हनुमान

पूजा विधि · हनुमान · रोज़ की पूजा

हनुमान पूजा विधि

मंगलवार और शनिवार को घर में हनुमान जी की सरल पूजा: राम नाम, दीपक, लाल फूल, सिंदूर का तिलक, गुड़-चने का भोग, हनुमान चालीसा और आरती।

इस पेज पर
  1. परिचय
  2. एक नज़र में
  3. कब करें
  4. सामग्री
  5. तैयारी
  6. चित्र या मूर्ति
  7. संकल्प
  8. चरण-दर-चरण विधि
  9. पाठ
  10. भोग
  11. समापन
  12. छोटी विधि
  13. परंपराओं में अंतर
  14. ये भी पढ़ें
  15. स्रोत
  16. सवाल-जवाब
  17. सुधार सुझाएँ
रोज़ की पूजा

यह पन्ना घर में मंगलवार, शनिवार या रोज़ की हनुमान जी की सरल पूजा बताता है: तस्वीर या छोटी मूर्ति के सामने दीपक, लाल-नारंगी फूल, सिंदूर का तिलक, गुड़-चने का भोग, राम नाम, हनुमान चालीसा और आरती। मूर्ति पर सिंदूर और चमेली के तेल का चोला चढ़ाना प्रतिष्ठित मूर्ति की सेवा है, जो मंदिरों में पुजारी करते हैं। हनुमान जयंती का व्रत-विधान (तेरह गाँठ वाला रक्षा-सूत्र), संकल्प लेकर किए जाने वाले सुंदरकांड या बजरंग बाण के अनुष्ठान, और दीक्षा से जुड़ी साधनाएँ अलग विधियाँ हैं, जिन्हें किसी जानकार के मार्गदर्शन में करना ठीक है।

परिचय

हनुमान जी श्री राम के सबसे बड़े भक्त हैं, और उनकी पूजा का मूल भी यही है: राम नाम और सेवा का भाव। इसलिए हनुमान जी की पूजा में श्री राम का स्मरण साथ चलता है; बहुत-से घरों में पूजा "श्री राम जय राम जय जय राम" से शुरू होती है और "सियावर रामचंद्र की जय" पर पूरी होती है।

मंगलवार और शनिवार हनुमान जी के दिन माने जाते हैं। घर की पूजा सीधी-सादी है: तस्वीर के सामने दीपक, लाल या नारंगी फूल, सिंदूर का तिलक, गुड़-चने या बूँदी का भोग, और हनुमान चालीसा का पाठ। मंदिरों में होने वाला चोला चढ़ाना घर की पूजा का हिस्सा नहीं है; घर में श्रद्धा से जलाया एक दीपक और एक बार का चालीसा-पाठ भी पूरी पूजा है।

एक नज़र में

समय
मंगलवार और शनिवार; सुबह स्नान के बाद, या शाम को दीपक के समय
अवधि
लगभग 15 से 20 मिनट, चालीसा पाठ सहित
कौन कर सकता है
घर का कोई भी सदस्य: स्त्री, पुरुष और बच्चे
मुख्य सामग्री
दीपक, लाल या नारंगी फूल, सिंदूर, तुलसी दल, गुड़-चना या बूँदी
आरती
आरती कीजै हनुमान लला की

पूजा कब करें

  • मंगलवार हनुमान जी का मुख्य दिन है, और शनिवार को भी उनकी पूजा होती है। यहीं के मंगलवार व्रत और शनिवार व्रत वाले पन्नों पर इन दिनों की परंपराएँ दी गई हैं।
  • उत्तर भारत में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है; दक्षिण के कई राज्यों में इसकी तारीख़ अलग है। यहीं का हनुमान जयंती वाला पन्ना हर साल की तारीख़ बताता है।
  • ज्येष्ठ महीने के मंगलवार (बड़ा मंगल) लखनऊ और आसपास विशेष रूप से मनाए जाते हैं।
  • कोई चिंता हो, यात्रा पर निकलना हो या परीक्षा हो, तब भी घर में हनुमान चालीसा पढ़ने की परंपरा है; इसके लिए कोई ख़ास दिन ज़रूरी नहीं।

