सीता

स्तोत्र · सीता · श्लोक

उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं (सीता वन्दना)

रामचरितमानस के आरम्भ का माँ सीता को प्रणाम करने वाला श्लोक: सृष्टि, पालन और संहार करने वाली रामवल्लभा सीता की वन्दना। पाठ और अर्थ।

इस पेज पर
  1. पूरा पाठ
  2. परिचय
  3. भावार्थ
  4. कब पढ़ें
  5. विधि
  6. रचयिता और स्रोत
  7. ये भी पढ़ें
  8. सवाल-जवाब
  9. सुधार सुझाएँ

उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम् ।सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम् ॥५॥

udbhavasthitisaṃhārakāriṇīṃ kleśahāriṇīm |
sarvaśreyaskarīṃ sītāṃ nato’haṃ rāmavallabhām ||

अर्थ: जो उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली हैं, जो सब क्लेशों को हरने वाली हैं और सब प्रकार का कल्याण करने वाली हैं, श्री रामचन्द्र जी की प्रिया उन सीता जी को मैं प्रणाम करता हूँ।

उद्भव
उत्पत्ति, सृष्टि
स्थिति
पालन
संहार
नाश, लय
क्लेशहारिणीम्
दुःख-क्लेश हरने वाली
सर्वश्रेयस्करीं
सब कल्याण करने वाली
नतोऽहं
मैं प्रणाम करता हूँ
रामवल्लभाम्
श्री राम की प्रिया

परिचय

यह श्लोक गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के बालकाण्ड के आरम्भ में आता है। मानस के पहले सात श्लोक संस्कृत में हैं: पहले छह में तुलसीदास जी वाणी-विनायक, भवानी-शंकर, गुरु, वाल्मीकि-हनुमान, सीता जी और श्री राम की वन्दना करते हैं, और सातवें में ग्रंथ का उद्देश्य बताते हैं। यह पाँचवाँ श्लोक माँ सीता की वन्दना है।

इसमें सीता जी को केवल राम की पत्नी के रूप में नहीं, बल्कि सृष्टि, पालन और संहार करने वाली शक्ति के रूप में प्रणाम किया गया है, जो क्लेश हरती हैं और सब तरह का कल्याण करती हैं।

भावार्थ

तुलसीदास जी रामकथा शुरू करने से पहले माँ सीता को प्रणाम करते हैं। उद्भव, स्थिति और संहार, यानी सृष्टि को रचना, चलाना और समेटना: ये तीनों काम सामान्य रूप से ब्रह्मा, विष्णु और शिव से जोड़े जाते हैं। यहाँ ये तीनों सीता जी के बताए गए हैं, यानी वे श्री राम की आदिशक्ति हैं।

फिर भी श्लोक का अंत बहुत आत्मीय है: "रामवल्लभाम्", राम की प्यारी। जो इतनी बड़ी शक्ति हैं, वही भक्त के क्लेश हरती हैं और उसका हर तरह से भला करती हैं। इसी भाव से भक्त उन्हें प्रणाम करता है।

यह श्लोक कब पढ़ा जाता है

  • सीता नवमी (जानकी जयंती) पर
  • विवाह पंचमी पर
  • रामचरितमानस या सुंदरकाण्ड का पाठ शुरू करते समय
  • राम-सीता की रोज़ की पूजा में

पढ़ने की विधि

  • राम-सीता के चित्र के सामने हाथ जोड़कर यह श्लोक पढ़ें।
  • मानस-पाठ की परंपरा में आरम्भ के सातों श्लोक क्रम से पढ़े जाते हैं; अकेले सीता जी के स्मरण के लिए यह श्लोक भी पढ़ा जा सकता है।
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रचयिता और स्रोत

रचयिता
गोस्वामी तुलसीदास
ग्रंथ / स्रोत
रामचरितमानस, बालकाण्ड, आरम्भ के श्लोक (श्लोक 5)
भाषा
संस्कृत

यह श्लोक तुलसीदास जी के रामचरितमानस (बालकाण्ड) के मंगलाचरण का अंश है।

sa.wikisource.org के बालकाण्ड पाठ और hi.wikisource.org पर छपे रामचरितमानस (पृष्ठ ५३) दोनों में यह श्लोक 5 के रूप में है।

पाठ की जाँच (10 अक्टूबर 2026): श्लोक sa.wikisource.org के बालकाण्ड पाठ और hi.wikisource.org पर रामचरितमानस की छपी पुस्तक के पृष्ठ ५३ (प्रूफ़ किया गया पृष्ठ) से मिलाया गया; दोनों में शब्द एक जैसे हैं। hi.wikisource.org पर रामनरेश त्रिपाठी वाले संस्करण (पृष्ठ २१) में भी यही पाठ है, केवल "नतोहं" में अवग्रह नहीं छपा।

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माँ सीता के लिए और

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह श्लोक रामचरितमानस में कहाँ है?

बालकाण्ड के बिल्कुल आरम्भ में, मंगलाचरण के सात संस्कृत श्लोकों में यह पाँचवाँ है। इससे पहले वाल्मीकि-हनुमान की और इसके बाद श्री राम की वन्दना है।

"उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं" का अर्थ क्या है?

उद्भव यानी उत्पत्ति, स्थिति यानी पालन, संहार यानी लय। सीता जी को इन तीनों को करने वाली शक्ति कहा गया है।

क्या यह तुलसीदास जी की रचना है?

हाँ। रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास की रचना है, और यह श्लोक उसके बालकाण्ड के आरम्भ का भाग है।

सीता नवमी पर क्या यह श्लोक पढ़ सकते हैं?

हाँ, सीता नवमी और विवाह पंचमी पर माँ सीता के स्मरण के लिए यह श्लोक पढ़ा जाता है। इसके साथ आरम्भ के बाकी श्लोक भी पढ़े जा सकते हैं।

सुधार सुझाएँ

पाठ की किसी पंक्ति, शब्द या अर्थ में गलती दिखे तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को प्रामाणिक स्रोत से मिलाकर ही बदलते हैं, और मूल पाठ में अपनी ओर से कुछ नहीं जोड़ते।

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