अय्यप्पा

स्तोत्र · अय्यप्पा · स्तुति

हरिवरासनम्

भगवान अय्यप्पा की स्तुति हरिवरासनम्, जो सबरीमला में रात को मंदिर के कपाट बंद होने से पहले गाई जाती है। आठ श्लोक, अर्थ सहित।

इस पेज पर
  1. पूरा पाठ
  2. परिचय
  3. भावार्थ
  4. कब पढ़ें
  5. विधि
  6. पाठ-भेद
  7. रचयिता और स्रोत
  8. ये भी पढ़ें
  9. सवाल-जवाब
  10. सुधार सुझाएँ

हरिवरासनं विश्वमोहनंहरिदधीश्वरमाराध्यपादुकम् ।अरिविमर्दनं नित्यनर्तनंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥१॥

॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥

harivarāsanaṃ viśvamohanaṃ
haridadhīśvaramārādhyapādukam |
arivimardanaṃ nityanartanaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||

अर्थ: जो श्रेष्ठ सिंहासन पर विराजते हैं, जो संसार को मोहित करते हैं, जो दिशाओं के स्वामी हैं और जिनकी पादुकाएँ पूजनीय हैं, जो शत्रुओं का नाश करते हैं और सदा आनंद में नृत्य करते हैं, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।

हरिवरासनं
श्रेष्ठ सिंहासन पर विराजने वाले
विश्वमोहनं
संसार को मोहित करने वाले
हरिदधीश्वरम्
दिशाओं के स्वामी
आराध्यपादुकम्
जिनकी पादुका पूजनीय है
अरिविमर्दनं
शत्रुओं का नाश करने वाले
हरिहरात्मजं
विष्णु और शिव के पुत्र
आश्रये
शरण लेता हूँ

शरणकीर्तनं भक्तमानसंभरणलोलुपं नर्तनालसम् ।अरुणभासुरं भूतनायकंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥२॥

॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥

śaraṇakīrtanaṃ bhaktamānasaṃ
bharaṇalolupaṃ nartanālasam |
aruṇabhāsuraṃ bhūtanāyakaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||

अर्थ: जिनका नाम शरण-घोष के कीर्तन में गूँजता है, जो भक्तों के मन में बसते हैं, जो संसार का पालन करने को सदा उत्सुक रहते हैं, जो नृत्य में मग्न रहते हैं, जो उगते सूर्य की लाली जैसे चमकते हैं और भूतगणों के स्वामी हैं, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।

शरणकीर्तनं
जिनका शरण-कीर्तन होता है
भक्तमानसं
भक्तों के मन में बसने वाले
भरणलोलुपं
पालन करने को उत्सुक
अरुणभासुरं
उगते सूर्य जैसे चमकने वाले
भूतनायकं
भूतगणों के स्वामी

प्रणयसत्यकं प्राणनायकंप्रणतकल्पकं सुप्रभाञ्चितम् ।प्रणवमन्दिरं कीर्तनप्रियंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥३॥

॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥

praṇayasatyakaṃ prāṇanāyakaṃ
praṇatakalpakaṃ suprabhāñcitam |
praṇavamandiraṃ kīrtanapriyaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||

अर्थ: जो प्रेम और सत्य के रूप हैं, प्राणों के स्वामी हैं, प्रणाम करने वालों के लिए कल्पवृक्ष हैं, सुंदर प्रभा से सुशोभित हैं, जो प्रणव (ॐ) के मंदिर हैं और जिन्हें कीर्तन प्रिय है, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।

प्रणयसत्यकं
प्रेम और सत्य के रूप
प्राणनायकं
प्राणों के स्वामी
प्रणतकल्पकं
प्रणाम करने वालों के कल्पवृक्ष
सुप्रभाञ्चितम्
सुंदर प्रभा से युक्त
प्रणवमन्दिरं
ॐ के धाम
कीर्तनप्रियं
जिन्हें कीर्तन प्रिय है

तुरगवाहनं सुन्दराननंवरगदायुधं वेदवर्णितम् ।गुरुकृपाकरं कीर्तनप्रियंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥४॥

॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥

turagavāhanaṃ sundarānanaṃ
varagadāyudhaṃ vedavarṇitam |
gurukṛpākaraṃ kīrtanapriyaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||

अर्थ: जिनका वाहन घोड़ा है, जिनका मुख सुंदर है, जो श्रेष्ठ गदा धारण करते हैं, जिनका वर्णन वेद करते हैं, जो गुरु की तरह कृपा करते हैं और जिन्हें कीर्तन प्रिय है, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।

तुरगवाहनं
घोड़े पर सवार
सुन्दराननं
सुंदर मुख वाले
वरगदायुधं
श्रेष्ठ गदा धारण करने वाले
वेदवर्णितम्
वेदों में वर्णित
गुरुकृपाकरं
गुरु की तरह कृपा करने वाले

त्रिभुवनार्चितं देवतात्मकंत्रिनयनप्रभुं दिव्यदेशिकम् ।त्रिदशपूजितं चिन्तितप्रदंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥५॥

॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥

tribhuvanārcitaṃ devatātmakaṃ
trinayanaprabhuṃ divyadeśikam |
tridaśapūjitaṃ cintitapradaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||

अर्थ: जिनकी तीनों लोक पूजा करते हैं, जो सब देवताओं के स्वरूप हैं, जो त्रिनयन प्रभु हैं, दिव्य गुरु हैं, जिन्हें देवता पूजते हैं और जो मन में सोची हुई इच्छा पूरी करते हैं, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।

त्रिभुवनार्चितं
तीनों लोकों से पूजित
देवतात्मकं
देवताओं के स्वरूप
त्रिनयनप्रभुं
तीन नेत्रों वाले प्रभु
दिव्यदेशिकम्
दिव्य गुरु
त्रिदशपूजितं
देवताओं से पूजित
चिन्तितप्रदं
सोची हुई इच्छा पूरी करने वाले

भवभयापहं भावुकावहंभुवनमोहनं भूतिभूषणम् ।धवलवाहनं दिव्यवारणंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥६॥

॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥

bhavabhayāpahaṃ bhāvukāvahaṃ
bhuvanamohanaṃ bhūtibhūṣaṇam |
dhavalavāhanaṃ divyavāraṇaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||

अर्थ: जो संसार के भय को दूर करते हैं, कल्याण लाते हैं, सब लोकों को मोहित करते हैं, विभूति (भस्म) जिनका आभूषण है, जिनका वाहन श्वेत दिव्य हाथी है, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।

भवभयापहं
संसार का भय हरने वाले
भावुकावहं
कल्याण लाने वाले
भुवनमोहनं
लोकों को मोहित करने वाले
भूतिभूषणम्
विभूति जिनका आभूषण है
धवलवाहनं
श्वेत वाहन वाले
दिव्यवारणं
दिव्य हाथी

कलमृदुस्मितं सुन्दराननंकलभकोमलं गात्रमोहनम् ।कलभकेसरी वाजिवाहनंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥७॥

॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥

kalamṛdusmitaṃ sundarānanaṃ
kalabhakomalaṃ gātramohanam |
kalabhakesarī vājivāhanaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||

अर्थ: जिनकी मुस्कान मधुर और कोमल है, मुख सुंदर है, जो हाथी के बच्चे जैसे कोमल हैं और जिनका शरीर मन मोह लेता है, जिनके वाहन हाथी का बच्चा, सिंह और घोड़ा हैं, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।

कलमृदुस्मितं
मधुर कोमल मुस्कान वाले
कलभ
हाथी का बच्चा
गात्रमोहनम्
मनमोहक शरीर वाले
केसरी
सिंह
वाजिवाहनं
घोड़े पर सवार

श्रितजनप्रियं चिन्तितप्रदंश्रुतिविभूषणं साधुजीवनम् ।श्रुतिमनोहरं गीतलालसंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥८॥

॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥

śritajanapriyaṃ cintitapradaṃ
śrutivibhūṣaṇaṃ sādhujīvanam |
śrutimanoharaṃ gītalālasaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||

