गणेश

पूजा विधि · गणेश · रोज़ की पूजा

गणेश पूजा विधि

घर में गणेश जी की सरल पूजा: बारह नामों से स्मरण, दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर, मोदक या लड्डू का भोग, आरती और तीन परिक्रमा। बुधवार, चतुर्थी और हर शुभ काम से पहले।

इस पेज पर
  1. परिचय
  2. एक नज़र में
  3. कब करें
  4. सामग्री
  5. तैयारी
  6. चित्र या मूर्ति
  7. संकल्प
  8. चरण-दर-चरण विधि
  9. पाठ
  10. भोग
  11. समापन
  12. छोटी विधि
  13. परंपराओं में अंतर
  14. ये भी पढ़ें
  15. स्रोत
  16. सवाल-जवाब
  17. सुधार सुझाएँ
रोज़ की पूजा

यह पन्ना घर में रोज़, बुधवार या चतुर्थी को की जाने वाली गणेश जी की सरल पूजा बताता है, और यह भी कि किसी नए काम की शुरुआत में उनका छोटा-सा स्मरण कैसे करें। गणेश चतुर्थी के दस दिन के उत्सव में नई मूर्ति की स्थापना, प्राण-प्रतिष्ठा और विसर्जन, गणपति अथर्वशीर्ष के वैदिक पाठ से अभिषेक, और मंदिर या दीक्षा से जुड़ी गणपति उपासना अलग विधियाँ हैं; इन्हें किसी जानकार आचार्य से समझकर करें।

परिचय

हर शुभ काम की शुरुआत गणेश जी के स्मरण से होती है; इसीलिए उन्हें प्रथम पूज्य कहा जाता है। किसी भी देवता की पूजा, गृह प्रवेश, विवाह या पढ़ाई की शुरुआत में सबसे पहले "श्री गणेशाय नमः" कहने की परंपरा पूरे भारत में है।

गणेश जी की अपनी पूजा भी सरल है। उन्हें दूर्वा (दूब घास) सबसे प्रिय मानी जाती है, भोग में मोदक या लड्डू, और लाल फूल व सिंदूर। यहाँ घर की रोज़ की पूजा का क्रम है, जिसे बुधवार और चतुर्थी को थोड़ा विस्तार दिया जा सकता है। मूर्ति न हो तो एक सुपारी से भी पूजा होती है, और जो सामग्री न हो उसकी जगह भाव से किया गया नमन भी पूरी पूजा है।

एक नज़र में

समय
सुबह स्नान के बाद; बुधवार, विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी पर विशेष
अवधि
लगभग 15 मिनट; किसी काम से पहले का स्मरण एक मिनट में
कौन कर सकता है
घर का कोई भी सदस्य; बच्चे भी आसानी से कर सकते हैं
मुख्य सामग्री
दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर या रोली, अक्षत, दीपक, मोदक या लड्डू
आरती
जय गणेश जय गणेश देवा; महाराष्ट्र में सुखकर्ता दुःखहर्ता

पूजा कब करें

  • रोज़ सुबह, घर की पूजा की शुरुआत में। जिस दिन समय कम हो, उस दिन दीपक जलाकर बारह नामों का स्मरण भी काफ़ी है।
  • बुधवार गणेश जी का दिन माना जाता है। उनके मासिक व्रत तिथि से चलते हैं: शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी।
  • विनायक चतुर्थी की पूजा दोपहर (मध्याह्न) में और संकष्टी की पूजा शाम को होती है; संकष्टी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है। यहीं के विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी वाले पन्नों पर तारीख़ें, मध्याह्न पूजा का समय और चंद्रोदय दिए गए हैं।
  • किसी नए काम, यात्रा, परीक्षा या नए घर में प्रवेश से पहले छोटा-सा गणेश स्मरण किया जाता है। भाद्रपद की गणेश चतुर्थी का दस दिन का उत्सव अलग पर्व है।

