वरलक्ष्मी व्रत 2027

वरलक्ष्मी व्रत 13 अगस्त 2027, शुक्रवार को है। यह श्रावण पूर्णिमा से पहले का शुक्रवार को आता है।

शुक्रवार13अगस्त 2027

गणेश और लक्ष्मी307 दिन बाद

वरलक्ष्मी व्रत 2027

श्रावण पूर्णिमा से पहले का शुक्रवार

आराध्य
माता वरलक्ष्मी

वरलक्ष्मी व्रत के बारे में

वरलक्ष्मी व्रत श्रावण महीने की पूर्णिमा से पहले के शुक्रवार को रखा जाता है; जिस साल पूर्णिमा ही शुक्रवार को हो, उस साल उसी दिन। वर यानी वरदान; वरलक्ष्मी वरदान देने वाली लक्ष्मी हैं।

दक्षिण भारत में सुहागिन महिलाएँ परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। कलश को देवी के रूप में सजाकर पूजा की जाती है और हाथ में पीला धागा बाँधा जाता है।

कब
श्रावण पूर्णिमा से पहले का शुक्रवार
अन्य नाम
वरलक्ष्मी व्रतम्, वरमहालक्ष्मी
आराध्य
माता वरलक्ष्मी
कहाँ
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र
व्रत का समय
दिन भर; पूजा सुबह या शाम
अगली बार
13 अगस्त 2027, शुक्रवार
पिछली बार
28 अगस्त 2026, शुक्रवार

व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।

वरलक्ष्मी व्रत: साल दर साल

वरलक्ष्मी व्रत की तारीख़ें
तारीख़साल
8अगस्तशुक्रवार
वरलक्ष्मी व्रत 2025
28अगस्तशुक्रवार
वरलक्ष्मी व्रत 2026
13अगस्तशुक्रवार
वरलक्ष्मी व्रत 2027
4अगस्तशुक्रवार
वरलक्ष्मी व्रत 2028
24अगस्तशुक्रवार
वरलक्ष्मी व्रत 2029
9अगस्तशुक्रवार
वरलक्ष्मी व्रत 2030
1अगस्तशुक्रवार
वरलक्ष्मी व्रत 2031
20अगस्तशुक्रवार
वरलक्ष्मी व्रत 2032

सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।

गणेश और लक्ष्मी

और व्रत

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वरलक्ष्मी व्रत 2027 में कब है?

वरलक्ष्मी व्रत 13 अगस्त 2027, शुक्रवार को है।

वरलक्ष्मी व्रत किस तिथि को आता है?

वरलक्ष्मी व्रत श्रावण पूर्णिमा से पहले का शुक्रवार को आता है।

वरलक्ष्मी व्रत किसका व्रत है?

वरलक्ष्मी व्रत माता वरलक्ष्मी से जुड़ा है। यह कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र में प्रचलित है।

वरलक्ष्मी व्रत 2028 में कब है?

वरलक्ष्मी व्रत 2028 में 4 अगस्त 2028, शुक्रवार को है।

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आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।

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तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।