राम

पूजा विधि · राम · रोज़ की पूजा

श्री राम पूजा विधि

घर में श्री राम और राम दरबार की सरल पूजा: ध्यान, तुलसी, भोग, राम-नाम जप, रामचरितमानस पाठ, आरती और क्षमा प्रार्थना, हर सामग्री के विकल्प के साथ।

इस पेज पर
  1. परिचय
  2. एक नज़र में
  3. कब करें
  4. सामग्री
  5. तैयारी
  6. चित्र या मूर्ति
  7. संकल्प
  8. चरण-दर-चरण विधि
  9. पाठ
  10. भोग
  11. समापन
  12. छोटी विधि
  13. परंपराओं में अंतर
  14. ये भी पढ़ें
  15. स्रोत
  16. सवाल-जवाब
  17. सुधार सुझाएँ
रोज़ की पूजा

यह घर में श्री राम (राम दरबार) की रोज़ की सरल पूजा है: ध्यान, जल, चंदन, फूल, तुलसी, धूप-दीप, भोग, राम-नाम का जप, रामचरितमानस का पाठ और आरती। राम नवमी पर यही पूजा दोपहर में जन्म-उत्सव के साथ की जाती है। अखंड रामायण का विधिवत अनुष्ठान, यज्ञ-हवन और किसी संप्रदाय की दीक्षा से मिले राम-मंत्र की साधना यहाँ नहीं हैं; उनके लिए किसी जानकार या पुरोहित से मार्गदर्शन लें।

परिचय

घरों में श्री राम की पूजा प्रायः राम दरबार के रूप में होती है: बीच में श्री राम, उनकी बाईं ओर माता सीता, दाहिनी ओर लक्ष्मण जी और चरणों में हनुमान जी। इसलिए राम जी की पूजा में सीता जी, लक्ष्मण जी और हनुमान जी का भी स्मरण होता है। राम भगवान विष्णु के अवतार हैं, इसलिए वैष्णव रीत में उनके भोग में भी तुलसीदल रखा जाता है।

राम जी की उपासना की सबसे सरल और सबसे प्रचलित राह राम-नाम है, और घर-घर में इसका साथी है गोस्वामी तुलसीदास का रामचरितमानस। रोज़ की पूजा में कुछ चौपाइयाँ पढ़ लेना, या केवल 'श्री राम जय राम जय जय राम' का जप करना भी पूरी श्रद्धा की पूजा है। नीचे हर चरण के साथ उसका छोटा रूप भी दिया है।

एक नज़र में

समय
सुबह स्नान के बाद या शाम को; राम नवमी पर दोपहर में
अवधि
लगभग 20–30 मिनट; मानस पाठ अपनी इच्छा से
कौन कर सकता है
कोई भी श्रद्धा रखने वाला: स्त्री, पुरुष, बच्चे, बुज़ुर्ग
मुख्य सामग्री
राम दरबार का चित्र, तुलसीदल, फूल, चंदन, घी का दीपक, भोग, रामचरितमानस
आरती
अपने घर की राम-आरती; जैसे 'ऐसी आरती राम रघुबीर की' या 'श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन'

पूजा कब करें

  • रोज़ सुबह स्नान के बाद या शाम को दीपक के समय। कई घरों में मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी के साथ राम जी की पूजा और सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से होता है।
  • राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी) श्री राम का जन्म-दिवस है; जन्म दोपहर में माना जाता है, इसलिए उस दिन मुख्य पूजा मध्याह्न में होती है। तारीख़ साइट के राम नवमी पन्ने पर है।
  • विवाह पंचमी (मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी) को राम-सीता विवाह का उत्सव होता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में कई घर रामचरितमानस का नौ दिन का पाठ (नवाह्न पारायण) करते हैं।