पूजा सामग्री

  • आवश्यक इसके बिना यह विधि नहीं होती
  • वैकल्पिक हो तो अच्छा; न हो तो विकल्प दिया है
  • परंपरा-विशेष कुछ परंपराओं में ही
सामग्रीउपयोगस्थितिविकल्प / टिप्पणी
गणेश जी की मूर्ति या तस्वीरपूजा का केंद्रवैकल्पिकन हो तो एक सुपारी पर मौली लपेटकर अक्षत की छोटी ढेरी पर रखें और उसे गणेश जी का प्रतीक मानकर पूजें; गीता प्रेस मूर्ति न होने पर यही बताती है।
दूर्वा (दूब घास)गणेश जी को सबसे प्रिय; तीन या पाँच पत्तियों वाली फुनगीवैकल्पिक21 दूर्वा चढ़ाने का चलन है, जिसे गीता प्रेस गणेश पुराण के हवाले से लिखती है; कम मिलें तो जितनी हों उतनी। एक गमले में दूब उगा लेना आसान उपाय है।
लाल फूलगुड़हल, गुलाब या कनेरवैकल्पिकजो भी ताज़ा फूल मिले। तुलसी गणेश जी को नहीं चढ़ाई जाती।
सिंदूर या रोलीतिलकवैकल्पिककुमकुम या लाल चंदन; न हो तो छोड़ दें।
चंदन और अक्षतगंध और अर्पणवैकल्पिकन हों तो छोड़ दें।
शमी के पत्तेकई परंपराओं में, ख़ासकर महाराष्ट्र में, गणेश जी को प्रियपरंपरा-विशेषन मिलें तो छोड़ दें।
मौली या जनेऊविस्तृत पूजा में वस्त्र और यज्ञोपवीत के रूप मेंपरंपरा-विशेषमौली का एक धागा वस्त्र की जगह चढ़ाया जा सकता है।
दीपक और धूपज्योति और सुगंधवैकल्पिकघी या तेल, जो हो।
मोदक या लड्डूगणेश जी का प्रिय भोगवैकल्पिकगुड़, बताशे, केला या कोई भी घर की मिठाई।
पान, सुपारी और नारियलविस्तृत पूजा में ताम्बूल और फलपरंपरा-विशेषरोज़ की पूजा में ज़रूरी नहीं।
कपूरआरतीवैकल्पिकघी के दीपक से भी आरती होती है।

स्थान और अपनी तैयारी

  • घर के पूजा-स्थान में गणेश जी की छोटी मूर्ति या तस्वीर रखें। कई परिवार मुख्य द्वार के पास भी गणेश जी का चित्र या स्वस्तिक रखते हैं।
  • स्नान के बाद साफ़ कपड़े पहनकर आसन पर बैठें और आचमन करें।
  • दूर्वा तोड़ें तो उसकी फुनगी, यानी ऊपर का कोमल हिस्सा, लें, जिसमें तीन या पाँच पत्तियाँ हों। धोकर उनकी छोटी-छोटी जोड़ियाँ या गड्डियाँ बना लें।
  • बच्चों को साथ बिठाना हो तो उन्हें दूर्वा गिनने या फूल चढ़ाने का काम दें; गणेश पूजा बच्चों के लिए पूजा सीखने की अच्छी शुरुआत है।

चित्र या मूर्ति कैसे रखें

  • गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर एक छोटी चौकी पर लाल या पीले कपड़े पर रखें। सामने एक थाली में पूजा की सामग्री।
  • मूर्ति न हो तो एक कटोरी या थाली में अक्षत की छोटी ढेरी बनाएँ और उस पर मौली लपेटी सुपारी रखें; यही गणेश जी का प्रतीक है।
  • गीता प्रेस की विधि में घी का दीपक दाईं ओर, धूप और घंटी बाईं ओर, और भोग मूर्ति के ठीक सामने रखा जाता है।
  • दिशा: पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठना प्रचलित है; परंपराएँ अलग हैं, घर की जगह के अनुसार बैठें।
  • कई परिवार गणेश जी के पास रोली से स्वस्तिक या "शुभ-लाभ" भी लिखते हैं।

