सरस्वती पूजा विधि
सरस्वती · पूजा विधि · त्योहार की पूजा
वसंत पंचमी पर घर में माँ सरस्वती की पूजा: पीले फूल, किताबें और वाद्य माँ के सामने, बच्चों का विद्यारंभ, मंत्र, आरती और प्रसाद, सरल विकल्पों के साथ।

आरती · सरस्वती
विद्या और वाणी की देवी माँ सरस्वती की आरती, जो वसंत पंचमी पर विशेष रूप से गाई जाती है। पूरा पाठ, हर अंतरे का अर्थ और पाठभेद।
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
अर्थ: हे सरस्वती माता, आपकी जय हो। आप सद्गुणों और वैभव से भरी हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं।
चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
॥ जय सरस्वती माता ॥
अर्थ: आपका मुख चंद्रमा जैसा है, आप कमल पर विराजती हैं और आपकी कांति मंगल करने वाली है। शुभ हंस की सवारी पर आप शोभा पाती हैं और आपका तेज अतुलनीय है।
बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥
॥ जय सरस्वती माता ॥
अर्थ: आपके बाएँ हाथ में वीणा और दाएँ हाथ में माला है। सिर पर मणियों वाला मुकुट और गले में मोतियों की माला शोभा पाती है।
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥
॥ जय सरस्वती माता ॥
अर्थ: हे देवी, जो आपकी शरण में आए, उनका आपने उद्धार किया। आपने मंथरा दासी की बुद्धि में प्रवेश किया, जिससे आगे चलकर रावण का संहार हुआ।
विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो।मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥
॥ जय सरस्वती माता ॥
अर्थ: हे विद्या और ज्ञान देने वाली माँ, हमारे भीतर ज्ञान का प्रकाश भर दो। मोह, अज्ञान और अँधेरे का जगत से नाश करो।
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥
॥ जय सरस्वती माता ॥
अर्थ: हे माँ, हमारी धूप, दीप, फल और मेवा स्वीकार करो। हमें ज्ञान की आँखें दो और जगत का उद्धार करो।
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥
॥ जय सरस्वती माता ॥
अर्थ: आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि माँ सरस्वती की यह आरती जो कोई गाता है, वह भला करने वाली और सुख देने वाली ज्ञान-भक्ति पाता है।
हर अंतरे का अर्थ पाठ के बीच में पढ़ने के लिए ऊपर पाठ और अर्थ चुनें, या नीचे पढ़ें।
“जय सरस्वती माता” विद्या, वाणी और संगीत की देवी माँ सरस्वती की आरती है। वसंत पंचमी की सरस्वती पूजा में और पढ़ाई या कोई नई विद्या शुरू करते समय इसे गाया जाता है। इसमें माँ के रूप का वर्णन है, कमल का आसन, हंस की सवारी, हाथों में वीणा और माला, और उनसे अज्ञान का अँधेरा दूर करने की विनती है।
इसके रचयिता का नाम ज्ञात नहीं है। गीता प्रेस के आरती-संग्रह के नए संस्करण में यह “माँ सरस्वतीकी आरती” शीर्षक से है, पर उसके कई शब्द प्रचलित पाठ से अलग हैं। यहाँ घरों में गाया जाने वाला पाठ दिया है, जो भक्ति भारत, वेबदुनिया और द्रिक पंचांग में छोटे अंतरों के साथ एक जैसा है; गीता प्रेस का पाठ नीचे पाठभेद में है।
हे सरस्वती माता, आपकी जय हो। आप सद्गुणों और वैभव से भरी हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं।
आपका मुख चंद्रमा जैसा है, आप कमल पर विराजती हैं और आपकी कांति मंगल करने वाली है। शुभ हंस की सवारी पर आप शोभा पाती हैं और आपका तेज अतुलनीय है।
आपके बाएँ हाथ में वीणा और दाएँ हाथ में माला है। सिर पर मणियों वाला मुकुट और गले में मोतियों की माला शोभा पाती है।
हे देवी, जो आपकी शरण में आए, उनका आपने उद्धार किया। आपने मंथरा दासी की बुद्धि में प्रवेश किया, जिससे आगे चलकर रावण का संहार हुआ।
हे विद्या और ज्ञान देने वाली माँ, हमारे भीतर ज्ञान का प्रकाश भर दो। मोह, अज्ञान और अँधेरे का जगत से नाश करो।
हे माँ, हमारी धूप, दीप, फल और मेवा स्वीकार करो। हमें ज्ञान की आँखें दो और जगत का उद्धार करो।
आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि माँ सरस्वती की यह आरती जो कोई गाता है, वह भला करने वाली और सुख देने वाली ज्ञान-भक्ति पाता है।
आरती पहले माँ सरस्वती का रूप सामने रखती है: चंद्रमा जैसा मुख, कमल का आसन, हंस की सवारी, हाथों में वीणा और माला, सिर पर मुकुट और गले में मोतियों की माला। वीणा कला और वाणी का, माला साधना का, और हंस विवेक का प्रतीक माना जाता है।
फिर आरती माँ के उस काम की याद दिलाती है जो रामकथा में आता है: देवताओं की विनती पर उन्होंने मंथरा की बुद्धि फेरी, और उसी से आगे रावण के अंत का मार्ग बना। अंत में भक्त अपनी सबसे बड़ी माँग रखता है: ज्ञान का प्रकाश, मोह और अज्ञान के अँधेरे का नाश, और “ज्ञानचक्षु”, यानी चीज़ों को सही देखने की दृष्टि।
