अन्य प्रमुख व्रत332 दिन बाद
दूर्वाष्टमी 2027
भाद्रपद शुक्ल अष्टमी
- तिथि शुरू
- 7 सितंबर, 11:27 AM
- तिथि समाप्त
- 8 सितंबर, 12:43 PM
- आराध्य
- दूर्वा (दूब) घास; गणेश जी
दूर्वाष्टमी 7 सितंबर 2027, मंगलवार को है। यह भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को आता है। तिथि 7 सितंबर, 11:27 AM से 8 सितंबर, 12:43 PM तक रहेगी।
अन्य प्रमुख व्रत332 दिन बाद
भाद्रपद शुक्ल अष्टमी
दूर्वाष्टमी भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आती है। इस दिन दूर्वा यानी दूब घास की पूजा की जाती है, जो गणेश जी को चढ़ाई जाती है और पवित्र मानी जाती है।
यह व्रत महिलाएँ परिवार की समृद्धि के लिए रखती हैं। यह उस दिन रखा जाता है जिस दिन अष्टमी सप्तमी से जुड़ी हो, यानी जिस दिन अष्टमी शुरू होती है।
व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|
| 31अगस्तरविवार | दूर्वाष्टमी 2025 | 30 अगस्त, 10:47 PM | 1 सितंबर, 12:58 AM |
| 18सितंबरशुक्रवार | दूर्वाष्टमी 2026 | 18 सितंबर, 1:00 PM | 19 सितंबर, 3:26 PM |
| 7सितंबरमंगलवार | दूर्वाष्टमी 2027 | 7 सितंबर, 11:27 AM | 8 सितंबर, 12:43 PM |
| 27अगस्तरविवार | दूर्वाष्टमी 2028 | 26 अगस्त, 7:32 PM | 27 अगस्त, 6:49 PM |
| 15सितंबरशनिवार | दूर्वाष्टमी 2029 | 14 सितंबर, 7:44 PM | 15 सितंबर, 6:22 PM |
| 4सितंबरबुधवार | दूर्वाष्टमी 2030 | 4 सितंबर, 4:28 PM | 5 सितंबर, 2:23 PM |
| 24सितंबरबुधवार | दूर्वाष्टमी 2031 | 23 सितंबर, 7:47 PM | 24 सितंबर, 5:47 PM |
| 12सितंबररविवार | दूर्वाष्टमी 2032 | 12 सितंबर, 12:37 PM | 13 सितंबर, 11:49 AM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
दूर्वाष्टमी 7 सितंबर 2027, मंगलवार को है। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि 7 सितंबर, 11:27 AM से 8 सितंबर, 12:43 PM तक रहेगी।
दूर्वाष्टमी भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को आता है।
दूर्वाष्टमी दूर्वा (दूब) घास; गणेश जी से जुड़ा है। यह पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पूर्वी भारत में प्रचलित है।
दूर्वाष्टमी 2028 में 27 अगस्त 2028, रविवार को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।