संकल्प

संकल्प का अर्थ है पूजा से पहले मन में साफ़ निश्चय करना। गणेश पूजा अक्सर किसी काम की शुरुआत से जुड़ी होती है, इसलिए संकल्प में उस काम का नाम भी लिया जा सकता है।

हे विघ्नहर्ता गणेश जी, आज [दिन] को मैं [अपना नाम] अपनी श्रद्धा के अनुसार आपकी पूजा कर रहा/रही हूँ। मेरे आज के कामों की रुकावटें दूर हों और मुझे सही समझ मिले।

किसी विशेष काम, जैसे परीक्षा, यात्रा या नए व्यापार, से पहले पूजा कर रहे हों तो संकल्प में उस काम का नाम ले लें। विस्तृत पूजा का संस्कृत संकल्प पुरोहित बोलते हैं; घर में अपनी भाषा का संकल्प काफ़ी है।

पूजा की विधि, चरण-दर-चरण

  1. १आचमन और संकल्प

    क्या करें
    आसन पर बैठकर आचमन करें और संकल्प लें।
    कैसे करें
    दाहिनी हथेली में थोड़ा जल लेकर तीन बार पिएँ और हाथ धो लें। फिर हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प बोलें और जल छोड़ दें।
    भाव
    आज का दिन गणेश जी के स्मरण से शुरू।
    विकल्प
    जल्दी हो तो हाथ जोड़कर मन में संकल्प कर लें।
  2. २बारह नामों से स्मरण

    क्या करें
    हाथ में फूल और अक्षत लेकर गणेश जी के बारह नामों का स्मरण करें।
    कैसे करें
    गीता प्रेस की पञ्चदेव-पूजा प्रारंभ में इन्हीं बारह नामों से गणेश-स्मरण करती है। धीरे-धीरे पढ़ें, फिर फूल-अक्षत गणेश जी के सामने चढ़ा दें।
    भाव
    हर नाम में गणेश जी का एक रूप: सुंदर मुख, एक दाँत, बड़े कान, बड़ा उदर, और मस्तक पर चंद्रमा।
    पाठ

    सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः।
    लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः॥
    धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।

    अर्थ: सुमुख (सुंदर मुख वाले), एकदंत, कपिल, गजकर्ण (हाथी जैसे कान वाले), लम्बोदर, विकट, विघ्ननाश (विघ्न मिटाने वाले), विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष (गणों के स्वामी), भालचंद्र (मस्तक पर चंद्रमा वाले) और गजानन: ये गणेश जी के बारह नाम हैं।

    स्रोत: गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, पञ्चदेव-पूजन-विधि का "गणेश-स्मरण" (बारह नामों वाला श्लोक)।

    विकल्प
    श्लोक न पढ़ सकें तो केवल "श्री गणेशाय नमः" कहकर प्रणाम करें।
  3. ३ध्यान

    क्या करें
    गणेश जी के रूप का ध्यान करते हुए प्रार्थना करें कि हर काम बिना विघ्न पूरा हो।
    कैसे करें
    आँखें बंद करके टेढ़ी सूँड, बड़े शरीर और करोड़ों सूर्यों जैसी आभा वाले गणेश जी का रूप मन में लाएँ और नीचे का श्लोक पढ़ें। किसी भी काम से पहले केवल यही श्लोक पढ़ लेना भी गणेश-स्मरण है।
    भाव
    मेरे कामों में जो रुकावट हो, वह आपकी कृपा से हट जाए।
    पाठ

    वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
    निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

    अर्थ: हे टेढ़ी सूँड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों जैसी आभा वाले देव, मेरे सब कामों को सदा बिना विघ्न पूरा करें।

