नवरात्रि और देवी186 दिन बाद
अशोकाष्टमी 2027
चैत्र शुक्ल अष्टमी
- तिथि शुरू
- 13 अप्रैल, 5:28 PM
- तिथि समाप्त
- 14 अप्रैल, 3:23 PM
- आराध्य
- माँ दुर्गा और भगवान शिव
अशोकाष्टमी 14 अप्रैल 2027, बुधवार को है। यह चैत्र शुक्ल अष्टमी को आता है। तिथि 13 अप्रैल, 5:28 PM से 14 अप्रैल, 3:23 PM तक रहेगी।
नवरात्रि और देवी186 दिन बाद
चैत्र शुक्ल अष्टमी
अशोकाष्टमी चैत्र के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आती है, चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन। इस दिन अशोक के पेड़ की पूजा की जाती है; अशोक का अर्थ है शोक को दूर करने वाला।
ओडिशा के भुवनेश्वर में इसी दिन भगवान लिंगराज की रुकुणा रथ यात्रा निकलती है।
व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|
| 5अप्रैलशनिवार | अशोकाष्टमी 2025 | 4 अप्रैल, 8:13 PM | 5 अप्रैल, 7:26 PM |
| 26मार्चगुरुवार | अशोकाष्टमी 2026 | 25 मार्च, 1:50 PM | 26 मार्च, 11:49 AM |
| 14अप्रैलबुधवार | अशोकाष्टमी 2027 | 13 अप्रैल, 5:28 PM | 14 अप्रैल, 3:23 PM |
| 3अप्रैलसोमवार | अशोकाष्टमी 2028 | 2 अप्रैल, 1:22 PM | 3 अप्रैल, 12:01 PM |
| 22अप्रैलरविवार | अशोकाष्टमी 2029 | 21 अप्रैल, 1:35 PM | 22 अप्रैल, 12:55 PM |
| 11अप्रैलगुरुवार | अशोकाष्टमी 2030 | 10 अप्रैल, 7:41 PM | 11 अप्रैल, 9:02 PM |
| 31मार्चसोमवार | अशोकाष्टमी 2031 | 30 मार्च, 4:44 PM | 31 मार्च, 7:17 PM |
| 18अप्रैलरविवार | अशोकाष्टमी 2032 | 17 अप्रैल, 7:48 AM | 18 अप्रैल, 10:02 AM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
अशोकाष्टमी 14 अप्रैल 2027, बुधवार को है। चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 13 अप्रैल, 5:28 PM से 14 अप्रैल, 3:23 PM तक रहेगी।
अशोकाष्टमी चैत्र शुक्ल अष्टमी को आता है।
अशोकाष्टमी माँ दुर्गा और भगवान शिव से जुड़ा है। यह ओडिशा, पश्चिम बंगाल में प्रचलित है।
अशोकाष्टमी 2028 में 3 अप्रैल 2028, सोमवार को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।