पूजा सामग्री

  • आवश्यक इसके बिना यह विधि नहीं होती
  • वैकल्पिक हो तो अच्छा; न हो तो विकल्प दिया है
  • परंपरा-विशेष कुछ परंपराओं में ही
सामग्रीउपयोगस्थितिविकल्प / टिप्पणी
राम दरबार या श्री राम का चित्र या मूर्तिपूजा का केंद्रवैकल्पिकचित्र न हो तो दीपक जलाकर उसके सामने बैठें और मन में राम दरबार का ध्यान करें।
तुलसीदलफूलों के साथ चढ़ाने और भोग पर रखने के लिएपरंपरा-विशेषवैष्णव रीत में राम जी के भोग में तुलसी रखी जाती है। न मिले तो मन से अर्पित करें; पूजा पूरी है।
शुद्ध जल का लोटाआचमन, स्नान और अर्घ्य के लिएवैकल्पिकगंगाजल हो तो कुछ बूँदें मिला लें; न हो तो साफ़ जल।
फूल और फूलमालापुष्प अर्पणवैकल्पिकजो भी ताज़ा फूल मिले; कमल मिले तो बहुत सुंदर, पर ज़रूरी नहीं।
चंदन, रोली और अक्षततिलक और अर्पण के लिएवैकल्पिकजो एक-दो चीज़ें हों, वही।
घी का दीपक और धूपदीप-धूप और आरती के लिएवैकल्पिकघी न हो तो तिल के तेल का दीपक।
भोग: फल, मिठाई, खीर, पंचामृतनैवेद्य के लिएवैकल्पिककुछ न हो तो गुड़ या मिश्री और जल।
रामचरितमानस की पोथी या गुटकापाठ के लिएवैकल्पिकपोथी न हो तो जो चौपाई या दोहा याद हो, वही; या केवल राम-नाम।
छोटा पीला वस्त्र या मौलीवस्त्र अर्पण के लिएवैकल्पिकन हो तो मन से अर्पित करें।
घंटी और शंखपूजा के आरंभ और आरती मेंवैकल्पिकन हों तो कोई बात नहीं।

स्थान और अपनी तैयारी

  • घर का पूजा-स्थान साफ़ करें। स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें और आसन पर बैठें।
  • रामचरितमानस की पोथी को साफ़ कपड़े में लपेटकर ऊँचे स्थान पर रखने की रीत है; पढ़ते समय उसे चौकी या रेहल पर रखें, ज़मीन पर नहीं।
  • पूजा से पहले कुछ पल चुप बैठकर मन को शांत करें।

चित्र या मूर्ति कैसे रखें

  • चौकी पर लाल या पीला साफ़ कपड़ा बिछाकर राम दरबार का चित्र या मूर्ति रखें। राम दरबार में श्री राम बीच में, माता सीता उनकी बाईं ओर, लक्ष्मण जी दाहिनी ओर और हनुमान जी चरणों के पास होते हैं।
  • पूजा करने वाले की दाहिनी ओर घी का दीपक और बाईं ओर जल का कलश व धूप रहे; फूल, चंदन और तुलसी सामने; भोग भगवान के ठीक सामने।
  • पूजा करने वाले का मुख आमतौर पर पूर्व या उत्तर की ओर रखा जाता है; घर की बनावट से संभव न हो तो जैसा सुविधाजनक हो। दिशा के बारे में परंपराओं में अंतर है।

संकल्प

पूजा से पहले मन में निश्चय करना कि किसकी, किस भाव से पूजा कर रहे हैं। दाहिने हाथ में थोड़ा जल, फूल और अक्षत लेकर संकल्प बोलें और जल थाली में छोड़ दें।

हे श्री राम, आज (दिन का नाम) को मैं (अपना नाम) अपने परिवार के साथ आपकी, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी की प्रसन्नता के लिए यह पूजा कर रहा/रही हूँ। मेरी इस सेवा को स्वीकार करें।

विस्तृत संस्कृत संकल्प में संवत्, मास, तिथि, स्थान और गोत्र बोले जाते हैं; किसी अनुष्ठान में यह पुरोहित करवाते हैं। रोज़ की पूजा में अपनी भाषा का यह संकल्प काफ़ी है।

पूजा की विधि, चरण-दर-चरण

  1. १शुद्धि और दीपक

    क्या करें
    हाथ-मुँह शुद्ध करके घी का दीपक जलाएँ।
    कैसे करें
    थोड़ा जल लेकर तीन बार आचमन करें या हाथ धो लें, अपने ऊपर और सामग्री पर जल छिड़कें। फिर दीपक जलाकर अपनी दाहिनी ओर रखें और घंटी बजाएँ।
    भाव
    मर्यादा पुरुषोत्तम के सामने साफ़ तन और शांत मन से बैठना।
    विकल्प
    आचमन न कर सकें तो हाथ धोकर राम-नाम लेते हुए बैठ जाएँ।
  2. २संकल्प