पूजा सामग्री

  • आवश्यक इसके बिना यह विधि नहीं होती
  • वैकल्पिक हो तो अच्छा; न हो तो विकल्प दिया है
  • परंपरा-विशेष कुछ परंपराओं में ही
सामग्रीउपयोगस्थितिविकल्प / टिप्पणी
हनुमान जी की तस्वीर या छोटी मूर्तिपूजा का केंद्रवैकल्पिकन हो तो राम दरबार की तस्वीर, या केवल दीपक के सामने बैठकर चालीसा और राम नाम।
दीपकघी या तेल का दीपकवैकल्पिकघी, तिल या सरसों, जो तेल घर में हो।
सिंदूरतस्वीर या मूर्ति पर तिलक; हनुमान जी को सिंदूर विशेष प्रिय माना जाता हैपरंपरा-विशेषरोली या लाल चंदन; न हो तो छोड़ दें।
चमेली का तेलमंदिरों में चोले के लिए सिंदूर में मिलाया जाता हैपरंपरा-विशेषघर की पूजा में ज़रूरी नहीं।
लाल या नारंगी फूलगुड़हल, गेंदा, गुलाब या कनेरवैकल्पिकजो भी ताज़ा फूल मिले।
तुलसी दलराम भक्त हनुमान जी को तुलसी अर्पित की जाती है; भोग पर भी रखी जाती हैवैकल्पिकन हो तो छोड़ दें।
जनेऊ और लाल वस्त्र या लंगोटविस्तृत पूजा में वस्त्र और यज्ञोपवीतपरंपरा-विशेषमौली का एक धागा वस्त्र की जगह।
अक्षत और चंदनअर्पणवैकल्पिकन हों तो छोड़ दें।
धूप या अगरबत्तीसुगंधवैकल्पिकन हो तो छोड़ दें।
नैवेद्यभुने चने और गुड़, बूँदी, बेसन के लड्डू, केलावैकल्पिकजो सात्विक मिठाई या फल घर में हो।
पान का बीड़ाकई जगह हनुमान जी को पान चढ़ाने का चलनपरंपरा-विशेषज़रूरी नहीं।
हनुमान चालीसा की पुस्तकपाठवैकल्पिकयाद हो तो बिना पुस्तक के।

स्थान और अपनी तैयारी

  • स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। मंगलवार को कई लोग लाल या नारंगी कपड़े पहनना पसंद करते हैं; यह रीति है, नियम नहीं।
  • पूजा का स्थान साफ़ करें। तस्वीर ऐसी जगह हो जहाँ बैठकर आराम से पाठ कर सकें।
  • हनुमान जी की पूजा में संयम और सादगी पर ज़ोर रहता है; कई लोग मंगलवार को सात्विक भोजन करते हैं और उस दिन क्रोध और कटु वचन से बचने का प्रयास करते हैं।
  • आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठना प्रचलित है; परंपराएँ अलग हैं, घर की जगह के अनुसार बैठें।

चित्र या मूर्ति कैसे रखें

  • चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति रखें। कई घरों में हनुमान जी की तस्वीर राम दरबार के साथ, श्री राम के चरणों के पास रखी जाती है।
  • दीपक तस्वीर के सामने दाईं ओर, धूप बाईं ओर, फूल और सिंदूर सामने, और भोग तस्वीर के ठीक सामने।
  • घर में छोटी धातु या पत्थर की मूर्ति हो तो उस पर सिंदूर का हल्का तिलक लगाया जा सकता है। पूरी मूर्ति पर सिंदूर का लेप (चोला) घर की पूजा का हिस्सा नहीं माना जाता; यह मंदिरों की सेवा है।

संकल्प

संकल्प का अर्थ है पूजा से पहले मन में साफ़ निश्चय करना। हनुमान पूजा के साथ अक्सर चालीसा के किसी निश्चित पाठ का संकल्प भी लिया जाता है; वह उतना ही लें जितना सहज निभा सकें।

हे पवनपुत्र हनुमान जी, आज [मंगलवार/शनिवार] को मैं [अपना नाम] श्रद्धा से आपकी पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा/रही हूँ। मुझे साहस, संयम और श्री राम के प्रति भक्ति दें।

