नवदुर्गा

स्तोत्र · नवदुर्गा, दुर्गा · श्लोक

प्रथमं शैलपुत्री च (नवदुर्गा के नौ नाम)

देवी कवच के तीन श्लोक जिनमें माँ दुर्गा के नौ रूपों के नाम क्रम से आते हैं: शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक। मूल पाठ, अर्थ और शब्दार्थ।

इस पेज पर
  1. पूरा पाठ
  2. परिचय
  3. भावार्थ
  4. कब पढ़ें
  5. विधि
  6. रचयिता और स्रोत
  7. ये भी पढ़ें
  8. सवाल-जवाब
  9. सुधार सुझाएँ

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी ।तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ॥३॥

prathamaṃ śailaputrī ca dvitīyaṃ brahmacāriṇī |
tṛtīyaṃ candraghaṇṭeti kūṣmāṇḍeti caturthakam ||

अर्थ: माँ दुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री है और दूसरा ब्रह्मचारिणी। तीसरा रूप चन्द्रघण्टा कहलाता है और चौथा कूष्माण्डा।

प्रथमं
पहला
शैलपुत्री
पर्वतराज हिमालय की पुत्री
द्वितीयं
दूसरा
ब्रह्मचारिणी
तप का आचरण करने वाली
तृतीयं
तीसरा
चन्द्रघण्टा
जिनके मस्तक पर घण्टे के आकार का अर्धचन्द्र है
कूष्माण्डा
देवी का चौथा रूप, जिन्हें परंपरा सृष्टि के आरम्भ से जोड़ती है
चतुर्थकम्
चौथा

पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च ।सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ॥४॥

pañcamaṃ skandamāteti ṣaṣṭhaṃ kātyāyanīti ca |
saptamaṃ kālarātrīti mahāgaurīti cāṣṭamam ||

अर्थ: पाँचवाँ रूप स्कन्दमाता है और छठा कात्यायनी। सातवाँ रूप कालरात्रि है और आठवाँ महागौरी।

पञ्चमं
पाँचवाँ
स्कन्दमाता
स्कन्द (कार्तिकेय) की माता
षष्ठं
छठा
कात्यायनी
महर्षि कात्यायन के नाम से जुड़ा देवी का रूप
सप्तमं
सातवाँ
कालरात्रि
देवी का उग्र रूप, जो अंधकार और भय का नाश करता है
महागौरी
अत्यंत उजले, गौर वर्ण वाली
अष्टमम्
आठवाँ

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः ।उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ॥५॥

navamaṃ siddhidātrī ca navadurgāḥ prakīrtitāḥ |
uktānyetāni nāmāni brahmaṇaiva mahātmanā ||

अर्थ: नौवाँ रूप सिद्धिदात्री है। ये नौ रूप नवदुर्गा कहे गए हैं। ये नाम स्वयं महात्मा ब्रह्मा जी ने बताए हैं।

नवमं
नौवाँ
सिद्धिदात्री
सिद्धियाँ देने वाली
नवदुर्गाः
दुर्गा के नौ रूप
प्रकीर्तिताः
कहे गए हैं
उक्तानि
बताए गए
ब्रह्मणा एव
ब्रह्मा जी ने ही
महात्मना
महान आत्मा वाले

परिचय

"प्रथमं शैलपुत्री च" से शुरू होने वाले ये तीन श्लोक देवी कवच के तीसरे, चौथे और पाँचवें श्लोक हैं। देवी कवच दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले पढ़े जाने वाले अंगों में से एक है। इन श्लोकों में माँ दुर्गा के नौ रूपों के नाम क्रम से गिनाए गए हैं, और इन्हीं को नवदुर्गा कहा गया है।

कवच में ये श्लोक ब्रह्मा जी के वचन हैं, जो मार्कण्डेय मुनि के पूछने पर देवी का कवच बताते हैं। नवरात्रि में नौ दिनों तक इन्हीं नौ रूपों की एक-एक दिन पूजा की परंपरा इसी क्रम पर चलती है।

भावार्थ

इन तीन श्लोकों में माँ दुर्गा के नौ रूप एक क्रम में गिनाए गए हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। श्लोक स्वयं कहता है कि इन्हें नवदुर्गा कहा गया है और ये नाम ब्रह्मा जी ने बताए हैं।

देवी कवच में इसके बाद देवी के रूपों और शक्तियों का स्मरण आता है और फिर शरीर के हर अंग की रक्षा के लिए देवी के अलग-अलग नामों से प्रार्थना। इस तरह ये नौ नाम पूरे कवच की नींव जैसे हैं: पहले देवी के रूपों को पहचानना, फिर उनकी शरण लेना।