    क्या करें
    हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर ऊपर दिया सरल संकल्प बोलें।
    कैसे करें
    संकल्प बोलकर जल और फूल थाली में या भगवान के चरणों के पास छोड़ दें।
    भाव
    यह पूजा राम जी और उनके परिवार के लिए है।
    विकल्प
    शब्द याद न रहें तो मन में कहें: हे राम, यह पूजा आपके लिए है।
  3. ३राम दरबार का ध्यान

    क्या करें
    आँखें बंद करके राम दरबार का ध्यान करें।
    कैसे करें
    हाथ में फूल लेकर नीचे का श्लोक पढ़ें और फूल चरणों में रख दें।
    भाव
    बीच में श्री राम, एक ओर सीता जी, दूसरी ओर लक्ष्मण जी और सामने हाथ जोड़े हनुमान जी: पूरे परिवार का दर्शन।
    पाठ

    दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा।
    पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम्॥

    अर्थ: जिनकी दाहिनी ओर लक्ष्मण हैं, बाईं ओर जनक की पुत्री सीता हैं और सामने पवनपुत्र हनुमान हैं, उन रघुनंदन श्री राम की मैं वंदना करता हूँ।

    श्री रामरक्षा स्तोत्रम्: पूरा पाठ और अर्थ

    विकल्प
    श्लोक न पढ़ सकें तो 'जय सियाराम' कहकर फूल चढ़ाएँ।
  4. ४स्नान

    क्या करें
    भगवान को जल से स्नान कराएँ।
    कैसे करें
    धातु की मूर्ति हो तो पात्र में रखकर शुद्ध जल से, चाहें तो पंचामृत से और फिर शुद्ध जल से नहलाकर पोंछ दें। चित्र हो तो फूल से जल के कुछ छींटे दें।
    भाव
    अतिथि की तरह आदर से सेवा।
    विकल्प
    रोज़ की छोटी पूजा में केवल जल के छींटे काफ़ी हैं।
  5. ५वस्त्र, चंदन और अक्षत

    क्या करें
    वस्त्र या मौली अर्पित करें, चंदन-रोली का तिलक लगाएँ और अक्षत चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    मूर्ति हो तो छोटा पीला वस्त्र पहनाएँ, नहीं तो मौली का टुकड़ा चढ़ाएँ। अनामिका से तिलक लगाएँ और अक्षत चढ़ाएँ। सीता जी को रोली-सिंदूर का तिलक लगाने की भी रीत है।
    भाव
    पीताम्बरधारी राम जी और जानकी माँ का शृंगार।
    विकल्प
    जो एक-दो चीज़ें हों, वही चढ़ाएँ।
  6. ६पुष्प और तुलसी

    क्या करें
    फूल, फूलमाला और तुलसीदल अर्पित करें।
    कैसे करें
    फूलमाला पहनाएँ और चरणों में फूल व तुलसीदल रखें। फिर हाथ जोड़कर नीचे का श्लोक पढ़ें।
    भाव
    राम जी के चरणों में अपना सिर झुकाना।
    पाठ

    आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
    लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥

    अर्थ: जो विपत्तियों को दूर करते हैं और सब संपदाएँ देते हैं, सारे जगत को आनंद देने वाले उन श्री राम को मैं बार-बार नमस्कार करता हूँ।

    श्री रामरक्षा स्तोत्रम्: पूरा पाठ और अर्थ

    विकल्प
    फूल न हो तो केवल तुलसीदल; वह भी न हो तो प्रणाम।
  7. ७सीता जी, लक्ष्मण जी और हनुमान जी को नमन

    क्या करें
    माता सीता को प्रणाम करें, और लक्ष्मण जी व हनुमान जी को फूल चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    सीता जी के चरणों में फूल रखकर नीचे का श्लोक पढ़ें। फिर लक्ष्मण जी और हनुमान जी को एक-एक फूल चढ़ाएँ।
    भाव
    राम जी उनके साथ ही पूरे हैं; उनके प्रियजनों का आदर उनका ही आदर है।
    पाठ

    उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।
    सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥

    अर्थ: जो संसार की उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली हैं, क्लेश हरने वाली हैं और सबका कल्याण करने वाली हैं, श्री राम की प्रिय उन सीता जी को मैं प्रणाम करता हूँ।

    उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं (सीता वन्दना): पूरा पाठ और अर्थ

