गणेश पूजा विधि
गणेश · पूजा विधि · रोज़ की पूजा
घर में गणेश जी की सरल पूजा: बारह नामों से स्मरण, दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर, मोदक या लड्डू का भोग, आरती और तीन परिक्रमा। बुधवार, चतुर्थी और हर शुभ काम से पहले।

स्तोत्र · अय्यप्पा · स्तुति
भगवान अय्यप्पा की स्तुति हरिवरासनम्, जो सबरीमला में रात को मंदिर के कपाट बंद होने से पहले गाई जाती है। आठ श्लोक, अर्थ सहित।
हरिवरासनं विश्वमोहनंहरिदधीश्वरमाराध्यपादुकम् ।अरिविमर्दनं नित्यनर्तनंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥१॥
॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥
harivarāsanaṃ viśvamohanaṃ
haridadhīśvaramārādhyapādukam |
arivimardanaṃ nityanartanaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||
अर्थ: जो श्रेष्ठ सिंहासन पर विराजते हैं, जो संसार को मोहित करते हैं, जो दिशाओं के स्वामी हैं और जिनकी पादुकाएँ पूजनीय हैं, जो शत्रुओं का नाश करते हैं और सदा आनंद में नृत्य करते हैं, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।
शरणकीर्तनं भक्तमानसंभरणलोलुपं नर्तनालसम् ।अरुणभासुरं भूतनायकंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥२॥
॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥
śaraṇakīrtanaṃ bhaktamānasaṃ
bharaṇalolupaṃ nartanālasam |
aruṇabhāsuraṃ bhūtanāyakaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||
अर्थ: जिनका नाम शरण-घोष के कीर्तन में गूँजता है, जो भक्तों के मन में बसते हैं, जो संसार का पालन करने को सदा उत्सुक रहते हैं, जो नृत्य में मग्न रहते हैं, जो उगते सूर्य की लाली जैसे चमकते हैं और भूतगणों के स्वामी हैं, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।
प्रणयसत्यकं प्राणनायकंप्रणतकल्पकं सुप्रभाञ्चितम् ।प्रणवमन्दिरं कीर्तनप्रियंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥३॥
॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥
praṇayasatyakaṃ prāṇanāyakaṃ
praṇatakalpakaṃ suprabhāñcitam |
praṇavamandiraṃ kīrtanapriyaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||
अर्थ: जो प्रेम और सत्य के रूप हैं, प्राणों के स्वामी हैं, प्रणाम करने वालों के लिए कल्पवृक्ष हैं, सुंदर प्रभा से सुशोभित हैं, जो प्रणव (ॐ) के मंदिर हैं और जिन्हें कीर्तन प्रिय है, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।
तुरगवाहनं सुन्दराननंवरगदायुधं वेदवर्णितम् ।गुरुकृपाकरं कीर्तनप्रियंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥४॥
॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥
turagavāhanaṃ sundarānanaṃ
varagadāyudhaṃ vedavarṇitam |
gurukṛpākaraṃ kīrtanapriyaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||
अर्थ: जिनका वाहन घोड़ा है, जिनका मुख सुंदर है, जो श्रेष्ठ गदा धारण करते हैं, जिनका वर्णन वेद करते हैं, जो गुरु की तरह कृपा करते हैं और जिन्हें कीर्तन प्रिय है, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।
त्रिभुवनार्चितं देवतात्मकंत्रिनयनप्रभुं दिव्यदेशिकम् ।त्रिदशपूजितं चिन्तितप्रदंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥५॥
॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥
tribhuvanārcitaṃ devatātmakaṃ
