नाम वाली पूर्णिमा और अमावस्या119 दिन बाद
मौनी अमावस्या 2027
माघ अमावस्या
- तिथि शुरू
- 5 फ़रवरी, 7:05 PM
- तिथि समाप्त
- 6 फ़रवरी, 9:25 PM
- आराध्य
- पितर; भगवान विष्णु
मौनी अमावस्या 6 फ़रवरी 2027, शनिवार को है। यह माघ अमावस्या को आता है (अमांत गणना में पौष अमावस्या)। तिथि 5 फ़रवरी, 7:05 PM से 6 फ़रवरी, 9:25 PM तक रहेगी।
नाम वाली पूर्णिमा और अमावस्या119 दिन बाद
माघ अमावस्या
मौनी अमावस्या माघ महीने की अमावस्या है। मौन का अर्थ है चुप रहना: परंपरा में इस दिन मौन रहकर पवित्र नदी में स्नान किया जाता है।
प्रयागराज के माघ मेले और कुंभ में यह स्नान का सबसे बड़ा दिन होता है।
व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|
| 29जनवरीबुधवार | मौनी अमावस्या 2025 | 28 जनवरी, 7:36 PM | 29 जनवरी, 6:06 PM |
| 18जनवरीरविवार | मौनी अमावस्या 2026 | 18 जनवरी, 12:04 AM | 19 जनवरी, 1:22 AM |
| 6फ़रवरीशनिवार | मौनी अमावस्या 2027 | 5 फ़रवरी, 7:05 PM | 6 फ़रवरी, 9:25 PM |
| 26जनवरीबुधवार | मौनी अमावस्या 2028 | 25 जनवरी, 6:17 PM | 26 जनवरी, 8:42 PM |
| 14जनवरीरविवार | मौनी अमावस्या 2029 | 13 जनवरी, 10:47 PM | 14 जनवरी, 10:54 PM |
| 2फ़रवरीशनिवार | मौनी अमावस्या 2030 | 1 फ़रवरी, 10:55 PM | 2 फ़रवरी, 9:37 PM |
| 23जनवरीगुरुवार | मौनी अमावस्या 2031 | 22 जनवरी, 1:26 PM | 23 जनवरी, 10:00 AM |
| 11फ़रवरीबुधवार | मौनी अमावस्या 2032 | 10 फ़रवरी, 3:47 PM | 11 फ़रवरी, 11:53 AM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
मौनी अमावस्या 6 फ़रवरी 2027, शनिवार को है। माघ अमावस्या तिथि 5 फ़रवरी, 7:05 PM से 6 फ़रवरी, 9:25 PM तक रहेगी।
मौनी अमावस्या माघ अमावस्या को आता है। जहाँ महीना अमावस्या पर पूरा होता है (अमांत गणना), वहाँ यही तिथि पौष अमावस्या कहलाती है।
मौनी अमावस्या पितर; भगवान विष्णु से जुड़ा है।
मौनी अमावस्या 2028 में 26 जनवरी 2028, बुधवार को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।