    विकल्प
    हनुमान जी के लिए 'मनोजवं मारुततुल्यवेगं' भी पढ़ सकते हैं; समय न हो तो केवल 'जय सियाराम, जय हनुमान' कहें।
  8. ८धूप और दीप

    क्या करें
    धूप दिखाएँ, फिर दीपक दिखाएँ।
    कैसे करें
    धूप भगवान के सामने धीरे से घुमाकर बाईं ओर रख दें। दीपक उठाकर दिखाएँ और वापस रखकर हाथ धो लें।
    भाव
    सुगंध और प्रकाश से सेवा।
    विकल्प
    धूप न हो तो केवल दीपक।
  9. ९नैवेद्य (भोग)

    क्या करें
    भोग पर तुलसीदल रखकर अर्पित करें, फिर पीने का जल दें।
    कैसे करें
    भोग सामने रखें, उस पर तुलसीदल रखें और 'श्री राम' का नाम लेते हुए कुछ पल आँखें बंद रखें। फिर जल अर्पित करें।
    भाव
    शबरी के बेरों की तरह, प्रेम से दी गई साधारण चीज़ भी राम जी को प्रिय है।
    विकल्प
    कुछ न हो तो गुड़ या मिश्री के कुछ दाने और जल।
  10. १०राम-नाम का जप

    क्या करें
    'श्री राम जय राम जय जय राम' का जप करें।
    कैसे करें
    माला हो तो एक माला (108 बार), नहीं तो 11 या 21 बार, धीमी आवाज़ में या मन में। परिवार साथ हो तो मिलकर गा भी सकते हैं।
    भाव
    हर नाम के साथ राम जी को याद करना और उनकी जय-जयकार।
    पाठ

    श्री राम जय राम जय जय राम

    अर्थ: श्री राम की जय हो, राम की जय हो।

    मंत्र का अर्थ और उच्चारण

    विकल्प
    केवल 'राम राम' या 'सीताराम' का जप भी उतना ही पूरा है।
  11. ११रामचरितमानस का पाठ

    क्या करें
    रामचरितमानस का कुछ अंश पढ़ें।
    कैसे करें
    रोज़ कुछ दोहे-चौपाइयाँ क्रम से पढ़ें, ताकि धीरे-धीरे पूरा मानस पढ़ा जाए। कई घरों में मंगलवार-शनिवार को सुंदरकांड, राम नवमी पर बालकांड का राम-जन्म प्रसंग और नवरात्रि में नौ दिन का पाठ होता है। समय कम हो तो नीचे का एक श्लोक पढ़ें, जिसमें पूरी रामकथा एक साथ है।
    भाव
    राम जी की कथा सुनना भी उनका सत्संग है।
    पाठ

    आदौ रामतपोवनादिगमनं हत्वा मृगं काञ्चनम्
    वैदेहीहरणं जटायुमरणम् सुग्रीवसम्भाषणम्॥
    वालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लङ्कापुरीदाहनम्
    पश्चाद्रावणकुम्भकर्णहननं एतद्धिरामायणम्॥

    अर्थ: पहले श्री राम का वन जाना, सोने के हिरण को मारना, सीता जी का हरण, जटायु की मृत्यु और सुग्रीव से मित्रता; फिर बाली का अंत, समुद्र पार करना और लंका का जलना; अंत में रावण और कुंभकर्ण का वध: यही रामायण है।

    स्रोत: sanskritdocuments.org, श्लोक संग्रह 2: श्रीरामायणसूत्र (एकश्लोकी रामायण)

    विकल्प
    पढ़ना कठिन हो तो किसी से सुन लें, या केवल राम-नाम जपें।
  12. १२आरती

    क्या करें
    घी के दीपक या कपूर से श्री राम की आरती करें।
    कैसे करें
    दीपक को पहले चरणों के सामने चार बार, नाभि के सामने दो बार, मुख के सामने एक बार और फिर पूरे दरबार के सामने सात बार घुमाएँ। अपने घर में जो राम-आरती गाई जाती हो, वही गाएँ: कहीं गोस्वामी तुलसीदास की विनय पत्रिका की 'ऐसी आरती राम रघुबीर की' गाई जाती है, तो बहुत-से घरों में इस समय 'श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन'। आरती के बाद थोड़ा जल गिराएँ और दोनों हथेलियों से आरती लें।
    भाव
    पूरे परिवार के साथ राम दरबार का गुणगान।
    विकल्प
    बोल याद न हों तो दीपक घुमाते हुए 'जय सियाराम' कहें।
    आरतीऐसी आरती राम रघुबीर की करहि मनपूरी श्री राम की आरती पढ़ें
  13. १३पुष्पांजलि, परिक्रमा और प्रणाम