trinayanaprabhuṃ divyadeśikam |
tridaśapūjitaṃ cintitapradaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||
अर्थ: जिनकी तीनों लोक पूजा करते हैं, जो सब देवताओं के स्वरूप हैं, जो त्रिनयन प्रभु हैं, दिव्य गुरु हैं, जिन्हें देवता पूजते हैं और जो मन में सोची हुई इच्छा पूरी करते हैं, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।
भवभयापहं भावुकावहंभुवनमोहनं भूतिभूषणम् ।धवलवाहनं दिव्यवारणंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥६॥
॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥
bhavabhayāpahaṃ bhāvukāvahaṃ
bhuvanamohanaṃ bhūtibhūṣaṇam |
dhavalavāhanaṃ divyavāraṇaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||
अर्थ: जो संसार के भय को दूर करते हैं, कल्याण लाते हैं, सब लोकों को मोहित करते हैं, विभूति (भस्म) जिनका आभूषण है, जिनका वाहन श्वेत दिव्य हाथी है, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।
कलमृदुस्मितं सुन्दराननंकलभकोमलं गात्रमोहनम् ।कलभकेसरी वाजिवाहनंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥७॥
॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥
kalamṛdusmitaṃ sundarānanaṃ
kalabhakomalaṃ gātramohanam |
kalabhakesarī vājivāhanaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||
अर्थ: जिनकी मुस्कान मधुर और कोमल है, मुख सुंदर है, जो हाथी के बच्चे जैसे कोमल हैं और जिनका शरीर मन मोह लेता है, जिनके वाहन हाथी का बच्चा, सिंह और घोड़ा हैं, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।
श्रितजनप्रियं चिन्तितप्रदंश्रुतिविभूषणं साधुजीवनम् ।श्रुतिमनोहरं गीतलालसंहरिहरात्मजं देवमाश्रये ॥८॥
॥ शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा ॥
śritajanapriyaṃ cintitapradaṃ
śrutivibhūṣaṇaṃ sādhujīvanam |
śrutimanoharaṃ gītalālasaṃ
hariharātmajaṃ devamāśraye ||
अर्थ: जिन्हें शरण में आए लोग प्रिय हैं, जो मनचाहा देते हैं, वेद जिनके आभूषण हैं, जो सज्जनों के जीवन-आधार हैं, जो सुनने में मनोहर हैं और जिन्हें गीत-संगीत प्रिय है, उन हरिहरपुत्र देव की मैं शरण लेता हूँ।
॥ इति श्री हरिहरात्मजाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
|| iti śrī hariharātmajāṣṭakaṃ sampūrṇam ||
अर्थ: इस प्रकार श्री हरिहरात्मजाष्टक (हरिवरासनम्) पूरा हुआ।
हरिवरासनम् भगवान अय्यप्पा (हरिहरपुत्र, धर्मशास्ता) की स्तुति है। हर श्लोक "हरिहरात्मजं देवमाश्रये" पर पूरा होता है, यानी मैं हरि (विष्णु) और हर (शिव) के पुत्र देव की शरण लेता हूँ। इसी कारण इसे हरिहरात्मजाष्टकम् भी कहते हैं।
केरल के सबरीमला मंदिर में रात को कपाट बंद होने से पहले यही स्तुति गाई जाती है, इसलिए इसे अय्यप्पा का निद्रा-गीत भी कहा जाता है। गाते समय हर श्लोक के बाद "शरणं अय्यप्पा स्वामी शरणं अय्यप्पा" दोहराया जाता है।
हरिवरासनम् में कोई माँग नहीं है, केवल शरणागति है। हर श्लोक भगवान अय्यप्पा के रूप और गुणों को गिनाता है और अंत में एक ही बात कहता है: मैं हरि और हर के पुत्र की शरण लेता हूँ। उनकी मधुर मुस्कान, सुंदर मुख, घोड़े और हाथी की सवारी, विभूति का आभूषण और कीर्तन का प्रेम, सब एक प्यार भरे चित्र की तरह उभरते हैं।