अर्थ: जिन्हें शरण में आए लोग प्रिय हैं, जो मनचाहा देते हैं, वेद जिनके आभूषण हैं, जो सज्जनों के जीवन-आधार हैं, जो सुनने में मनोहर हैं और जिन्हें गीत-संगीत प्रिय है, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।

श्रितजनप्रियं
शरणागतों को प्रिय रखने वाले
श्रुतिविभूषणं
वेद जिनके आभूषण हैं
साधुजीवनम्
सज्जनों के जीवन
श्रुतिमनोहरं
कानों को प्रिय
गीतलालसं
गीत के प्रेमी

॥ इति श्री हरिहरात्मजाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

|| iti śrī hariharātmajāṣṭakaṃ sampūrṇam ||

अर्थ: इस प्रकार श्री हरिहरात्मजाष्टक (हरिवरासनम्) पूरा हुआ।

हरिहरात्मजाष्टकं
हरिहरपुत्र का अष्टक
सम्पूर्णम्
पूरा हुआ

परिचय

हरिवरासनम् भगवान अय्यप्पा (हरिहरपुत्र, धर्मशास्ता) की स्तुति है। हर श्लोक "हरिहरात्मजं देवमाश्रये" पर पूरा होता है, यानी मैं हरि (विष्णु) और हर (शिव) के पुत्र देव की शरण लेता हूँ। इसी कारण इसे हरिहरात्मजाष्टकम् भी कहते हैं।

केरल के सबरीमला मंदिर में रात को कपाट बंद होने से पहले यही स्तुति गाई जाती है, इसलिए इसे अय्यप्पा का निद्रा-गीत भी कहा जाता है। गाते समय हर श्लोक के बाद "शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा" दोहराया जाता है।

भावार्थ

हरिवरासनम् में कोई माँग नहीं है, केवल शरणागति है। हर श्लोक भगवान अय्यप्पा के रूप और गुणों को गिनाता है और अंत में एक ही बात कहता है: मैं हरि और हर के पुत्र की शरण लेता हूँ। उनकी मधुर मुस्कान, सुंदर मुख, घोड़े और हाथी की सवारी, विभूति का आभूषण और कीर्तन का प्रेम, सब एक प्यार भरे चित्र की तरह उभरते हैं।

हरिहरपुत्र होने से अय्यप्पा में शिव और विष्णु, दोनों परंपराएँ मिलती हैं। रात को सबरीमला में यह स्तुति गाकर भगवान को विश्राम दिया जाता है, इसलिए इसका स्वर कोमल और शांत है। घर पर भी इसे दिन के अंत में, मन को शांत करके, शरण के भाव से गाया जाता है।

यह स्तुति कब पढ़ा जाता है

  • रात की पूजा के अंत में, सोने से पहले
  • सबरीमला यात्रा (मण्डल काल) के दिनों में
  • मकर संक्रांति (मकरविळक्कु) के आसपास अय्यप्पा पूजा में
  • अय्यप्पा भजन-संध्या के समापन पर

पढ़ने की विधि

  • अय्यप्पा के चित्र के सामने दीप जलाकर शांत मन से बैठें।
  • हर श्लोक धीमी, कोमल लय में गाएँ; यह लोरी की तरह शांत भाव की स्तुति है।
  • हर श्लोक के बाद "शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा" दोहराएँ।

पाठ-भेद

अलग-अलग पुस्तकों में कुछ जगह शब्द अलग मिलते हैं। ऊपर का पाठ नीचे दिए स्रोत के अनुसार है; दूसरे पाठ ये हैं:

कहाँदूसरा पाठटिप्पणी
श्लोक 6भावुकावकम्vignanam.org में ऐसा छपा है; sanskritdocuments.org का "भावुकावहं" (कल्याण लाने वाले) यहाँ लिया गया है।
श्लोक 7कलभकेसरीवाजिवाहनम्vignanam.org इसे एक समास के रूप में लिखता है; अर्थ वही है।
दोहराई जाने वाली पंक्तिशरणं अय्यप्पा स्वामि शरणं अय्यप्पाvignanam.org "स्वामि" लिखता है।

