राम, कृष्ण और विष्णु के अवतार210 दिन बाद
परशुराम जयंती 2027
वैशाख शुक्ल तृतीया
- तिथि शुरू
- 8 मई, 11:43 AM
- तिथि समाप्त
- 9 मई, 9:03 AM
- आराध्य
- भगवान परशुराम
परशुराम जयंती 8 मई 2027, शनिवार को है। यह वैशाख शुक्ल तृतीया को आता है। तिथि 8 मई, 11:43 AM से 9 मई, 9:03 AM तक रहेगी।
राम, कृष्ण और विष्णु के अवतार210 दिन बाद
वैशाख शुक्ल तृतीया
परशुराम जयंती वैशाख के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है और भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के जन्म का दिन है।
परशुराम का जन्म प्रदोष काल में माना जाता है, इसलिए यह उस दिन मनाई जाती है जिसकी शाम को तृतीया हो। ज़्यादातर साल यह अक्षय तृतीया के ही दिन पड़ती है, और कभी एक दिन पहले।
व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|
| 29अप्रैलमंगलवार | परशुराम जयंती 2025 | 29 अप्रैल, 5:32 PM | 30 अप्रैल, 2:13 PM |
| 19अप्रैलरविवार | परशुराम जयंती 2026 | 19 अप्रैल, 10:49 AM | 20 अप्रैल, 7:28 AM |
| 8मईशनिवार | परशुराम जयंती 2027 | 8 मई, 11:43 AM | 9 मई, 9:03 AM |
| 27अप्रैलगुरुवार | परशुराम जयंती 2028 | 27 अप्रैल, 1:48 AM | 28 अप्रैल, 1:28 AM |
| 16मईबुधवार | परशुराम जयंती 2029 | 15 मई, 10:20 PM | 16 मई, 11:21 PM |
| 5मईरविवार | परशुराम जयंती 2030 | 5 मई, 12:50 AM | 6 मई, 3:27 AM |
| 24अप्रैलगुरुवार | परशुराम जयंती 2031 | 24 अप्रैल, 12:27 AM | 25 अप्रैल, 2:13 AM |
| 11मईमंगलवार | परशुराम जयंती 2032 | 11 मई, 6:24 PM | 12 मई, 6:54 PM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
परशुराम जयंती 8 मई 2027, शनिवार को है। वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 8 मई, 11:43 AM से 9 मई, 9:03 AM तक रहेगी।
परशुराम जयंती वैशाख शुक्ल तृतीया को आता है।
परशुराम जयंती भगवान परशुराम से जुड़ा है।
परशुराम जयंती 2028 में 27 अप्रैल 2028, गुरुवार को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।