हरिहरपुत्र होने से अय्यप्पा में शिव और विष्णु, दोनों परंपराएँ मिलती हैं। रात को सबरीमला में यह स्तुति गाकर भगवान को विश्राम दिया जाता है, इसलिए इसका स्वर कोमल और शांत है। घर पर भी इसे दिन के अंत में, मन को शांत करके, शरण के भाव से गाया जाता है।
अलग-अलग पुस्तकों में कुछ जगह शब्द अलग मिलते हैं। ऊपर का पाठ नीचे दिए स्रोत के अनुसार है; दूसरे पाठ ये हैं:
| कहाँ | दूसरा पाठ | टिप्पणी |
|---|---|---|
| श्लोक 6 | भावुकावकम् | vignanam.org में ऐसा छपा है; sanskritdocuments.org का "भावुकावहं" (कल्याण लाने वाले) यहाँ लिया गया है। |
| श्लोक 7 | कलभकेसरीवाजिवाहनम् | vignanam.org इसे एक समास के रूप में लिखता है; अर्थ वही है। |
| दोहराई जाने वाली पंक्ति | शरणं अय्यप्पा स्वामि शरणं अय्यप्पा | vignanam.org "स्वामि" लिखता है। |
रचयिता को लेकर मतभेद है। सबसे अधिक कुम्बकुडि कुलत्तूर श्रीनिवास अय्यर का नाम लिया जाता है, पर दूसरे दावे भी हैं। sanskritdocuments.org और vignanam.org रचयिता का नाम नहीं देते। यह बीसवीं सदी की रचना मानी जाती है।
sanskritdocuments.org इसे "हरिहरात्मजाष्टकम्" नाम से देता है और उसके बाद दस और श्लोक (9–18) जोड़ता है, जिनमें कुछ मलयालम शब्द हैं और जो प्रचलित हरिवरासनम् में नहीं गाए जाते। यहाँ केवल आठ मूल श्लोक दिए गए हैं, जो vignanam.org के पाठ से भी मेल खाते हैं।
पाठ की जाँच (10 अक्टूबर 2026): आठों श्लोक sanskritdocuments.org से लिए गए और vignanam.org (हरिवरासनम् और हरिहरात्मज अष्टकम्, दोनों पृष्ठ) से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाए गए। दोनों स्रोत आठ श्लोकों में लगभग एक-से हैं। sanskritdocuments.org के अतिरिक्त श्लोक 9–18 शामिल नहीं किए गए, क्योंकि वे प्रचलित स्तुति का भाग नहीं हैं। "शरणं अय्यप्पा" वाली पंक्ति स्रोतों में अंत में एक बार छपी है; गाने में वह हर श्लोक के बाद आती है, इसलिए उसे दोहराव के रूप में चिह्नित किया गया है।
गणेश · पूजा विधि · रोज़ की पूजा
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गणेश · आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
गणेश · आरती · मराठी
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची
गणेश · चालीसा
जय गणपति सद्गुणसदन, कविवर बदन कृपाल
गणेश · स्तोत्र · संस्कृत
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्
गणेश · श्लोक · संस्कृत
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ
इस पर मतभेद है। सबसे अधिक कुम्बकुडि कुलत्तूर श्रीनिवास अय्यर का नाम लिया जाता है, पर दूसरे दावे भी हैं, और प्रमुख स्तोत्र-स्रोत रचयिता का नाम नहीं देते।
रात को मंदिर के कपाट बंद होने से ठीक पहले। इसीलिए इसे अय्यप्पा का निद्रा-गीत भी कहा जाता है।
हरि यानी विष्णु, हर यानी शिव और आत्मज यानी पुत्र। भगवान अय्यप्पा को शिव और विष्णु (मोहिनी रूप) का पुत्र माना जाता है।
हाँ। बहुत से भक्त रात की पूजा या भजन के अंत में इसे गाते हैं। इसका कोई कठिन नियम नहीं है; शांत मन और शरण का भाव ही मुख्य है।
प्रचलित हरिवरासनम् में आठ श्लोक हैं। कुछ संग्रहों (जैसे sanskritdocuments.org) में बाद में जोड़े गए दस और श्लोक मिलते हैं, जो सामान्यतः नहीं गाए जाते।
पाठ की किसी पंक्ति, शब्द या अर्थ में गलती दिखे तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को प्रामाणिक स्रोत से मिलाकर ही बदलते हैं, और मूल पाठ में अपनी ओर से कुछ नहीं जोड़ते।