जो है, उसमें संतोष रहे।
    पाठ

    सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतरांशुकगन्धमाल्यशोभे।
    भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्॥

    अर्थ: हे कमल में निवास करने वाली, हाथ में कमल लिए, अत्यंत उजले वस्त्र, सुगंध और माला से शोभित भगवती, हे हरि की प्रिया, मन को भाने वाली, तीनों लोकों का कल्याण करने वाली माँ, मुझ पर प्रसन्न हों।

    स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन के अंत की प्रार्थना।

    विकल्प
    अपने शब्दों में की गई प्रार्थना भी उतनी ही सच्ची है।

पूजा में पढ़े जाने वाले पाठ

लक्ष्मी

श्री सूक्त

लक्ष्मी · सूक्त · संस्कृत

जो वैदिक पाठ सीखे हों, वे स्तोत्र पाठ में

भोग

  • चावल की खीर
  • मिश्री या बताशे
  • मखाने
  • सफ़ेद मिठाई, जैसे रसगुल्ला या बर्फ़ी
  • गुड़ और मौसमी फल

लक्ष्मी जी को सफ़ेद और मीठा भोग प्रिय माना जाता है; गीता प्रेस लिखती है कि कई जगह भोग में गुड़ भी दिया जाता है। घर में जो सात्विक मिठाई बने, वही भोग बन सकती है। भोग परिवार में बाँटें।

प्रार्थना और समापन

हे माँ लक्ष्मी, आपकी कृपा से जो मिला है, उसके लिए आभार। हमारे घर में ईमानदारी की कमाई हो, अन्न और जल की कमी न हो, और हम जो कुछ है उसे ज़रूरतमंदों के साथ बाँट सकें। पूजा में जो कमी रही हो, उसे क्षमा करें।

क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥

अर्थ: हे परमेश्वरी, न मैं आपको बुलाना जानता हूँ, न विदा करना, न पूजा की विधि; मुझे क्षमा करें। हे देवताओं की ईश्वरी, मेरी पूजा मंत्र, विधि और भक्ति में अधूरी है; फिर भी मैंने जो पूजा की है, वह आपकी कृपा से पूरी हो।

स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन की क्षमा-प्रार्थना।

पूजा के बाद

  • आरती के बाद सबको आरती दें और प्रसाद बाँटें।
  • शाम की पूजा हो तो दीपक को अपने-आप शांत होने दें; परंपरा में दीपक को फूँककर नहीं बुझाया जाता।
  • पूजा का सिक्का पर्स, तिजोरी या पूजा-स्थान में रख लें और अगली पूजा में फिर उसी की पूजा करें।
  • अगले दिन फूल उतारकर गमले या बगीचे की मिट्टी में डाल दें, और पूजा-स्थान साफ़ कर दें।

समय कम हो तो: छोटी विधि

  1. घर और पूजा-स्थान की सफ़ाई करें, स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें।
  2. घी का दीपक जलाएँ, संकल्प लें और गणेश जी को प्रणाम करें।
  3. माँ लक्ष्मी का ध्यान करें, जल और चुनरी अर्पित करें।
  4. कुमकुम, अक्षत और कमल या लाल फूल चढ़ाएँ।
  5. धूप-दीप दिखाएँ और खीर या मिश्री का भोग लगाएँ।
  6. लक्ष्मी मंत्र का जाप करें और "ॐ जय लक्ष्मी माता" से आरती करें।
  7. प्रार्थना और प्रणाम करके प्रसाद बाँटें।

परंपराओं में अंतर

  • संतोषी माता का शुक्रवार व्रत लक्ष्मी पूजा से अलग है: वह लगातार सोलह शुक्रवार रखा जाता है, उसमें खट्टी चीज़ें नहीं खाई जातीं और गुड़-चने का प्रसाद होता है। वैभव लक्ष्मी व्रत की भी अपनी कथा और विधि है।
  • दक्षिण भारत में श्रावण पूर्णिमा से पहले के शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत होता है, जिसमें कलश को देवी का रूप देकर सजाया और पूजा जाता है।
  • बंगाल और ओडिशा में शरद पूर्णिमा की कोजागरी लक्ष्मी पूजा घर-घर होती है, जिसमें लक्ष्मी जी की कथा (पांचाली) पढ़ी जाती है।
  • गीता प्रेस लिखती है कि कुछ जगह महालक्ष्मी को अक्षत की जगह हल्दी या धनिया और भोग में गुड़ चढ़ाया जाता है।
  • कई परिवार लक्ष्मी जी की पूजा अकेले नहीं, भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी-नारायण के रूप में करते हैं, और कई घरों में शुक्रवार को लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा होती है।