    क्या करें
    दोनों हाथों में फूल लेकर अर्पित करें, अपनी जगह पर परिक्रमा करें और प्रणाम करें।
    कैसे करें
    फूल चढ़ाकर दाहिनी ओर से घूमते हुए अपनी जगह पर एक परिक्रमा करें, फिर साष्टांग या हाथ जोड़कर प्रणाम करें और नीचे दी गई क्षमा प्रार्थना पढ़ें।
    भाव
    राम जी की शरण में आज का दिन सौंपना।
    विकल्प
    परिक्रमा की जगह न हो तो केवल प्रणाम।

पूजा में पढ़े जाने वाले पाठ

भोग

  • मौसम के फल, ख़ासकर केला और बेर
  • खीर या पंचामृत
  • लड्डू, पेड़ा या कोई घर की मिठाई
  • राम नवमी पर कई घरों में धनिया पंजीरी और पंचामृत

भोग पर तुलसीदल रखने की वैष्णव रीत है। भोग सात्त्विक हो: प्याज़-लहसुन के बिना। भोग थोड़ी देर बाद हटाकर प्रसाद के रूप में बाँट दें।

प्रार्थना और समापन

हे सियाराम, इस पूजा में जो कमी रह गई हो, उसे क्षमा करें। हमें आपकी तरह मर्यादा में रहने, सच बोलने और सबका भला सोचने की शक्ति दें, और हनुमान जी की तरह आपके चरणों में मन लगा रहे।

क्षमा प्रार्थना

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

अर्थ: हे जनार्दन, मेरी पूजा में मंत्र की, विधि की या भक्ति की जो कमी रही हो, उसके बावजूद मैंने जो पूजा की है, उसे पूरा मान लें। मैं न आपको बुलाना जानता हूँ, न विदा करना, न ठीक से पूजा करना; हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें।

स्रोत: गीताप्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, गृह-मन्दिर में पञ्चदेव-पूजा: क्षमा-याचना

पूजा के बाद

  • प्रसाद परिवार में बाँटें और ख़ुद भी लें।
  • रामचरितमानस की पोथी को साफ़ कपड़े में लपेटकर उसके स्थान पर रख दें; पाठ जहाँ छोड़ा, वहाँ एक धागा या पत्ता रख सकते हैं।
  • पिछले दिन के फूल अगली सुबह हटाकर गमले या बगीचे की मिट्टी में डाल दें; कूड़े में न डालें।

समय कम हो तो: छोटी विधि

  1. स्नान के बाद दीपक जलाएँ और मन में संकल्प करें।
  2. 'दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य' पढ़कर या 'जय सियाराम' कहकर राम दरबार को फूल चढ़ाएँ।
  3. जल के छींटे, चंदन, फूल और तुलसीदल अर्पित करें।
  4. तुलसीदल रखकर भोग लगाएँ।
  5. 'श्री राम जय राम जय जय राम' का 11 या 108 बार जप करें।
  6. रामचरितमानस के कुछ दोहे-चौपाई पढ़ें।
  7. आरती करके क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बाँटें।

परंपराओं में अंतर

  • उत्तर भारत में राम जी की पूजा के साथ रामचरितमानस का पाठ सबसे प्रचलित है; दक्षिण और महाराष्ट्र में वाल्मीकि रामायण का पारायण, राम-नाम संकीर्तन और 'श्री राम जय राम जय जय राम' का अखंड जप ज़्यादा होता है।
  • मिथिला और अयोध्या में सीता-राम की युगल उपासना और विवाह पंचमी का उत्सव विशेष है; वहाँ 'सीताराम' नाम का जप प्रचलित है।
  • रामानंदी जैसी संत-परंपराओं में राम-मंत्र गुरु से दीक्षा में मिलता है और उसके अपने नियम होते हैं; घर में 'श्री राम जय राम जय जय राम' नाम-जप किसी दीक्षा के बिना किया जाता है।
  • राम नवमी पर कई घरों में दोपहर को जन्म के समय पालना झुलाया जाता है और पंचामृत-पंजीरी का प्रसाद बँटता है; कहीं-कहीं नवमी पर कन्या-पूजन भी होता है, क्योंकि यह नवरात्रि का आख़िरी दिन है।