नवरात्रि की परंपरा इसी क्रम को नौ दिनों में बाँटती है: पहले दिन शैलपुत्री से लेकर नौवें दिन सिद्धिदात्री तक। इसलिए ये श्लोक नवरात्रि की पूजा में बहुत पढ़े जाते हैं।

यह श्लोक कब पढ़ा जाता है

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि में, पूजा के आरम्भ में नौ रूपों के स्मरण के लिए
  • दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले, देवी कवच के भाग के रूप में
  • रोज़ की देवी पूजा या दुर्गाष्टमी पर, नवदुर्गा के नाम-स्मरण के लिए

पढ़ने की विधि

  • स्नान के बाद माँ दुर्गा के चित्र या प्रतिमा के सामने दीप जलाकर शांत मन से बैठें।
  • तीनों श्लोक धीरे-धीरे पढ़ें और हर नाम के साथ उस रूप का मन में स्मरण करें।
  • नवरात्रि में जिस दिन जिस रूप की पूजा हो, उस दिन उसका नाम लेते समय थोड़ा रुककर प्रणाम कर सकते हैं।
  • संस्कृत उच्चारण कठिन लगे तो पहले अर्थ पढ़ लें; भाव के साथ किया गया सरल पाठ भी पूरा है।
पूरी विधिदुर्गा पूजा विधिनवरात्रि में घर पर रोज़ माँ दुर्गा की पूजा: दीपक या अखंड ज्योति, कलश, लाल चुनरी, लाल फूल, कुमकुम, दिन की देवी का स्मरण, पाठ, आरती और कन्या पूजन।

रचयिता और स्रोत

रचयिता
ज्ञात नहीं
ग्रंथ / स्रोत
देवी कवच (दुर्गा सप्तशती के आरम्भिक अंग), श्लोक 3 से 5
भाषा
संस्कृत

sanskritdocuments.org वाले पाठ की अंतिम पंक्ति इस कवच को मार्कण्डेय पुराण से जोड़ती है। देवी कवच मार्कण्डेय पुराण के देवी माहात्म्य (सप्तशती के तेरह अध्याय) से बाहर का अंग है, जो परंपरा से सप्तशती पाठ के साथ पढ़ा जाता है। कवच में ये नाम ब्रह्मा जी मार्कण्डेय मुनि को बताते हैं।

पाठ की जाँच (10 अक्टूबर 2026): श्लोक 3 से 5 sanskritdocuments.org के देवीकवचम् और drikpanchang.com के देवी कवचम् से शब्दशः मिलाए गए; दोनों में ये श्लोक एक जैसे हैं और श्लोक-संख्या भी एक ही है। पूरा कवच संदर्भ फ़ाइल में रखा गया है ताकि ये श्लोक अपनी जगह पर देखे जा सकें।

ये भी पढ़ें

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नवदुर्गा के लिए और

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

"प्रथमं शैलपुत्री च" श्लोक कहाँ से है?

यह देवी कवच का तीसरा श्लोक है। चौथे और पाँचवें श्लोक के साथ मिलकर यह नवदुर्गा के नौ नाम पूरे करता है। देवी कवच दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले पढ़ा जाने वाला अंग है।

नवरात्रि में किस दिन किस देवी की पूजा होती है?

प्रचलित परंपरा इन्हीं श्लोकों के क्रम पर चलती है: पहले दिन शैलपुत्री, फिर ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री।

क्या केवल ये तीन श्लोक पढ़ सकते हैं, या पूरा देवी कवच पढ़ना होगा?

ये श्लोक नाम-स्मरण के लिए अलग से भी पढ़े जाते हैं। सप्तशती पाठ करने वाले परंपरा से पूरा कवच पढ़ते हैं; कौन-सा पाठ करें यह अपने समय और नियम पर निर्भर है।

इन श्लोकों में नवदुर्गा के नाम किसने बताए हैं?

पाँचवाँ श्लोक स्वयं कहता है कि ये नाम महात्मा ब्रह्मा जी ने बताए हैं। देवी कवच में ब्रह्मा जी मार्कण्डेय मुनि के प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं।

नवदुर्गा और नौ देवियाँ क्या एक ही हैं?

हाँ, "नौ देवियाँ" आम बोलचाल में इन्हीं नौ रूपों को कहा जाता है। ये सब एक ही माँ दुर्गा के रूप माने जाते हैं।

सुधार सुझाएँ

पाठ की किसी पंक्ति, शब्द या अर्थ में गलती दिखे तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को प्रामाणिक स्रोत से मिलाकर ही बदलते हैं, और मूल पाठ में अपनी ओर से कुछ नहीं जोड़ते।

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