दुर्गा पूजा विधि
दुर्गा · पूजा विधि · रोज़ की पूजा
नवरात्रि में घर पर रोज़ माँ दुर्गा की पूजा: दीपक या अखंड ज्योति, कलश, लाल चुनरी, लाल फूल, कुमकुम, दिन की देवी का स्मरण, पाठ, आरती और कन्या पूजन।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी ।तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ॥३॥
prathamaṃ śailaputrī ca dvitīyaṃ brahmacāriṇī |
tṛtīyaṃ candraghaṇṭeti kūṣmāṇḍeti caturthakam ||
अर्थ: माँ दुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री है और दूसरा ब्रह्मचारिणी। तीसरा रूप चन्द्रघण्टा कहलाता है और चौथा कूष्माण्डा।
पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च ।सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ॥४॥
pañcamaṃ skandamāteti ṣaṣṭhaṃ kātyāyanīti ca |
saptamaṃ kālarātrīti mahāgaurīti cāṣṭamam ||
अर्थ: पाँचवाँ रूप स्कन्दमाता है और छठा कात्यायनी। सातवाँ रूप कालरात्रि है और आठवाँ महागौरी।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः ।उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ॥५॥
navamaṃ siddhidātrī ca navadurgāḥ prakīrtitāḥ |
uktānyetāni nāmāni brahmaṇaiva mahātmanā ||
अर्थ: नौवाँ रूप सिद्धिदात्री है। ये नौ रूप नवदुर्गा कहे गए हैं। ये नाम स्वयं महात्मा ब्रह्मा जी ने बताए हैं।
"प्रथमं शैलपुत्री च" से शुरू होने वाले ये तीन श्लोक देवी कवच के तीसरे, चौथे और पाँचवें श्लोक हैं। देवी कवच दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले पढ़े जाने वाले अंगों में से एक है। इन श्लोकों में माँ दुर्गा के नौ रूपों के नाम क्रम से गिनाए गए हैं, और इन्हीं को नवदुर्गा कहा गया है।
कवच में ये श्लोक ब्रह्मा जी के वचन हैं, जो मार्कण्डेय मुनि के पूछने पर देवी का कवच बताते हैं। नवरात्रि में नौ दिनों तक इन्हीं नौ रूपों की एक-एक दिन पूजा की परंपरा इसी क्रम पर चलती है।
इन तीन श्लोकों में माँ दुर्गा के नौ रूप एक क्रम में गिनाए गए हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। श्लोक स्वयं कहता है कि इन्हें नवदुर्गा कहा गया है और ये नाम ब्रह्मा जी ने बताए हैं।
देवी कवच में इसके बाद देवी के रूपों और शक्तियों का स्मरण आता है और फिर शरीर के हर अंग की रक्षा के लिए देवी के अलग-अलग नामों से प्रार्थना। इस तरह ये नौ नाम पूरे कवच की नींव जैसे हैं: पहले देवी के रूपों को पहचानना, फिर उनकी शरण लेना।
नवरात्रि की परंपरा इसी क्रम को नौ दिनों में बाँटती है: पहले दिन शैलपुत्री से लेकर नौवें दिन सिद्धिदात्री तक। इसलिए ये श्लोक नवरात्रि की पूजा में बहुत पढ़े जाते हैं।
sanskritdocuments.org वाले पाठ की अंतिम पंक्ति इस कवच को मार्कण्डेय पुराण से जोड़ती है। देवी कवच मार्कण्डेय पुराण के देवी माहात्म्य (सप्तशती के तेरह अध्याय) से बाहर का अंग है, जो परंपरा से सप्तशती पाठ के साथ पढ़ा जाता है। कवच में ये नाम ब्रह्मा जी मार्कण्डेय मुनि को बताते हैं।
पाठ की जाँच (10 अक्टूबर 2026): श्लोक 3 से 5 sanskritdocuments.org के देवीकवचम् और drikpanchang.com के देवी कवचम् से शब्दशः मिलाए गए; दोनों में ये श्लोक एक जैसे हैं और श्लोक-संख्या भी एक ही है। पूरा कवच संदर्भ फ़ाइल में रखा गया है ताकि ये श्लोक अपनी जगह पर देखे जा सकें।
दुर्गा · पूजा विधि · रोज़ की पूजा
नवरात्रि में घर पर रोज़ माँ दुर्गा की पूजा: दीपक या अखंड ज्योति, कलश, लाल चुनरी, लाल फूल, कुमकुम, दिन की देवी का स्मरण, पाठ, आरती और कन्या पूजन।
दुर्गा · आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
दुर्गा · चालीसा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी
दुर्गा · स्तोत्र · संस्कृत
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
दुर्गा · स्तोत्र · संस्कृत
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्
दुर्गा · स्तुति · संस्कृत
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः
यह देवी कवच का तीसरा श्लोक है। चौथे और पाँचवें श्लोक के साथ मिलकर यह नवदुर्गा के नौ नाम पूरे करता है। देवी कवच दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले पढ़ा जाने वाला अंग है।
प्रचलित परंपरा इन्हीं श्लोकों के क्रम पर चलती है: पहले दिन शैलपुत्री, फिर ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री।
ये श्लोक नाम-स्मरण के लिए अलग से भी पढ़े जाते हैं। सप्तशती पाठ करने वाले परंपरा से पूरा कवच पढ़ते हैं; कौन-सा पाठ करें यह अपने समय और नियम पर निर्भर है।
पाँचवाँ श्लोक स्वयं कहता है कि ये नाम महात्मा ब्रह्मा जी ने बताए हैं। देवी कवच में ब्रह्मा जी मार्कण्डेय मुनि के प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं।
हाँ, "नौ देवियाँ" आम बोलचाल में इन्हीं नौ रूपों को कहा जाता है। ये सब एक ही माँ दुर्गा के रूप माने जाते हैं।
पाठ की किसी पंक्ति, शब्द या अर्थ में गलती दिखे तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को प्रामाणिक स्रोत से मिलाकर ही बदलते हैं, और मूल पाठ में अपनी ओर से कुछ नहीं जोड़ते।