तीज और गौरी व्रत181 दिन बाद
गणगौर 2027
चैत्र शुक्ल तृतीया
- तिथि शुरू
- 9 अप्रैल, 3:10 AM
- तिथि समाप्त
- 10 अप्रैल, 1:32 AM
- आराध्य
- ईसर (शिव) और गौर (पार्वती)
गणगौर 9 अप्रैल 2027, शुक्रवार को है। यह चैत्र शुक्ल तृतीया को आता है। तिथि 9 अप्रैल, 3:10 AM से 10 अप्रैल, 1:32 AM तक रहेगी।
तीज और गौरी व्रत181 दिन बाद
चैत्र शुक्ल तृतीया
गणगौर राजस्थान का सबसे बड़ा लोक पर्व है। गण यानी शिव और गौर यानी पार्वती। इसकी पूजा होली के अगले दिन से शुरू होती है और चैत्र शुक्ल तृतीया को पूरी होती है।
कुँवारी लड़कियाँ अच्छे वर के लिए और सुहागिन महिलाएँ पति की लंबी उम्र के लिए ईसर-गौर की मिट्टी की प्रतिमाओं की पूजा करती हैं। आख़िरी दिन जयपुर और उदयपुर में गणगौर की सवारी निकलती है।
व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|
| 31मार्चसोमवार | गणगौर 2025 | 31 मार्च, 9:11 AM | 1 अप्रैल, 5:42 AM |
| 21मार्चशनिवार | गणगौर 2026 | 21 मार्च, 2:31 AM | 21 मार्च, 11:56 PM |
| 9अप्रैलशुक्रवार | गणगौर 2027 | 9 अप्रैल, 3:10 AM | 10 अप्रैल, 1:32 AM |
| 29मार्चबुधवार | गणगौर 2028 | 28 मार्च, 1:03 PM | 29 मार्च, 1:59 PM |
| 17अप्रैलमंगलवार | गणगौर 2029 | 16 अप्रैल, 7:48 AM | 17 अप्रैल, 9:49 AM |
| 6अप्रैलशनिवार | गणगौर 2030 | 5 अप्रैल, 7:28 AM | 6 अप्रैल, 9:56 AM |
| 26मार्चबुधवार | गणगौर 2031 | 25 मार्च, 8:22 AM | 26 मार्च, 8:53 AM |
| 12अप्रैलसोमवार | गणगौर 2032 | 12 अप्रैल, 4:46 AM | 13 अप्रैल, 4:00 AM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
गणगौर 9 अप्रैल 2027, शुक्रवार को है। चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि 9 अप्रैल, 3:10 AM से 10 अप्रैल, 1:32 AM तक रहेगी।
गणगौर चैत्र शुक्ल तृतीया को आता है।
गणगौर ईसर (शिव) और गौर (पार्वती) से जुड़ा है। यह राजस्थान; गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा के कुछ हिस्से में प्रचलित है।
गणगौर 2028 में 29 मार्च 2028, बुधवार को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।