राम, कृष्ण और विष्णु के अवतार339 दिन बाद
अनंत चतुर्दशी 2027
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी
- तिथि शुरू
- 14 सितंबर, 12:39 AM
- तिथि समाप्त
- 15 सितंबर, 2:48 AM
- आराध्य
- भगवान विष्णु का अनंत रूप
अनंत चतुर्दशी 14 सितंबर 2027, मंगलवार को है। यह भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को आता है। तिथि 14 सितंबर, 12:39 AM से 15 सितंबर, 2:48 AM तक रहेगी।
राम, कृष्ण और विष्णु के अवतार339 दिन बाद
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को आती है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है और बाँह पर चौदह गाँठों वाला अनंत सूत्र बाँधा जाता है।
यह दस दिन के गणेशोत्सव का आख़िरी दिन भी है, जिस दिन गणेश विसर्जन होता है।
व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|
| 6सितंबरशनिवार | अनंत चतुर्दशी 2025 | 6 सितंबर, 3:13 AM | 7 सितंबर, 1:41 AM |
| 25सितंबरशुक्रवार | अनंत चतुर्दशी 2026 | 24 सितंबर, 11:18 PM | 25 सितंबर, 11:06 PM |
| 14सितंबरमंगलवार | अनंत चतुर्दशी 2027 | 14 सितंबर, 12:39 AM | 15 सितंबर, 2:48 AM |
| 2सितंबरशनिवार | अनंत चतुर्दशी 2028 | 2 सितंबर, 12:35 AM | 3 सितंबर, 2:52 AM |
| 21सितंबरशुक्रवार | अनंत चतुर्दशी 2029 | 20 सितंबर, 6:57 PM | 21 सितंबर, 8:18 PM |
| 10सितंबरमंगलवार | अनंत चतुर्दशी 2030 | 10 सितंबर, 4:57 AM | 11 सितंबर, 3:40 AM |
| 29सितंबरसोमवार | अनंत चतुर्दशी 2031 | 29 सितंबर, 4:59 AM | 30 सितंबर, 2:33 AM |
| 18सितंबरशनिवार | अनंत चतुर्दशी 2032 | 17 सितंबर, 10:27 PM | 18 सितंबर, 6:43 PM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
अनंत चतुर्दशी 14 सितंबर 2027, मंगलवार को है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि 14 सितंबर, 12:39 AM से 15 सितंबर, 2:48 AM तक रहेगी।
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को आता है।
अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु का अनंत रूप से जुड़ा है।
अनंत चतुर्दशी 2028 में 2 सितंबर 2028, शनिवार को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।