महालक्ष्म्यष्टकम्
लक्ष्मी · अष्टकम् · संस्कृत
ध्यान में पहला श्लोक; पूरा अष्टक आरती से पहले

यह पन्ना घर में शुक्रवार या रोज़ शाम की माँ लक्ष्मी की सरल पूजा बताता है। दीपावली की लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए अलग पन्ना है। श्री सूक्त के वैदिक मंत्रों से हवन या अभिषेक, श्री यंत्र की प्रतिष्ठा, तांत्रिक या दीक्षा से जुड़ी लक्ष्मी साधनाएँ, और वरलक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी या संतोषी माता जैसे व्रतों की अपनी कथा और विधि है; ये इस पन्ने में नहीं हैं, और विस्तृत अनुष्ठान किसी जानकार आचार्य के साथ करना ठीक है।
माँ लक्ष्मी की पूजा का पहला अंग पूजा से पहले ही शुरू हो जाता है: घर की सफ़ाई। परंपरा में लक्ष्मी जी को स्वच्छता, प्रकाश और शांत, प्रेम भरे घर से जोड़ा जाता है, इसलिए साफ़ घर में शाम को जलाया गया दीपक ही उनकी सबसे सरल पूजा मानी जाती है।
शुक्रवार देवी का दिन है, और बहुत-से घर इस दिन लक्ष्मी जी की थोड़ी विस्तृत पूजा करते हैं। यहाँ दिया क्रम गीता प्रेस की नित्यकर्म-पूजाप्रकाश की "श्रीमहालक्ष्मी-पूजन" विधि पर आधारित है, घर के हिसाब से छोटा किया हुआ। इस पूजा का भाव समृद्धि की प्रार्थना के साथ-साथ जो पहले से मिला है, उसके लिए आभार है।
| सामग्री | उपयोग | स्थिति | विकल्प / टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| घी का दीपक | पूजा का प्रकाश; लक्ष्मी पूजा में दीपक का विशेष स्थान है | वैकल्पिक | तिल या किसी भी तेल का दीपक उतना ही मान्य है। गीता प्रेस के अनुसार घी का दीपक दाईं ओर और तेल का बाईं ओर रखा जाता है। |
| माँ लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति | पूजा का केंद्र; कमल पर बैठी लक्ष्मी जी की छवि सबसे प्रचलित है | वैकल्पिक | न हो तो एक साफ़ थाली में चाँदी या कोई भी सिक्का रखकर उसकी पूजा करें; गीता प्रेस इसे "द्रव्य-लक्ष्मी" कहती है। |
| कमल का फूल | लक्ष्मी जी कमलासना हैं; गीता प्रेस यथासंभव लाल कमल से पूजा करने को कहती है | वैकल्पिक | गुलाब, गुड़हल या कोई भी लाल-गुलाबी ताज़ा फूल। |
| कुमकुम या रोली | तिलक और अर्पण | वैकल्पिक | न हो तो हल्दी। |
| अक्षत | कुमकुम में रँगे साबुत चावल | वैकल्पिक | गीता प्रेस लिखती है कि कुछ जगह अक्षत की जगह हल्दी या धनिया चढ़ाया जाता है। |
| केसर या चंदन | गंध; विस्तृत पूजा में केसर मिले चंदन से आठ पंखुड़ियों का कमल बनाया जाता है | परंपरा-विशेष | रोली से कमल या स्वस्तिक भी बना सकते हैं; न हो तो छोड़ दें। |
| इत्र | सुगंध | वैकल्पिक | धूप या अगरबत्ती से भी सुगंध अर्पित होती है। |
| लाल या गुलाबी चुनरी | वस्त्र के रूप में | वैकल्पिक | मौली का एक धागा वस्त्र की जगह। |
| नैवेद्य | खीर, मिश्री, मखाने, सफ़ेद मिठाई या गुड़ | वैकल्पिक | गीता प्रेस लिखती है कि कई जगह भोग में गुड़ का प्रसाद दिया जाता है। थोड़ी मिश्री भी काफ़ी है। |
| कमलगट्टे की माला | लक्ष्मी मंत्र के जाप के लिए | परंपरा-विशेष | किसी भी माला से या उंगलियों पर जाप करें। |
| शंख | आरती के समय शंख-ध्वनि | परंपरा-विशेष | घंटी या केवल ताली। |
संकल्प का अर्थ है पूजा से पहले मन में साफ़ निश्चय करना। लक्ष्मी पूजा में संकल्प के साथ यह भी याद रखा जाता है कि समृद्धि की प्रार्थना ईमानदार कमाई और घर के सुख के लिए है।
हे माँ लक्ष्मी, आज शुक्रवार को मैं [अपना नाम] अपने परिवार के साथ श्रद्धा से आपकी पूजा कर रहा/रही हूँ। हमारे घर में मेहनत की कमाई, आपसी प्रेम और संतोष बना रहे, और जो मिला है उसका सही उपयोग करने की बुद्धि मिले।
