अन्य प्रमुख व्रत211 दिन बाद
अक्षय तृतीया 2027
वैशाख शुक्ल तृतीया
- तिथि शुरू
- 8 मई, 11:43 AM
- तिथि समाप्त
- 9 मई, 9:03 AM
- आराध्य
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी
अक्षय तृतीया 9 मई 2027, रविवार को है। यह वैशाख शुक्ल तृतीया को आता है। तिथि 8 मई, 11:43 AM से 9 मई, 9:03 AM तक रहेगी।
अन्य प्रमुख व्रत211 दिन बाद
वैशाख शुक्ल तृतीया
अक्षय तृतीया वैशाख के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है। अक्षय का अर्थ है जो कभी कम न हो: मान्यता है कि इस दिन किया गया दान और शुभ काम हमेशा फल देता है।
इसे साल के उन दिनों में गिना जाता है जब कोई भी शुभ काम बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है। इस दिन सोना खरीदने की परंपरा है, और जैन धर्म में वर्षीतप का पारण इसी दिन होता है।
व्रत की विधि और नियम परंपरा और परिवार के अनुसार अलग होते हैं; यहाँ सबसे प्रचलित रूप बताया गया है।
| तारीख़ | साल | तिथि शुरू | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|
| 30अप्रैलबुधवार | अक्षय तृतीया 2025 | 29 अप्रैल, 5:32 PM | 30 अप्रैल, 2:13 PM |
| 19अप्रैलरविवार | अक्षय तृतीया 2026 | 19 अप्रैल, 10:49 AM | 20 अप्रैल, 7:28 AM |
| 9मईरविवार | अक्षय तृतीया 2027 | 8 मई, 11:43 AM | 9 मई, 9:03 AM |
| 27अप्रैलगुरुवार | अक्षय तृतीया 2028 | 27 अप्रैल, 1:48 AM | 28 अप्रैल, 1:28 AM |
| 16मईबुधवार | अक्षय तृतीया 2029 | 15 मई, 10:20 PM | 16 मई, 11:21 PM |
| 5मईरविवार | अक्षय तृतीया 2030 | 5 मई, 12:50 AM | 6 मई, 3:27 AM |
| 24अप्रैलगुरुवार | अक्षय तृतीया 2031 | 24 अप्रैल, 12:27 AM | 25 अप्रैल, 2:13 AM |
| 12मईबुधवार | अक्षय तृतीया 2032 | 11 मई, 6:24 PM | 12 मई, 6:54 PM |
सभी तारीख़ें और समय दिल्ली के लिए भारतीय समय (IST) में हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और चंद्रोदय का समय अलग होता है, इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन भी एक दिन आगे-पीछे हो जाता है; समय में कुछ मिनट का अंतर भी हो सकता है।
अक्षय तृतीया 9 मई 2027, रविवार को है। वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 8 मई, 11:43 AM से 9 मई, 9:03 AM तक रहेगी।
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को आता है।
अक्षय तृतीया भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से जुड़ा है।
अक्षय तृतीया 2028 में 27 अप्रैल 2028, गुरुवार को है।
आज का पंचांग, त्योहार से एक दिन पहले याद, व्रत ट्रैकर, जप माला और दो मिनट की नित्य पूजा, एक ही जगह।
तारीख़ें खगोलीय गणना से निकाली गई हैं और जगह के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं; व्रत और त्योहार के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी मिलान कर लें।