    वक्रतुण्ड महाकाय: पूरा पाठ और अर्थ

    विकल्प
    गीता प्रेस की पुस्तक में यह पाठ "कोटिसूर्यसमप्रभ" है; दोनों का अर्थ एक ही है: करोड़ों सूर्यों जैसी आभा वाले।
  4. ४स्नान और वस्त्र

    क्या करें
    मूर्ति को जल से स्नान कराएँ, पोंछें और मौली या वस्त्र चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    धातु या पत्थर की मूर्ति हो तो एक कटोरी में रखकर जल डालें, फिर साफ़ कपड़े से पोंछकर चौकी पर रखें। तस्वीर हो तो जल के कुछ छींटे दें या एक पात्र में जल अर्पित करें। वस्त्र की जगह मौली का एक धागा चढ़ा सकते हैं।
    भाव
    अतिथि की तरह आदर से सेवा।
    पाठ

    ॐ श्रीगणेशाय नमः। स्नानीयं जलं समर्पयामि॥
    ॐ श्रीगणेशाय नमः। वस्त्रं समर्पयामि॥

    अर्थ: श्री गणेश जी को नमन; मैं स्नान के लिए जल अर्पित करता/करती हूँ। श्री गणेश जी को नमन; मैं वस्त्र अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: हर उपचार को देवता के नाम-मंत्र के साथ "समर्पयामि" कहकर अर्पित करने का प्रचलित ढंग। गीता प्रेस की नित्यकर्म-पूजाप्रकाश कहती है कि जो श्लोक न पढ़ सकें वे नाम-मंत्र से पूजा करें; उसकी पञ्चदेव-पूजा में गणेश जी का नाम-मंत्र "ॐ श्रीगणेशाय नमः" है।

    विकल्प
    मिट्टी की मूर्ति पर जल न डालें; केवल फूल से जल के छींटे दें।
  5. ५सिंदूर, चंदन और अक्षत

    क्या करें
    गणेश जी को सिंदूर या रोली का तिलक लगाएँ, चंदन और अक्षत चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    अनामिका उंगली से तिलक लगाएँ। कई घरों में सिंदूर में थोड़ा घी मिलाकर लगाया जाता है। फिर कुछ अक्षत चढ़ाएँ।
    भाव
    मंगल का रंग, मंगल के देवता को।
    पाठ

    ॐ श्रीगणेशाय नमः। सिन्दूरं समर्पयामि॥
    ॐ श्रीगणेशाय नमः। अक्षतान् समर्पयामि॥

    अर्थ: श्री गणेश जी को नमन; मैं सिंदूर अर्पित करता/करती हूँ। श्री गणेश जी को नमन; मैं अक्षत अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; उपचार-वाक्य द्रिक पंचांग की गणेश पूजा विधि और गीता प्रेस के अनुसार।

    विकल्प
    सिंदूर न हो तो रोली या कुमकुम।
  6. ६दूर्वा अर्पण

    क्या करें
    दूर्वा की जोड़ियाँ गणेश जी के चरणों में या मस्तक पर चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    21 दूर्वा हों तो उन्हें दो-दो की जोड़ियों में या एक साथ गड्डी बनाकर चढ़ाएँ। गीता प्रेस के अनुसार दूर्वा की नोक अपनी ओर रखकर चढ़ाई जाती है। चढ़ाते हुए नीचे का श्लोक पढ़ें।
    भाव
    दूब की तरह हर हाल में हरा-भरा रहने की सीख।
    पाठ

    दूर्वाङ्कुरान् सुहरितानमृतान् मङ्गलप्रदान्।
    आनीतांस्तव पूजार्थं गृहाण गणनायक॥

    अर्थ: हे गणनायक, आपकी पूजा के लिए लाए गए ये हरे-भरे, अमृत जैसे, मंगल देने वाले दूर्वा के अंकुर स्वीकार करें।

    स्रोत: द्रिक पंचांग की गणेश चतुर्थी पूजा विधि का दूर्वाङ्कुर मंत्र। गीता प्रेस की पूजा-विधियों में भी यही श्लोक मिलता है, जहाँ अंत में "गृहाण परमेश्वर" है।

