सरस्वती

स्तोत्र · सरस्वती · श्लोक

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला (सरस्वती वन्दना)

माँ सरस्वती का सबसे प्रसिद्ध वन्दना-श्लोक, जिसमें उनके उजले रूप का ध्यान है और सारी जड़ता दूर करने की प्रार्थना। मूल पाठ, अर्थ और शब्दार्थ।

इस पेज पर
  1. पूरा पाठ
  2. परिचय
  3. भावार्थ
  4. कब पढ़ें
  5. विधि
  6. पाठ-भेद
  7. रचयिता और स्रोत
  8. ये भी पढ़ें
  9. सवाल-जवाब
  10. सुधार सुझाएँ

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृताया वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजितासा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥१॥

yā kundendutuṣārahāradhavalā yā śubhravastrāvṛtā
yā vīṇāvaradaṇḍamaṇḍitakarā yā śvetapadmāsanā |
yā brahmācyutaśaṅkaraprabhṛtibhirdevaiḥ sadā pūjitā
sā māṃ pātu sarasvatī bhagavatī niḥśeṣajāḍyāpahā ||

अर्थ: जो कुन्द के फूल, चन्द्रमा, हिम और मोतियों के हार की तरह उजली हैं, जो श्वेत वस्त्र पहने हैं, जिनके हाथ श्रेष्ठ वीणा के दण्ड से सुशोभित हैं और जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं; ब्रह्मा, विष्णु और शंकर आदि देवता जिनकी सदा पूजा करते हैं, वे सारी जड़ता को पूरी तरह दूर करने वाली भगवती सरस्वती मेरी रक्षा करें।

कुन्द
एक सफ़ेद फूल
इन्दु
चन्द्रमा
तुषार
हिम, पाला
धवला
उजली, श्वेत
शुभ्रवस्त्रावृता
सफ़ेद वस्त्रों से ढकी हुई
वीणावरदण्डमण्डितकरा
जिनके हाथ श्रेष्ठ वीणा के दण्ड से शोभित हैं
श्वेतपद्मासना
सफ़ेद कमल पर बैठी हुई
निःशेषजाड्यापहा
सारी जड़ता (सुस्ती, अज्ञान) को पूरी तरह हरने वाली

परिचय

"या कुन्देन्दुतुषारहारधवला" माँ सरस्वती की सबसे अधिक गाई जाने वाली वन्दना है। विद्यालयों की प्रार्थना से लेकर वसंत पंचमी की पूजा तक, पढ़ाई और कला के हर आरम्भ में यह श्लोक पढ़ा जाता है।

यह एक ही श्लोक है जिसमें पहले माँ सरस्वती के रूप का ध्यान है (श्वेत वर्ण, श्वेत वस्त्र, हाथ में वीणा, श्वेत कमल का आसन) और अंत में प्रार्थना है कि वे मेरी हर तरह की जड़ता, यानी मन और बुद्धि की सुस्ती और अज्ञान, दूर करें। यह अगस्त्य मुनि के नाम से प्रसिद्ध सरस्वती स्तोत्र का पहला श्लोक है।

भावार्थ

श्लोक के पहले तीन चरणों में माँ सरस्वती का ध्यान है। उनका सब कुछ उजला है: रंग कुन्द के फूल, चन्द्रमा, हिम और मोतियों के हार जैसा, वस्त्र श्वेत, आसन श्वेत कमल। यह उजलापन ज्ञान की निर्मलता का प्रतीक है। हाथ में वीणा बताती है कि वे वाणी, संगीत और कला की देवी हैं, और ब्रह्मा, विष्णु, शंकर जैसे देवता भी उनकी पूजा करते हैं।

चौथे चरण में प्रार्थना है: "सा मां पातु", वे मेरी रक्षा करें। रक्षा किससे? जड़ता से। जड़ता का अर्थ है बुद्धि की मंदता, आलस, भूल और अज्ञान। इसलिए यह श्लोक पढ़ाई या किसी भी सीखने के काम से पहले पढ़ा जाता है: मन को निर्मल और सजग बनाने की प्रार्थना के रूप में।

यह श्लोक कब पढ़ा जाता है

  • वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) पर
  • पढ़ाई, लेखन, संगीत या किसी कला का अभ्यास शुरू करने से पहले
  • विद्यालयों और सभाओं की प्रार्थना में
  • रोज़ सुबह की पूजा में माँ सरस्वती के स्मरण के लिए