विस्तृत पूजा में पुरोहित संस्कृत संकल्प बोलते हैं; घर की पूजा में अपनी भाषा का यह संकल्प काफ़ी है।
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: हे महामाया, श्रीपीठ पर विराजमान, देवताओं से पूजित, हाथों में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी, आपको नमस्कार।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः। शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि॥
ॐ महालक्ष्म्यै नमः। वस्त्रं समर्पयामि॥
अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं शुद्ध जल से स्नान अर्पित करता/करती हूँ। माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं वस्त्र अर्पित करता/करती हूँ।
स्रोत: हर उपचार को देवता के नाम-मंत्र के साथ "समर्पयामि" कहकर अर्पित करने का प्रचलित ढंग। गीता प्रेस की नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के श्रीमहालक्ष्मी-पूजन में हर उपचार "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" के साथ इन्हीं शब्दों से अर्पित होता है।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः। कुङ्कुमं समर्पयामि॥
ॐ महालक्ष्म्यै नमः। अक्षतान् समर्पयामि॥
अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं कुमकुम अर्पित करता/करती हूँ। माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं अक्षत अर्पित करता/करती हूँ।
स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन के उपचार-वाक्य।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः। पुष्पं पुष्पमालां च समर्पयामि॥
अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं फूल और फूलों की माला अर्पित करता/करती हूँ।
स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन के उपचार-वाक्य।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः। धूपमाघ्रापयामि॥
ॐ महालक्ष्म्यै नमः। दीपं दर्शयामि॥
अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं धूप की सुगंध अर्पित करता/करती हूँ। माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं दीपक की ज्योति दिखाता/दिखाती हूँ।
स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के अनुसार।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः। नैवेद्यं निवेदयामि॥
अर्थ: माँ महालक्ष्मी को नमन; मैं यह भोग निवेदन करता/करती हूँ।
स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन के उपचार-वाक्य।
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
अर्थ: हम महालक्ष्मी को जानते हैं, विष्णु-पत्नी का ध्यान करते हैं; वे लक्ष्मी हमें प्रेरणा दें।
सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतरांशुकगन्धमाल्यशोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्॥
अर्थ: हे कमल में निवास करने वाली, हाथ में कमल लिए, अत्यंत उजले वस्त्र, सुगंध और माला से शोभित भगवती, हे हरि की प्रिया, मन को भाने वाली, तीनों लोकों का कल्याण करने वाली माँ, मुझ पर प्रसन्न हों।
स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन के अंत की प्रार्थना।
लक्ष्मी · अष्टकम् · संस्कृत
ध्यान में पहला श्लोक; पूरा अष्टक आरती से पहले
लक्ष्मी · स्तोत्र · संस्कृत
शुक्रवार को स्तोत्र पाठ में
लक्ष्मी · सूक्त · संस्कृत
जो वैदिक पाठ सीखे हों, वे स्तोत्र पाठ में
लक्ष्मी · चालीसा
हिंदी में सरल पाठ, आरती से पहले
लक्ष्मी जी को सफ़ेद और मीठा भोग प्रिय माना जाता है; गीता प्रेस लिखती है कि कई जगह भोग में गुड़ भी दिया जाता है। घर में जो सात्विक मिठाई बने, वही भोग बन सकती है। भोग परिवार में बाँटें।