चालीसा के 7 या 11 पाठ का संकल्प लेने का चलन है; एक पाठ भी पूरा पाठ है। संकल्प बीच में टूट जाए तो डरें नहीं, अगली बार फिर से शुरू करें।

पूजा की विधि, चरण-दर-चरण

  1. १श्री राम का स्मरण

    क्या करें
    पूजा की शुरुआत श्री राम के नाम से करें, फिर गणेश जी को प्रणाम करें।
    कैसे करें
    हाथ जोड़कर कुछ बार "श्री राम जय राम जय जय राम" बोलें। फिर "श्री गणेशाय नमः" कहकर प्रणाम करें।
    भाव
    हनुमान जी को सबसे प्रिय उनके प्रभु का नाम है; भक्तों की मान्यता है कि जहाँ राम नाम होता है, वहाँ हनुमान जी होते हैं।
    विकल्प
    राम दरबार की तस्वीर हो तो पहले श्री राम-सीता को प्रणाम करें।
  2. २आचमन और संकल्प

    क्या करें
    आचमन करें और संकल्प लें।
    कैसे करें
    दाहिनी हथेली में थोड़ा जल लेकर तीन बार पिएँ और हाथ धो लें। हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प बोलें और जल छोड़ दें।
    भाव
    अगले कुछ मिनट केवल हनुमान जी के लिए।
    विकल्प
    मन में संकल्प करना भी पूरा संकल्प है।
  3. ३ध्यान

    क्या करें
    हाथ में फूल लेकर हनुमान जी के रूप का ध्यान करें।
    कैसे करें
    आँखें बंद करके मन जैसे तेज़, पवन जैसे वेग वाले, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, श्री राम के दूत हनुमान जी का रूप मन में लाएँ। नीचे का श्लोक पढ़कर फूल तस्वीर के सामने चढ़ा दें।
    भाव
    मैं श्री राम के दूत की शरण में हूँ।
    पाठ

    मनोजवं मारुततुल्यवेगं
    जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
    श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

    अर्थ: जो मन के समान तेज़ और पवन के समान वेग वाले हैं, जिन्होंने इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, जो पवन-पुत्र और वानर-सेना के प्रमुख हैं, उन श्री राम के दूत की मैं शरण लेता/लेती हूँ।

    मनोजवं मारुततुल्यवेगं (हनुमान वन्दना): पूरा पाठ और अर्थ

    विकल्प
    श्लोक कठिन लगे तो "ॐ हनुमते नमः" कहकर रूप का स्मरण करें।
  4. ४जल अर्पण

    क्या करें
    हनुमान जी को जल अर्पित करें।
    कैसे करें
    धातु या पत्थर की छोटी मूर्ति हो तो जल से स्नान कराकर पोंछ दें; तस्वीर हो तो जल के कुछ छींटे दें या एक पात्र में जल अर्पित करें।
    भाव
    थके हुए सेवक को जल पिलाने का आदर।
    पाठ

    ॐ हनुमते नमः। स्नानीयं जलं समर्पयामि॥

    अर्थ: हनुमान जी को नमस्कार; मैं स्नान के लिए जल अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: हर उपचार को देवता के नाम-मंत्र के साथ "समर्पयामि" कहकर अर्पित करने का प्रचलित ढंग। गीता प्रेस की नित्यकर्म-पूजाप्रकाश कहती है कि जो श्लोक न पढ़ सकें वे नाम-मंत्र से पूजा करें; द्रिक पंचांग की हनुमान पूजा विधि में हर उपचार "ॐ श्री हनुमते नमः ... समर्पयामि" से अर्पित होता है।

    विकल्प
    मन से जल अर्पित करना भी पूरा उपचार है।
  5. ५सिंदूर का तिलक और अक्षत

    क्या करें
    हनुमान जी को सिंदूर का तिलक लगाएँ और अक्षत चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    अनामिका उंगली से तस्वीर या मूर्ति के मस्तक पर सिंदूर का तिलक लगाएँ। कई भक्त हनुमान जी के चरणों से थोड़ा सिंदूर लेकर अपने माथे पर लगाते हैं। फिर कुछ अक्षत चढ़ाएँ।
    भाव
    राम जी के प्रति हनुमान जी के प्रेम का रंग।
    पाठ