पढ़ने की विधि

  • माँ सरस्वती के चित्र के सामने दीप जलाकर, हाथ जोड़कर बैठें। वसंत पंचमी पर सफ़ेद या पीले फूल चढ़ाने की परंपरा है।
  • श्लोक को धीरे-धीरे, एक-एक पद साफ़ बोलते हुए पढ़ें। पढ़ते समय उनके उजले रूप का मन में ध्यान करें।
  • पढ़ाई से पहले एक बार पढ़ना काफ़ी है; चाहें तो तीन बार भी पढ़ सकते हैं।
  • बच्चों को सिखाते समय पहले अर्थ समझाएँ, फिर श्लोक याद कराएँ।
पूरी विधिसरस्वती पूजा विधिवसंत पंचमी पर घर में माँ सरस्वती की पूजा: पीले फूल, किताबें और वाद्य माँ के सामने, बच्चों का विद्यारंभ, मंत्र, आरती और प्रसाद, सरल विकल्पों के साथ।

पाठ-भेद

अलग-अलग पुस्तकों में कुछ जगह शब्द अलग मिलते हैं। ऊपर का पाठ नीचे दिए स्रोत के अनुसार है; दूसरे पाठ ये हैं:

कहाँदूसरा पाठटिप्पणी
श्लोक 1, तीसरा चरणदेवैः सदा वन्दिताबहुत-सी पुस्तकों और प्रार्थनाओं में "पूजिता" की जगह "वन्दिता" मिलता है; sanskritdocuments.org के अगस्त्य प्रोक्त स्तोत्र में यह कोष्ठक में दूसरे पाठ के रूप में दिया है। अर्थ लगभग एक ही है: पूजित या वन्दित।

रचयिता और स्रोत

रचयिता
अगस्त्य मुनि (परंपरा के अनुसार)
ग्रंथ / स्रोत
सरस्वती स्तोत्र (अगस्त्य मुनि प्रोक्त), श्लोक 1
भाषा
संस्कृत

जिस सरस्वती स्तोत्र का यह पहला श्लोक है, उसका अंतिम श्लोक उसे अगस्त्य मुनि का कहा हुआ बताता है। यही श्लोक दूसरे स्तुति-संग्रहों में भी मिलता है, इसलिए रचयिता को परंपरा के अनुसार ही माना जाना चाहिए।

sanskritdocuments.org और stotranidhi.com दोनों पर यह श्लोक इसी स्तोत्र के आरम्भ में है; sanskritdocuments.org के "सरस्वतीस्तुति" संग्रह में भी यह पहला श्लोक है।

पाठ की जाँच (10 अक्टूबर 2026): श्लोक sanskritdocuments.org के सरस्वतीस्तुति संग्रह, उसी साइट के अगस्त्य प्रोक्त सरस्वती स्तोत्र और stotranidhi.com के सरस्वती स्तोत्र से मिलाया गया; तीनों के मुख्य पाठ में शब्द एक जैसे हैं। "वन्दिता" वाला प्रचलित पाठ पाठ-भेद में दिया है।

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माँ सरस्वती के लिए और

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

"या कुन्देन्दु" श्लोक किस स्तोत्र से है?

यह उस सरस्वती स्तोत्र का पहला श्लोक है जिसे उसका अंतिम श्लोक अगस्त्य मुनि का कहा हुआ बताता है। यही श्लोक कई दूसरे स्तुति-संग्रहों में भी सबसे पहले रखा जाता है।

"सदा पूजिता" सही है या "सदा वन्दिता"?

दोनों पाठ मिलते हैं। यहाँ दिए दोनों स्रोतों के मुख्य पाठ में "पूजिता" है, और बहुत-सी प्रार्थनाओं में "वन्दिता" गाया जाता है। अर्थ में कोई बड़ा अंतर नहीं है।

"निःशेषजाड्यापहा" का क्या अर्थ है?

"निःशेष" यानी पूरी तरह, "जाड्य" यानी जड़ता (बुद्धि की मंदता, आलस, अज्ञान), और "अपहा" यानी दूर करने वाली। माँ सरस्वती से यही प्रार्थना है कि वे मन की हर जड़ता दूर करें।

"शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमाम्" क्या इसी श्लोक का भाग है?

नहीं, वह एक अलग श्लोक है जो सरस्वती वन्दना में अक्सर इसके साथ गाया जाता है। एक स्तुति-संग्रह में वह "शुद्धां ब्रह्मविचार" पाठ के साथ अलग श्लोक के रूप में मिलता है।

वसंत पंचमी पर यह श्लोक कैसे पढ़ें?

पूजा के समय माँ सरस्वती को फूल और दीप अर्पित करके यह श्लोक पढ़ें। कई घरों में बच्चे इसी दिन किताब-कलम की पूजा करके इसे पढ़ते हैं।

सुधार सुझाएँ

पाठ की किसी पंक्ति, शब्द या अर्थ में गलती दिखे तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को प्रामाणिक स्रोत से मिलाकर ही बदलते हैं, और मूल पाठ में अपनी ओर से कुछ नहीं जोड़ते।

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