दांपत्य और संतान के व्रत251 दिन बाद
वट पूर्णिमा व्रत 2027
ज्येष्ठ पूर्णिमा
- तिथि शुरू
- 18 जून, 4:35 AM
- तिथि समाप्त
- 19 जून, 6:14 AM
- आराध्य
- सावित्री और सत्यवान; बरगद का पेड़
वट पूर्णिमा व्रत 18 जून 2027, शुक्रवार को है। यह ज्येष्ठ पूर्णिमा को आता है। तिथि 18 जून, 4:35 AM से 19 जून, 6:14 AM तक रहेगी।
दांपत्य और संतान के व्रत251 दिन बाद
ज्येष्ठ पूर्णिमा
वट पूर्णिमा ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को आती है। यह वही व्रत है जो उत्तर भारत में पंद्रह दिन पहले ज्येष्ठ अमावस्या को वट सावित्री के नाम से रखा जाता है।
सुहागिन महिलाएँ पति की लंबी उम्र के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और उसके चारों ओर सूत लपेटती हैं।
व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|
| 10जूनमंगलवार | वट पूर्णिमा व्रत 2025 | 10 जून, 11:36 AM | 11 जून, 1:14 PM |
| 29जूनसोमवार | वट पूर्णिमा व्रत 2026 | 29 जून, 3:07 AM | 30 जून, 5:27 AM |
| 18जूनशुक्रवार | वट पूर्णिमा व्रत 2027 | 18 जून, 4:35 AM | 19 जून, 6:14 AM |
| 6जूनमंगलवार | वट पूर्णिमा व्रत 2028 | 6 जून, 12:30 PM | 7 जून, 11:39 AM |
| 25जूनसोमवार | वट पूर्णिमा व्रत 2029 | 25 जून, 10:55 AM | 26 जून, 8:52 AM |
| 15जूनशनिवार | वट पूर्णिमा व्रत 2030 | 15 जून, 3:50 AM | 16 जून, 12:11 AM |
| 5जूनगुरुवार | वट पूर्णिमा व्रत 2031 | 4 जून, 8:51 PM | 5 जून, 5:28 PM |
| 23जूनबुधवार | वट पूर्णिमा व्रत 2032 | 22 जून, 7:41 PM | 23 जून, 5:02 PM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
वट पूर्णिमा व्रत 18 जून 2027, शुक्रवार को है। ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 18 जून, 4:35 AM से 19 जून, 6:14 AM तक रहेगी।
वट पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा को आता है।
वट पूर्णिमा व्रत सावित्री और सत्यवान; बरगद का पेड़ से जुड़ा है। यह महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक में प्रचलित है।
वट पूर्णिमा व्रत 2028 में 6 जून 2028, मंगलवार को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।