    ॐ हनुमते नमः। सिन्दूरं समर्पयामि॥
    ॐ हनुमते नमः। अक्षतान् समर्पयामि॥

    अर्थ: हनुमान जी को नमस्कार; मैं सिंदूर अर्पित करता/करती हूँ। हनुमान जी को नमस्कार; मैं अक्षत अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; उपचार-वाक्य गीता प्रेस और द्रिक पंचांग की पूजा-विधियों के अनुसार।

    विकल्प
    सिंदूर न हो तो रोली या लाल चंदन।
  6. ६लाल फूल और तुलसी दल

    क्या करें
    लाल या नारंगी फूल, माला और तुलसी दल चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    फूल ऊपर मुख करके चढ़ाएँ। द्रिक पंचांग की हनुमान पूजा में फूलों के साथ बेलपत्र और तुलसी दल से पूजा का उल्लेख है।
    भाव
    भक्त के प्रिय भगवान का प्रिय, भक्त को भी प्रिय।
    पाठ

    ॐ हनुमते नमः। पुष्पाणि समर्पयामि॥

    अर्थ: हनुमान जी को नमस्कार; मैं फूल अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; द्रिक पंचांग की हनुमान पूजा विधि के उपचार-वाक्य के अनुसार।

    विकल्प
    फूल न हों तो अक्षत, या मन से फूल।
  7. ७धूप और दीप

    क्या करें
    धूप दिखाएँ और दीपक की ज्योति अर्पित करें।
    कैसे करें
    धूप घुमाकर रख दें, फिर दीपक उठाकर दिखाएँ और यथास्थान रख दें। हाथ धो लें।
    भाव
    मन का डर और आलस इस ज्योति में जल जाए।
    पाठ

    ॐ हनुमते नमः। धूपमाघ्रापयामि॥
    ॐ हनुमते नमः। दीपं दर्शयामि॥

    अर्थ: हनुमान जी को नमस्कार; मैं धूप की सुगंध अर्पित करता/करती हूँ। हनुमान जी को नमस्कार; मैं दीपक की ज्योति दिखाता/दिखाती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; द्रिक पंचांग की हनुमान पूजा विधि के उपचार-वाक्य "धूपमाघ्रापयामि" और "दीपं दर्शयामि"।

    विकल्प
    धूप न हो तो केवल दीपक।
  8. ८गुड़-चने का भोग

    क्या करें
    हनुमान जी के सामने गुड़-चने, बूँदी या लड्डू का भोग रखें।
    कैसे करें
    भोग एक छोटी थाली में रखें और उस पर एक तुलसी दल रख दें। भोग के चारों ओर थोड़ा जल घुमाकर निवेदन करें, फिर आचमन के लिए एक बार जल चढ़ाएँ।
    भाव
    सादा भोग, सच्चा मन।
    पाठ

    ॐ हनुमते नमः। नैवेद्यं निवेदयामि॥

    अर्थ: हनुमान जी को नमस्कार; मैं यह भोग निवेदन करता/करती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; द्रिक पंचांग की हनुमान पूजा विधि के अनुसार।

    विकल्प
    एक केला या थोड़ा गुड़ भी भोग है।
  9. ९हनुमान चालीसा का पाठ

    क्या करें
    बैठकर, साफ़ उच्चारण से हनुमान चालीसा पढ़ें।
    कैसे करें
    दोहे से शुरू करके चालीसों चौपाइयाँ और अंत का दोहा, बिना जल्दबाज़ी के। एक पाठ पूरा है; मंगलवार को कई लोग 7 या 11 पाठ करते हैं। परिवार साथ हो तो मिलकर पढ़ें।
    भाव
    बल, बुद्धि और विद्या की प्रार्थना, विनम्रता के साथ।
    पाठ

    बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
    बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

    अर्थ: अपने को बुद्धिहीन जानकर मैं पवन-पुत्र हनुमान जी का स्मरण करता/करती हूँ। हे हनुमान जी, मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए और मेरे दुःख और दोष दूर कीजिए।