ये भी पढ़ें

लक्ष्मी

दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि

लक्ष्मी · पूजा विधि · त्योहार की पूजा

दीपावली की शाम घर में लक्ष्मी-गणेश पूजा: सफ़ाई, प्रदोष काल का समय, चौकी सजाना, गणेश पूजन, लक्ष्मी पूजन, दीपमालिका, बही-खाता, तिजोरी और आरती।

माँ लक्ष्मी के लिए और

स्रोत और समीक्षा

  • गीता प्रेस, गोरखपुर: नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन: पूजा का क्रम, पूर्व या उत्तर मुख बैठना, द्रव्य-लक्ष्मी और अष्टदल कमल, "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" के साथ उपचार-वाक्य, लाल कमल, अक्षत की जगह हल्दी-धनिया और गुड़ का भोग, "सरसिजनिलये" प्रार्थना और क्षमा-प्रार्थना; दीपक रखने का क्रम और कमल की कली का नियम।
  • गीता प्रेस: नित्यकर्म-पूजाप्रकाश (दूसरी प्रति): प्रार्थना और क्षमा-प्रार्थना के श्लोक इस साफ़ प्रति से मिलाए गए।
  • दैनिक भक्ति: लक्ष्मी गायत्री मंत्र और शुक्रवार व्रत: मंत्र का पाठ और अर्थ यहीं के मंत्र पन्ने से; शुक्रवार के व्रतों की जानकारी यहीं के व्रत पन्ने से।

समीक्षा (10 अक्टूबर 2026): Built on the Gita Press Nityakarma-Pujaprakash Shri Mahalakshmi-pujan (two archive.org OCR copies): east/north facing, dravya-lakshmi on an eight-petal lotus, upachara sentences with "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" (gandha, kumkum, akshat, pushpa-mala, dhoop, deep, naivedya), red lotus, the local custom of haldi/dhania for akshat and gud for bhog, the "सरसिजनिलये" prayer and the kshama-prarthana, all quoted as printed. Lamp placement and the lotus-bud exception from the same book. Dhyana verse is the first shloka of the mahalakshmi-ashtakam work as it now stands in texts/works. Lakshmi Gayatri from the site's mantra page. Santoshi Mata note matches the site's own Shukravar vrat text.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शुक्रवार की लक्ष्मी पूजा सुबह करें या शाम को?

दोनों ठीक हैं। सुबह स्नान के बाद पूजा करने का चलन भी है, और बहुत-से घरों में शाम को दीपक जलाने के समय लक्ष्मी जी की पूजा और आरती होती है। जिस समय पूरा परिवार शांति से बैठ सके, वही अच्छा समय है।

क्या लक्ष्मी पूजा करने से धन आता है?

परंपरा लक्ष्मी जी को समृद्धि की देवी मानती है, और उनकी पूजा कृतज्ञता, मेहनत और ईमानदार कमाई के भाव से जुड़ी है। पूजा को किसी निश्चित फल के सौदे की तरह न देखें। साफ़ घर, संयम से ख़र्च, बाँटने का मन और नियमित पूजा, यही इस पूजा का असली रूप है।

माँ लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति न हो तो?

गीता प्रेस की विधि में सिक्कों को "द्रव्य-लक्ष्मी" मानकर उनकी भी पूजा होती है। एक साफ़ थाली में सिक्का रखकर, या केवल घी का दीपक जलाकर उसके सामने पूजा कर सकते हैं।

क्या रोज़ लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ के लिए छोटा रूप काफ़ी है: शाम को दीपक, एक फूल, "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" और प्रणाम। शुक्रवार को ऊपर दिया पूरा क्रम करें।

पूजा के सिक्के का क्या करें?

दीपावली की पूजा के लिए गीता प्रेस पूजे हुए द्रव्य, हल्दी, धनिया और कमलगट्टे वाली थैली तिजोरी में रखने को कहती है। शुक्रवार की पूजा का सिक्का भी पर्स, तिजोरी या पूजा-स्थान में रखा जा सकता है और अगली पूजा में फिर उसी की पूजा हो सकती है।

शुक्रवार का व्रत कैसे रखें?

व्रत ज़रूरी नहीं; पूजा उसके बिना भी पूरी है। रखना चाहें तो फलाहार या एक समय भोजन, अपनी सेहत के अनुसार। बीमारी, गर्भावस्था या नियमित दवा में कठोर व्रत न रखें। ध्यान रखें कि संतोषी माता और वैभव लक्ष्मी के व्रतों के नियम अलग हैं।

सुधार सुझाएँ

इस विधि में कोई बात आपकी परंपरा से अलग हो, या कहीं गलती दिखे, तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को स्रोत से मिलाकर देखते हैं।

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