सरस्वती

आरती · सरस्वती

जय सरस्वती माता

विद्या और वाणी की देवी माँ सरस्वती की आरती, जो वसंत पंचमी पर विशेष रूप से गाई जाती है। पूरा पाठ, हर अंतरे का अर्थ और पाठभेद।

इस पेज पर
  1. पूरा पाठ
  2. परिचय
  3. अंतरा-वार अर्थ
  4. भावार्थ
  5. कठिन शब्द
  6. फलश्रुति
  7. कब पढ़ें
  8. विधि
  9. पाठ-भेद
  10. रचयिता और स्रोत
  11. ये भी पढ़ें
  12. सवाल-जवाब
  13. सुधार सुझाएँ

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

अर्थ: हे सरस्वती माता, आपकी जय हो। आप सद्गुणों और वैभव से भरी हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं।

चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥

॥ जय सरस्वती माता ॥

अर्थ: आपका मुख चंद्रमा जैसा है, आप कमल पर विराजती हैं और आपकी कांति मंगल करने वाली है। शुभ हंस की सवारी पर आप शोभा पाती हैं और आपका तेज अतुलनीय है।

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥

॥ जय सरस्वती माता ॥

अर्थ: आपके बाएँ हाथ में वीणा और दाएँ हाथ में माला है। सिर पर मणियों वाला मुकुट और गले में मोतियों की माला शोभा पाती है।

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥

॥ जय सरस्वती माता ॥

अर्थ: हे देवी, जो आपकी शरण में आए, उनका आपने उद्धार किया। आपने मंथरा दासी की बुद्धि में प्रवेश किया, जिससे आगे चलकर रावण का संहार हुआ।

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो।मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥

॥ जय सरस्वती माता ॥

अर्थ: हे विद्या और ज्ञान देने वाली माँ, हमारे भीतर ज्ञान का प्रकाश भर दो। मोह, अज्ञान और अँधेरे का जगत से नाश करो।

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥

॥ जय सरस्वती माता ॥

अर्थ: हे माँ, हमारी धूप, दीप, फल और मेवा स्वीकार करो। हमें ज्ञान की आँखें दो और जगत का उद्धार करो।

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥

॥ जय सरस्वती माता ॥

अर्थ: आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि माँ सरस्वती की यह आरती जो कोई गाता है, वह भला करने वाली और सुख देने वाली ज्ञान-भक्ति पाता है।

हर अंतरे का अर्थ पाठ के बीच में पढ़ने के लिए ऊपर पाठ और अर्थ चुनें, या नीचे पढ़ें।

परिचय

“जय सरस्वती माता” विद्या, वाणी और संगीत की देवी माँ सरस्वती की आरती है। वसंत पंचमी की सरस्वती पूजा में और पढ़ाई या कोई नई विद्या शुरू करते समय इसे गाया जाता है। इसमें माँ के रूप का वर्णन है, कमल का आसन, हंस की सवारी, हाथों में वीणा और माला, और उनसे अज्ञान का अँधेरा दूर करने की विनती है।

इसके रचयिता का नाम ज्ञात नहीं है। गीता प्रेस के आरती-संग्रह के नए संस्करण में यह “माँ सरस्वतीकी आरती” शीर्षक से है, पर उसके कई शब्द प्रचलित पाठ से अलग हैं। यहाँ घरों में गाया जाने वाला पाठ दिया है, जो भक्ति भारत, वेबदुनिया और द्रिक पंचांग में छोटे अंतरों के साथ एक जैसा है; गीता प्रेस का पाठ नीचे पाठभेद में है।

अंतरा-वार अर्थ

  1. मुखड़ा जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता…

    हे सरस्वती माता, आपकी जय हो। आप सद्गुणों और वैभव से भरी हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं।

  2. अंतरा १ चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी…

    आपका मुख चंद्रमा जैसा है, आप कमल पर विराजती हैं और आपकी कांति मंगल करने वाली है। शुभ हंस की सवारी पर आप शोभा पाती हैं और आपका तेज अतुलनीय है।

  3. अंतरा २ बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला…

    आपके बाएँ हाथ में वीणा और दाएँ हाथ में माला है। सिर पर मणियों वाला मुकुट और गले में मोतियों की माला शोभा पाती है।