    हनुमान चालीसा: पूरा पाठ और अर्थ

    विकल्प
    समय कम हो तो केवल शुरू के दोहे और कुछ चौपाइयाँ; या संकटमोचन हनुमानाष्टक।
  10. १०मंत्र जाप

    क्या करें
    कुछ देर "ॐ हनुमते नमः" या राम नाम का जाप करें।
    कैसे करें
    11, 21 या 108 बार, माला से या बिना माला के। हनुमान जी के साथ "श्री राम जय राम जय जय राम" का जाप भी किया जाता है।
    भाव
    नाम में मन टिकाना।
    पाठ

    ॐ हनुमते नमः

    अर्थ: हनुमान जी को नमस्कार।

    मंत्र का अर्थ और उच्चारण

    विकल्प
    चाहें तो हनुमान गायत्री मंत्र का जाप करें।
  11. ११आरती

    क्या करें
    "आरती कीजै हनुमान लला की" गाकर आरती करें।
    कैसे करें
    घी के दीपक या कपूर से आरती की थाली हनुमान जी के सामने घड़ी की सुई की दिशा में घुमाएँ, घंटी बजाएँ, परिवार साथ गाए। आरती के बाद "सियावर रामचंद्र की जय, पवनसुत हनुमान की जय" का जयकारा लगाने का चलन है।
    भाव
    भक्त की जय में भगवान की जय।
    विकल्प
    आरती न आती हो तो दीपक घुमाते हुए राम नाम बोलें।
    आरतीआरती कीजै हनुमान लला कीपूरी हनुमान जी की आरती पढ़ें
  12. १२प्रणाम और प्रार्थना

    क्या करें
    परिक्रमा या अपने स्थान पर घूमकर हाथ जोड़ें और हनुमान जी से प्रार्थना करें।
    कैसे करें
    नीचे का श्लोक पढ़ें या अपने शब्दों में प्रार्थना करें, फिर क्षमा-प्रार्थना पढ़कर प्रणाम करें।
    भाव
    हे महावीर, जैसे आपने सीता माँ और लक्ष्मण जी की रक्षा की, वैसे ही अपने इस भक्त पर भी कृपा-दृष्टि रखें।
    पाठ

    नमस्तेऽस्तु महावीर नमस्ते वायुनन्दन।
    विलोक्य कृपया नित्यं त्राहि मां भक्तवत्सल॥

    अर्थ: हे महावीर, आपको नमस्कार; हे वायुनंदन, आपको नमस्कार। हे भक्तों से प्रेम करने वाले, कृपा-दृष्टि से देखते हुए सदा मेरी रक्षा करें।

    स्रोत: द्रिक पंचांग की हनुमान पूजा विधि का नमस्कार मंत्र।

    विकल्प
    अपने शब्दों में की गई प्रार्थना भी पूरी प्रार्थना है।

पूजा में पढ़े जाने वाले पाठ

हनुमान

बजरंग बाण

हनुमान · स्तुति · अवधी

कई परिवार मंगलवार या शनिवार को चालीसा के बाद पढ़ते हैं

भोग

  • भुने चने और गुड़
  • बूँदी या बूँदी के लड्डू
  • बेसन के लड्डू
  • केला और मौसमी फल
  • पान का बीड़ा (कई जगह)

भोग पर एक तुलसी दल रखने का चलन है। मंगलवार को बहुत-से लोग गुड़-चने का प्रसाद बाँटते हैं, और कई जगह बंदरों या गायों को गुड़-चना खिलाने की परंपरा भी है; बंदरों को खिलाते समय सावधानी रखें और जहाँ मना हो वहाँ न खिलाएँ।

प्रार्थना और समापन

हे पवनपुत्र, आपने श्री राम की सेवा में अपना सब कुछ लगा दिया। मुझे भी अपने काम में ऐसी ही लगन, कठिन समय में साहस, और बल के साथ विनम्रता दें। मेरे घर में श्री राम का नाम बना रहे। पूजा में जो कमी रही हो, उसे क्षमा करें।

क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम।
तस्मात् कारुण्यभावेन रक्ष मां परमेश्वर॥

