राम, कृष्ण और विष्णु के अवतार337 दिन बाद
वामन द्वादशी 2027
भाद्रपद शुक्ल द्वादशी
- तिथि शुरू
- 11 सितंबर, 7:36 PM
- तिथि समाप्त
- 12 सितंबर, 10:13 PM
- आराध्य
- भगवान वामन
वामन द्वादशी 12 सितंबर 2027, रविवार को है। यह भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को आता है। तिथि 11 सितंबर, 7:36 PM से 12 सितंबर, 10:13 PM तक रहेगी।
राम, कृष्ण और विष्णु के अवतार337 दिन बाद
भाद्रपद शुक्ल द्वादशी
वामन द्वादशी भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को आती है, परिवर्तिनी एकादशी के अगले दिन। यह भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार वामन के प्राकट्य का दिन है।
कथा के अनुसार वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि माँगकर तीनों लोक नाप लिए थे।
व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|
| 4सितंबरगुरुवार | वामन द्वादशी 2025 | 4 सितंबर, 4:22 AM | 5 सितंबर, 4:08 AM |
| 23सितंबरबुधवार | वामन द्वादशी 2026 | 22 सितंबर, 9:43 PM | 23 सितंबर, 10:50 PM |
| 12सितंबररविवार | वामन द्वादशी 2027 | 11 सितंबर, 7:36 PM | 12 सितंबर, 10:13 PM |
| 31अगस्तगुरुवार | वामन द्वादशी 2028 | 30 अगस्त, 8:47 PM | 31 अगस्त, 10:31 PM |
| 19सितंबरबुधवार | वामन द्वादशी 2029 | 18 सितंबर, 5:23 PM | 19 सितंबर, 5:59 PM |
| 9सितंबरसोमवार | वामन द्वादशी 2030 | 8 सितंबर, 8:21 AM | 9 सितंबर, 6:32 AM |
| 28सितंबररविवार | वामन द्वादशी 2031 | 27 सितंबर, 10:20 AM | 28 सितंबर, 7:37 AM |
| 16सितंबरगुरुवार | वामन द्वादशी 2032 | 16 सितंबर, 5:18 AM | 17 सितंबर, 2:02 AM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
वामन द्वादशी 12 सितंबर 2027, रविवार को है। भाद्रपद शुक्ल द्वादशी तिथि 11 सितंबर, 7:36 PM से 12 सितंबर, 10:13 PM तक रहेगी।
वामन द्वादशी भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को आता है।
वामन द्वादशी भगवान वामन से जुड़ा है।
वामन द्वादशी 2028 में 31 अगस्त 2028, गुरुवार को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।