    विकल्प
    दूर्वा न मिले तो एक लाल फूल चढ़ाएँ और मन से दूर्वा अर्पित करें।
  7. ७फूल अर्पण

    क्या करें
    लाल फूल या फूलों की माला चढ़ाएँ।
    कैसे करें
    फूल ऊपर मुख करके चढ़ाएँ, जैसे पौधे पर खिलते हैं। तुलसी न चढ़ाएँ; गीता प्रेस पद्म पुराण के हवाले से लिखती है कि तुलसी से गणेश जी की पूजा नहीं की जाती।
    भाव
    जो सुंदर है, वह आपके लिए।
    पाठ

    ॐ श्रीगणेशाय नमः। पुष्पाणि समर्पयामि॥

    अर्थ: श्री गणेश जी को नमन; मैं फूल अर्पित करता/करती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के अनुसार।

    विकल्प
    फूल न हों तो अक्षत या मन से फूल अर्पित करें।
  8. ८धूप और दीप

    क्या करें
    धूप दिखाएँ और दीपक की ज्योति अर्पित करें।
    कैसे करें
    धूप को गणेश जी के सामने धीरे-धीरे घुमाकर रख दें, फिर दीपक दिखाएँ। दीपक दिखाने के बाद हाथ धो लें।
    भाव
    बुद्धि में उजाला रहे।
    पाठ

    ॐ श्रीगणेशाय नमः। धूपमाघ्रापयामि॥
    ॐ श्रीगणेशाय नमः। दीपं दर्शयामि॥

    अर्थ: श्री गणेश जी को नमन; मैं धूप की सुगंध अर्पित करता/करती हूँ। श्री गणेश जी को नमन; मैं दीपक की ज्योति दिखाता/दिखाती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के अनुसार।

    विकल्प
    दीपक न हो तो केवल धूप।
  9. ९मोदक या लड्डू का भोग

    क्या करें
    गणेश जी के सामने मोदक या लड्डू का भोग रखें।
    कैसे करें
    भोग एक छोटी थाली में रखें, उसके चारों ओर थोड़ा जल घुमाएँ और कुछ क्षण आँखें बंद करके निवेदन करें। फिर एक बार जल चढ़ाकर आचमन अर्पित करें। गीता प्रेस आचारेन्दु के हवाले से गणेश जी को लड्डू प्रिय बताती है; महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में मोदक सबसे प्रचलित है।
    भाव
    मीठा भोग, मीठा मन।
    पाठ

    ॐ श्रीगणेशाय नमः। नैवेद्यं निवेदयामि॥

    अर्थ: श्री गणेश जी को नमन; मैं यह भोग निवेदन करता/करती हूँ।

    स्रोत: नाम-मंत्र के साथ उपचार अर्पित करने का प्रचलित ढंग; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश के अनुसार।

    विकल्प
    गुड़, बताशे, केला या जो भी शुद्ध मिठाई घर में हो।
  10. १०मंत्र जाप

    क्या करें
    कुछ देर गणेश जी के मंत्र का जाप करें।
    कैसे करें
    11, 21 या 108 बार "ॐ गं गणपतये नमः", माला से या बिना माला के। गिनती से ज़्यादा ध्यान उच्चारण पर रखें। समय हो तो गणेश चालीसा या संकटनाशन गणेश स्तोत्र पढ़ें।
    भाव
    बार-बार नाम लेने से मन एक जगह टिकता है।
    पाठ

    ॐ गं गणपतये नमः

    अर्थ: गणों के स्वामी गणपति को नमस्कार।

    मंत्र का अर्थ और उच्चारण

    विकल्प
    कई परंपराओं में बीज मंत्र गुरु से लेकर जपे जाते हैं; जो ऐसा मानते हों, वे "श्री गणेशाय नमः" का नाम-जाप करें या गणेश गायत्री मंत्र पढ़ें।
  11. ११आरती