हे माँ लक्ष्मी, आपकी कृपा से जो मिला है, उसके लिए आभार। हमारे घर में ईमानदारी की कमाई हो, अन्न और जल की कमी न हो, और हम जो कुछ है उसे ज़रूरतमंदों के साथ बाँट सकें। पूजा में जो कमी रही हो, उसे क्षमा करें।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥
अर्थ: हे परमेश्वरी, न मैं आपको बुलाना जानता हूँ, न विदा करना, न पूजा की विधि; मुझे क्षमा करें। हे देवताओं की ईश्वरी, मेरी पूजा मंत्र, विधि और भक्ति में अधूरी है; फिर भी मैंने जो पूजा की है, वह आपकी कृपा से पूरी हो।
स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, श्रीमहालक्ष्मी-पूजन की क्षमा-प्रार्थना।
लक्ष्मी · पूजा विधि · त्योहार की पूजा
दीपावली की शाम घर में लक्ष्मी-गणेश पूजा: सफ़ाई, प्रदोष काल का समय, चौकी सजाना, गणेश पूजन, लक्ष्मी पूजन, दीपमालिका, बही-खाता, तिजोरी और आरती।
लक्ष्मी · आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
समीक्षा (10 अक्टूबर 2026): Built on the Gita Press Nityakarma-Pujaprakash Shri Mahalakshmi-pujan (two archive.org OCR copies): east/north facing, dravya-lakshmi on an eight-petal lotus, upachara sentences with "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" (gandha, kumkum, akshat, pushpa-mala, dhoop, deep, naivedya), red lotus, the local custom of haldi/dhania for akshat and gud for bhog, the "सरसिजनिलये" prayer and the kshama-prarthana, all quoted as printed. Lamp placement and the lotus-bud exception from the same book. Dhyana verse is the first shloka of the mahalakshmi-ashtakam work as it now stands in texts/works. Lakshmi Gayatri from the site's mantra page. Santoshi Mata note matches the site's own Shukravar vrat text.
दोनों ठीक हैं। सुबह स्नान के बाद पूजा करने का चलन भी है, और बहुत-से घरों में शाम को दीपक जलाने के समय लक्ष्मी जी की पूजा और आरती होती है। जिस समय पूरा परिवार शांति से बैठ सके, वही अच्छा समय है।
परंपरा लक्ष्मी जी को समृद्धि की देवी मानती है, और उनकी पूजा कृतज्ञता, मेहनत और ईमानदार कमाई के भाव से जुड़ी है। पूजा को किसी निश्चित फल के सौदे की तरह न देखें। साफ़ घर, संयम से ख़र्च, बाँटने का मन और नियमित पूजा, यही इस पूजा का असली रूप है।
गीता प्रेस की विधि में सिक्कों को "द्रव्य-लक्ष्मी" मानकर उनकी भी पूजा होती है। एक साफ़ थाली में सिक्का रखकर, या केवल घी का दीपक जलाकर उसके सामने पूजा कर सकते हैं।
हाँ। रोज़ के लिए छोटा रूप काफ़ी है: शाम को दीपक, एक फूल, "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" और प्रणाम। शुक्रवार को ऊपर दिया पूरा क्रम करें।
दीपावली की पूजा के लिए गीता प्रेस पूजे हुए द्रव्य, हल्दी, धनिया और कमलगट्टे वाली थैली तिजोरी में रखने को कहती है। शुक्रवार की पूजा का सिक्का भी पर्स, तिजोरी या पूजा-स्थान में रखा जा सकता है और अगली पूजा में फिर उसी की पूजा हो सकती है।
व्रत ज़रूरी नहीं; पूजा उसके बिना भी पूरी है। रखना चाहें तो फलाहार या एक समय भोजन, अपनी सेहत के अनुसार। बीमारी, गर्भावस्था या नियमित दवा में कठोर व्रत न रखें। ध्यान रखें कि संतोषी माता और वैभव लक्ष्मी के व्रतों के नियम अलग हैं।
इस विधि में कोई बात आपकी परंपरा से अलग हो, या कहीं गलती दिखे, तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को स्रोत से मिलाकर देखते हैं।