ये भी पढ़ें

श्री राम के लिए और

स्रोत और समीक्षा

समीक्षा (10 अक्टूबर 2026): ध्यान और पुष्प के श्लोक sanskritdocuments के रामरक्षास्तोत्र (श्लोक 31, 35) से; सीता-वंदना रामचरितमानस बालकाण्ड के मंगलाचरण (श्लोक 5) से; एकश्लोकी रामायण श्लोक संग्रह 2 से; क्षमा-याचना और आरती की रीत गीताप्रेस की नित्यकर्म-पूजाप्रकाश से। श्री राम की आरती का पन्ना लिखते समय तैयार नहीं था (texts/ref में विनय पत्रिका की 'ऐसी आरती राम रघुबीर की' का स्रोत आ चुका था, पर work फ़ाइल नहीं), इसलिए aarti को null रखा गया और आरती के चरण में उसका और 'श्री रामचन्द्र कृपालु' का केवल नाम लिया गया; राम-आरती का पन्ना पास हो जाए तो उसे चरण 12 और aarti में जोड़ दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राम जी की कौन-सी आरती गाएँ?

अलग-अलग क्षेत्रों में श्री राम की अलग आरतियाँ प्रचलित हैं। गोस्वामी तुलसीदास की विनय पत्रिका में 'ऐसी आरती राम रघुबीर की' पद है, और उत्तर भारत के बहुत-से घरों में आरती के समय उन्हीं की स्तुति 'श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन' गाई जाती है। जो आरती आपके घर में गाई जाती रही है, वही गाएँ; बोल याद न हों तो दीपक घुमाते हुए राम-नाम लेना भी आरती है।

क्या राम जी की पूजा में तुलसी चढ़ती है?

हाँ, वैष्णव रीत में राम जी के भोग और पूजा में तुलसीदल रखा जाता है, क्योंकि वे भगवान विष्णु के अवतार हैं। तुलसी न हो तो भी पूजा पूरी है; मन से अर्पित कर दें।

रामचरितमानस का पाठ कैसे शुरू करें?

किसी शुभ दिन, जैसे राम नवमी, विवाह पंचमी या किसी भी मंगलवार से, बालकांड के आरंभ से रोज़ कुछ दोहे-चौपाई पढ़ना शुरू करें। पढ़ने से पहले राम दरबार को प्रणाम करें और पढ़कर फिर प्रणाम करें। रोज़ थोड़ा पढ़ना, कभी-कभार ज़्यादा पढ़ने से अच्छा है।

राम नवमी पर पूजा का समय क्या है?

श्री राम का जन्म दोपहर में माना जाता है, इसलिए राम नवमी की मुख्य पूजा मध्याह्न में होती है। उस दिन की सही तारीख़ साइट के राम नवमी पन्ने पर है। सुबह स्नान करके संकल्प लें और दोपहर को यही पूजा जन्म-उत्सव के साथ करें।

क्या मासिक धर्म के दिनों में राम जी की पूजा या पाठ कर सकते हैं?

इस पर परिवारों में अलग-अलग रीत है। कई घरों में उन दिनों मूर्ति और पोथी छूने से बचा जाता है, जबकि बहुत-से परिवार ऐसा कोई नियम नहीं मानते। जो भी रीत हो, राम-नाम का जप और मन से प्रार्थना हर दिन की जा सकती है; इसमें अपराध-बोध की कोई बात नहीं है।

घर में राम दरबार का चित्र नहीं है, तो?

श्री राम का कोई भी चित्र, या केवल 'राम' लिखा एक साफ़ काग़ज़ रखकर भी पूजा की जा सकती है। चित्र बिल्कुल न हो तो दीपक जलाकर मन में राम दरबार का ध्यान करें।

रोज़ इतना समय नहीं है, तो क्या करें?

छोटा रूप करें: दीपक जलाएँ, फूल या तुलसी चढ़ाएँ, 11 बार 'श्री राम जय राम जय जय राम' कहें और प्रणाम करें। चलते-फिरते भी राम-नाम लिया जा सकता है।

सुधार सुझाएँ

इस विधि में कोई बात आपकी परंपरा से अलग हो, या कहीं गलती दिखे, तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को स्रोत से मिलाकर देखते हैं।

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