    क्या करें
    कपूर या घी के दीपक से "जय गणेश जय गणेश देवा" गाकर आरती करें।
    कैसे करें
    आरती की थाली गणेश जी के सामने घड़ी की सुई की दिशा में घुमाएँ, घंटी बजाएँ, परिवार साथ गाए। महाराष्ट्र के घरों में मराठी आरती "सुखकर्ता दुःखहर्ता" गाई जाती है। आरती के बाद थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमा दें।
    भाव
    पूरे घर का मन एक साथ गणपति की ओर।
    विकल्प
    आरती न आती हो तो दीपक घुमाते हुए "गणपति बाप्पा मोरया" या "श्री गणेशाय नमः" बोलें।
    आरतीजय गणेश जय गणेश जय गणेश देवापूरी गणेश जी की आरती पढ़ें
  12. १२तीन परिक्रमा और प्रणाम

    क्या करें
    गणेश जी की तीन परिक्रमा करें और प्रणाम करें।
    कैसे करें
    गीता प्रेस के अनुसार गणेश जी की तीन परिक्रमा की जाती है। मूर्ति को अपनी दाईं ओर रखते हुए घूमें; जगह न हो तो अपने आसन पर ही तीन बार घूम जाएँ। फिर हाथ जोड़कर प्रणाम करें और नीचे दी क्षमा-प्रार्थना पढ़ें।
    भाव
    जो बना, आपके चरणों में; जो छूटा, उसके लिए क्षमा।
    विकल्प
    बैठे-बैठे सिर झुकाकर प्रणाम करना भी पूरा प्रणाम है।

पूजा में पढ़े जाने वाले पाठ

भोग

  • मोदक: भाप में पके उकडीचे मोदक या खोये के मोदक
  • बेसन या मोतीचूर के लड्डू
  • गुड़ और नारियल
  • केला और मौसमी फल
  • बताशे या मिश्री

गीता प्रेस गणेश जी को लड्डू प्रिय बताती है; महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में मोदक सबसे प्रचलित भोग है। घर में जो सात्विक मिठाई बनी हो, वही भोग बन सकती है। भोग बाद में परिवार और बच्चों में बाँटें।

प्रार्थना और समापन

हे गणपति, आपने आज की शुरुआत अपने नाम से करने दी, इसके लिए आभार। मेरे कामों से किसी का अहित न हो, मेरी बुद्धि साफ़ रहे और जो भी काम हाथ में लूँ, उसे धीरज से पूरा कर सकूँ। पूजा में जो कमी रही हो, उसे क्षमा करें।

क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व गणेश्वर॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥

अर्थ: हे गणेश्वर, न मैं आपको बुलाना जानता हूँ, न आपकी अर्चना करना, न पूजा की विधि; मुझे क्षमा करें। हे देवों के ईश्वर, मेरी पूजा मंत्र, विधि और भक्ति में अधूरी है; फिर भी मैंने जो पूजा की है, वह आपकी कृपा से पूरी हो।

स्रोत: द्रिक पंचांग की गणेश चतुर्थी पूजा विधि में विसर्जन से पहले पढ़े जाने वाले क्षमा-श्लोक; "मन्त्रहीनं क्रियाहीनं" वाला श्लोक गीता प्रेस की पूजा-विधियों की क्षमा-याचना में भी है।

पूजा के बाद

  • प्रसाद, ख़ासकर मोदक या लड्डू, परिवार और बच्चों में बाँटें।
  • अगले दिन पुरानी दूर्वा और फूल उतारकर गमले या बगीचे की मिट्टी में डाल दें; दूर्वा जल्दी खाद बन जाती है।
  • सुपारी को गणेश मानकर पूजा की हो तो उसे पूजा-स्थान में ही रहने दें और रोज़ उसी की पूजा करें।
  • मूर्ति पर लगा सिंदूर कई भक्त प्रसाद की तरह अपने माथे पर लगाते हैं।