अर्थ: हे प्रभु, न मैं आपको बुलाना जानता हूँ, न विदा करना, न पूजा की विधि; मुझे क्षमा करें। आपके सिवा मेरा कोई और सहारा नहीं, आप ही मेरी शरण हैं; इसलिए करुणा करके मेरी रक्षा करें।

स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, पञ्चदेव-पूजा के अंत की क्षमा-याचना के दो श्लोक; ये किसी भी देवता की पूजा के अंत में पढ़े जाते हैं।

पूजा के बाद

  • प्रसाद, ख़ासकर गुड़-चना, परिवार में बाँटें।
  • हनुमान जी के चरणों का सिंदूर कई भक्त प्रसाद की तरह माथे पर लगाते हैं।
  • अगले दिन फूल उतारकर मिट्टी में डाल दें; सिंदूर लगी तस्वीर को साफ़ कपड़े से हल्के से पोंछ दें।
  • चालीसा की पुस्तक साफ़ कपड़े में लपेटकर पूजा-स्थान पर रखें।

समय कम हो तो: छोटी विधि

  1. स्नान करके "श्री राम जय राम जय जय राम" और गणेश जी के प्रणाम से शुरू करें।
  2. "मनोजवं मारुततुल्यवेगं" पढ़कर हनुमान जी का ध्यान करें।
  3. जल, सिंदूर का तिलक, लाल फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
  4. धूप-दीप दिखाएँ और गुड़-चने का भोग लगाएँ।
  5. हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  6. "आरती कीजै हनुमान लला की" से आरती और जयकारा।
  7. प्रार्थना और प्रणाम करके प्रसाद बाँटें।

परंपराओं में अंतर

  • चोला: मंदिरों में मंगलवार या शनिवार को पुराना चोला उतारकर, घी या चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर प्रतिमा पर लेप किया जाता है, और कई जगह उस पर चाँदी का वर्क लगाया जाता है। यह प्रतिष्ठित मूर्ति की सेवा है; घर में तस्वीर पर तिलक काफ़ी है।
  • स्त्रियाँ और हनुमान पूजा: कुछ परिवारों और मंदिरों में स्त्रियों के मूर्ति छूने या चोला चढ़ाने की रीति नहीं है, जिसे हनुमान जी के ब्रह्मचर्य से जोड़ा जाता है। घर में पूजा, दीपक, भोग और चालीसा-पाठ स्त्रियाँ सदा से करती आई हैं।
  • दक्षिण भारत में हनुमान जी आंजनेय कहलाते हैं; वहाँ उन्हें मक्खन, वड़ों की माला और पान के पत्तों की माला चढ़ाने की परंपरा है। महाराष्ट्र में वे मारुति कहलाते हैं और शनिवार को उन्हें तेल और आक के पत्तों की माला चढ़ाने का चलन है।
  • शनिवार की हनुमान पूजा को कई परिवार शनि देव से जोड़ते हैं और उस दिन दोनों की पूजा करते हैं।
  • सुंदरकांड का पाठ कई घरों में मंगलवार या शनिवार को परिवार के साथ होता है; पूरा पाठ एक-दो घंटे का होता है।

ये भी पढ़ें

हनुमान जी के लिए और

स्रोत और समीक्षा

  • द्रिक पंचांग: हनुमान पूजा विधि: उपचारों का क्रम और "ॐ श्री हनुमते नमः ... समर्पयामि" वाले उपचार-वाक्य, फूलों के साथ बेलपत्र और तुलसी दल, नमस्कार मंत्र, और हनुमान जयंती व्रत का तेरह गाँठ वाला दोरक (जिसे इस पन्ने में अलग विधि बताया गया है)।
  • गीता प्रेस, गोरखपुर: नित्यकर्म-पूजाप्रकाश: पंचोपचार और नाम-मंत्र से पूजा; पञ्चदेव-पूजा के अंत की क्षमा-याचना; हनुमान चालीसा का पाठ।
  • गीता प्रेस: नित्यकर्म-पूजाप्रकाश (दूसरी प्रति): क्षमा-याचना के श्लोक और हनुमान चालीसा के दोहे इस साफ़ प्रति से मिलाए गए।
  • दैनिक भक्ति: ॐ हनुमते नमः, मंगलवार और शनिवार व्रत: मंत्र का पाठ और अर्थ यहीं के मंत्र पन्ने से; बड़ा मंगल और शनिवार की परंपराएँ यहीं के व्रत पन्नों से।