रचयिता और स्रोत

रचयिता
कुम्बकुडि कुलत्तूर अय्यर (प्रचलित मत) (परंपरा के अनुसार)
ग्रंथ / स्रोत
सबरीमला मंदिर की गायन-परंपरा
भाषा
संस्कृत

रचयिता को लेकर मतभेद है। सबसे अधिक कुम्बकुडि कुलत्तूर श्रीनिवास अय्यर का नाम लिया जाता है, पर दूसरे दावे भी हैं। sanskritdocuments.org और vignanam.org रचयिता का नाम नहीं देते। यह बीसवीं सदी की रचना मानी जाती है।

sanskritdocuments.org इसे "हरिहरात्मजाष्टकम्" नाम से देता है और उसके बाद दस और श्लोक (9–18) जोड़ता है, जिनमें कुछ मलयालम शब्द हैं और जो प्रचलित हरिवरासनम् में नहीं गाए जाते। यहाँ केवल आठ मूल श्लोक दिए गए हैं, जो vignanam.org के पाठ से भी मेल खाते हैं।

पाठ की जाँच (10 अक्टूबर 2026): आठों श्लोक sanskritdocuments.org से लिए गए और vignanam.org (हरिवरासनम् और हरिहरात्मज अष्टकम्, दोनों पृष्ठ) से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाए गए। दोनों स्रोत आठ श्लोकों में लगभग एक-से हैं। sanskritdocuments.org के अतिरिक्त श्लोक 9–18 शामिल नहीं किए गए, क्योंकि वे प्रचलित स्तुति का भाग नहीं हैं। "शरणं अय्यप्पा" वाली पंक्ति स्रोतों में अंत में एक बार छपी है; गाने में वह हर श्लोक के बाद आती है, इसलिए उसे दोहराव के रूप में चिह्नित किया गया है।

ये भी पढ़ें

गणेश

गणेश पूजा विधि

गणेश · पूजा विधि · रोज़ की पूजा

घर में गणेश जी की सरल पूजा: बारह नामों से स्मरण, दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर, मोदक या लड्डू का भोग, आरती और तीन परिक्रमा। बुधवार, चतुर्थी और हर शुभ काम से पहले।

गणेश

गणेश चालीसा

गणेश · चालीसा

जय गणपति सद्गुणसदन, कविवर बदन कृपाल

भगवान अय्यप्पा के लिए और

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हरिवरासनम् किसने लिखा?

इस पर मतभेद है। सबसे अधिक कुम्बकुडि कुलत्तूर श्रीनिवास अय्यर का नाम लिया जाता है, पर दूसरे दावे भी हैं, और प्रमुख स्तोत्र-स्रोत रचयिता का नाम नहीं देते।

सबरीमला में यह कब गाया जाता है?

रात को मंदिर के कपाट बंद होने से ठीक पहले। इसीलिए इसे अय्यप्पा का निद्रा-गीत भी कहा जाता है।

"हरिहरात्मज" का क्या अर्थ है?

हरि यानी विष्णु, हर यानी शिव और आत्मज यानी पुत्र। भगवान अय्यप्पा को शिव और विष्णु (मोहिनी रूप) का पुत्र माना जाता है।

क्या इसे घर पर गा सकते हैं?

हाँ। बहुत से भक्त रात की पूजा या भजन के अंत में इसे गाते हैं। इसका कोई कठिन नियम नहीं है; शांत मन और शरण का भाव ही मुख्य है।

इसमें कितने श्लोक हैं?

प्रचलित हरिवरासनम् में आठ श्लोक हैं। कुछ संग्रहों (जैसे sanskritdocuments.org) में बाद में जोड़े गए दस और श्लोक मिलते हैं, जो सामान्यतः नहीं गाए जाते।

सुधार सुझाएँ

पाठ की किसी पंक्ति, शब्द या अर्थ में गलती दिखे तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को प्रामाणिक स्रोत से मिलाकर ही बदलते हैं, और मूल पाठ में अपनी ओर से कुछ नहीं जोड़ते।

सुधार भेजें