समय कम हो तो: छोटी विधि

  1. स्नान करके आसन पर बैठें, आचमन करें और संकल्प लें।
  2. बारह नाम या "वक्रतुण्ड महाकाय" पढ़कर गणेश जी का स्मरण करें।
  3. जल अर्पित करें, सिंदूर का तिलक लगाएँ और अक्षत चढ़ाएँ।
  4. दूर्वा और लाल फूल चढ़ाएँ; तुलसी नहीं।
  5. धूप-दीप दिखाएँ और मोदक या लड्डू का भोग लगाएँ।
  6. "जय गणेश देवा" से आरती करें।
  7. तीन परिक्रमा करके प्रणाम करें और प्रसाद बाँटें।

परंपराओं में अंतर

  • तुलसी: गणेश पूजा में तुलसी नहीं चढ़ाई जाती। गीता प्रेस पद्म पुराण ("न तुलस्या गणाधिपम्") और कार्तिक-माहात्म्य के हवाले से यही लिखती है, और यह भी कि गणेश जी को तुलसी छोड़कर बाकी सभी अनिषिद्ध पत्र-पुष्प प्रिय हैं।
  • महाराष्ट्र में आरती "सुखकर्ता दुःखहर्ता" और भोग उकडीचे मोदक; दक्षिण भारत में गणेश जी "पिल्लैयार" या "विनायक" कहलाते हैं और उन्हें कोलुकट्टै (मोदक) चढ़ाए जाते हैं; उत्तर भारत में "जय गणेश देवा" और बूँदी या बेसन के लड्डू।
  • दूर्वा की संख्या: 21 सबसे प्रचलित है; कई घर 3, 5 या 11 दूर्वा चढ़ाते हैं।
  • परिक्रमा: गीता प्रेस के अनुसार गणेश जी की तीन परिक्रमा की जाती है, जबकि देवी की एक और शिव की आधी।
  • संकष्टी पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलना, और गणेश चतुर्थी की रात चंद्र-दर्शन न करने की मान्यता, पर्व-विशेष रीतियाँ हैं; रोज़ की पूजा में इनकी ज़रूरत नहीं।

ये भी पढ़ें

गणेश जी के लिए और

स्रोत और समीक्षा

  • गीता प्रेस, गोरखपुर: नित्यकर्म-पूजाप्रकाश: पञ्चदेव-पूजा का गणेश-स्मरण (बारह नाम) और नाम-मंत्र "ॐ श्रीगणेशाय नमः"; नाम-मंत्र से उपचार; मूर्ति न हो तो सुपारी; गणपति के लिए विहित पत्र-पुष्प, तुलसी का निषेध, दूर्वा की फुनगी और 21 दूर्वा, लड्डू; दूर्वा चढ़ाने का ढंग; तीन परिक्रमा; "वक्रतुण्ड महाकाय" का पाठ।
  • गीता प्रेस: नित्यकर्म-पूजाप्रकाश (दूसरी प्रति): पहली प्रति के धुँधले हिस्से, जैसे सुपारी वाला निर्देश और फूलों के नियम, इससे मिलाए गए।
  • द्रिक पंचांग: गणेश चतुर्थी पूजा विधि: दूर्वाङ्कुर मंत्र, सिंदूर और शमी के उपचार, मोदक का नैवेद्य, और विसर्जन से पहले के क्षमा-श्लोक।
  • दैनिक भक्ति: ॐ गं गणपतये नमः: मंत्र का पाठ और अर्थ यहीं के मंत्र पन्ने से।

