नवरात्रि और देवी169 दिन बाद
शीतला सप्तमी 2027
चैत्र कृष्ण सप्तमी
- तिथि शुरू
- 28 मार्च, 3:04 PM
- तिथि समाप्त
- 29 मार्च, 5:10 PM
- आराध्य
- शीतला माता
शीतला सप्तमी 28 मार्च 2027, रविवार को है। यह चैत्र कृष्ण सप्तमी को आता है (अमांत गणना में फाल्गुन कृष्ण सप्तमी)। तिथि 28 मार्च, 3:04 PM से 29 मार्च, 5:10 PM तक रहेगी।
नवरात्रि और देवी169 दिन बाद
चैत्र कृष्ण सप्तमी
शीतला सप्तमी होली के सात दिन बाद, चैत्र के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को आती है। शीतला माता को चेचक जैसे रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है।
इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता; एक दिन पहले बना भोजन माता को चढ़ाया और खाया जाता है। कई इलाक़ों में यही पूजा अगले दिन, अष्टमी को होती है।
व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|
| 21मार्चशुक्रवार | शीतला सप्तमी 2025 | 21 मार्च, 2:46 AM | 22 मार्च, 4:24 AM |
| 10मार्चमंगलवार | शीतला सप्तमी 2026 | 9 मार्च, 11:26 PM | 11 मार्च, 1:54 AM |
| 28मार्चरविवार | शीतला सप्तमी 2027 | 28 मार्च, 3:04 PM | 29 मार्च, 5:10 PM |
| 16मार्चगुरुवार | शीतला सप्तमी 2028 | 16 मार्च, 4:13 PM | 17 मार्च, 4:26 PM |
| 6मार्चमंगलवार | शीतला सप्तमी 2029 | 6 मार्च, 3:26 AM | 7 मार्च, 1:52 AM |
| 25मार्चसोमवार | शीतला सप्तमी 2030 | 25 मार्च, 6:09 AM | 26 मार्च, 4:10 AM |
| 15मार्चशनिवार | शीतला सप्तमी 2031 | 15 मार्च, 2:58 AM | 16 मार्च, 1:05 AM |
| 2अप्रैलशुक्रवार | शीतला सप्तमी 2032 | 2 अप्रैल, 6:05 AM | 3 अप्रैल, 4:34 AM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
शीतला सप्तमी 28 मार्च 2027, रविवार को है। चैत्र कृष्ण सप्तमी तिथि 28 मार्च, 3:04 PM से 29 मार्च, 5:10 PM तक रहेगी।
शीतला सप्तमी चैत्र कृष्ण सप्तमी को आता है। जहाँ महीना अमावस्या पर पूरा होता है (अमांत गणना), वहाँ यही तिथि फाल्गुन कृष्ण सप्तमी कहलाती है।
शीतला सप्तमी शीतला माता से जुड़ा है। यह राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में प्रचलित है।
शीतला सप्तमी 2028 में 16 मार्च 2028, गुरुवार को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।