समीक्षा (10 अक्टूबर 2026): Upachara order and the "ॐ श्री हनुमते नमः ... समर्पयामि" sentences, tulsi and bilva among Hanuman's flowers, and the namaskar verse (quoted verbatim) from Drik Panchang's Hanuman puja vidhi; here the name-mantra is the site's own "ॐ हनुमते नमः". Kshama verses are the two general ones at the end of Gita Press Panchadeva-puja (checked in both archive.org OCR copies). Dhyana verse and chalisa doha quoted from the hanuman-vandana and hanuman-chalisa works as they stand in texts/works (both match Gita Press). Chola is described as temple seva on the owner's instruction; the women-and-chola custom is given as a local custom only. Regional customs (vada mala, Maruti with oil and aak leaves) are stated as customs without a scriptural claim.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या स्त्रियाँ हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं?

हाँ। हनुमान जी की पूजा, दीपक, भोग, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ स्त्रियाँ सदा से करती आई हैं। कुछ परिवारों और मंदिरों में स्त्रियों के मूर्ति छूने या चोला चढ़ाने की रीति नहीं है, जिसे हनुमान जी के ब्रह्मचर्य से जोड़ा जाता है; यह स्थानीय रीति है। अपने घर की परंपरा के अनुसार चलें, पर पूजा और पाठ से स्वयं को दूर न रखें।

क्या घर में हनुमान जी को चोला चढ़ा सकते हैं?

चोला चढ़ाना, यानी पूरी प्रतिमा पर सिंदूर और चमेली के तेल का लेप, प्रतिष्ठित मूर्ति की सेवा है जो मंदिरों में पुजारी करते हैं। घर की तस्वीर या छोटी मूर्ति के लिए सिंदूर का तिलक काफ़ी है। चोला चढ़वाना हो तो पास के मंदिर में सिंदूर और तेल अर्पित कर दें।

हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़ें?

एक बार का पाठ पूरा पाठ है। 7, 11 या 108 पाठ के संकल्प का चलन है, पर संख्या से ज़्यादा ज़रूरी है कि पाठ ध्यान से और साफ़ उच्चारण से हो। संकल्प टूट जाए तो डरने की बात नहीं; अगली बार फिर से शुरू करें।

मंगलवार का व्रत कैसे रखें?

व्रत ज़रूरी नहीं; पूजा उसके बिना भी पूरी है। रखना चाहें तो कई लोग दिन में एक बार सात्विक भोजन करते हैं, कुछ लोग उस दिन नमक नहीं खाते। बीमारी, गर्भावस्था, नियमित दवा या बुढ़ापे में कठोर व्रत न रखें।

तस्वीर या मूर्ति न हो तो पूजा कैसे करें?

राम दरबार की तस्वीर के सामने पूजा करें, या केवल एक दीपक जलाकर उसके सामने बैठें और हनुमान चालीसा व राम नाम का पाठ करें। मंदिर जाकर दर्शन और चालीसा पाठ भी इसी पूजा का रूप है।

मासिक धर्म के दिनों में हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं?

इस पर परिवारों की रीतियाँ अलग हैं। कई घरों में इन दिनों मूर्ति छूने और विधिवत पूजा से विराम लिया जाता है; कई घर ऐसा नहीं मानते। मन में राम नाम और हनुमान जी का स्मरण आम तौर पर हर स्थिति में किया जाता है। अपने घर की रीति और अपनी सुविधा के अनुसार चलें; इसमें अपराध-बोध की कोई बात नहीं।

क्या बच्चे हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं?

हाँ, बहुत-से बच्चे बचपन में ही हनुमान चालीसा याद कर लेते हैं। हनुमान जी का बल, बुद्धि, सेवा और विनम्रता बच्चों के लिए अच्छा आदर्श है। परीक्षा से पहले या नई जगह जाने से पहले बच्चे के साथ बैठकर चालीसा पढ़ना उसे शांत और साहसी बनाता है।

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