समीक्षा (10 अक्टूबर 2026): Upachara order and name-mantra rule from Gita Press Nityakarma-Pujaprakash; twelve-names verse from its Panchadeva-pujan Ganesh-smaran (first three lines quoted, the phala lines left out); Vakratunda quoted in the main reading of the vakratunda-mahakaya work ("सूर्यकोटिसमप्रभ"); the Gita Press reading "कोटिसूर्यसमप्रभ" is noted in the alt, as the work also records it. Ganesh's flower rules (no tulsi, durva with 3 or 5 leaves, 21 durva from Ganesha Purana, laddu) and supari-as-Ganesh checked in the cleaner archive.org OCR copy. Durva verse, sindoor/shami upacharas and kshama verses from Drik Panchang's Ganesh Chaturthi puja vidhi. Three pradakshinas from the Gita Press rule "तिस्रः कार्या विनायके". Mantra from the site's mantra page; its beej note repeated in the alt.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घर में गणेश जी की मूर्ति न हो तो पूजा कैसे करें?

गीता प्रेस बताती है कि मूर्ति न हो तो सुपारी पर मौली लपेटकर अक्षत की ढेरी पर रखें और उसकी गणेश जी के रूप में पूजा करें। गणेश जी की तस्वीर या कोई साफ़ छपा चित्र भी चल जाता है। कुछ न हो तो दीपक के सामने बैठकर बारह नामों का स्मरण भी पूरी पूजा है।

गणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते?

गीता प्रेस पद्म पुराण और कार्तिक-माहात्म्य के हवाले से लिखती है कि तुलसी से गणेश जी की पूजा नहीं की जाती; इसके पीछे पुराणों में कथाएँ कही जाती हैं। तुलसी की जगह दूर्वा चढ़ाएँ। अनजाने में तुलसी चढ़ गई हो तो चिंता न करें; उसे आदर से हटा दें।

क्या 21 दूर्वा ही चढ़ानी चाहिए?

21 दूर्वा का चलन गणेश पुराण से आया है, पर यह कोई कठोर नियम नहीं। जितनी दूर्वा मिलें, उतनी श्रद्धा से चढ़ाएँ। फुनगी में तीन या पाँच पत्तियाँ हों और दूर्वा साफ़ धुली हो, इतना काफ़ी है।

किसी काम से पहले छोटा-सा गणेश स्मरण कैसे करें?

हाथ जोड़कर "वक्रतुण्ड महाकाय" श्लोक पढ़ें, या केवल "श्री गणेशाय नमः" कहें। परीक्षा, यात्रा, नया काम, गृह प्रवेश, हर बार यही काफ़ी है। चाहें तो उस दिन गणेश जी के सामने एक दीपक जला दें।

क्या बच्चे गणेश पूजा कर सकते हैं?

हाँ, गणेश पूजा बच्चों के लिए पूजा सीखने की सबसे आसान शुरुआत है। वे दूर्वा गिन सकते हैं, फूल चढ़ा सकते हैं, आरती में घंटी बजा सकते हैं और "वक्रतुण्ड महाकाय" याद कर सकते हैं। परीक्षा से पहले बच्चे के साथ बैठकर दो मिनट का गणेश स्मरण उसे शांत भी करता है।

गणेश जी की सूँड़ किस ओर हो, इससे फ़र्क पड़ता है?

घरों में बाईं ओर मुड़ी सूँड़ वाली मूर्ति ज़्यादा रखी जाती है, और दाईं ओर सूँड़ वाली मूर्ति के लिए कई जगह विशेष नियमों की मान्यता है। यह परंपरा की बात है; इसे लेकर डरने की ज़रूरत नहीं। जो मूर्ति आपके घर में है, उसकी श्रद्धा से नियमित पूजा करें।

बुधवार का व्रत ज़रूरी है?

नहीं, पूजा व्रत के बिना भी पूरी है। गणेश जी के मासिक व्रत चतुर्थी के हैं: विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी। व्रत रखें तो अपनी सेहत के अनुसार; बीमारी, गर्भावस्था या नियमित दवा में कठोर व्रत न रखें।

सुधार सुझाएँ

इस विधि में कोई बात आपकी परंपरा से अलग हो, या कहीं गलती दिखे, तो हमें बताइए। हम हर सुझाव को स्रोत से मिलाकर देखते हैं।

सुधार भेजें