अंतरा 6 इस आरती की फलश्रुति है। आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि इसे गाने वाला ज्ञान और भक्ति पाता है; यहाँ यह आरती के अपने वचन के रूप में दिया है।
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि माँ सरस्वती की यह आरती जो कोई गाता है, वह भला करने वाली और सुख देने वाली ज्ञान-भक्ति पाता है।
अलग-अलग पुस्तकों में कुछ जगह शब्द अलग मिलते हैं। ऊपर का पाठ नीचे दिए स्रोत के अनुसार है; दूसरे पाठ ये हैं:
| कहाँ | दूसरा पाठ | टिप्पणी |
|---|---|---|
| मुखड़ा | ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता | वेबदुनिया में; भारतडिस्कवरी में “जय सरस्वती माता जय जय हे सरस्वती माता”। |
| अंतरा 1 | चन्द्रवदनि, पद्मासिनि द्युति मङ्गलकारी। सोहे हंस-सवारी, अतुल तेजधारी॥ | गीता प्रेस के आरती-संग्रह (नया संस्करण) में “शुभ” शब्द नहीं है। |
| अंतरा 2 | बायें कर में वीणा, दूजे कर माला। शीश मुकुट-मणि सोहे, गले मोतियन माला॥ | गीता प्रेस। |
| अंतरा 3 | देव शरण में आये, उनका उद्धार किया। पैठि मंथरा दासी, असुर-संहार किया॥ | गीता प्रेस। |
| अंतरा 4 | वेद-ज्ञान-प्रदायिनि, बुद्धि-प्रकाश करो। मोहाज्ञान तिमिर का सत्वर नाश करो॥ | गीता प्रेस (स्कैन से पढ़े गए पाठ में कुछ अक्षर बिगड़े हैं)। भारतडिस्कवरी में दूसरी पंक्ति “मोह और अज्ञान तिमिर का जग से नाश करो”। |
| अंतरा 5 | धूप-दीप-फल-मेवा, पूजा स्वीकार करो। ज्ञान-चक्षु दे माता, सब गुण-ज्ञान भरो॥ | गीता प्रेस। भारतडिस्कवरी में “ज्ञानचक्षु दे माता भव से उद्धार करो”। |
पाठ की जाँच (10 अक्टूबर 2026): हर पंक्ति भक्ति भारत, वेबदुनिया (2012 का लेख) और द्रिक पंचांग से मिलाई; भारतडिस्कवरी और गीता प्रेस के आरती-संग्रह (नया संस्करण, archive.org पर स्कैन से पढ़ा गया पाठ) से भी तुलना की। भक्ति भारत और द्रिक पंचांग का पाठ अक्षरशः एक है, इसलिए हर पंक्ति वेबदुनिया या भारतडिस्कवरी से भी जाँची: सब पंक्तियाँ इनमें मिलती हैं, “बाएं … दाएं कर माला” और “मोह अज्ञान और तिमिर का” छोटे शब्द-अंतर के साथ। गीता प्रेस का पाठ कई पंक्तियों में अलग (संपादित) है और किसी दूसरे स्रोत में नहीं मिला, इसलिए वह पाठभेद में है। गीता प्रेस के पुराने संस्करण (कोड 153) में यह आरती नहीं है।
सरस्वती · पूजा विधि · त्योहार की पूजा
वसंत पंचमी पर घर में माँ सरस्वती की पूजा: पीले फूल, किताबें और वाद्य माँ के सामने, बच्चों का विद्यारंभ, मंत्र, आरती और प्रसाद, सरल विकल्पों के साथ।
सरस्वती · श्लोक · संस्कृत
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
लक्ष्मी · पूजा विधि · रोज़ की पूजा
शुक्रवार को घर में माँ लक्ष्मी की सरल पूजा: सफ़ाई, घी का दीपक, कमल या लाल फूल, कुमकुम, खीर या मिश्री का भोग, लक्ष्मी मंत्र, आरती और प्रार्थना।
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नवरात्रि में घर पर रोज़ माँ दुर्गा की पूजा: दीपक या अखंड ज्योति, कलश, लाल चुनरी, लाल फूल, कुमकुम, दिन की देवी का स्मरण, पाठ, आरती और कन्या पूजन।
लक्ष्मी · पूजा विधि · त्योहार की पूजा
दीपावली की शाम घर में लक्ष्मी-गणेश पूजा: सफ़ाई, प्रदोष काल का समय, चौकी सजाना, गणेश पूजन, लक्ष्मी पूजन, दीपमालिका, बही-खाता, तिजोरी और आरती।
दुर्गा · चालीसा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी
इसके रचयिता का नाम आरती में नहीं आता, और किसी विश्वसनीय स्रोत में प्रमाण के साथ नहीं मिलता।
रामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड में कथा है कि देवताओं की विनती पर सरस्वती ने मंथरा की बुद्धि फेर दी, जिससे श्री राम वन गए और आगे चलकर रावण का अंत हुआ। आरती इसी कथा की ओर संकेत करती है।
वसंत पंचमी की सरस्वती पूजा के बाद यह विशेष रूप से गाई जाती है। पढ़ाई या संगीत सीखने वाले इसे रोज़ की पूजा में भी गा सकते हैं।
नहीं। “या कुन्देन्दु…” संस्कृत का वंदना-श्लोक है, और “जय सरस्वती माता” हिंदी की आरती। कई घरों में पहले श्लोक और फिर आरती गाई जाती है।
हाँ। इसकी भाषा सरल है, और बच्चे इसे आसानी से सीख सकते हैं।
पाठ की किसी पंक्ति, शब्द या अर्थ में गलती दिखे तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को प्रामाणिक स्रोत से मिलाकर ही बदलते हैं, और मूल पाठ में अपनी ओर से कुछ नहीं जोड़ते।