  4. अंतरा ३ देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया…

    हे देवी, जो आपकी शरण में आए, उनका आपने उद्धार किया। आपने मंथरा दासी की बुद्धि में प्रवेश किया, जिससे आगे चलकर रावण का संहार हुआ।

  5. अंतरा ४ विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो…

    हे विद्या और ज्ञान देने वाली माँ, हमारे भीतर ज्ञान का प्रकाश भर दो। मोह, अज्ञान और अँधेरे का जगत से नाश करो।

  6. अंतरा ५ धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो…

    हे माँ, हमारी धूप, दीप, फल और मेवा स्वीकार करो। हमें ज्ञान की आँखें दो और जगत का उद्धार करो।

  7. अंतरा ६ माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे…

    आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि माँ सरस्वती की यह आरती जो कोई गाता है, वह भला करने वाली और सुख देने वाली ज्ञान-भक्ति पाता है।

भावार्थ

आरती पहले माँ सरस्वती का रूप सामने रखती है: चंद्रमा जैसा मुख, कमल का आसन, हंस की सवारी, हाथों में वीणा और माला, सिर पर मुकुट और गले में मोतियों की माला। वीणा कला और वाणी का, माला साधना का, और हंस विवेक का प्रतीक माना जाता है।

फिर आरती माँ के उस काम की याद दिलाती है जो रामकथा में आता है: देवताओं की विनती पर उन्होंने मंथरा की बुद्धि फेरी, और उसी से आगे रावण के अंत का मार्ग बना। अंत में भक्त अपनी सबसे बड़ी माँग रखता है: ज्ञान का प्रकाश, मोह और अज्ञान के अँधेरे का नाश, और “ज्ञानचक्षु”, यानी चीज़ों को सही देखने की दृष्टि।

कठिन शब्दों के अर्थ

सदगुण
अच्छे गुण
वैभव शालिनी
वैभव से संपन्न
विख्याता
प्रसिद्ध
चन्द्रवदनि
चंद्रमा जैसे मुख वाली
पद्मासिनि
कमल पर बैठने वाली
द्युति
कांति, चमक
मंगलकारी
कल्याण करने वाली
अतुल
जिसकी तुलना न हो सके
मणि
रत्न
मोतियन
मोतियों की
उद्धार
संकट से निकालना, कल्याण
पैठी
प्रवेश किया
मंथरा
कैकेयी की दासी
प्रदायिनि
देने वाली
तिमिर
अँधेरा
ज्ञानचक्षु
ज्ञान की आँखें, सही देखने की दृष्टि
निस्तार
उद्धार, पार लगाना
हितकारी
भला करने वाली

फलश्रुति

अंतरा 6 इस आरती की फलश्रुति है। आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि इसे गाने वाला ज्ञान और भक्ति पाता है; यहाँ यह आरती के अपने वचन के रूप में दिया है।

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥

आरती की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि माँ सरस्वती की यह आरती जो कोई गाता है, वह भला करने वाली और सुख देने वाली ज्ञान-भक्ति पाता है।

यह आरती कब गाई जाती है

  • वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के बाद
  • पढ़ाई, संगीत या कोई नई विद्या शुरू करते समय
  • रोज़ की पूजा में, विशेषकर विद्यार्थियों के लिए

आरती कैसे करें

  • माँ सरस्वती के चित्र या मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएँ। वसंत पंचमी पर कई घरों में किताबें, क़लम या वाद्य भी माँ के सामने रखे जाते हैं।
  • सफ़ेद या पीले फूल चढ़ाकर, खड़े होकर आरती गाएँ और दीपक को धीरे-धीरे माँ के चारों ओर घुमाएँ।
  • हर अंतरे के बाद “जय सरस्वती माता” दोहराया जाता है।
  • कई घरों में आरती से पहले “या कुन्देन्दुतुषारहारधवला” वाला वंदना-श्लोक बोला जाता है।
पूरी विधिसरस्वती पूजा विधिवसंत पंचमी पर घर में माँ सरस्वती की पूजा: पीले फूल, किताबें और वाद्य माँ के सामने, बच्चों का विद्यारंभ, मंत्र, आरती और प्रसाद, सरल विकल्पों के साथ।

पाठ-भेद

अलग-अलग पुस्तकों में कुछ जगह शब्द अलग मिलते हैं। ऊपर का पाठ नीचे दिए स्रोत के अनुसार है; दूसरे पाठ ये हैं:

कहाँदूसरा पाठटिप्पणी
मुखड़ाॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती मातावेबदुनिया में; भारतडिस्कवरी में “जय सरस्वती माता जय जय हे सरस्वती माता”।
अंतरा 1चन्द्रवदनि, पद्मासिनि द्युति मङ्गलकारी। सोहे हंस-सवारी, अतुल तेजधारी॥गीता प्रेस के आरती-संग्रह (नया संस्करण) में “शुभ” शब्द नहीं है।
अंतरा 2बायें कर में वीणा, दूजे कर माला। शीश मुकुट-मणि सोहे, गले मोतियन माला॥गीता प्रेस।
अंतरा 3देव शरण में आये, उनका उद्धार किया। पैठि मंथरा दासी, असुर-संहार किया॥गीता प्रेस।
अंतरा 4वेद-ज्ञान-प्रदायिनि, बुद्धि-प्रकाश करो। मोहाज्ञान तिमिर का सत्वर नाश करो॥गीता प्रेस (स्कैन से पढ़े गए पाठ में कुछ अक्षर बिगड़े हैं)। भारतडिस्कवरी में दूसरी पंक्ति “मोह और अज्ञान तिमिर का जग से नाश करो”।
अंतरा 5धूप-दीप-फल-मेवा, पूजा स्वीकार करो। ज्ञान-चक्षु दे माता, सब गुण-ज्ञान भरो॥गीता प्रेस। भारतडिस्कवरी में “ज्ञानचक्षु दे माता भव से उद्धार करो”।

रचयिता और स्रोत

रचयिता
ज्ञात नहीं
भाषा
हिन्दी

पाठ की जाँच (10 अक्टूबर 2026): हर पंक्ति भक्ति भारत, वेबदुनिया (2012 का लेख) और द्रिक पंचांग से मिलाई; भारतडिस्कवरी और गीता प्रेस के आरती-संग्रह (नया संस्करण, archive.org पर स्कैन से पढ़ा गया पाठ) से भी तुलना की। भक्ति भारत और द्रिक पंचांग का पाठ अक्षरशः एक है, इसलिए हर पंक्ति वेबदुनिया या भारतडिस्कवरी से भी जाँची: सब पंक्तियाँ इनमें मिलती हैं, “बाएं … दाएं कर माला” और “मोह अज्ञान और तिमिर का” छोटे शब्द-अंतर के साथ। गीता प्रेस का पाठ कई पंक्तियों में अलग (संपादित) है और किसी दूसरे स्रोत में नहीं मिला, इसलिए वह पाठभेद में है। गीता प्रेस के पुराने संस्करण (कोड 153) में यह आरती नहीं है।

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माँ सरस्वती के लिए और

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सरस्वती जी की यह आरती किसने लिखी?

इसके रचयिता का नाम आरती में नहीं आता, और किसी विश्वसनीय स्रोत में प्रमाण के साथ नहीं मिलता।

“पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया” का क्या अर्थ है?

रामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड में कथा है कि देवताओं की विनती पर सरस्वती ने मंथरा की बुद्धि फेर दी, जिससे श्री राम वन गए और आगे चलकर रावण का अंत हुआ। आरती इसी कथा की ओर संकेत करती है।

सरस्वती जी की आरती कब गाएँ?

वसंत पंचमी की सरस्वती पूजा के बाद यह विशेष रूप से गाई जाती है। पढ़ाई या संगीत सीखने वाले इसे रोज़ की पूजा में भी गा सकते हैं।

क्या “जय सरस्वती माता” और “या कुन्देन्दुतुषारहारधवला” एक ही हैं?

नहीं। “या कुन्देन्दु…” संस्कृत का वंदना-श्लोक है, और “जय सरस्वती माता” हिंदी की आरती। कई घरों में पहले श्लोक और फिर आरती गाई जाती है।

क्या छोटे बच्चे यह आरती गा सकते हैं?

हाँ। इसकी भाषा सरल है, और बच्चे इसे आसानी से सीख सकते हैं।

सुधार सुझाएँ

पाठ की किसी पंक्ति, शब्द या अर्थ में गलती दिखे तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को प्रामाणिक स्रोत से मिलाकर ही बदलते हैं, और मूल पाठ में अपनी ओर से कुछ नहीं जोड़ते।

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